Login
Lorem ipsum dolor sit amet, consectetur adipiscing elit. Morbi adipiscing gravdio, sit amet suscipit risus ultrices eu. Fusce viverra neque at purus laoreet consequa. Vivamus vulputate posuere nisl quis consequat.
Create an accountLost your password? Please enter your username and email address. You will receive a link to create a new password via email.
सà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥ शरीर के लिठकई पोषक ततà¥à¤µà¥‹à¤‚ की आवशà¥à¤¯à¤•ता होती है। अगर इन पोषक ततà¥à¤µà¥‹à¤‚ की मातà¥à¤°à¤¾ घट जाà¤, तो शरीर कई रोगों से घिर सकता है। पोषक ततà¥à¤µà¥‹à¤‚ की कमी का ही नतीजा है मरासà¥à¤®à¤¸ रोग। हो सकता है कई लोगों को मरासà¥à¤®à¤¸ से जà¥à¤¡à¤¼à¥€ जानकारी न हो। यही कारण है कि सà¥à¤Ÿà¤¾à¤‡à¤²à¤•à¥à¤°à¥‡à¤œ का यह लेख खासतौर पर, मरासà¥à¤®à¤¸, मरासà¥à¤®à¤¸ के कारण और साथ ही मरासà¥à¤®à¤¸ का इलाज से जà¥à¤¡à¤¼à¥€ जानकारियों को लेकर लिखा गया है। तो मरासà¥à¤®à¤¸ रोग के लकà¥à¤·à¤£ से मरासà¥à¤®à¤¸ की रोकथाम तक की सà¤à¥€ जरूरी जानकारियों के बारे में जानने के लिठलेख को अंत तक पढ़ें।
सबसे पहले जानते हैं कि मरासà¥à¤®à¤¸ रोग कà¥à¤¯à¤¾ है।
मरासà¥à¤®à¤¸ कà¥à¤¯à¤¾ है? – What is Marasmus in Hindi
मरासà¥à¤®à¤¸ कैलोरी की कमी के परिणामसà¥à¤µà¤°à¥‚प होने वाली कà¥à¤ªà¥‹à¤·à¤£ की समसà¥à¤¯à¤¾ है। मरासà¥à¤®à¤¸ की सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ में शरीर के à¤à¤¡à¤¿à¤ªà¥‰à¤œ टिशà¥à¤¯à¥‚ (Adipose Tissue) और मांसपेशियों को नà¥à¤•सान हो सकता है। इससे बचà¥à¤šà¥‡ और बड़े पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ हो सकते हैं। इसकी वजह से शारीरिक वजन और कद पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ हो सकता है। à¤à¤¨à¥€à¤¸à¥€à¤¬à¥€à¤†à¤ˆ (National Center for Biotechnology Information) की रिपोरà¥à¤Ÿ के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° मरासà¥à¤®à¤¸ से गà¥à¤°à¤¸à¥à¤¤ बचà¥à¤šà¤¾ अपनी उमà¥à¤° के सामानà¥à¤¯ बचà¥à¤šà¥‡ से 3 गà¥à¤¨à¤¾ अविकसित हो सकता है (1)। विशà¥à¤µ सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ संगठन के अनà¥à¤¸à¤¾à¤°, मरासà¥à¤®à¤¸ रोग à¤à¤• साल से छोटी उमà¥à¤° के बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ में अधिक देखा जा सकता है। हालांकि, मरासà¥à¤®à¤¸ रोग दà¥à¤°à¥à¤²à¤ होता है। आकाल के समय या à¤à¤¸à¥‡ बचà¥à¤šà¥‡ जिनका किसी कारण से सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ अधूरा रह जाता है, उनमें इसका जोखिम देखा जा सकता है (2)। आगे जानेंगे मरासà¥à¤®à¤¸ रोग से जà¥à¤¡à¤¼à¥€ अनà¥à¤¯ जरूरी बातें।
