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लिपोमा कà¥à¤¯à¤¾ होता है?
लिपोमा वसा की à¤à¤• गांठहै जो आपके शरीर के कोमल ऊतकों में बढ़ती है। हालांकि इसे टà¥à¤¯à¥‚मर के रूप में वरà¥à¤—ीकृत किया गया है, पर यह आमतौर पर हानिरहित होता है। यह आपकी तà¥à¤µà¤šà¤¾ के नीचे बनने वाला सबसे आम टà¥à¤¯à¥‚मर है। ये अकसर अपने ऊपरी शरीर, बाहों या जांघों में होते हैं। कई लोगों में ये माथे पर à¤à¥€ देखे जा सकते हैं।
लिपोमा के पà¥à¤°à¤•ार (lipoma Ke Prakaar)
लिपोमा कई पà¥à¤°à¤•ार के होते हैं, जिनमें शामिल हैं:
à¤à¤‚जियोलिपोमा
इस पà¥à¤°à¤•ार को लिपोमा में वसा और रकà¥à¤¤ वाहिकाà¤à¤‚ होती हैं। à¤à¤‚जियोलिपोमा अकà¥à¤¸à¤° दरà¥à¤¦à¤¨à¤¾à¤• होते हैं।
कंवेंशनल
यह लिपोमा का सबसे आम पà¥à¤°à¤•ार है। à¤à¤• पारंपरिक लिपोमा में सफेद वसा कोशिकाà¤à¤‚ होती हैं। सफेद वसा कोशिकाà¤à¤‚ ऊरà¥à¤œà¤¾ का à¤à¤‚डारण करती हैं।
फाइबà¥à¤°à¥‹à¤²à¤¿à¤ªà¥‹à¤®à¤¾
इस पà¥à¤°à¤•ार के लिपोमा का निरà¥à¤®à¤¾à¤£ वसा और रेशेदार ऊतक के कारण होता है।
हाइबरनोमा
इस तरह के लिपोमा में बà¥à¤°à¤¾à¤‰à¤¨ फैट होता है। अधिकांश लिपोमा में सफेद वसा होती है। बà¥à¤°à¤¾à¤‰à¤¨ फैट कोशिकाà¤à¤‚ गरà¥à¤®à¥€ उतà¥à¤ªà¤¨à¥à¤¨ करती हैं और शरीर के तापमान को नियंतà¥à¤°à¤¿à¤¤ करने में मदद करती हैं।
मायलोलिपोमा
इन लिपोमा में वसा और ऊतक होते हैं जो रकà¥à¤¤ कोशिकाओं का उतà¥à¤ªà¤¾à¤¦à¤¨ करते हैं।
सà¥à¤ªà¤¿à¤‚डल सेल
इन लिपोमा में वसा कोशिकाà¤à¤‚ चौड़ी होने की तà¥à¤²à¤¨à¤¾ में लंबी होती हैं।
पà¥à¤²à¤¿à¤¯à¥‹à¤®à¥‰à¤°à¥à¤«à¤¿à¤•
इन लिपोमा में विà¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ आकार की वसा कोशिकाà¤à¤‚ होती हैं।
लिपोमा होने के लकà¥à¤·à¤£ (lipoma Ke Lakshad)
लिपोमा अधिकतर छोटे, मà¥à¤²à¤¾à¤¯à¤® होते हैं और गांठके रूप में दिखाई देते हैं। वे आम तौर पर 2 इंच से कम चौड़े होते हैं। à¤à¤• वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ के à¤à¤• से अधिक लिपोमा हो सकते हैं। ये अधिकतर कंधों, छाती, बांहों, पीठ, जांघों, कूलà¥à¤¹à¥‹à¤‚ या माथे पर होते हैं।
जब आप लिपोमा को दबाते हैं, तो यह मà¥à¤²à¤¾à¤¯à¤® महसूस हो सकता है। उंगली से हिलाने पर यह अपनी जगह से हिल à¤à¥€ सकता है। इनसे आम तौर पर कोई दरà¥à¤¦ नहीं होता है लेकिन अगर ये नसों से टकरा जाà¤à¤‚ तो दरà¥à¤¦ का कारण बन सकते हैं।
लिपोमा होने के कारण (lipoma Hone Ke Kaaran)
यह सà¥à¤ªà¤·à¥à¤Ÿ नहीं है कि लिपोमा कà¥à¤¯à¥‹à¤‚ होते हैं । हालांकि मधà¥à¤¯à¤® आयॠवरà¥à¤— के पà¥à¤°à¤·à¥‹à¤‚ और महिलाओं में ये अधिक पाठजाते हैं।कई बार ये अनà¥à¤µà¤¾à¤‚शिक à¤à¥€ हो सकते हैं यानी परिवार के कई सदसà¥à¤¯à¥‹à¤‚ को ये हो सकते हैं। लिपोमा अकà¥à¤¸à¤° चोट लगने के बाद दिखाई देते हैं। हालांकि ये जà¥à¤žà¤¾à¤¤ नहीं है कि वे चोट के कारण उà¤à¤°à¥‡ हैं।
