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सà¥à¤¤à¤¨à¥‹à¤‚ का दूध सà¥à¤–ाने के 8 घरेलू उपाय
6 महीने तर हर शिशॠके लिठसà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ जरूरी माना गया है। वहीं दो साल के बाद इसकी आवशà¥à¤¯à¤•ता समापà¥à¤¤ हो जाती है। à¤à¤¸à¥€ सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ में कà¥à¤› महिलाà¤à¤‚ अपने सà¥à¤¤à¤¨ के दूध को सà¥à¤–ाने के बारे में सोचना शà¥à¤°à¥‚ कर देती है। इस पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ को मेडिकल टरà¥à¤® में लैकà¥à¤Ÿà¥‡à¤¶à¤¨ सपà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤¨ के नाम से जाना जाता है। मॉमजंकà¥à¤¶à¤¨ का हमारा यह लेख इसी विषय पर आधारित है। यहां हम सरल à¤à¤¾à¤·à¤¾ में सà¥à¤¤à¤¨ का दूध सà¥à¤–ाने के 8 घरेलू नà¥à¤¸à¥à¤–े बताà¤à¤‚गे। इसके अलावा हम कà¥à¤› अनà¥à¤¯ टिपà¥à¤¸ à¤à¥€ देंगे, जो सà¥à¤¤à¤¨ का दूध सà¥à¤–ाने में कारगर साबित हो सकती हैं।
इस कà¥à¤°à¤® में हम सबसे पहले जानेंगे कि आखिर महिलाओं को सà¥à¤¤à¤¨ का दूध कà¥à¤¯à¥‹à¤‚ सà¥à¤–ाना पड़ता है।
सà¥à¤¤à¤¨à¥‹à¤‚ का दूध सà¥à¤–ाने के कारण | Reasons To Dry Up Breast Milk In Hindi
à¤à¤• महिला दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ सà¥à¤¤à¤¨ का दूध सà¥à¤–ाने के कई कारण हो सकते हैं, जिसकी चरà¥à¤šà¤¾ हम नीचे कà¥à¤°à¤®à¤µà¤¾à¤° तरीके से कर रहे हैं (1) (2):
शिशॠसंकेत: कà¥à¤› शिशà¥à¤“ं को कà¥à¤²à¤¾à¤¸à¤¿à¤• गैलेकà¥à¤Ÿà¥‹à¤¸à¥‡à¤®à¤¿à¤¯à¤¾ (डेयरी उतà¥à¤ªà¤¾à¤¦à¥‹à¤‚ में मौजूद शà¥à¤—र को पचाने में असमरà¥à¤¥ होना) की समसà¥à¤¯à¤¾ हो सकती है। à¤à¤¸à¥‡ मामलों में शिशॠसà¥à¤¤à¤¨ के दूध को नहीं पचा पाता है।
मां का वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿à¤—त फैसला : कई मामलों में माताओं को अपने काम के कारण अपने शिशà¥à¤“ं को सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ कराने का मौका नहीं मिलता है। अधà¥à¤¯à¤¯à¤¨à¥‹à¤‚ से पता चलता है कि लगà¤à¤— 70 पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¶à¤¤ माताà¤à¤‚ बचà¥à¤šà¥‡ को जनà¥à¤® देने के बाद काम पर लौटती हैं। à¤à¤¸à¥€ सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ में उनके लिठबचà¥à¤šà¥‡ को दूध पिलाना कठिन हो जाता है। इसलिठवो à¤à¤¸à¤¾ फैसला ले सकती है।
गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ खोना या मृत शिशॠका जनà¥à¤®: à¤à¤¸à¥‡ मामलों में à¤à¥€ महिलाओं को सà¥à¤¤à¤¨ के दूध को सà¥à¤–ाने की आवशà¥à¤¯à¤•ता पड़ सकती है।
सà¥à¤¤à¤¨ संकà¥à¤°à¤®à¤£ और टà¥à¤¯à¥‚मर : कई मामलों में सà¥à¤¤à¤¨ के संकà¥à¤°à¤®à¤£ या फिर टà¥à¤¯à¥‚मर होने के कारण à¤à¥€ महिलाओं को सà¥à¤¤à¤¨ का दूध सà¥à¤–ाने का फैसला लेना पड़ सकता है।
कà¥à¤› विशेष दवाओं का उपयोग : महिलाओं दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ कà¥à¤› à¤à¤¸à¥€ दवाओं का उपयोग, जो शिशॠके लिठहानिकारक हो सकता है। इस कारण à¤à¥€ महिलाओं को सà¥à¤¤à¤¨ का दूध सà¥à¤–ाना पड़ता है।
