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दà¥à¤—à¥à¤§à¤ªà¤¾à¤¨ या दà¥à¤—à¥à¤§à¤¸à¥à¤°à¤µà¤¨ या लैकà¥à¤Ÿà¥‡à¤¶à¤¨, सà¥à¤¤à¤¨ गà¥à¤°à¤‚थि से दूध निकलने, उस दूध को बचà¥à¤šà¥‡ को पिलाने की पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ तथा à¤à¤• माठदà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ अपने बचà¥à¤šà¥‡ को दूध पिलाने में लगने वाले समय को वरà¥à¤£à¤¿à¤¤ करता है। यह पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ सà¤à¥€ मादा सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¯à¥€ पà¥à¤°à¤¾à¤£à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ में होती है और मनà¥à¤·à¥à¤¯à¥‹à¤‚ में इसे आम तौर पर सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ या नरà¥à¤¸à¤¿à¤‚ग कहा जाता है। अधिकांश पà¥à¤°à¤œà¤¾à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ में माठके निपलà¥à¤¸ से दूध निकलता है; हालाà¤à¤•ि, पà¥à¤²à¥ˆà¤Ÿà¤¿à¤ªà¤¸ (à¤à¤• गैर-गरà¥à¤à¤¨à¤¾à¤²à¥€à¤¯ सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¯à¥€ पà¥à¤°à¤¾à¤£à¥€) के पेट की नलिकाओं से दूध निकलता है। सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¯à¥€ पà¥à¤°à¤¾à¤£à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ की केवल à¤à¤• पà¥à¤°à¤œà¤¾à¤¤à¤¿ दयाक फà¥à¤°à¥‚ट चमगादड़ में दूध उतà¥à¤ªà¤¨à¥à¤¨ करना नर का à¤à¤• सामानà¥à¤¯ कारà¥à¤¯ है। कà¥à¤› अनà¥à¤¯ सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¯à¥€ पà¥à¤°à¤¾à¤£à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ में हारà¥à¤®à¥‹à¤¨ के असंतà¥à¤²à¤¨ की वजह से नर दूध उतà¥à¤ªà¤¨à¥à¤¨ कर सकते हैं। इस घटना को नवजात शिशà¥à¤“ं में à¤à¥€ देखा जा सकता है (उदाहरण के लिठडायन का दूध (विचेज मिलà¥à¤•))।
गैलकà¥à¤Ÿà¥‹à¤ªà¥‹à¤‡à¤à¤¸à¤¿à¤¸ दूध उतà¥à¤ªà¤¾à¤¦à¤¨ को बनाये रखने को कहते हैं। इस चरण में पà¥à¤°à¥‹à¤²à¥ˆà¤•à¥à¤Ÿà¤¿à¤¨ (पीआरà¤à¤²) और ऑकà¥à¤¸à¥€à¤Ÿà¥‹à¤¸à¤¿à¤¨ की जरूरत पड़ती है।
पà¥à¤°à¤¯à¥‹à¤œà¤¨
लैकà¥à¤Ÿà¥‡à¤¶à¤¨ का मà¥à¤–à¥à¤¯ कारà¥à¤¯ जनà¥à¤® के बाद बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को पोषण और पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤°à¤•à¥à¤·à¤¾ संरकà¥à¤·à¤£ देना है। लगà¤à¤— सà¤à¥€ सà¥à¤¤à¤¨à¤§à¤¾à¤°à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ में, लैकà¥à¤Ÿà¥‡à¤¶à¤¨ बाà¤à¤à¤ªà¤¨ की à¤à¤• अवधि को जनà¥à¤® देता है जो संतान के जीवित रहने के लिठइषà¥à¤Ÿà¤¤à¤® जनà¥à¤® अंतराल पà¥à¤°à¤¦à¤¾à¤¨ करने का काम करता है।[1]