मैडेलà¥à¤‚ग नाम की à¤à¤• दà¥à¤°à¥à¤²à¤ बीमारी से पीड़ित लोगों में अकसर हो सकते हैं।इसके अलावा डरà¥à¤•म डिज़ीज़, गारà¥à¤¡à¤¨à¤° सिंडà¥à¤°à¥‹à¤®, हेरेडिटरी मलà¥à¤Ÿà¥€à¤ªà¤² लिपोमाटोसिस जैसी बीमारियों से पीड़ित लोगों में ये अकसर देखे जाते हैं।
लिपोमा की लिपोमा के दौरान आपका खान-पान (Aapki Diet lipoma Lipoma ke Dooran)
यदि संà¤à¤µ हो तो ऑरà¥à¤—ैनिक खादà¥à¤¯ पदारà¥à¤¥à¥‹à¤‚ का सेवन करें। इन खादà¥à¤¯ पदारà¥à¤¥à¥‹à¤‚ में कम पà¥à¤°à¤¿à¤œà¤¼à¤°à¥à¤µà¥‡à¤Ÿà¤¿à¤µà¥à¤œà¤¼ और à¤à¤¡à¤¿à¤Ÿà¤¿à¤µà¥à¤œà¤¼ होते हैं, जो लिपोमा के वसायà¥à¤•à¥à¤¤ ऊतकों से विषाकà¥à¤¤ पदारà¥à¤¥à¥‹à¤‚ को निकालने में लीवर की सहायता कर सकते हैं।
फलों और सबà¥à¤œà¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ से à¤à¤°à¤ªà¥‚र आहार आपके रकà¥à¤¤ से वसा को कम करने के लिठआवशà¥à¤¯à¤• है कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि वे à¤à¤‚टीऑकà¥à¤¸à¥€à¤¡à¥‡à¤‚ट से à¤à¤°à¤ªà¥‚र होते हैं। चमकीले रंग के फल और सबà¥à¤œà¤¿à¤¯à¤¾à¤‚ जैसे बà¥à¤²à¥‚बेरी, आलूबà¥à¤–ारा, हरी पतà¥à¤¤à¥‡à¤¦à¤¾à¤° सबà¥à¤œà¤¿à¤¯à¤¾à¤‚, सà¥à¤•à¥à¤µà¥ˆà¤¶, बेल मिरà¥à¤š आदि विटामिन और खनिजों से à¤à¤°à¤ªà¥‚र होते हैं और इनमें à¤à¤°à¤ªà¥‚र मातà¥à¤°à¤¾ में à¤à¤‚टीऑकà¥à¤¸à¥€à¤¡à¥‡à¤‚ट à¤à¥€ होते हैं।ये शरीर को साफ करने के साथ ही पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤°à¤•à¥à¤·à¤¾ पà¥à¤°à¤£à¤¾à¤²à¥€ के निरà¥à¤®à¤¾à¤£ में मदद करते हैं। ताजी सबà¥à¤œà¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ और फलों के रस à¤à¥€ पोषण में वृदà¥à¤§à¤¿ करते हैं और सरà¥à¤•à¥à¤²à¥‡à¤Ÿà¤°à¥€ सिसà¥à¤Ÿà¤® की सफाई करते हैं।
लिपोमास से छà¥à¤Ÿà¤•ारा पाने के लिठमछली का सेवन फायदेमंद होता है कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि इनमें ओमेगा थà¥à¤°à¥€ फैटी à¤à¤¸à¤¿à¤¡ और उचà¥à¤š गà¥à¤£à¤µà¤¤à¥à¤¤à¤¾ वाले पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨ होते हैं।ये आपके शरीर में सूजन को कम करने में मदद करते हैं और तà¥à¤µà¤šà¤¾ के नीचे वसायà¥à¤•à¥à¤¤ ऊतकों के विकास को à¤à¥€ सीमित करते हैं। सैलà¥à¤®à¤¨ और टूना मछली ओमेगा3 फैटी à¤à¤¸à¤¿à¤¡ के उतà¥à¤•ृषà¥à¤Ÿ सà¥à¤°à¥‹à¤¤ हैं जो विटामिन बी12 में à¤à¥€ उचà¥à¤š हैं।