कà¥à¤› रोगों के कारण : कà¥à¤› विशेष रोगों (जैसे – टà¥à¤¯à¥‚बरकà¥â€à¤¯à¥à¤²à¥‹à¤¸à¤¿à¤¸) के सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ में à¤à¥€ महिलाà¤à¤‚ सà¥à¤¤à¤¨ का दूध सà¥à¤–ाने का फैसला ले सकती है।
दूध का परà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¥à¤¤ मातà¥à¤°à¤¾ में न बनना : अगर किसी महिला के सà¥à¤¤à¤¨ में दूध का परà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¥à¤¤ उतà¥à¤ªà¤¾à¤¦à¤¨ नहीं हो रहा है, तो इस सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ में à¤à¥€ महिला सà¥à¤¤à¤¨ के दूध को सà¥à¤–ाने का फैसला ले सकती है।
सà¥à¤¤à¤¨ का दूध सà¥à¤–ाने के कारण जानने के बाद हम बताà¤à¤‚गे कि इस समय कà¥à¤¯à¤¾ करना चाहिà¤à¥¤
सà¥à¤¤à¤¨à¥‹à¤‚ का दूध सà¥à¤–ाने के दौरान कà¥à¤¯à¤¾ करें?
किसी à¤à¥€ महिला को सà¥à¤¤à¤¨ का दूध सà¥à¤–ाने के लिठकà¥à¤› बातों का धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ रखना चाहिà¤, जो कà¥à¤› इस पà¥à¤°à¤•ार हैं (3):
सà¥à¤¤à¤¨à¥‹à¤‚ को सहारा देने के लिठफिटिंग बà¥à¤°à¤¾ का इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² करें। धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ रहे कि बà¥à¤°à¤¾ जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ कसी न हो, इससे तकलीफ बढ़ सकती है।
सà¥à¤¤à¤¨à¥‹à¤‚ की सिकाई करें। इसके लिठगरà¥à¤® और ठंडी दोनों ही तरह की सिकाई इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² में लाई जा सकती है, जो सà¥à¤¤à¤¨à¥‹à¤‚ की सूजन को कम करने में सहायक हो सकती है।
सà¥à¤¤à¤¨ के दरà¥à¤¦ को दूर करने के लिठइबà¥à¤ªà¥à¤°à¥‹à¤«à¥‡à¤¨ या पैरासिटामोल का उपयोग à¤à¥€ किया जा सकता है। हालांकि, इनका सेवन डॉकà¥à¤Ÿà¤° की सलाह पर ही करना चाहिà¤à¥¤
वहीं घरेलू उपायों के तौर पर कà¥à¤› जड़ी-बूटियों और कचà¥à¤šà¥‡ गोà¤à¥€ के पतà¥à¤¤à¥‹à¤‚ से à¤à¥€ सà¥à¤¤à¤¨à¥‹à¤‚ के दरà¥à¤¦ और सूजन को कम करने का पà¥à¤°à¤¯à¤¾à¤¸ किया जा सकता है।
अगर महिला खà¥à¤¦ में बीमार महसूस कर रही हो या फिर सà¥à¤¤à¤¨ का तापमान 38 डिगà¥à¤°à¥€ सेलà¥à¤¸à¤¿à¤¯à¤¸ से अधिक हो। साथ ही सà¥à¤¤à¤¨à¥‹à¤‚ में दरà¥à¤¦, सूजन या सà¥à¤¤à¤¨à¥‹à¤‚ में लाली हो, तो à¤à¤¸à¥‡ में विशेष रूप से सà¥à¤¤à¤¨à¥‹à¤‚ की देखà¤à¤¾à¤² की सलाह दी जाती है।
महिलाओं को à¤à¤¸à¥€ शिकà¥à¤·à¤¾ दी जानी चाहिà¤, जिससे वे असहजता महसूस होने पर सà¥à¤¤à¤¨ का अतिरिकà¥à¤¤ दूध निकाल सके। जब à¤à¥€ सà¥à¤¤à¤¨ अधिक à¤à¤° जाà¤, इस पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ को अपनाया जा सकता है।
लेख में आगे हम दूध सà¥à¤–ाने के दौरान बरती जाने वाली सावधानियों के बारे में बताà¤à¤‚गे।
सà¥à¤¤à¤¨à¥‹à¤‚ का दूध सà¥à¤–ाने के दौरान कà¥à¤¯à¤¾ नहीं करना चाहिà¤?
