सबसे लो बीपी कितना होता है?HealthPlanet

Posted on Mon 6th Mar 2023 : 11:13

Low BP : नीचे वाला ब्लड प्रेशर कितना होना चाहिए, कहीं आप लो बीपी के शिकार तो नहीं, देखें चार्ट

दिल की धड़कन, यानी जिंदगी. दिल की धड़कन बंद हुई कि सांसों की डोर टूटी और उसी क्षण जीवन खत्म.हार्ट हमारे लिए कितना महत्वपूर्ण है, यह इस बात से समझा जा सकता है लेकिन जिस हार्ट से शुद्ध खून पूरे शरीर को पहुंचता है और वहां से निकला खून धमनियों पर कितना असर करता है, यह भी जानना जरूरी है. इसमें अगर दिक्कत आ जाए तो हाई ब्लड प्रेशर और लो ब्लड प्रेशर हो जाता है. ब्लड प्रेशर यानी हृदय या हार्ट और धमनियों पर पड़ने वाले दबाव को कहते हैं. हार्ट एक पंपिंग मशीन है जो शुद्ध खून को शरीर के पूरे हिस्से में पहुंचाता है और फिर शरीर के प्रत्येक हिस्से से खून हार्ट में पहुंचता है. यह काम ब्लड प्रेशर के माध्यम से ही होता है.

मेडिकल भाषा में इसे सिस्टोलिक ब्लड प्रेशर और डायस्टोलिक ब्लड प्रेशर कहते हैं. उपर वाले को सिस्टोलिक और नीचे वाले को डायस्टोलिक प्रेशर कहते हैं. सिस्टोलिक ब्लड प्रेशर इस बात को दर्शाता है कि दिल धड़कने के समय खून धमनी की दीवारों पर कितना दबाव डालता है. वहीं सिस्टोलिक ब्लड प्रेशर इस बात को दर्शाता है कि जब दिल आराम करता है और खून हार्ट में पहुंचता है तो यह धमनी की दीवारों पर कितना दबाव डालता है. इसमें यह जानना जरूरी है कि सामान्य सिस्टोलिक और डायस्टोलिक ब्लड प्रेशर कितना होना चाहिए. आमतौर पर लोग उपर वाले ब्लड प्रेशर पर ध्यान देते हैं और नीचे वाले ब्लड प्रेशर को नजरअंदाज कर देते हैं लेकिन चाहे हाई बीपी हो या लो बीपी, दोनों स्थितियों में खतरा बना रहता है.

नीचे वाला ब्लड प्रेशर की रेंज कितनी होनी चाहिए

अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन की वेबसाइट के मुताबिक अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन ने हाई बीपी के लिए 5 तरह के ब्लड प्रेशर की रेंज क निर्धारित किया है. इसमें सामान्य ब्लड प्रेशर रेंज, बढ़ा हुआ ब्लड प्रेशर रेंज, हाइपरटेंशन स्टेज 1, हाइपरटेंशन स्टेज 2 और हाइपरटेंसिव क्राइसिस की रेंज के बारे में बताया गया है. उपर वाला ब्लड प्रेशर यानी सिस्टोलिक ब्लड प्रेशर 120 से ज्यादा नहीं होना चाहिए. उसी तरह नीचे वाला ब्लड प्रेशर 80 से नीचे नहीं होना चाहिए. अगर नीचे वाला ब्लड प्रेशर 80 से नीचे आ गया तो इसका मतलब है कि शरीर के सभी हिस्से में खून को पहुंचने में दिक्कत हो रही है. इससे भी हार्ट अटैक, स्ट्रोक और किडनी फेल्योर तक की समस्या हो सकती है. अगर उपर वाला ब्लड प्रेशर 90 और नीचे वाला 60 तक पहुंच गया है तो इसका मतलब कि यह लो ब्लड प्रेशर की बीमारी है.

सामान्य ब्लड प्रेशर का चार्ट

सामान्य वयस्क उपर वाला नीचे वाला
नॉर्मल 120 80
बढ़ा हुआ 120-129 80 से नीचे
हाई बीपी स्टेज1 130-139 80-89
हाई बीपी स्टेज 2 140 से ज्यादा 90 से ज्यादा
हाइपरटेंसिव क्राइसिस 180 से ज्यादा 120 से ज्यादा

लो ब्लड प्रेशर के लक्षण

ब्रिटिश सरकार की हेल्थ वेबसाइट के मुताबिक लो ब्लड प्रेशर को हाइपोटेंशन कहते हैं. जब ब्लड प्रेशर की रीडिंग 90/60 से नीचे आ जाए यानी उपर वाला 90 और नीचे वाला 60 आ जाए तो यह लो ब्लड प्रेशर की बीमारी है. हालांकि बुजुर्गों में, प्रेग्नेंट महिलाओं में, डायबिटीज जैसी कुछ बीमारियों में और कुछ दवाइयों के असर से भी ब्लड प्रेशर लो हो सकता है. इसके लिए डॉक्टर से सलाह जरूरी है ताकि लो ब्लड प्रेशर का वास्तविक पता लगाया जा सके. हालांकि अगर लो ब्लड प्रेशर है तो खून शरीर के सभी अंगों में ठीक से नहीं पहुंच पाता है. अगर किसी को लो ब्लड प्रेशर हो तो इसमें शरीर में हल्कापन महसूस होने लगता है और हमेशा चक्कर आते हैं. वहीं, बीमारी महसूस होना, दिखाई देने में दिक्कत, कमजोरी महसूस करना, भ्रम की स्थिति में रहना और बेहोश होना लो ब्लड प्रेशर के लक्षण हैं. इसके लिए डॉक्टर दवाई की डोज बदलते हैं. साथ ही ब्लड प्रेशर को बढ़ाने के लिए सपोर्टिंग स्टॉक्स पहनने के लिए कहते हैं. कुछ दवाइयों से ब्लड प्रेशर को बढ़ाया जाता है.

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