रेड मीट डाइट में कमी à¤à¥€ फायदेमंद है कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि इससे वसा का संचय होता है। रेड मीट के बजाय आप चिकन, टोफू और बीनà¥à¤¸ का सेवन कर सकते हैं जो सेहतमंद होते हैं और इनमें उचà¥à¤š सà¥à¤¤à¤° का पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨ à¤à¥€ होता है।
अधिक पानी पीना आपके शरीर और समगà¥à¤° सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ के लिठà¤à¥€ अचà¥à¤›à¤¾ होता है। यह शरीर से विषाकà¥à¤¤ पदारà¥à¤¥à¥‹à¤‚ को बाहर निकालने में मदद करता है। यह लिपोमा को कम करने के साथ ही à¤à¤µà¤¿à¤·à¥à¤¯ में दौबारा होने से रोकता है।
बेकिंग सोडा के साथ नींबू के रस का सेवन à¤à¥€ सà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥ होता है और रकà¥à¤¤ से शरà¥à¤•रा और विषाकà¥à¤¤ पदारà¥à¤¥à¥‹à¤‚ को बाहर निकालने में मदद करता है।
सूजन को कम करने वाले खादà¥à¤¯ पदारà¥à¤¥à¥‹à¤‚ के सेवन से लाठहोता है जैसे à¤à¤µà¥‹à¤•ाडो, हलà¥à¤¦à¥€, अदरक, पà¥à¤¯à¤¾à¤œ, लहसà¥à¤¨, नटà¥à¤¸, पालक और जैतून का तेल ।
लिपोमा होने पर इन चीजों से करें परहेज (lipoma hone par en cheezo se kare parhez)
लिपोमा वसायà¥à¤•à¥à¤¤ ऊतक के कारण होता है इसलिठसबसे पहले वसायà¥à¤•à¥à¤¤ खादà¥à¤¯ पदारà¥à¤¥à¥‹à¤‚ में कमी लाना आपके लिठसहायक हो सकता है।
डेयरी और डेयरी उतà¥à¤ªà¤¾à¤¦à¥‹à¤‚ जैसे आइसकà¥à¤°à¥€à¤®, मकà¥à¤–न, कà¥à¤°à¥€à¤® आदि से परहेज करना वसा संचय की मातà¥à¤°à¤¾ को कम करने में सहायक होता है जिससे लिपोमा हो सकता है।
इसके अलावा, चीनी से à¤à¤°à¤ªà¥‚र खादà¥à¤¯ पदारà¥à¤¥ जैसे चॉकलेट, जंक फूड कृतà¥à¤°à¤¿à¤® मिठास आपके शरीर में अधिक वसा जोड़ते हैं। रकà¥à¤¤à¤ªà¥à¤°à¤µà¤¾à¤¹ में मौजूद चीनी वसा में परिवरà¥à¤¤à¤¿à¤¤ हो जाती है और तà¥à¤µà¤šà¤¾ के नीचे जमा हो जाती है, इसलिठलिपोमा के संà¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ गठन को रोकने के लिठशरà¥à¤•रा यà¥à¤•à¥à¤¤ खादà¥à¤¯ पदारà¥à¤¥à¥‹à¤‚ से छà¥à¤Ÿà¤•ारा पाना बहà¥à¤¤ महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ है।
अपने आहार में पà¥à¤°à¥‹à¤¸à¥‡à¤¸à¥à¤¡ और पैकेजà¥à¤¡ खादà¥à¤¯ पदारà¥à¤¥à¥‹à¤‚ को सीमित करने से शरीर में विषाकà¥à¤¤ पदारà¥à¤¥à¥‹à¤‚ का निरà¥à¤®à¤¾à¤£ कम होगा।
शराब से परहेज करें। शराब पीने से कई लिपोमा विकसित होने का खतरा बढ़ सकता है, इसलिठशराब के सेवन से बचें।
लिपोमा होने पर कà¥à¤¯à¤¾ करे (lipoma Hone par kya kare)
लिपोमा फैट से बनी गांठें होती हैं इसलिठआमतौर पर अपने आहार में परिवरà¥à¤¤à¤¨ कर के आप इससे बचाव कर सकते हैं। हरी सबà¥à¤œà¤¼à¤¿à¤¯à¤¾à¤‚ फलों का सेवन करें
