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: लिवर में सूजन की समसà¥à¤¯à¤¾ है बहà¥à¤¤ नà¥à¤•सानदायक, जानें कौन सा हेपेटाइटिस है जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ घातक
: सेहतमंद रहने के लिठलिवर का सà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥ रहना बहà¥à¤¤ जरूरी है। लिवर शरीर का वह महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ हिसà¥à¤¸à¤¾ है, जो खून में टॉकà¥à¤¸à¤¿à¤¨à¥à¤¸ को साफ करता है। à¤à¥‹à¤œà¤¨ पचाने में मदद करता है, जिसे पाचन तंतà¥à¤° तà¥à¤°à¥à¤¸à¥à¤¤ रहता है और कई तरह की समसà¥à¤¯à¤¾ दूर होती हैं। लेकिन किसी कारण से अगर लिवर को नà¥à¤•सान पहà¥à¤‚चे तो वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ को जान का जोखिम à¤à¥€ हो सकता है। à¤à¤¸à¥‡ में जब इंफेकà¥à¤¶à¤¨ के कारण लिवर में सूजन आ जाती है, तो इस समसà¥à¤¯à¤¾ को हेपेटाइटिस कहते हैं। हर साल 28 जà¥à¤²à¤¾à¤ˆ को विशà¥à¤µ हेपेटाइटिस दिवस मनाया जाता है। हेपेटाइटिस डे मनाने की वजह लोगों को लिवर के पà¥à¤°à¤¤à¤¿ जागरूक करना और वायरल इंफेकà¥à¤¶à¤¨ से बचाना है ताकि शरीर सà¥à¤šà¤¾à¤°à¥‚ रूप से कारà¥à¤¯ कर सके। आंकड़ों के मà¥à¤¤à¤¾à¤¬à¤¿à¤•, à¤à¤¾à¤°à¤¤ में हेपेटाइटिस की बीमारी बहà¥à¤¤ आम है। देश में सालाना हेपेटाइटिस के करीब 10 लाख मामले सामने आते हैं। हेपेटाइटिस को लेकर बड़ी समसà¥à¤¯à¤¾ ये है कि इस रोग के शà¥à¤°à¥à¤†à¤¤à¥€ सà¥à¤¤à¤° पर तीवà¥à¤° लकà¥à¤·à¤£ जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾à¤¤à¤° मरीजों को नजर नहीं आते, जिससे इलाज में देरी हो जाती है और बीमारी जानलेवा हो जाती है। कई तरह के हेपेटाइटिस हैं, जो अपने वायरस के आधार पर कम और अधिक घातक होते हैं। चलिठजानते हैं हेपेटाइटिस के पà¥à¤°à¤•ार और अधिक जानलेवा हेपेटाइटिस के बारे में।
हेपेटाइटिस के पà¥à¤°à¤•ार
वायरस के आधार पर- हेपेटाइटिस लिवर की बीमारी है, जिसमें पांच तरह के वायरस होते हैं। हेपेटाइटिस के ये पांच वायरस लिवर के दà¥à¤¶à¥à¤®à¤¨ होते हैं। पांचों वायरस के आधार पर हेपेटाइटिस पांच पà¥à¤°à¤•ार का होता है। इसमें हेपेटाइटिस à¤, हेपेटाइटिस बी, हेपेटाइटिस सी, हेपेटाइटिस डी, हेपेटाइटिस ई शामिल है। वैसे तो हेपेटाइटिस के सà¤à¥€ पà¥à¤°à¤•ार नà¥à¤•सानदायक हैं। लेकिन सबसे घातक हेपेटाइटिस बी और हेपेटाइटिस सी हैं, जो लिवर सिरोसिस और कैंसर को जनà¥à¤® देते हैं।