हारà¥à¤®à¥‹à¤¨ संबंधी पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µ
गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ के चौथे महीने (दूसरी और तीसरी तिमाही) से मादा या महिला का शारीर हारà¥à¤®à¥‹à¤¨ उतà¥à¤ªà¤¨à¥à¤¨ करने लगता है जो सà¥à¤¤à¤¨à¥‹à¤‚ में दà¥à¤—à¥à¤§ नलिका तंतà¥à¤° के विकास को उतà¥à¤¤à¥‡à¤œà¤¿à¤¤ कर देता है:
पà¥à¤°à¥‹à¤œà¥‡à¤¸à¥à¤Ÿà¥‡à¤°à¥‹à¤¨ — यह वायà¥à¤¦à¥à¤µà¤¾à¤° और पालि के आकार में होने वाली वृदà¥à¤§à¤¿ को पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ करता है। जनà¥à¤® के बाद पà¥à¤°à¥‹à¤œà¥‡à¤¸à¥à¤Ÿà¥‡à¤°à¥‹à¤¨ का सà¥à¤¤à¤° गिरने लगता है। यह पà¥à¤°à¤šà¥à¤° परिमाण में दूध उतà¥à¤ªà¤¾à¤¦à¤¨ की शà¥à¤°à¥à¤†à¤¤ में तेजी लाता है।[2]
ओà¤à¤¸à¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‹à¤œà¥‡à¤¨ — यह दूध नलिका तंतà¥à¤° को बढ़ने और विशिषà¥à¤Ÿ रूप धारण करने में मदद करती है। पà¥à¤°à¤¸à¤µ के समय ओà¤à¤¸à¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‹à¤œà¥‡à¤¨ का सà¥à¤¤à¤° à¤à¥€ गिर जाता है और सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ के पहले कई महीनों तक इसका सà¥à¤¤à¤° नीचे ही रहता है।[2] à¤à¤¸à¤¾ सà¥à¤à¤¾à¤µ दिया जाता है कि सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ कराने वाली माताओं को ओà¤à¤¸à¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‹à¤œà¥‡à¤¨ आधारित जनà¥à¤® नियंतà¥à¤°à¤£ विधियों से बचना चाहिठकà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि à¤à¤¸à¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‹à¤œà¥‡à¤¨ के सà¥à¤¤à¤° में कà¥à¤·à¤£à¤¿à¤• परिवरà¥à¤¤à¤¨ से à¤à¥€ माता की दूध आपूरà¥à¤¤à¤¿ में गिरावट आ सकती है।
फॉलिकल सà¥à¤Ÿà¤¿à¤®à¥à¤²à¥‡à¤Ÿà¤¿à¤‚ग हारà¥à¤®à¥‹à¤¨ अरà¥à¤¥à¤¾à¤¤à¥ कूप पà¥à¤°à¥‡à¤°à¤• हारà¥à¤®à¥‹à¤¨ (à¤à¤«à¤à¤¸à¤à¤š)
लà¥à¤¯à¥‚टीनाइजिंग हारà¥à¤®à¥‹à¤¨ (à¤à¤²à¤à¤š)
पà¥à¤°à¥‹à¤²à¥ˆà¤•à¥à¤Ÿà¤¿à¤¨ — यह गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ के दौरान वायà¥à¤¦à¥à¤µà¤¾à¤°à¥‹à¤‚ की वृदà¥à¤§à¤¿ में योगदान करता है।