सरà¥à¤œà¤°à¥€ के बाद देखà¤à¤¾à¤² के लिठआमतौर पर 1-3 दिनों के लिठदरà¥à¤¦ निवारक दवाà¤à¤‚ दी जाती हैं।इनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ नियमित रूप से लेते रहें।
डॉकà¥à¤Ÿà¤° की सलाह से समय-समय पर आइस पैक से सिंकाई à¤à¥€ कर सकते हैं।
सरà¥à¤œà¤°à¥€ के बाद लगà¤à¤— à¤à¤• सपà¥à¤¤à¤¾à¤¹ तक आराम करें।
सरà¥à¤œà¤°à¥€ के बाद घाव à¤à¤°à¤¨à¥‡ तक पीठके बल ही लेटकर सोà¤à¤‚।
सरà¥à¤œà¤°à¥€ के बाद डॉकà¥à¤Ÿà¤° की सलाह लेकर ही नहाà¤à¤‚।नहाते समय टांकों को à¤à¥€à¤—ने ना दें।
लिपोमा होने पर कà¥à¤¯à¤¾ ना करे (lipoma hone par kya Na Kare)
à¤à¤¾à¤°à¥€ à¤à¤°à¤•म वà¥à¤¯à¤¾à¤¯à¤¾à¤® से तब तक बचना चाहिठजब तक आपका सरà¥à¤œà¤¿à¤•ल घाव ठीक नहीं हो जाता है।
शराब से दूर रहें कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि कà¥à¤› सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ समसà¥à¤¯à¤¾à¤à¤‚ जो शराब पीने से होती हैं उनमें लिपोमा होने का जोखिम अधिक होता है।
लिपोमा को घर पर ठीक कैसे करे (Home Remedy for lipoma) Treatment in Hindi)
अलसी और नीम
अलसी औऱ नीम जैसे पà¥à¤°à¤¾à¤•ृतिक तेल लिपोमा में कारगर हैं। नीम का तेल à¤à¤• à¤à¤‚टीसेपà¥à¤Ÿà¤¿à¤• के रूप में कारà¥à¤¯ करता है, जो आपकी तà¥à¤µà¤šà¤¾ को संकà¥à¤°à¤®à¤£ से बचाता है। बहà¥à¤¤ लंबे समय से इसका उपयोग लिपोमा में राहत देने के लिठकिया जाता रहा है।अलसी के तेल में ओमेगा-3 और ओमेगा-6 फैटी à¤à¤¸à¤¿à¤¡ पाठजाते हैं और ये लिपोमा से पैदा होने वाली सूजन के खिलाफ फायदेमंद होते हैं। आप नीम और अलसी के बीजों से तेल बना सकते हैं या दà¥à¤•ान से तेल खरीद सकते हैं।
काली मिरà¥à¤š
काली मिरà¥à¤š à¤à¤• à¤à¤¸à¤¾ ततà¥à¤µ है जो वजन पà¥à¤°à¤¬à¤‚धन के लिठलोकपà¥à¤°à¤¿à¤¯ रूप से इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² किया जाता रहा है। यह लिपोमा के लिठà¤à¤• पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¥€ पà¥à¤°à¤¾à¤•ृतिक उपचार माना जाता है। à¤à¤• चमà¥à¤®à¤š काली मिरà¥à¤š, à¤à¤• चमà¥à¤®à¤š नीम का तेल या अलसी का तेल लें और आप वैकलà¥à¤ªà¤¿à¤• रूप से ठंडी चाय का उपयोग करके पेसà¥à¤Ÿ बना सकते हैं और इसे सीधे गांठपर लगा सकते हैं।
हलà¥à¤¦à¥€ लगाà¤à¤‚
लिपोमा ऑइंटमेंट बनाने के लिठहलà¥à¤¦à¥€ को नीम के तेल या अलसी के तेल के साथ मिलाà¤à¤‚। इन सà¤à¥€ पदारà¥à¤¥à¥‹à¤‚ में à¤à¤‚टी इंफà¥à¤²à¥‡à¤®à¥‡à¤Ÿà¤°à¥€ और चिकितà¥à¤¸à¤•ीय गà¥à¤£ होते हैं। इनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ मिलाकर à¤à¤• पेसà¥à¤Ÿ तैयार करें और इसे गांठपर लगाà¤à¤‚।
तेज पतà¥à¤¤à¤¾
आधा चमà¥à¤®à¤š तेज़ पतà¥à¤¤à¥‡ के पाउडर में 2 से 3 चमà¥à¤®à¤š नीम और अलसी का तेल मिलाकर गांठपर लगाà¤à¤.