सà¥à¤¤à¤¨ का दूध सà¥à¤–ाने के दौरान कà¥à¤› चीजों से परहेज करना चाहिà¤, तà¤à¥€ दूध को सà¥à¤–ाने में मदद मिल सकती है। नीचे हम उनà¥à¤¹à¥€à¤‚ बातों की चरà¥à¤šà¤¾ कर रहे हैं (3):
सà¥à¤¤à¤¨ का दूध सà¥à¤–ाने के दौरान ढीली या कसी बà¥à¤°à¤¾ का इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² करने से बचें।
अगर सà¥à¤¤à¤¨ का अतिरिकà¥à¤¤ दूध निकालने में असहजता महसूस हो रही हो, तो à¤à¤¸à¤¾ न करें और डॉकà¥à¤Ÿà¤° से सलाह लें।
इसके अलावा सà¥à¤¤à¤¨ का दूध सà¥à¤–ाने के दौरान à¤à¤¸à¤¾ कोई à¤à¥€ काम न करें, जिससे सà¥à¤¤à¤¨ उतà¥à¤¤à¥‡à¤œà¤¿à¤¤ हो।
लेख के इस हिसà¥à¤¸à¥‡ में हम सà¥à¤¤à¤¨ के दूध सà¥à¤–ाने के घरेलू उपाय बता रहे हैं।
सà¥à¤¤à¤¨à¥‹à¤‚ का दूध सà¥à¤–ाने के 8 घरेलू उपाय
सà¥à¤¤à¤¨à¥‹à¤‚ का दूध सà¥à¤–ाने के लिठकà¥à¤› घरेलू उपायों का उपयोग काफी कारगर माना जाता है। इस कारण यहां हम सà¥à¤¤à¤¨à¥‹à¤‚ का दूध सà¥à¤–ाने के लिठकà¥à¤› घरेलू उपाय बता रहे हैं, जो कà¥à¤› इस पà¥à¤°à¤•ार हैं :
1. पतà¥à¤¤à¤¾ गोà¤à¥€ के पतà¥à¤¤à¥‡
सामगà¥à¤°à¥€ :
पतà¥à¤¤à¤¾ गोà¤à¥€ के पतà¥à¤¤à¥‡ – 2 से 4
उपयोग करने का तरीका :
सबसे पहले पतà¥à¤¤à¤¾ गोà¤à¥€ के पतà¥à¤¤à¥‡ को ठंडा होने के लिठफà¥à¤°à¤¿à¤œ में रख दें।
जब ये पतà¥à¤¤à¥‡ अचà¥à¤›à¥€ तरह से ठंडे हो जाà¤à¤‚, तो इनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ बà¥à¤°à¤¾ के सपोरà¥à¤Ÿ से सà¥à¤¤à¤¨à¥‹à¤‚ पर लगाकर छोड़ दें।
फिर à¤à¤• घंटे बाद इन पतà¥à¤¤à¥‹à¤‚ को बदल लें।
कैसे है फायदेमंद :
सà¥à¤¤à¤¨ के दूध को सà¥à¤–ाने के लिठपतà¥à¤¤à¤¾ गोà¤à¥€ का इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² फायदेमंद हो सकता है। à¤à¤• रिसरà¥à¤š में इस बात की जानकारी मिलती है कि सà¥à¤¤à¤¨ पर पतà¥à¤¤à¤¾ गोà¤à¥€ के उपयोग से दरà¥à¤¦ को कम करने में मदद मिल सकती है। इसके अलावा बà¥à¤°à¥‡à¤¸à¥à¤Ÿ à¤à¤¨à¤—à¥à¤°à¥‡à¤®à¥‡à¤‚ट (दूध की अधिक मातà¥à¤°à¤¾ से सà¥à¤¤à¤¨ में होने वाला दरà¥à¤¦) से à¤à¥€ राहत मिल सकती है (4)। हालांकि, सà¥à¤¤à¤¨ के दूध को सà¥à¤–ाने में इसकी à¤à¥‚मिका को लेकर अà¤à¥€ और अधिक शोध किठजाने की आवशà¥à¤¯à¤•ता है।
2. सेज के पतà¥à¤¤à¥‡
सामगà¥à¤°à¥€ :
सेज के पतà¥à¤¤à¥‡ – 1 से 3 गà¥à¤°à¤¾à¤®
नींबू (सà¥à¤µà¤¾à¤¦à¤¾à¤¨à¥à¤¸à¤¾à¤°)
शहद (सà¥à¤µà¤¾à¤¦à¤¾à¤¨à¥à¤¸à¤¾à¤°)
उपयोग करने का तरीका :
सबसे पहले à¤à¤• पैन में पानी डालकर उसे उबाल लें।
इसके बाद गैस बंद करके सेज के पतà¥à¤¤à¥‡ को इसमें डालें और 3 से 5 मिनट तक के लिठà¤à¤¸à¥‡ ही छोड़ दें।