गंà¤à¥€à¤°à¤¤à¤¾ के आधार पर- हेपेटाइटिस दो तरह के होते हैं- à¤à¤•à¥à¤¯à¥‚ट हेपेटाइटिस और कà¥à¤°à¥‰à¤¨à¤¿à¤• हेपेटाइटिस। à¤à¤•à¥à¤¯à¥‚ट हेपेटाइटिस में अचानक लीवर में सूजन आ जाती है। इसमें रोगी में 6 महीने तक लकà¥à¤·à¤£ रह सकते हैं, धीरे धीरे ठीक हो जाते हैं। कà¥à¤°à¥‰à¤¨à¤¿à¤• हेपेटाइटिस में रोगी का इमà¥à¤¯à¥‚न सिसà¥à¤Ÿà¤® बà¥à¤°à¥€ तरह पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ हो जाता है। जिसके कारण लीवर कैंसर हो सकता है और रोगी की मौत à¤à¥€ हो सकती है।
सबसे घातक हेपेटाइटिस
हेपेटाइटिस बी
हेपेटाइटिस बी वायरस से संकà¥à¤°à¤®à¤¿à¤¤ वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ के रकà¥à¤¤ वीरà¥à¤¯ या शरीर के अनà¥à¤¯ तरल पदारà¥à¤¥à¥‹à¤‚ में संकà¥à¤°à¤®à¤£ फैल जाता है, जो लिवर में कà¥à¤°à¥‰à¤¨à¤¿à¤• समसà¥à¤¯à¤¾à¤“ं का कारण बनता है। हेपेटाइटिस बी संकà¥à¤°à¤®à¤¿à¤¤ मां से बचà¥à¤šà¥‡ में पà¥à¤°à¤µà¥‡à¤¶ कर सकता है। यूरिन और रकà¥à¤¤ के जरिठà¤à¥€ फैलता है।
हेपेटाइटिस बी के लकà¥à¤·à¤£- अगर हेपेटाइटिस बी से गà¥à¤°à¤¸à¤¿à¤¤ हो जाते हैं तो इसके लकà¥à¤·à¤£ लगà¤à¤— à¤à¤• से चार महीने बाद दिखाई देते हैं। पेट में दरà¥à¤¦, यूरिन का रंग बदलना, बà¥à¤–ार, जोड़ों का दरà¥à¤¦, à¤à¥‚ख न लगना, उलà¥à¤Ÿà¥€, कमजोरी और थकान हेपेटाइटिस बी के लकà¥à¤·à¤£ हैं।
हेपेटाइटिस बी से बचाव- हेपेटाइटिस बी की रोकथाम के लिठवैकà¥à¤¸à¥€à¤¨ हैं। साथ ही इलाज के लिठचिकितà¥à¤¸à¤• à¤à¤‚टीवायरल दवाà¤à¤‚ देते हैं। हेपेटाइटिस बी से संकà¥à¤°à¤®à¤¿à¤¤ रोगी की सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ गंà¤à¥€à¤° होने पर लिवर टà¥à¤°à¤¾à¤‚सपà¥à¤²à¤¾à¤‚ट à¤à¥€ कराया जा सकता है।
हेपेटाइटिस सी
हेपेटाइटिस ठऔर बी की तà¥à¤²à¤¨à¤¾ में हेपेटाइटिस सी अधिक घातक होता है। ये संकà¥à¤°à¤®à¤¿à¤¤ वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ के रकà¥à¤¤ के जरिठफैलता है। हेपेटाइटिस सी à¤à¥€ कà¥à¤°à¤¾à¥…निक समसà¥à¤¯à¤¾ है जो आमतौर पर कई सालों तक à¤à¤• मूक संकà¥à¤°à¤®à¤£ की तरह बना रहता है। हेपेटाइटिस सी के कारण कà¥à¤› रोगियों को लिवर कैंसर तक हो सकता है। टैटू गà¥à¤¦à¤µà¤¾à¤¨à¥‡, दूषित रकà¥à¤¤, इंफेकà¥à¤Ÿà¥‡à¤¡ निडिलà¥à¤¸ के इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² और दूसरों की शेविंग किट के उपयोग से हेपेटाइटिस सी का जोखिम बढ़ता है।