मरासà¥à¤®à¤¸ रोग के बारे में जानने के बाद, अब हम मरासà¥à¤®à¤¸ रोग के लकà¥à¤·à¤£ बता रहे हैं।
मरासà¥à¤®à¤¸ के लकà¥à¤·à¤£ – Symptoms of Marasmus in Hindi
मरासà¥à¤®à¤¸ सीधे तौर पर शारीरिक विकास को पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ करता है। इस वजह से मरासà¥à¤®à¤¸ रोग के लकà¥à¤·à¤£ शारीरिक तौर पर आसानी से पहचाने जा सकते हैं। मरासà¥à¤®à¤¸ रोग के लकà¥à¤·à¤£ निमà¥à¤¨à¤²à¤¿à¤–ित हैं, जिनमें शामिल हैं (1) (2)।
शारीरिक रूप से बचà¥à¤šà¥‡ का बहà¥à¤¤ कमजोर होना
बालों का रूखा और बेजान होना
शरीर की तà¥à¤µà¤šà¤¾ पतली, à¤à¥à¤°à¥à¤°à¥€à¤¦à¤¾à¤° और बेजान होना
आंखों का बड़ा नजर आना या डà¥à¤°à¤¾à¤ˆ आई की समसà¥à¤¯à¤¾ होना।
मांसपेशियों में à¤à¤‚ठन होना
अंगों में अकड़न होना
उमà¥à¤° के हिसाब से बचà¥à¤šà¥‡ का कम वजन होना।
नाखूनों में बदलाव होना।
à¤à¤¨à¥€à¤®à¤¿à¤¯à¤¾ और रिकेटà¥à¤¸ से मिलते-जà¥à¤²à¤¤à¥‡ लकà¥à¤·à¤£à¥¤
मरासà¥à¤®à¤¸ रोग के कारण और जोखिम कारक – Marasmus Causes and Risk factors in Hindi
मरासà¥à¤®à¤¸ कà¥à¤ªà¥‹à¤·à¤£ का ही à¤à¤• जाना-माना और गंà¤à¥€à¤° रूप है। यह अधिकतर खाने में पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨ और कैलोरी (à¤à¤¨à¤°à¥à¤œà¥€) की कमी के कारण होता है। इसके अलावा, मरासà¥à¤®à¤¸ के कारण और जोखिम कारक नीचे विसà¥à¤¤à¤¾à¤° से बताठगठहैं (1) (2) (3) (4) :
बचà¥à¤šà¥‡ को गंà¤à¥€à¤° डायरिया होना
सांस से संबंधित संकà¥à¤°à¤®à¤£ होना
काली खांसी या खसरा रोग जैसे महामारी होना
शिशॠका सही से सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ न करना
कमजोर आरà¥à¤¥à¤¿à¤• सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ (गरीबी)
à¤à¥‚ख में कमी (Anorexia)
महिलाओं और बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को मरासà¥à¤®à¤¸ का जोखिम अधिक होता है।
अपरà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¥à¤¤ à¤à¥‹à¤œà¤¨ करना
पैरासिटिक डिजीज (परजीवी के कारण होने वाले रोग)
पोषक ततà¥à¤µà¥‹à¤‚ का शरीर में अवशोषित न होने देने वाली सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿à¤¯à¤¾à¤‚
ऊरà¥à¤œà¤¾ पà¥à¤°à¤¦à¤¾à¤¨ करने वाले खादà¥à¤¯ पदारà¥à¤¥à¥‹à¤‚ की कमी
संकà¥à¤°à¤¾à¤®à¤£, जैसे – पायलाइटिस (गà¥à¤°à¥à¤¦à¥‡ में सूजन), ओटिटिस मीडिया (कानों में सूजन), टॉकà¥à¤¸à¥‡à¤®à¤¿à¤¯à¤¾ (खून का विषाकà¥à¤¤ होना)।
शिशॠमें जनà¥à¤®à¤œà¤¾à¤¤ रोग, जैसे – समय से पहले जनà¥à¤® होना, जनà¥à¤®à¤œà¤¾à¤¤ हृदय रोग आदि।
सà¥à¤µà¤šà¥à¤›à¤¤à¤¾ की कमी होना
विटामिन, आयरन, कैलà¥à¤¶à¤¿à¤¯à¤® जैसे सूकà¥à¤·à¥à¤® पोषक ततà¥à¤µà¥‹à¤‚ की कमी होना।