फिर इसमें अपने सà¥à¤µà¤¾à¤¦à¤¾à¤¨à¥à¤¸à¤¾à¤° नींबू का रस और शहद मिलाà¤à¤‚।
इस तरह तैयार हो जाà¤à¤—ी सेज की चाय। अब à¤à¤•-à¤à¤• घूंट करके इस चाय का आनंद लें।
कैसे है फायदेमंद :
सà¥à¤¤à¤¨ के दूध को सà¥à¤–ाने के लिठसेज के पतà¥à¤¤à¥‹à¤‚ के फायदे देखे जा सकते है। इस बात की जानकारी à¤à¤¨à¤¸à¥€à¤¬à¥€à¤†à¤ˆ (National Center for Biotechnology Information) की साइट पर मौजूद रिसरà¥à¤š से मिलती है। इस शोध के अनà¥à¤¸à¤¾à¤°, सेज के पतà¥à¤¤à¥‡ का उपयोग दूध की मातà¥à¤°à¤¾ को धीरे-धीरे कम करने में मददगार साबित हो सकता है (5)। इस आधार पर यह माना जा सकता है कि सà¥à¤¤à¤¨à¥‹à¤‚ के दूध को सà¥à¤–ाने में सेज के पतà¥à¤¤à¥‹à¤‚ का उपयोग कà¥à¤› हद तक कारगर साबित हो सकता है।
3. पà¥à¤¦à¥€à¤¨à¥‡ का तेल
सामगà¥à¤°à¥€ :
पà¥à¤¦à¥€à¤¨à¥‡ का तेल – 2 से 3 बूंद
उपयोग करने का तरीका :
अपनी हथेलियों में पà¥à¤¦à¥€à¤¨à¥‡ का तेल लगाà¤à¤‚ और सà¥à¤¤à¤¨ की मालिश करें।
कैसे है फायदेमंद :
सà¥à¤¤à¤¨ के दूध को सà¥à¤–ाने के लिठपà¥à¤¦à¥€à¤¨à¥‡ के तेल की मालिश à¤à¥€ लाà¤à¤•ारी साबित हो सकती है। इससे संबंधित à¤à¤• शोध के मà¥à¤¤à¤¾à¤¬à¤¿à¤•, पà¥à¤¦à¥€à¤¨à¥‡ के तेल की मालिश दूध की आपूरà¥à¤¤à¤¿ को कम कर सकती है। हालांकि, इसका उपयोग सीमित मातà¥à¤°à¤¾ में ही किया जाना चाहिà¤, कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि पà¥à¤¦à¥€à¤¨à¥‡ के तेल की उचà¥à¤š खà¥à¤°à¤¾à¤• विषाकà¥à¤¤à¤¤à¤¾ का कारण बन सकती है। इस कारण बचà¥à¤šà¥‡ के सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ करने की सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ में यह बचà¥à¤šà¥‡ को नà¥à¤•सान पहà¥à¤‚चा सकती है (5)।
4. चेसà¥à¤Ÿà¤¬à¥‡à¤°à¥€
सामगà¥à¤°à¥€:
चेसà¥à¤Ÿà¤¬à¥‡à¤°à¥€ सपà¥à¤²à¥€à¤®à¥‡à¤‚ट – 20 à¤à¤®à¤œà¥€
उपयोग करने का तरीका:
डॉकà¥à¤Ÿà¤° की सलाह पर इसका सेवन करें।
कैसे है फायदेमंद :
à¤à¤• शोध में बताया गया है कि चेसà¥à¤Ÿà¤¬à¥‡à¤°à¥€ का इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² सà¥à¤¤à¤¨ के दूध को सà¥à¤–ाने के लिठकिया जा सकता है। दरअसल, इस रिसरà¥à¤š के मà¥à¤¤à¤¾à¤¬à¤¿à¤•, 52 महिलाओं को करीब तीन महीने तक रोजाना 20 मिलीगà¥à¤°à¤¾à¤® चेसà¥à¤Ÿà¤¬à¥‡à¤°à¥€ का सेवन कराया गया। à¤à¤¸à¥‡ में 3 महीने बाद उन महिलाओं में पà¥à¤°à¥‹à¤²à¥ˆà¤•à¥à¤Ÿà¤¿à¤¨ (à¤à¤• तरह का हारà¥à¤®à¥‹à¤¨) का सà¥à¤¤à¤° कम देखा गया, जो दूध के उतà¥à¤ªà¤¾à¤¦à¤¨ को घटाने में मदद कर सकता है (6)।
5. अजमोद
पतà¥à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ से यà¥à¤•à¥à¤¤ अजमोद की डंठल – 5 से 6