ऑकà¥à¤¸à¥€à¤Ÿà¥‹à¤¸à¤¿à¤¨ — यह जनà¥à¤® के दौरान और उसके बाद और समà¥à¤à¥‹à¤— सà¥à¤– के दौरान गरà¥à¤à¤¾à¤¶à¤¯ की कोमल मांसपेशियों को सिकोड़ देता है। जनà¥à¤® के बाद ऑकà¥à¤¸à¥€à¤Ÿà¥‹à¤¸à¤¿à¤¨ नलिका तंतà¥à¤° में नवनिरà¥à¤®à¤¿à¤¤ दूध को निचोड़ने के लिठवायà¥à¤¦à¥à¤µà¤¾à¤° के चारों तरफ बैंड जैसी कोशिकाओं की कोमल मांसपेशियों की परत को सिकोड़ देता है। ऑकà¥à¤¸à¥€à¤Ÿà¥‹à¤¸à¤¿à¤¨ दूध निषà¥à¤•ासन पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ या तà¥à¤¯à¤¾à¤— के लिठजरूरी है।
मानव गरà¥à¤à¤¨à¤¾à¤²à¥€à¤¯ लैकà¥à¤Ÿà¥‹à¤œà¥‡à¤¨ (à¤à¤šà¤ªà¥€à¤à¤²) — गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ के दूसरे महीने से गरà¥à¤à¤¨à¤¾à¤² से काफी मातà¥à¤°à¤¾ में à¤à¤šà¤ªà¥€à¤à¤² निकलने लगता है। यह हारà¥à¤®à¥‹à¤¨ जनà¥à¤® से पहले सà¥à¤¤à¤¨, निपल और à¤à¤°à¤¿à¤“ला अरà¥à¤¥à¤¾à¤¤à¥ चूसनी या निपल के आसपास गोल घेरे के विकास में काफी महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ à¤à¥‚मिका निà¤à¤¾à¤¤à¤¾ है।
गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ के पांचवें या छठवें महीने तक सà¥à¤¤à¤¨ दूध उतà¥à¤ªà¤¨à¥à¤¨ करने के लिठतैयार हो जाते हैं। गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ के बिना à¤à¥€ लैकà¥à¤Ÿà¥‡à¤¶à¤¨ को पà¥à¤°à¥‡à¤°à¤¿à¤¤ किया जा सकता है।
लैकà¥à¤Ÿà¥‹à¤œà¥‡à¤¨à¥‡à¤¸à¤¿à¤¸ पà¥à¤°à¤¥à¤® चरण
गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ के उतà¥à¤¤à¤°à¤¾à¤°à¥à¤§ में महिला या मादा के सà¥à¤¤à¤¨ लैकà¥à¤Ÿà¥‹à¤œà¥‡à¤¨à¥‡à¤¸à¤¿à¤¸ के पà¥à¤°à¤¥à¤® चरण में पà¥à¤°à¤µà¥‡à¤¶ करते हैं। à¤à¤¸à¤¾ तब होता है जब सà¥à¤¤à¤¨ में कोलोसà¥à¤Ÿà¥à¤°à¤® (नीचे देखें) बनता है जो कि à¤à¤• गाढ़ा और कà¤à¥€-कà¤à¥€ पीले रंग का तरल पदारà¥à¤¥ है। इस चरण में पà¥à¤°à¥‹à¤œà¥‡à¤¸à¥à¤Ÿà¥‡à¤°à¥‹à¤¨ की अतà¥à¤¯à¤§à¤¿à¤• मातà¥à¤°à¤¾ की वजह से दूध उतà¥à¤ªà¤¾à¤¦à¤¨ में काफी रूकावट आती है। यह किसी चिकितà¥à¤¸à¥€à¤¯ चिंता का विषय नहीं है अगर अपने बचà¥à¤šà¥‡ को जनà¥à¤® देने से पहले ही किसी गरà¥à¤à¤µà¤¤à¥€ महिला के सà¥à¤¤à¤¨ से कोलोसà¥à¤Ÿà¥à¤°à¤® निकलने लगे और यह à¤à¤¾à¤µà¥€ दूध उतà¥à¤ªà¤¾à¤¦à¤¨ का कोई संकेत à¤à¥€ नहीं है।
लैकà¥à¤Ÿà¥‹à¤œà¥‡à¤¨à¥‡à¤¸à¤¿à¤¸ दà¥à¤µà¤¿à¤¤à¥€à¤¯ चरण