जरूरत से जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ फैट, सà¥à¤Ÿà¤¾à¤°à¥à¤š और शà¥à¤—र यà¥à¤•à¥à¤¤ खादà¥à¤¯ पदारà¥à¤¥ खाना।
मरासà¥à¤®à¤¸ रोग का निदान – Marasmus Diagnosis In Hindi
मरासà¥à¤®à¤¸ रोग का निदान करने के लिठडॉकà¥à¤Ÿà¤° कई तकनीकों का इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² कर सकते हैं, जिनमें शामिल हैं (1):
à¤à¤‚थà¥à¤°à¥‹à¤ªà¥‹à¤®à¥‡à¤Ÿà¥à¤°à¥€ (शारीरिक परीकà¥à¤·à¤£) :
à¤à¤‚थà¥à¤°à¥‹à¤ªà¥‹à¤®à¥‡à¤Ÿà¥à¤°à¥€ (Anthropometry) à¤à¤• शारीरिक परीकà¥à¤·à¤£ की विधि है। इसमें शरीर की मांसपेशियों, हडà¥à¤¡à¥€ और ऊतकों के बारे में जांच की जाती है। इस दौरान उमà¥à¤° के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ का शारीरिक कद, वजन और बॉडी मास इंडेकà¥à¤¸ को मापा जाता है। साथ ही, कमर, कूलà¥à¤¹à¥‹à¤‚ और अनà¥à¤¯ अंगों की मोटाई, लंबाई और चौड़ाई मापी जा सकती है। शरीर में पोषक ततà¥à¤µà¥‹à¤‚ के बारे में पता लगाने के लिठइस पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ में मिड-अपर आरà¥à¤® सरकमà¥à¤«à¥à¤°à¥‡à¤‚स (MUAC – कंधे और कोहनी के बीच का हिसà¥à¤¸à¤¾) और बीà¤à¤®à¤†à¤ˆ के परिणामों पर à¤à¥€ धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ दिया जाता है (5)।
लैब टेसà¥à¤Ÿ करना :
मरासà¥à¤®à¤¸ का पता लगाने के लिठडॉकà¥à¤Ÿà¤° लैब टेसà¥à¤Ÿ की सलाह à¤à¥€ दे सकते हैं। इसमें मूतà¥à¤° या रकà¥à¤¤ जांच शामिल है। दरअसल, शरीर में किसी पà¥à¤°à¤•ार के संकà¥à¤°à¤®à¤£ का पता लगाने के लिठमल-मूतà¥à¤° की जांच कराने की सलाह दी जा सकती है। साथ ही पोषक ततà¥à¤µà¥‹à¤‚ की कमी और अनà¥à¤¯ सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ के बारे में पता लगाने के लिठखून की जांच कराने की सलाह à¤à¥€ दी जा सकती है। हीमोगà¥à¤²à¥‹à¤¬à¤¿à¤¨ और à¤à¤¨à¤¿à¤®à¤¿à¤¯à¤¾ का पता लगाने के लिà¤, à¤à¤²à¥à¤¬à¥à¤¯à¥‚मिन (Albumin – à¤à¤• पà¥à¤°à¤•ार का पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨) सà¥à¤¤à¤° के लिà¤, इलेकà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‹à¤²à¤¾à¤‡à¤Ÿà¥à¤¸ का सà¥à¤¤à¤° के लिठऔर अनà¥à¤¯ पोषक ततà¥à¤µà¥‹à¤‚ के बारे में पता लगाने के लिठà¤à¥€ खून की जांच कराने की सलाह दी जा सकती है (1)।
मरासà¥à¤®à¤¸ का इलाज – Treatment of Marasmus in Hindi
जैसा कि हम लेख में बता चà¥à¤•े हैं कि मरासà¥à¤®à¤¸ पोषण की कमी से होने वाली सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ है, तो à¤à¤¸à¥‡ में उचित खानपान और पोषण के जरिठइसका इलाज किया जा सकता है। मरासà¥à¤®à¤¸ का इलाज करने के लिठडॉकà¥à¤Ÿà¤° नीचे बताई गई तीन विधियां अपना सकते हैं (1)।