हेपेटाइटिस सी के लकà¥à¤·à¤£- हेपेटाइटिस सी को साइलेंट किलर à¤à¥€ कह सकते हैं। जब तक लिवर को गंà¤à¥€à¤° नà¥à¤•सान नहीं पहà¥à¤‚चा देता, तब तक हेपेटाइटिस सी के लकà¥à¤·à¤£ नजर नहीं आते। हालांकि हेपेटाइटिस सी के रोगियों को बहà¥à¤¤ थकान आती है, à¤à¥‚ख नहीं लगती, पीलिया की शिकायत हो सकती है, गहरे रंग की पेशाब और तà¥à¤µà¤šà¤¾ में खà¥à¤œà¤²à¥€ की समसà¥à¤¯à¤¾ हो सकती है।
हेपेटाइटिस सी से बचाव - à¤à¤²à¥‡ ही हेपेटाइटिस सी के लिठफिलहाल कोई वैकà¥à¤¸à¥€à¤¨ नहीं है लेकिन चिकितà¥à¤¸à¤¾ कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° में हà¥à¤ नठशोध और पà¥à¤°à¤¯à¥‹à¤—ों के कारण हेपेटाइटिस के इलाज में आशाजनक परिणाम सामने आठहैं। हेपेटाइटिस सी के इलाज के लिठà¤à¤‚टीवायरल दवाà¤à¤‚ उपलबà¥à¤§ हैं। हेपेटाइटिस सी की à¤à¤¸à¥€ कई दवाइयां हैं जो मरीज के शरीर से 90-100 फीसदी तक वायरस को दूर कर सकती है। हालांकि इसके लिठसही समय पर सही इलाज मिलना जरूरी है। हेपेटाइटिस सी की सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ गंà¤à¥€à¤° होने पर लिवर टà¥à¤°à¤¾à¤‚सपà¥à¤²à¤¾à¤‚ट की आवशà¥à¤¯à¤•ता हो सकती है।
हेपेटाइटिस ई
हेपेटाइटिस ई के मामले अनà¥à¤¯ हेपेटाइटिस वायरस की तà¥à¤²à¤¨à¤¾ में कम होते हैं, लेकिन ये à¤à¤šà¤ˆà¤µà¥€ à¤à¥€ लिवर के लिठकाफी नà¥à¤•सानदायक माना जाता है। संकà¥à¤°à¤®à¤¿à¤¤ वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ के मल से, दूषित खानपान के कारण हेपेटाइटिस ई की शिकायत हो सकती है। हेपेटाइटिस ई की सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ गंà¤à¥€à¤° होने पर लिवर फेलियर की समसà¥à¤¯à¤¾ हो सकती है।
हेपेटाइटिस ई के लकà¥à¤·à¤£- हेपेटाइटिस ई वायरस से संकà¥à¤°à¤®à¤¿à¤¤ रोगी को पीलिया, जोड़ों में दरà¥à¤¦, पेट में दरà¥à¤¦, à¤à¥‚ख न लगना, जी मिचलाना और उलà¥à¤Ÿà¥€ जैसे लकà¥à¤·à¤£ महसूस हो सकते हैं।
हेपेटाइटिस ई से बचाव- रोगियों को 21 दिनों के लिठदवा का कोरà¥à¤¸ अपनाना होता है। हेपेटाइटिस ई से बचने के लिठटीका लगवा सकते हैं। चिकितà¥à¤¸à¤• हेपेटाइटिस ई से बचाव के लिठसà¥à¤µà¤šà¥à¤›à¤¤à¤¾ का विशेष धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ रखने की सलाह देते हैं। बरसात में गंदे पानी के कारण हेपेटाइटिस ई का खतरा सबसे जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ होता है, इसलिठसà¥à¤µà¤šà¥à¤› पानी पीने की सलाह दी जाती है।
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