जनà¥à¤® के समय पà¥à¤°à¥‹à¤²à¥ˆà¤•à¥à¤Ÿà¤¿à¤¨ का सà¥à¤¤à¤° ऊंचा रहता है जबकि गरà¥à¤à¤¨à¤¾à¤² के पà¥à¤°à¤¸à¤µ के परिणामसà¥à¤µà¤°à¥‚प पà¥à¤°à¥‹à¤œà¥‡à¤¸à¥à¤Ÿà¥‡à¤°à¥‹à¤¨, à¤à¤¸à¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‹à¤œà¥‡à¤¨ और à¤à¤šà¤ªà¥€à¤à¤² के सà¥à¤¤à¤°à¥‹à¤‚ में अचानक गिरावट आ जाती है। उचà¥à¤š पà¥à¤°à¥‹à¤²à¥ˆà¤•à¥à¤Ÿà¤¿à¤¨ सà¥à¤¤à¤° की मौजूदगी में पà¥à¤°à¥‹à¤œà¥‡à¤¸à¥à¤Ÿà¥‡à¤°à¥‹à¤¨ में अचानक गिरावट आने से लैकà¥à¤Ÿà¥‹à¤œà¥‡à¤¨à¥‡à¤¸à¤¿à¤¸ के दà¥à¤µà¤¿à¤¤à¥€à¤¯ चरण में काफी पà¥à¤°à¤šà¥à¤° परिमाण में दूध उतà¥à¤ªà¤¨à¥à¤¨ होने लगता है।
सà¥à¤¤à¤¨ के उतà¥à¤¤à¥‡à¤œà¤¿à¤¤ होने पर रकà¥à¤¤ में मौजूद पà¥à¤°à¥‹à¤²à¥ˆà¤•à¥à¤Ÿà¤¿à¤¨ का सà¥à¤¤à¤° बढ़ने लगता है और लगà¤à¤— 45 मिनट में काफी ऊपर चला जाता है और लगà¤à¤— तीन घंटे बाद दूध पिलाने की अवसà¥à¤¥à¤¾ में आने से पहले इसका सà¥à¤¤à¤° वापस नीचे गिर जाता है। पà¥à¤°à¥‹à¤²à¥ˆà¤•à¥à¤Ÿà¤¿à¤¨ के निकलने से वायà¥à¤¦à¥à¤µà¤¾à¤° की कोशिकाà¤à¤‚ उतà¥à¤¤à¥‡à¤œà¤¿à¤¤ हो जाती हैं जिससे दूध का निरà¥à¤®à¤¾à¤£ होने लगता है। पà¥à¤°à¥‹à¤²à¥ˆà¤•à¥à¤Ÿà¤¿à¤¨ सà¥à¤¤à¤¨ के दूध में à¤à¥€ चला जाता है। कà¥à¤› शोधों से पता चला है कि बहà¥à¤¤ जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ दूध उतà¥à¤ªà¤¾à¤¦à¤¨ के समय दूध में पà¥à¤°à¥‹à¤²à¥ˆà¤•à¥à¤Ÿà¤¿à¤¨ का परिमाण बहà¥à¤¤ अधिक होता है और जब सà¥à¤¤à¤¨ दूध से à¤à¤°à¤¾ रहता है तब इसका परिमाण कम होता है और दो बजे से छः बजे सà¥à¤¬à¤¹ तक इसके काफी ऊंचे सà¥à¤¤à¤° में होने की समà¥à¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ रहती है।[3]
मà¥à¤–à¥à¤¯ रूप से इंसà¥à¤²à¤¿à¤¨, थायरोकà¥à¤¸à¤¿à¤¨ और कोरà¥à¤Ÿà¤¿à¤¸à¥‹à¤² जैसे अनà¥à¤¯ हारà¥à¤®à¥‹à¤¨ शामिल होते हैं लेकिन अà¤à¥€ तक उनकी à¤à¥‚मिकाओं के बारे में पूरी जानकारी नहीं मिली है। हालाà¤à¤•ि जैव रासायनिक मारà¥à¤•रों से यह संकेत मिलता है कि लैकà¥à¤Ÿà¥‹à¤œà¥‡à¤¨à¥‡à¤¸à¤¿à¤¸ के दà¥à¤µà¤¿à¤¤à¥€à¤¯ चरण की शà¥à¤°à¥à¤†à¤¤ बचà¥à¤šà¥‡ को जनà¥à¤® देने के लगà¤à¤— 30 से 40 घंटे के बाद होती है लेकिन माताओं को आम तौर पर अपने बचà¥à¤šà¥‡ को जनà¥à¤® देने के 50 से 73 घंटे (2 से 3 दिन) तक सà¥à¤¤à¤¨ के दूध से पूरी तरह à¤à¤°à¥‡ होने का à¤à¤¹à¤¸à¤¾à¤¸ ("सà¥à¤¤à¤¨ में दूध आने की अनà¥à¤à¥‚ति") नहीं होता है।