1. रिससेटेशन à¤à¤‚ड सà¥à¤Ÿà¥‡à¤¬à¤²à¤¾à¤‡à¤œà¥‡à¤¶à¤¨ (Resuscitation and Stabilization) :
मरासà¥à¤®à¤¸ में निरà¥à¤œà¤²à¥€à¤•रण और संकà¥à¤°à¤®à¤£ जान का जोखिम à¤à¥€ पैदा कर सकता है। इसलिà¤, रिससेटेशन à¤à¤‚ड सà¥à¤Ÿà¥‡à¤¬à¤²à¤¾à¤‡à¤œà¥‡à¤¶à¤¨ का चरण इसके इलाज के लिठअपनाया जा सकता है। इस चरण में मरासà¥à¤®à¤¸ के कारण हà¥à¤ सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ लकà¥à¤·à¤£à¥‹à¤‚ का उचित उपचार किया जाता है। इसकी पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ à¤à¤• सपà¥à¤¤à¤¾à¤¹ तक चल सकती है। इस चरण के दौरान विà¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ का उपचार किया जा सकता है।
डिहाइडà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤¨ के इलाज के लिठनसों के माधà¥à¤¯à¤® से तरल पदारà¥à¤¥ दिया जा सकता है।
हाइपोवोलà¥à¤®à¤¿à¤¯à¤¾ (Hypovolemia – खून से संबंधित विकार) की सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ में नसों के जरिठरकà¥à¤¤ की पूरà¥à¤¤à¤¿ à¤à¥€ की जा सकती है।
हाइपोथरà¥à¤®à¤¿à¤¯à¤¾ (Hypothermia – शरीर का तापमान सामानà¥à¤¯ से कम होना) होने पर गरà¥à¤® कमरे में मरीज को रखा जा सकता है।
वहीं, संकà¥à¤°à¤®à¤£ होने पर à¤à¤‚टीबायोटिक दवाओं के सेवन की सलाह दी जा सकती है।
इसके अलावा, रीफीडिंग सिंडà¥à¤°à¥‹à¤® के जोखिम को रोकने के लिà¤, उमà¥à¤° के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° आहार की मातà¥à¤°à¤¾ और खाना खिलाने का समय निरà¥à¤§à¤¾à¤°à¤¿à¤¤ किया जा सकता है।
2. नà¥à¤¯à¥‚टà¥à¤°à¤¿à¤¶à¤¨à¤² रिहैबिलिटेशन (Nutritional Rehabilitation) :
पहले चरण में मरासà¥à¤®à¤¸ की गंà¤à¥€à¤° जटिलताओं का इलाज करने के बाद दूसरे चरण की पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ शà¥à¤°à¥‚ की जाती है। जब मरीज के शरीर में इलेकà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‹à¤²à¤¾à¤‡à¤Ÿ (तरल पदारà¥à¤¥) संतà¥à¤²à¤¿à¤¤ होने लगते हैं और उसे सामानà¥à¤¯ à¤à¥‚ख लगने लगती है, तो नà¥à¤¯à¥‚टà¥à¤°à¤¿à¤¶à¤¨à¤² रिहैबिलिटेशन का चरण शà¥à¤°à¥‚ किया जा सकता है। इस चरण में बचà¥à¤šà¥‡ के शरीर में कैलोरी की मातà¥à¤°à¤¾, उचित टीकाकरण के साथ ही शारीरिक गतिविधियों को बढ़ाने पर à¤à¥€ धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ दिया जा सकता है। इस पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ का चरण 2 से 6 सपà¥à¤¤à¤¾à¤¹ तक चल सकता है। इसके अलावा, इस चरण के दौरान बचà¥à¤šà¥‡ में विकासातà¥à¤®à¤• शकà¥à¤¤à¤¿ बढ़ाने के लिठमां और बचà¥à¤šà¥‡ के बीच बातचीत को पà¥à¤°à¥‹à¤¤à¥à¤¸à¤¾à¤¹à¤¿à¤¤ किया जाता है। वहीं, वयसà¥à¤•ों में à¤à¥€ कà¥à¤› इसी