सामगà¥à¤°à¥€ :
उपयोग करने का तरीका:
अजमोद की पतà¥à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ को अपने आहार में शामिल करें।
चाहें तो अजमोद की पतà¥à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ को सलाद में डालकर à¤à¥€ खा सकते हैं या फिर इसका सूप बनाकर पी सकते हैं।
कैसे है फायदेमंद :
इस संबंध में पà¥à¤°à¤•ाशित शोध से पता चलता है कि अजमोद पà¥à¤°à¥‹à¤²à¥ˆà¤•à¥à¤Ÿà¤¿à¤¨ के सà¥à¤¤à¤° को कम करता है। à¤à¥‹à¤œà¤¨ के रूप में इसका सेवन दूध की आपूरà¥à¤¤à¤¿ को कम कर सकता है (5)। यही कारण है कि सà¥à¤¤à¤¨ के दूध को सà¥à¤–ाने के लिठअमजोद का इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² लाà¤à¤•ारी माना जाता है।
6. चमेली
सामगà¥à¤°à¥€ :
चमेली का फूल
उपयोग करने का तरीका :
चमेली के फूल का पेसà¥à¤Ÿ बनाकर सà¥à¤¤à¤¨ पर लगाà¤à¤‚।
कैसे है फायदेमंद :
सà¥à¤¤à¤¨ के दूध को सà¥à¤–ाने के लिठचमेली के फूल का उपयोग à¤à¥€ फायदेमंद हो सकता है। दरअसल, चमेली का फूल पà¥à¤°à¥‹à¤²à¥ˆà¤•à¥à¤Ÿà¤¿à¤¨ के सà¥à¤¤à¤° को कम करने में सहायक सिदà¥à¤§ हो सकता है, जो दूध के उतà¥à¤ªà¤¾à¤¦à¤¨ को कम करने में कारगर साबित हो सकता है (5)।
7. विटामिन-बी 6
सामगà¥à¤°à¥€ :
विटामिन-बी 6 सपà¥à¤²à¥€à¤®à¥‡à¤‚ट – 450 à¤à¤®à¤œà¥€
उपयोग करने का तरीका :
दिन में à¤à¤• बार विटामिन बी 6 की 450 à¤à¤®à¤œà¥€ की टैबलेट ली जा सकती है।
कैसे है फायदेमंद :
विटामिन बी-6 (पाइरिडोकà¥à¤¸à¤¿à¤¨ हाइडà¥à¤°à¥‹à¤•à¥à¤²à¥‹à¤°à¤¾à¤‡à¤¡) का इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² सà¥à¤¤à¤¨ के दूध को सà¥à¤–ाने के लिठकारगर माना जा सकता है। इस बात की जानकारी à¤à¤¨à¤¸à¥€à¤¬à¥€à¤†à¤ˆ की साइट पर मौजूद रिसरà¥à¤š में मिलती है। इस शोध के अनà¥à¤¸à¤¾à¤°, विटामिन बी-6 पà¥à¤°à¥‹à¤²à¥ˆà¤•à¥à¤Ÿà¤¿à¤¨ हारà¥à¤®à¥‹à¤¨ के सà¥à¤¤à¤° को कम कर सकता है, जिससे सà¥à¤¤à¤¨à¥‹à¤‚ में दूध बनने की पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ कम हो सकती है (7)। वहीं दूध को सà¥à¤–ाने के लिठली जाने वाली 450 से 600 à¤à¤®à¤œà¥€ तक की विटामिन बी-6 की खà¥à¤°à¤¾à¤• को सà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¿à¤¤ माना गया है (8)। हालांकि, इसे इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² में लाने से पहले à¤à¤• बार डॉकà¥à¤Ÿà¤° से सलाह जरूर ले लेनी चाहिà¤à¥¤
8. आइस पैक
सामगà¥à¤°à¥€ :
आइसपैक
उपयोग करने का तरीका :
आइस पैक से सà¥à¤¤à¤¨à¥‹à¤‚ की 5 से 10 मिनट के लिठसिकाई करें।