अपनी माठके सà¥à¤¤à¤¨ से दूध पीने वाले बचà¥à¤šà¥‡ को सबसे पहले दूध के रूप में कोलोसà¥à¤Ÿà¥à¤°à¤® पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ होता है। इसमें परिपकà¥à¤µ दूध की तà¥à¤²à¤¨à¤¾ में काफी परिमाण में सफ़ेद रकà¥à¤¤ कोशिकाà¤à¤‚ और à¤à¤‚टीबॉडी होते हैं और विशेष रूप से इसमें इमà¥à¤¯à¥‚नोगà¥à¤²à¥‹à¤¬à¥à¤²à¤¿à¤¨ ठ(IgA) का सà¥à¤¤à¤° ऊंचा रहता है जो बचà¥à¤šà¥‡ के अपरिपकà¥à¤µ आà¤à¤¤à¥‹à¤‚ की परत को ढंकने का काम करता है और बचà¥à¤šà¥‡ के तंतà¥à¤° पर हमला करने से रोगाणà¥à¤“ं को रोकने में मदद करता है। सà¥à¤°à¤¾à¤µà¥€ IgA से खादà¥à¤¯ à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ को रोकने में à¤à¥€ मदद मिलती है।[4] जनà¥à¤® के बाद पहले दो सपà¥à¤¤à¤¾à¤¹ तक कोलोसà¥à¤Ÿà¥à¤°à¤® के उतà¥à¤ªà¤¾à¤¦à¤¨ से धीरे-धीरे सà¥à¤¤à¤¨ के दूध को परिपकà¥à¤µ होने का अवसर मिलता है।[2]
लैकà¥à¤Ÿà¥‹à¤œà¥‡à¤¨à¥‡à¤¸à¤¿à¤¸ तृतीय चरण
हारà¥à¤®à¥‹à¤¨à¤² à¤à¤‚डोकà¥à¤°à¤¾à¤‡à¤¨ नियंतà¥à¤°à¤£ तंतà¥à¤°, गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ और जनà¥à¤® देने के बाद पहले कà¥à¤› दिनों के दौरान दूध उतà¥à¤ªà¤¾à¤¦à¤¨ को पà¥à¤°à¥‡à¤°à¤¿à¤¤ करती है। जब दूध की आपूरà¥à¤¤à¤¿ अधिक मजबूत सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ में पहà¥à¤à¤š जाती है तो ऑटोकà¥à¤°à¤¾à¤‡à¤¨ (या सà¥à¤¥à¤¾à¤¨à¥€à¤¯) नियंतà¥à¤°à¤£ तंतà¥à¤° का कारà¥à¤¯ शà¥à¤°à¥‚ होता है। इस चरण को लैकà¥à¤Ÿà¥‹à¤œà¥‡à¤¨à¥‡à¤¸à¤¿à¤¸ का तृतीय चरण कहते हैं।
इस चरण के दौरान सà¥à¤¤à¤¨à¥‹à¤‚ से जितना जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ दूध निकलता है उन सà¥à¤¤à¤¨à¥‹à¤‚ में उतना जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ दूध उतà¥à¤ªà¤¨à¥à¤¨ होता है।[5][6] शोध से यह à¤à¥€ पता चला है कि पूरी तरह से सà¥à¤¤à¤¨à¥‹à¤‚ से जितना जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ दूध निकलता है, दूध उतà¥à¤ªà¤¨à¥à¤¨ होने की दर उतनी ही अधिक हो जाती है।[7] इस पà¥à¤°à¤•ार दूध आपूरà¥à¤¤à¤¿ पर इस बात का बहà¥à¤¤ जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ असर पड़ता है कि बचà¥à¤šà¤¾ कितनी बार दूध पीता है और सà¥à¤¤à¤¨ से कितनी अचà¥à¤›à¥€ तरह से दूध निकल पाता है। कम आपूरà¥à¤¤à¤¿ की पहचान अकà¥à¤¸à¤° निमà¥à¤¨ बातों से की जा सकती है:
अगर परà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¥à¤¤ रूप से दूध पिलाया या निकाला नहीं गया हो
अगर शिशॠपà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¥€ ढंग से दूध नहीं पी सकता हो जिसके निमà¥à¤¨ कारण हो सकते हैं:
जबड़े या मà¥à¤à¤¹ के ढांचे में कोई कमी
दूध पिलाने का अनà¥à¤šà¤¿à¤¤ तरीका