पà¥à¤°à¤•ार की उपचार की तकनीक अपनाई जा सकती है। यह पूरी तरह से वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ की उमà¥à¤° और सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ पर निरà¥à¤à¤° करता है कि वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ को इस दौरान किस पà¥à¤°à¤•ार के और कितनी मातà¥à¤°à¤¾ में पोषक ततà¥à¤µ देने की आवशà¥à¤¯à¤•ता है।
3. रोकथाम के चरणों को पालन करना:
उपचार के बाद à¤à¥€ मरासà¥à¤®à¤¸ रोग का खतरा दोबारा से हो सकता है। इसलिà¤, इसे दोबारा होने से रोकने के लिठइस संबंध में मां को शिशॠको सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ कराने और आहार के संबंध में जरूरी जानकारी देनी जरूरी है। साथ ही, अगर बड़े लोगों में मरासà¥à¤®à¤¸ रोग होता है, तो उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ à¤à¥€ इलाज के दोनों चरणों के बाद तीसरे चरण का पालन करने की सलाह दी जा सकती है। इसके लिठआहार सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ विशेषजà¥à¤ž की सलाह लेकर उचित कैलोरी व पोषण यà¥à¤•à¥à¤¤ आहार का à¤à¥€ सेवन किया जा सकता है।
इसके अलावा, कà¥à¤› अनà¥à¤¯ तरीके à¤à¥€ हैं, जिससे मरासà¥à¤®à¤¸ का जोखिम कम किया जा सकता है। ये कà¥à¤› इस पà¥à¤°à¤•ार हैं (1):
सà¥à¤µà¤šà¥à¤› पानी का इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² करना।
शरीर में पोषक ततà¥à¤µà¥‹à¤‚ की कमी न हो इसके लिठपरà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¥à¤¤ मातà¥à¤°à¤¾ में आहार का सेवन करना।
संकà¥à¤°à¤¾à¤®à¤• रोगों का नियंतà¥à¤°à¤£ करना, आदि।
मरासà¥à¤®à¤¸ में कà¥à¤¯à¤¾ खाना चाहिठ– Foods to Eat for Marasmus in Hindi
शिशॠया बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ में मरासà¥à¤®à¤¸ के उपचार में बà¥à¤°à¥‡à¤¸à¥à¤Ÿ मिलà¥à¤• सबसे उपयà¥à¤•à¥à¤¤ आहार माना जा सकता है (4)। इसके साथ ही, कà¥à¤› अनà¥à¤¯ पौषà¥à¤Ÿà¤¿à¤• आहार का à¤à¥€ सेवन करना जरूरी होता है। इसलिठइस à¤à¤¾à¤— में हम मरासà¥à¤®à¤¸ रोग होने पर कà¥à¤¯à¤¾ खाà¤à¤‚ और कà¥à¤¯à¤¾ न खाà¤à¤‚, इसकी जानकारी दे रहे हैं।
मरासà¥à¤®à¤¸ रोग में कà¥à¤¯à¤¾ खाà¤à¤‚ :
पहले जानते हैं कि मरासà¥à¤®à¤¸ रोग में किन चीजों का सेवन कर सकते हैं :
पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨ यà¥à¤•à¥à¤¤ खादà¥à¤¯ : मरासà¥à¤®à¤¸ पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨ और à¤à¤¨à¤°à¥à¤œà¥€ की कमी से होने वाली कà¥à¤ªà¥‹à¤·à¤£ की समसà¥à¤¯à¤¾ है (1)। à¤à¤¸à¥‡ में पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨ यà¥à¤•à¥à¤¤ खादà¥à¤¯ पदारà¥à¤¥ शामिल किठजा सकते हैं, जैसे मछली, अंडा, दूध, सोया पà¥à¤°à¥‹à¤¡à¤•à¥à¤Ÿ, बीन, फलियां (6)। शाकाहरी पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨ यà¥à¤•à¥à¤¤ खादà¥à¤¯ पदारà¥à¤¥à¥‹à¤‚ में, पालक, बà¥à¤°à¥‹à¤•ली, टोफू, पनीर, डà¥à¤°à¤¾à¤ˆ फà¥à¤°à¥‚टà¥à¤¸ शामिल का सकते हैं।