थà¥à¤œà¤¾ ऑकà¥à¤¸à¥€à¤¡à¥‡à¤‚टलिस
इसे पूरà¥à¤µà¥€ सफेद देवदार के रूप में à¤à¥€ जाना जाता है।ये à¤à¤• पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¶à¤¾à¤²à¥€ , à¤à¤‚टीऑकà¥à¤¸à¤¿à¤¡à¥‡à¤‚ट,à¤à¤‚टी इंफà¥à¤²à¥‡à¤®à¥‡à¤Ÿà¤°à¥€ और à¤à¤‚टीकैंसर यà¥à¤•à¥à¤¤ पौधे के रूप में जाना जाता है। होमà¥à¤¯à¥‹à¤ªà¥ˆà¤¥à¤¿à¤• चिकितà¥à¤¸à¤¾ में इसका वà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¤• रूप से उपयोग कà¥à¤¯à¥‹à¤‚ किया जाता है।थूजा का उपयोग कà¤à¥€-कà¤à¥€ तà¥à¤µà¤šà¤¾ पर असामानà¥à¤¯ वृदà¥à¤§à¤¿ जैसे मसà¥à¤¸à¥‡ के इलाज के लिठकिया जाता है। यह वसायà¥à¤•à¥à¤¤ गांठजैसे लिपोमा को à¤à¤‚ग करने में मददगार साबित हो सकता है।इसे इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² करने के लिठथूजा के अरà¥à¤• को थोड़े से पानी में मिलाà¤à¤‚। इस पेसà¥à¤Ÿ को लिपोमा पर दिन में तीन बार तब तक लगाà¤à¤‚ जब तक गांठघà¥à¤² न जाà¤à¥¤
à¤à¤¸à¥‡à¤‚शियल ऑयल
लिपोमा के इलाज में कई à¤à¤¸à¥‡à¤‚शियल ऑयल कारगर हो सकते हैं। उदाहरण के लिठअदरक का à¤à¤¸à¥‡à¤‚शियल ऑयल, लौंग का à¤à¤¸à¥‡à¤‚शियल ऑयल, अंगूर का à¤à¤¸à¥‡à¤‚शियल ऑयल, जीरे का à¤à¤¸à¥‡à¤‚शियल ऑयल, दालचीनी का à¤à¤¸à¥‡à¤‚शियल ऑयल आदि।इन सà¤à¥€ तेलों में शरीर की चरà¥à¤¬à¥€ के साथ-साथ टà¥à¤¯à¥‚मर कोशिकाओं से लड़ने की कà¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾ होती है। इस पà¥à¤°à¤•ार, वे लिपोमा की गांठको कम करने में मदद करते हैं।
लिपोमा के इलाज (lipoma Ke Ilaaj)
चूंकि लिपोमा हानिकारक नहीं होते हैं, इसलिठडॉकà¥à¤Ÿà¤° अकà¥à¤¸à¤° उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ वैसे ही छोड़ देने की सलाह देते हैं । हालांकि आपको इस बात का धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ रखना ज़रूरी है कि किसी लिपोमा में दरà¥à¤¦ तो नहीं हो रहा है। कà¥à¤› लोग शरीर पर लिपोमा के कारण खà¥à¤¦ को आकरà¥à¤·à¤• महसूस नहीं करते और उसे निकलवाना चाहते हैं।
अनà¥à¤¯ संà¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ उपचारों में शामिल हैं सà¥à¤Ÿà¥‡à¤°à¥‰à¤¯à¤¡ देना। इस पà¥à¤°à¤•ार की दवा लिपोमा को सिकोड़ने में मदद कर सकती है।
कà¥à¤› मामलों में लिपोमा खतरनाक हो सकते हैं और इनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ निकलवाना आवशà¥à¤¯à¤• हो जाता है। सरà¥à¤œà¤°à¥€ से पहले डॉकà¥à¤Ÿà¤° आपकी बायोपà¥à¤¸à¥€ कर सकते हैं। इसमें डॉकà¥à¤Ÿà¤° गांठसे कोशिकाओं का à¤à¤• छोटा सा नमूना लेकर कैंसर के लकà¥à¤·à¤£ देखने के लिठउसकी जांच करते हैं।