कैसे है फायदेमंद :
सà¥à¤¤à¤¨ के दूध को सà¥à¤–ाने के लिठघरेलू उपायों में आइस पैक का इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² à¤à¥€ शामिल है। à¤à¤¨à¤¸à¥€à¤¬à¥€à¤†à¤ˆ की साइट पर पà¥à¤°à¤•ाशित à¤à¤• शोध के अनà¥à¤¸à¤¾à¤°, सà¥à¤¤à¤¨ के दूध को सà¥à¤–ाने के लिठआइस पैक का इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² लाà¤à¤•ारी हो सकता है (9)।
घरेलू उपायों के बाद सà¥à¤¤à¤¨ के दूध को सà¥à¤–ाने के लिठदवाइयों के बारे में जानिà¤à¥¤
सà¥à¤¤à¤¨ के दूध को सà¥à¤–ाने के लिठदवाà¤à¤‚
सà¥à¤¤à¤¨ के दूध को सà¥à¤–ाने के लिठकà¥à¤› दवाओं का उपयोग à¤à¥€ किया जा सकता है। हालांकि सामानà¥à¤¯ तौर पर दवा का इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² करने की सलाह नहीं दी जाती है, कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि इसके साइड इफेकà¥à¤Ÿà¥à¤¸ à¤à¥€ हो सकते हैं । इसलिठइसके इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² से पहले डॉकà¥à¤Ÿà¤° से सलाह जरूर लें। चलिठअब हम सà¥à¤¤à¤¨à¥‹à¤‚ का दूध सà¥à¤–ाने वाली कà¥à¤› à¤à¤¸à¥€ ही दवाओं के नाम बता रहे हैं, जिनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ डॉकà¥à¤Ÿà¤° लेने की सलाह दे सकते हैं :
सà¥à¤¯à¥‚डोà¤à¤«à¥€à¤¡à¥à¤°à¥€à¤¨ – सà¥à¤¤à¤¨ के दूध को सà¥à¤–ाने के लिठसà¥à¤¯à¥‚डोफेडà¥à¤°à¤¿à¤¨ का इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² किया जा सकता है। इस बात की पà¥à¤·à¥à¤Ÿà¤¿ à¤à¤• शोध में होती है। इस शोध की मानें, तो इस दवा की à¤à¤• खà¥à¤°à¤¾à¤• से दूध उतà¥à¤ªà¤¾à¤¦à¤¨ को कम करने में काफी हद तक मदद मिल सकती है (10)।
बà¥à¤°à¥‹à¤®à¥‹à¤•à¥à¤°à¤¿à¤ªà¥à¤Ÿà¤¾à¤‡à¤¨ – इस दवा का à¤à¥€ उपयोग सà¥à¤¤à¤¨ के दूध को सà¥à¤–ाने के लिठकिया जा सकता है। इस पर हà¥à¤ शोध से पता चलता है कि 3 दिनों के लिठदैनिक रूप से इस दवाई का सेवन दूध को सà¥à¤–ाने में कारगर हो सकता है (11)।
कैबरà¥à¤œà¥‹à¤²à¤¿à¤¨- बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ कराने के दौरान कैबरà¥à¤œà¥‹à¤²à¤¿à¤¨ का उपयोग नहीं किया जाता है कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि यह सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ को दबा देता है। इस आधार पर सà¥à¤¤à¤¨ के दूध को सà¥à¤–ाने के लिठइस दवा का à¤à¥€ पà¥à¤°à¤¯à¥‹à¤— किया जा सकता है (12)।
यहां हम बताà¤à¤‚गे कि सà¥à¤¤à¤¨ का दूध सà¥à¤–ाने में कितना समय लग सकता है।
सà¥à¤¤à¤¨à¥‹à¤‚ का दूध को सूखने में कितना समय लगता है?
