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पà¥à¤°à¥‚षों में फरà¥à¤Ÿà¤¿à¤²à¤¿à¤Ÿà¥€ जांचने के लिठसीमेन à¤à¤¨à¤¾à¤²à¤¿à¤¸à¤¿à¤¸ टेसà¥à¤Ÿ या वीरà¥à¤¯ विशà¥à¤²à¥‡à¤·à¤£ किया जाता है, जिसमें शà¥à¤•à¥à¤°à¤¾à¤£à¥ की मातà¥à¤°à¤¾, आकार और जीवित शà¥à¤•à¥à¤°à¤¾à¤£à¥à¤“ं की संखà¥à¤¯à¤¾ आदि का परीकà¥à¤·à¤£ होता है।
गरà¥à¤à¤§à¤¾à¤°à¤£ करने के लिठसà¥à¤¤à¥à¤°à¥€ के अंडे और पà¥à¤°à¥à¤· के सà¥à¤ªà¤°à¥à¤® का का सà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥ होना आवशà¥à¤¯à¤• है। इन दोनों में से किसी à¤à¤• में à¤à¥€ समसà¥à¤¯à¤¾ होने पर गरà¥à¤à¤§à¤¾à¤°à¤£ में बाधा पैदा होती है।
वीरà¥à¤¯ में किसी तरह की समसà¥à¤¯à¤¾ होने पर गरà¥à¤à¤§à¤¾à¤°à¤£ की कोशिश फेल हो जाती है। à¤à¤¸à¥€ सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ में डॉकà¥à¤Ÿà¤° वीरà¥à¤¯ विशà¥à¤²à¥‡à¤·à¤£ का सà¥à¤à¤¾à¤µ देते हैं। इस पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ के दौरान, डॉकà¥à¤Ÿà¤° वीरà¥à¤¯ की जांच कर उसकी गà¥à¤£à¤µà¤¤à¥à¤¤à¤¾ और मातà¥à¤°à¤¾ यानी कà¥à¤µà¤¾à¤²à¤¿à¤Ÿà¥€ और कà¥à¤µà¤¾à¤‚टिटी को मापते हैं।
वीरà¥à¤¯ की जांच के दौरान पà¥à¤°à¥à¤· अपने वीरà¥à¤¯ का नमूना डॉकà¥à¤Ÿà¤° को देता है। उसके बाद, डॉकà¥à¤Ÿà¤° जांच करने के लिठवीरà¥à¤¯ का à¤à¤• अचà¥à¤›à¤¾ सैंपल तैयार करते हैं। इस दौरान, दो बातों का खास धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ रखना है जिसमें शामिल हैं:-
-वीरà¥à¤¯ को शरीर के तापमान पर रखना होता है। कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि अगर यह अधिक गरà¥à¤® या ठंडा हà¥à¤† तो वीरà¥à¤¯ जांच का रिजलà¥à¤Ÿ गलत आ सकता है।
-वीरà¥à¤¯ को शरीर से बाहर आने के 30-60 मिनट के अंदर ही जांच के लिठडॉकà¥à¤Ÿà¤° के पास à¤à¥‡à¤œ देना चाहिà¤à¥¤
वीरà¥à¤¯ की जांच को घर या कà¥à¤²à¤¿à¤¨à¤¿à¤• दोनों ही जगहों पर किया जा सकता है। घर पर की जाने वाली जांच में केवल शà¥à¤•à¥à¤°à¤¾à¤£à¥à¤“ं की संखà¥à¤¯à¤¾ की ही पà¥à¤·à¥à¤Ÿà¤¿ कर सकते हैं। घर पर की जाने वाली जांच के दौरान शà¥à¤•à¥à¤°à¤¾à¤£à¥à¤“ं के आकार और गतिशीलता का विशà¥à¤²à¥‡à¤·à¤£ नहीं होता हैं।
पà¥à¤°à¤œà¤¨à¤¨ शकà¥à¤¤à¤¿ की पà¥à¤·à¥à¤Ÿà¤¿ करने और बांà¤à¤ªà¤¨ के कारणों का पता लगाने के लिठकà¥à¤²à¤¿à¤¨à¤¿à¤• में वीरà¥à¤¯ की जांच की जाती है। कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि यहां पà¥à¤°à¤œà¤¨à¤¨ शकà¥à¤¤à¤¿ का मूलà¥à¤¯à¤¾à¤‚कन वà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¤• रूप से किया जाता है।
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