थियामिन (विटामिन बी1) यà¥à¤•à¥à¤¤ खादà¥à¤¯ पदारà¥à¤¥ : मरासà¥à¤®à¤¸ रोग होने पर थियामिन (विटामिन बी1) यà¥à¤•à¥à¤¤ खादà¥à¤¯ आहार में शामिल किठजा सकते हैं। दरअसल, मरासà¥à¤®à¤¸ में रिफीडिंग यानी पोषक ततà¥à¤µ यà¥à¤•à¥à¤¤ आहार को दोबारा डाइट में शामिल किया जाता है। à¤à¤¸à¥‡ में इस दौरान आहार में 60 से 80 फीसदी की मातà¥à¤°à¤¾ में ही कैलोरी शामिल करने की सलाह दी जा सकती है। इससे अधिक मातà¥à¤°à¤¾ रिफीडिंग सिंडà¥à¤°à¥‹à¤® (Refeeding Syndrome) का कारण बन सकती है। साथ ही रिफीडिंग के दौरान हाइपोफॉसà¥à¤«à¥‡à¤Ÿà¥‡à¤®à¤¿à¤¯à¤¾ (Hypophosphatemia – रकà¥à¤¤ में फॉसà¥à¤«à¥‡à¤Ÿ का निमà¥à¤¨ सà¥à¤¤à¤°) के जोखिम को कम करने के लिठथियामिन यà¥à¤•à¥à¤¤ खादà¥à¤¯ पदारà¥à¤¥à¥‹à¤‚ को आहार में शामिल करना आवशà¥à¤¯à¤• है (1)।
बता दें कि, विटामिन बी1 या थियामिन मà¥à¤–à¥à¤¯ रूप से कोशिकाओं में कारà¥à¤¬à¥‹à¤¹à¤¾à¤‡à¤¡à¥à¤°à¥‡à¤Ÿ को ऊरà¥à¤œà¤¾ में बदलने में मदद कर सकता है। यह मसà¥à¤¤à¤¿à¤·à¥à¤• और तंतà¥à¤°à¤¿à¤•ा तंतà¥à¤° के लिठआवशà¥à¤¯à¤• पोषक ततà¥à¤µà¥‹à¤‚ में से à¤à¤• है (7)। इसके लिठआहार में चावल, संतरा, दही, ओटमील, दूध, बाजरा, सेब, फलियां, के साथ ही अंडा, मछली और अनà¥à¤¯ मांसाहारी खादà¥à¤¯ à¤à¥€ शामिल किठजा सकते हैं (8)।
विटामिन डी यà¥à¤•à¥à¤¤ खादà¥à¤¯ : कà¥à¤› सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ में मरासà¥à¤®à¤¸ के कारण शरीर में विटामिन डी की à¤à¥€ कमी हो सकती है। इसके कारण पेट दरà¥à¤¦, दसà¥à¤¤, वजन घटाने और ऑसà¥à¤Ÿà¤¿à¤¯à¥‹à¤ªà¥€à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ या ऑसà¥à¤Ÿà¤¿à¤¯à¥‹à¤ªà¥‹à¤°à¥‹à¤¸à¤¿à¤¸ जैसे हडà¥à¤¡à¥€ से जà¥à¤¡à¤¼à¥‡ विकारों का à¤à¥€ जोखिम बढ़ सकता है (9)। à¤à¤¸à¥‡ में विटामिन डी यà¥à¤•à¥à¤¤ खादà¥à¤¯ शरीर में विटामिन डी की कमी होने के जोखिम को कम कर सकते हैं। साथ ही, इससे होने वाली सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ से बचाव करने में à¤à¥€ यह मदद कर सकता है। इसके लिठआहार में अंडा, मछली, दूध, मशरूम और अनाज जैसे खादà¥à¤¯ शामिल किया जा सकता है (10)।