बात करें अगर सà¥à¤¤à¤¨ का दूध सà¥à¤–ाने में लगने वाले समय की, तो à¤à¤¨à¤¸à¥€à¤¬à¥€à¤†à¤ˆ की साइट पर पà¥à¤°à¤•ाशित शोध के मà¥à¤¤à¤¾à¤¬à¤¿à¤• दवा लेने की सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ में 12 से 96 घंटे में दूध सà¥à¤–ाया जा सकता है (12)। वहीं घरेलू उपायों के माधà¥à¤¯à¤® से इसे ठीक करने में थोड़ा अधिक समय लग सकता है।
चलिठअब कà¥à¤› अनà¥à¤¯ टिपà¥à¤¸ जान लेते हैं, जिनकी मदद से सà¥à¤¤à¤¨à¥‹à¤‚ के दूध को सà¥à¤–ाने में सहायता मिल सकती है।
सà¥à¤¤à¤¨à¥‹à¤‚ का दूध सà¥à¤–ाने के लिठकà¥à¤› अनà¥à¤¯ जरूरी टिपà¥à¤¸
सà¥à¤¤à¤¨à¥‹à¤‚ का दूध सà¥à¤–ाने का इलाज और घरेलू उपाय जानने के बाद यहां हम कà¥à¤› अनà¥à¤¯ टिपà¥à¤¸ दे रहे हैं, जिनके माधà¥à¤¯à¤® से दूध के उतà¥à¤ªà¤¾à¤¦à¤¨ को कम करने में मदद मिल सकती है :
सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ को उतà¥à¤¤à¥‡à¤œà¤¿à¤¤ करने से बचें। इससे दूध सà¥à¤–ाने में काफी हद तक मदद मिल सकेगी (3)।
सà¥à¤¤à¤¨ के दूध को सà¥à¤–ाने के लिठगरà¥à¤® पानी से शॉवर के दौरान हलà¥à¤•ी-हलà¥à¤•ी मातà¥à¤°à¤¾ में दूध को बाहर निकालें (13)। कà¥à¤› दिनों तक इस पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ को दोहराà¤à¤‚।
सà¥à¤¤à¤¨ से दूध का रिसाव को रोकने के लिठफिटिंग बà¥à¤°à¤¾ का उपयोग करें, ताकि सà¥à¤¤à¤¨ नीचे की ओर à¤à¥à¤•ा न हो (3)। महिला चाहे तो इसके लिठनरà¥à¤¸à¤¿à¤‚ग पैड का इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² कर सकती हैं। दरअसल, ये वैसे पैड होते हैं, जिनमें सोखने की कà¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾ होती है।
इसके अलावा सà¥à¤¤à¤¨ को सहारा देने के लिठबà¥à¤°à¤¾ के अंदर कपड़े à¤à¥€ रख सकती हैं, ताकि दूध अधिक होने की सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ में सà¥à¤¤à¤¨à¥‹à¤‚ से बाहर निकलने वाला दूध कपड़ों पर दाग का कारण न बने (3)।
सà¥à¤¤à¤¨ का दूध सà¥à¤–ाने के टिपà¥à¤¸ जानने के बाद इसके जोखिमों को à¤à¥€ जानना जरूरी है।
सà¥à¤¤à¤¨à¥‹à¤‚ का दूध सà¥à¤–ाने के जोखिम
सà¥à¤¤à¤¨ का दूध सà¥à¤–ाने के जोखिम कà¥à¤› इस पà¥à¤°à¤•ार हो सकते हैं :
अगर सà¥à¤¤à¤¨ से दूध की निकासी नहीं होती है, तो उससे à¤à¤‚गोरà¥à¤œà¤®à¥‡à¤‚ट (सà¥à¤¤à¤¨ में सूजन) का जोखिम बढ़ सकता है (14)।
इसके अलावा, सà¥à¤¤à¤¨ का दूध सà¥à¤–ाने के लिठअपनाठगठघरेलू उपायों में अपनाई जाने वाली चेसà¥à¤Ÿà¤¬à¥‡à¤°à¥€ का अधिक सेवन कà¥à¤› मामलों में मतली की समसà¥à¤¯à¤¾, गैसà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‹à¤‡à¤‚टेसà¥à¤Ÿà¤¾à¤‡à¤¨à¤² समसà¥à¤¯à¤¾ (पेट और आंत से जà¥à¤¡à¤¼à¥€ समसà¥à¤¯à¤¾), मासिक धरà¥à¤® संबंधी विकार, मà¥à¤‚हासे, पà¥à¤°à¥à¤°à¤¿à¤Ÿà¤¸ (तà¥à¤µà¤šà¤¾ पर खà¥à¤œà¤²à¥€ होना) और सिरदरà¥à¤¦ का कारण बन सकता है। हालांकि इसके पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µ हलà¥à¤•े होते हैं और यह खà¥à¤¦ से ही ठीक à¤à¥€ हो सकते हैं (12)।