दà¥à¤°à¥à¤²à¤ मातृ à¤à¤‚डोकà¥à¤°à¤¾à¤‡à¤¨ विकार
हाइपोपà¥à¤²à¤¾à¤¸à¥à¤Ÿà¤¿à¤• सà¥à¤¤à¤¨ ऊतक
शिशॠमें चयापचय या पाचन संबंधी अकà¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾ जिससे वह पीठगठदूध को पचाने में असमरà¥à¤¥ हो
अपरà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¥à¤¤ कैलोरी सेवन या मां का कà¥à¤ªà¥‹à¤·à¤£
दूध निषà¥à¤•ासन पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾
ऑकà¥à¤¸à¥€à¤Ÿà¥‹à¤¸à¤¿à¤¨ हारà¥à¤®à¥‹à¤¨ के निकलने की वजह से दूध निषà¥à¤•ासन या तà¥à¤¯à¤¾à¤— पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ का परिणाम देखने को मिलता है। ऑकà¥à¤¸à¥€à¤Ÿà¥‹à¤¸à¤¿à¤¨ सà¥à¤¤à¤¨ के आसपास की मांसपेशियों को उतà¥à¤¤à¥‡à¤œà¤¿à¤¤ कर देता है जिससे सà¥à¤¤à¤¨ से दूध निकलने लगता है। दूध पिलाने वाली माताओं ने दूध पिलाते समय होने वाली अनà¥à¤à¥‚ति का अलग-अलग वरà¥à¤£à¤¨ किया है। कà¥à¤› माताओं को मामूली à¤à¥à¤¨à¤à¥à¤¨à¥€ का à¤à¤¹à¤¸à¤¾à¤¸ होता है जबकि अनà¥à¤¯ माताओं को खूब जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ दबाव या हलà¥à¤•ा दरà¥à¤¦/बेचैनी का à¤à¤¹à¤¸à¤¾à¤¸ होता है और à¤à¤¸à¥€ à¤à¥€ कà¥à¤› माताà¤à¤‚ हैं जिनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ कà¥à¤› अलग महसूस ही नहीं होता।
तà¥à¤¯à¤¾à¤— पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ हमेशा खास तौर पर शà¥à¤°à¥‚ में संगत नहीं होती है। दूध पिलाने का विचार आने पर या किसी बचà¥à¤šà¥‡ की आवाज़ सà¥à¤¨à¤¾à¤ˆ देने पर यह रिफà¥à¤²à¥‡à¤•à¥à¤¸ अरà¥à¤¥à¤¾à¤¤à¥ पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ उतà¥à¤¤à¥‡à¤œà¤¿à¤¤ हो सकती है जिसकी वजह से न चाहते हà¥à¤ à¤à¥€ दूध का रिसाव होने लगता है या उस वकà¥à¤¤ à¤à¥€ दोनों सà¥à¤¤à¤¨à¥‹à¤‚ से दूध निकल सकता है जब शिशॠकिसी à¤à¤• सà¥à¤¤à¤¨ से दूध पी रहा होता है। हालाà¤à¤•ि, इस तरह की और अनà¥à¤¯ पà¥à¤°à¤•ार की समसà¥à¤¯à¤¾à¤à¤‚ अकà¥à¤¸à¤° दूध पिलाना शà¥à¤°à¥‚ करने के दो सपà¥à¤¤à¤¾à¤¹ के बाद दूर हो जाती हैं।[कृपया उदà¥à¤§à¤°à¤£ जोड़ें] तनाव या चिंता की वजह से दूध पिलाने में कठिनाई हो सकती है।