इसके अलावा कà¥à¤› और जांचें à¤à¥€ कराई जा सकती हैं जैसे-
अलà¥à¤Ÿà¥à¤°à¤¾à¤¸à¤¾à¤‰à¤‚ड सà¥à¤•ैन
à¤à¤®à¤†à¤°à¤†à¤ˆ सà¥à¤•ैन
सीटी सà¥à¤•ैन
कà¥à¤› लोगों में लिपोमा में कैंसर पाया जाता है ।à¤à¤¸à¥‡ में लिपोमा को निकालना ज़रूरी हो जाता है। इसके अलावा अगर लिपोमा आकार में काफी बड़ा है ,तेजी से बढ़ रहा है, दरà¥à¤¦ और बेचैनी जैसे परेशान करने वाले लकà¥à¤·à¤£ पैदा कर रहा है, शरीर के सामानà¥à¤¯ कारà¥à¤¯à¥‹à¤‚ में बाधा डाल रहा है या फिर कॉसà¥à¤®à¥‡à¤Ÿà¤¿à¤• कारणों से परेशानी का कारण बन रहा है तो इसे सरà¥à¤œà¤°à¥€ से निकालना ही उचित है।
सरà¥à¤œà¤°à¥€ की पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾
à¤à¤• तरीका यह है कि तà¥à¤µà¤šà¤¾ में à¤à¤• छोटा सा चीरा लगाया जाठऔर फिर लिपोमा को निकाल लिया जाà¤à¥¤ पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ के दौरान वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ को आमतौर पर लोकल à¤à¤¨à¥‡à¤¸à¥à¤¥à¥€à¤¯à¤¿à¤¸à¤¾ दिया जाता है और रोगी उसी दिन घर लौटने में सकà¥à¤·à¤® होता है।
बड़े लिपोमा को पूरी तरह से हटाने के लिठडॉकà¥à¤Ÿà¤° को अधिक महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ चीरा लगाने की आवशà¥à¤¯à¤•ता हो सकती है। लिपोसकà¥à¤¶à¤¨ का उपयोग करके कà¥à¤› लिपोमा को हटाना à¤à¥€ संà¤à¤µ है। à¤à¤¸à¤¾ करने के लिà¤, डॉकà¥à¤Ÿà¤° को गांठको काटकर और चीरे के माधà¥à¤¯à¤® से à¤à¤• पतली, खोखली टà¥à¤¯à¥‚ब अंदर डालते हैं । वे तब शरीर से वसा कोशिकाओं के दà¥à¤°à¤µà¥à¤¯à¤®à¤¾à¤¨ को चूसने के लिठटà¥à¤¯à¥‚ब का उपयोग करते हैं।
सरà¥à¤œà¤°à¥€ के बाद, डॉकà¥à¤Ÿà¤° आमतौर पर लिपोमा से निकली सामगà¥à¤°à¥€ को विशà¥à¤²à¥‡à¤·à¤£ के लिठपà¥à¤°à¤¯à¥‹à¤—शाला में à¤à¥‡à¤œà¤¤à¥‡ हैं। घाव ठीक हो जाने के बाद इस पà¥à¤°à¤•ार के ऑपरेशन अकà¥à¤¸à¤° à¤à¤• छोटा सा निशान छोड़ देते हैं।
लिपोमा के इलाज की लागत (lipoma ke Ilaaj ka Kharcha)
à¤à¤¾à¤°à¤¤ में लिपोमा की सरà¥à¤œà¤°à¥€ की लागत 20,000 रà¥à¤ªà¤ से à¤à¤• लाख रà¥à¤ªà¤ तक हो सकती है।ये लागत इस बात पर à¤à¥€ निरà¥à¤à¤° करती है कि आपको कितनी सरà¥à¤œà¤°à¥€ की आवशà¥à¤•ता पड़ेगी और आफ य़े सरà¥à¤œà¤°à¥€ कहां करवा रहे हैं।
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