वहीं घरेलू उपाय के तौर पर अधिक मातà¥à¤°à¤¾ में सेज के पतà¥à¤¤à¥‹à¤‚ के इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² से à¤à¥€ कई दà¥à¤·à¥à¤ªà¥à¤°à¤à¤¾à¤µ सामने आ सकते हैं। जैसे- मतली, उलà¥à¤Ÿà¥€ और चकà¥à¤•र आना। इसके अलावा, सेज का अधिक उपयोग महिलाà¤à¤‚ में घरघराहट का कारण बन सकता है और बà¥à¤²à¤¡ शà¥à¤—र को कम कर सकता है। विशेषजà¥à¤žà¥‹à¤‚ की मानें तो असà¥à¤¥à¤®à¤¾ और मधà¥à¤®à¥‡à¤¹ से पीड़ित लोगों को सेज के उचà¥à¤š खà¥à¤°à¤¾à¤• से बचना चाहिà¤, इससे उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ दौरा पड़ने का à¤à¥€ खतरा हो सकता है (5)।
इसके साथ ही पà¥à¤¦à¥€à¤¨à¥‡ के तेल का अधिक सेवन विषाकà¥à¤¤à¤¤à¤¾ पैदा कर सकता है। à¤à¤¸à¥‡ में दूध सà¥à¤–ाने के लिठसà¥à¤¤à¤¨à¥‹à¤‚ पर पिपरमेंट के तेल की मालिश के बाद बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ बिलà¥à¤•à¥à¤² à¤à¥€ नहीं करना चाहिठ(5)।
यही नहीं, सà¥à¤¤à¤¨ का दूध सà¥à¤–ाने के लिठली जाने वाली दवाइयों के à¤à¥€ कà¥à¤› साइड इफेकà¥à¤Ÿ सामने आ सकते हैं। इनमें चकà¥à¤•र आने की समसà¥à¤¯à¤¾, सिरदरà¥à¤¦, मतली और पेट में दरà¥à¤¦ की समसà¥à¤¯à¤¾ शामिल हैं (12) (10) (11)।
लेख के अंत में जानें कि सà¥à¤¤à¤¨à¥‹à¤‚ के दूध को सà¥à¤–ाने के लिठडॉकà¥à¤Ÿà¤° के पास कब जाना चाहिà¤à¥¤
सà¥à¤¤à¤¨à¥‹à¤‚ के दूध को सà¥à¤–ाने के लिठडॉकà¥à¤Ÿà¤° की मदद कब लें
सà¥à¤¤à¤¨ के दूध को सà¥à¤–ाने के लिठडॉकà¥à¤Ÿà¤° से कब मदद लें, इस बारे में हम नीचे कà¥à¤°à¤®à¤µà¤¾à¤° तरीके से बता रहे हैं (15) :
अगर सà¥à¤¤à¤¨ में गांठहो, जिसे छूने पर दरà¥à¤¦ महसूस होता हो या फिर गरà¥à¤® हो।
अधिक थकान महसूस होना।
इसके अलावा अगर शरीर का तापमान 100 डिगà¥à¤°à¥€ से अधिक हो।
लेख से आपने जाना कि सà¥à¤¤à¤¨ के दूध को सà¥à¤–ाने में थोड़ा समय लगता है। इसलिठइस पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ के दौरान संयम जरूर बरतें। लेख में हमने सà¥à¤¤à¤¨à¥‹à¤‚ का दूध सà¥à¤–ाने के लिठघरेलू उपायों के साथ-साथ दवाइयों के बारे में à¤à¥€ बताया है। मगर, यहां हम सà¥à¤ªà¤·à¥à¤Ÿ कर दें कि किसी à¤à¥€ दवाई का पà¥à¤°à¤¯à¥‹à¤— करने से पहले डॉकà¥à¤Ÿà¤°à¥€ सलाह जरूर लें। वहीं उन दवाओं के पà¥à¤°à¤¯à¥‹à¤— के दौरान किसी पà¥à¤°à¤•ार की परेशानी आती है, तो तà¥à¤°à¤‚त डॉकà¥à¤Ÿà¤° के पास जाà¤à¤‚।
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