खराब दूध निषà¥à¤•ासन पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ के पीछे कई कारण हो सकते हैं, जैसे - घाव या दरारयà¥à¤•à¥à¤¤ निपलà¥à¤¸, शिशॠसे जà¥à¤¦à¤¾à¤ˆ, सà¥à¤¤à¤¨ शलà¥à¤¯ चिकितà¥à¤¸à¤¾ का इतिहास, या पूरà¥à¤µ सà¥à¤¤à¤¨ आघात से ऊतक कà¥à¤·à¤¤à¤¿. अगर किसी माता को दूध पिलाने में परेशानी होती हो तो उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ दूध निषà¥à¤•ासन पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ में सहायक साबित होने वाले कई विà¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ तरीकों से मदद मिल सकती है। इन तरीकों में शामिल हैं: किसी परिचित या आरामदायक सà¥à¤¥à¤¾à¤¨ में दूध पिलाना, सà¥à¤¤à¤¨ या पीठकी मालिश, या किसी कपड़े या सà¥à¤¨à¤¾à¤¨ आदि के माधà¥à¤¯à¤® से सà¥à¤¤à¤¨ को गरà¥à¤® करना।
आफà¥à¤Ÿà¤°à¤ªà¥‡à¤¨à¥à¤¸ (बाद का कषà¥à¤Ÿ)
ऑकà¥à¤¸à¥€à¤Ÿà¥‹à¤¸à¤¿à¤¨ की वृदà¥à¤§à¤¿ से संà¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ रूप से दूध निषà¥à¤•ासन पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ के उतà¥à¤¤à¥‡à¤œà¤¿à¤¤ होने के अलावा इसकी वजह से गरà¥à¤à¤¾à¤¶à¤¯ में संकà¥à¤šà¤¨ à¤à¥€ हो सकता है। दूध पिलाते समय माताओं को इस तरह के संकà¥à¤šà¤¨ का à¤à¤¹à¤¸à¤¾à¤¸ हो सकता है जिसे आफà¥à¤Ÿà¤°à¤ªà¥‡à¤¨à¥à¤¸ कहते हैं। इसमें à¤à¤‚ठन जैसी छोटी-मोटी तकलीफ से लेकर संकà¥à¤šà¤¨ जैसी बहà¥à¤¤ जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ तकलीफ का à¤à¥€ à¤à¤¹à¤¸à¤¾à¤¸ हो सकता है और दूसरे à¤à¤µà¤‚ परवरà¥à¤¤à¥€ बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ के साथ हालत और गंà¤à¥€à¤° हो सकती है। कà¥à¤› महिलाओं के सà¥à¤¤à¤¨ सूख और चटक जाते हैं और उनमें खà¥à¤²à¥€ दरारें à¤à¥€ पड़ जाती हैं और दूध पिलाने के दौरान उनसे खून à¤à¥€ निकल सकता है। निपलà¥à¤¸ (चूचà¥à¤•) और à¤à¤°à¤¿à¤“ला (चूचà¥à¤• के इरà¥à¤¦à¤—िरà¥à¤¦ गोल घेरा) पर लानोलिन मलने से इन समसà¥à¤¯à¤¾à¤“ं से राहत मिल सकती है।[8]
गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ के बिना दूध का निकलना, उतà¥à¤¤à¥‡à¤œà¤¿à¤¤ करके दूध निकालना, फिर से दूध का निकलना
जो महिला गरà¥à¤à¤µà¤¤à¥€ नहीं है उस महिला में "कृतà¥à¤°à¤¿à¤® रूप से" और जानबूà¤à¤•र दूध उतà¥à¤ªà¤¨à¥à¤¨ किया जा सकता है। इसके लिठजरूरी नहीं है कि महिला गरà¥à¤à¤µà¤¤à¥€ हो और वह रजोनिवृतà¥à¤¤à¤¿ के बाद की अवधि में à¤à¥€ यह काम अचà¥à¤›à¥€ तरह कर सकती है। जो महिला कà¤à¥€ गरà¥à¤à¤µà¤¤à¥€ नहीं हà¥à¤ˆ है वह à¤à¥€ कà¤à¥€-कà¤à¥€ दूध पिलाने लायक काफी परिमाण में दूध उतà¥à¤ªà¤¨à¥à¤¨ करने में सकà¥à¤·à¤® होती है। इसे "पà¥à¤°à¥‡à¤°à¤¿à¤¤ लैकà¥à¤Ÿà¥‡à¤¶à¤¨" अरà¥à¤¥à¤¾à¤¤à¥ "उतà¥à¤¤à¥‡à¤œà¤¿à¤¤ होने पर दूध का निकलना" कहते हैं। जिन महिलाओं ने पहले à¤à¥€ सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ कराया है उनमें फिर से दूध का निकलना शà¥à¤°à¥‚ हो सकता है। इसे "रिलैकà¥à¤Ÿà¥‡à¤¶à¤¨" अरà¥à¤¥à¤¾à¤¤à¥ "फिर से दूध का निकलना" कहते हैं। इसी तरह से आम तौर पर à¤à¤• पूरक नरà¥à¤¸à¤¿à¤‚ग सिसà¥à¤Ÿà¤® या कà¥à¤› अनà¥à¤¯ पà¥à¤°à¤•ार की पूरकता से शà¥à¤°à¥‚ करने वाली कà¥à¤› दतà¥à¤¤à¤•गà¥à¤°à¤¾à¤¹à¥€ माताà¤à¤‚ सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ करा सकती हैं। à¤à¤¸à¤¾ माना जाता है कि दूध की संरचना में बहà¥à¤¤ कम या कोई अंतर नहीं होता है चाहे दूध का निकलना कृतà¥à¤°à¤¿à¤® रूप से पà¥à¤°à¥‡à¤°à¤¿à¤¤ होने पर या गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ के परिणामसà¥à¤µà¤°à¥‚प होता हो। [9][10]
शारीरिक उतà¥à¤¤à¥‡à¤œà¤¨à¤¾ और दवाओं दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ à¤à¥€ दूध निकल सकता है। सिदà¥à¤§à¤¾à¤‚ततः, काफी धैरà¥à¤¯ और दृढ़ता के साथ केवल निपलà¥à¤¸ को चूस कर à¤à¥€ दूध निकाला जा सकता है। इसके लिठनिपलà¥à¤¸ को लगातार उतà¥à¤¤à¥‡à¤œà¤¿à¤¤ करना पड़ सकता है और इनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ उतà¥à¤¤à¥‡à¤œà¤¿à¤¤ करने के लिठसà¥à¤¤à¤¨ को दबाना या वासà¥à¤¤à¤µ में चूसने (à¤à¤• दिन में कई बार) की जरूरत पड़ती है और दूध के बहाव को बढ़ाने के लिठसà¥à¤¤à¤¨à¥‹à¤‚ की मालिश करनी पड़ती है और उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ निचोड़ना ("दूहना") पड़ता है।[कृपया उदà¥à¤§à¤°à¤£ जोड़ें] गैलेकà¥à¤Ÿà¤¾à¤—ोग (दूध-पà¥à¤°à¥‡à¤°à¤£) दवाओं का असà¥à¤¥à¤¾à¤¯à¥€ उपयोग à¤à¥€ पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤•ारी होता है; गैलेकà¥à¤Ÿà¤¾à¤—ोग जड़ी-बूटियाठà¤à¥€ उपयोगी साबित हो सकती हैं। à¤à¤• बार सà¥à¤¥à¤¾à¤ªà¤¿à¤¤ हो जाने पर जरूरत के मà¥à¤¤à¤¾à¤¬à¤¿à¤•़ दूध निकलना शà¥à¤°à¥‚ हो जाता है।
इसके अलावा, कà¥à¤› जोड़े लैंगिक पà¥à¤°à¤¯à¥‹à¤œà¤¨à¥‹à¤‚ के लिठà¤à¥€ लैकà¥à¤Ÿà¥‡à¤¶à¤¨ का इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² कर सकते हैं।
चिकितà¥à¤¸à¥€à¤¯ साहितà¥à¤¯ में नर लैकà¥à¤Ÿà¥‡à¤¶à¤¨ (गैलेकà¥à¤Ÿà¥‹à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ से अलग) का शायद ही कोई विवरण मिलता है।
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