वनसà¥à¤ªà¤¤à¤¿ तेल : वनसà¥à¤ªà¤¤à¤¿ तेलों में वसा मà¥à¤–à¥à¤¯ ततà¥à¤µ होता है, जो कà¥à¤ªà¥‹à¤·à¤£ या मरासà¥à¤®à¤¸ जैसी सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ से बचाव व उपचार में मदद कर सकती है। इसके लिठमरासà¥à¤®à¤¸ रोगी के आहार में नारियल तेल, ताड़ का तेल, जैतून का तेल, सूरजमà¥à¤–ी का तेल, मूंगफली का तेल, अलसी का तेल, सोयाबीन का तेल और मछली के तेल जैसे समृदà¥à¤§ वसा वाले विà¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ वनसà¥à¤ªà¤¤à¤¿ तेल शामिल किठजा सकते हैं (11)।
चीनी यà¥à¤•à¥à¤¤ आहार : कà¥à¤ªà¥‹à¤·à¤£ की हलà¥à¤•ी-फà¥à¤²à¥à¤•ी समसà¥à¤¯à¤¾ में गà¥à¤²à¥‚कोज, फà¥à¤°à¤•à¥à¤Ÿà¥‹à¤œ, लैकà¥à¤Ÿà¥‹à¤œ, और सà¥à¤•à¥à¤°à¥‹à¤œ यà¥à¤•à¥à¤¤ खादà¥à¤¯ शामिल किठजा सकते हैं। दरअसल, ये ऊरà¥à¤œà¤¾ के अचà¥à¤›à¥‡ सà¥à¤¤à¥à¤°à¥‹à¤¤ होते हैं (11)। à¤à¤¸à¥‡ में कà¥à¤ªà¥‹à¤·à¤£ की हलà¥à¤•ी-फà¥à¤²à¥à¤•ी समसà¥à¤¯à¤¾ या शà¥à¤°à¥à¤†à¤¤à¥€ चरण में ही वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ के आहार में चीनी यà¥à¤•à¥à¤¤ आहार शामिल करना अचà¥à¤›à¤¾ विकलà¥à¤ª हो सकता है। हालांकि, धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ रहे कि आहार में चीनी का पà¥à¤°à¤¾à¤•ृतिक सà¥à¤¤à¥à¤°à¥‹à¤¤ जैसे – फल, दूध के जरिठशामिल किया जाठतो बेहतर है। मन में संशय हो तो बेहतर है इस बारे में डॉकà¥à¤Ÿà¤°à¥€ सलाह à¤à¥€ ली जाà¤à¥¤
मरासà¥à¤®à¤¸ रोग में कà¥à¤¯à¤¾ न खाà¤à¤‚ :
यहां जानिठमरासà¥à¤®à¤¸ में न खाने वाले खादà¥à¤¯ पदारà¥à¤¥à¥‹à¤‚ के बारे में:
लो पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨ खादà¥à¤¯ पदारà¥à¤¥ : जैसे कि हमने लेख की शà¥à¤°à¥à¤†à¤¤ में ही जानकारी दी है कि मरासà¥à¤®à¤¸ रोग पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨ की कमी से होने वाली सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ है। इसलिठमरासà¥à¤®à¤¸ रोग होने पर पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨ की कम मातà¥à¤°à¤¾ वाले खादà¥à¤¯ पदारà¥à¤¥à¥‹à¤‚ के सेवन से बचना चाहिà¤à¥¤ इसके लिठबà¥à¤°à¥‡à¤¡, पासà¥à¤¤à¤¾ और बिसà¥à¤•à¥à¤Ÿ जैसे खादà¥à¤¯ खाने से बचाव करना चाहिठ(12)।
जंक फूड : इसके साथ ही, डिबà¥à¤¬à¤¾ बंद और जंक फूड खाने से à¤à¥€ परहेज करना चाहिà¤à¥¤ इस तरह के खादà¥à¤¯ पदारà¥à¤¥à¥‹à¤‚ में पोषक ततà¥à¤µà¥‹à¤‚ की कमी होती है। साथ ही, इनमें शà¥à¤—र और नमक की अधिक मातà¥à¤°à¤¾ होती है, जो सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ के लिठहानिकारक हो सकती है (13)।
नोट : मरासà¥à¤®à¤¸ में चीनी और नमक की मातà¥à¤°à¤¾ के बारे में पहले à¤à¤• बार डॉकà¥à¤Ÿà¤°à¥€ सलाह जरूर लें। खासकर, जब बात शिशॠव बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ के आहार में नमक या चीनी को शामिल करने की हो। साथ ही मरासà¥à¤®à¤¸ मरीज की डाइट या डाइट चारà¥à¤Ÿ से जà¥à¤¡à¤¼à¥€ अनà¥à¤¯ जानकारियों के लिठà¤à¥€ डॉकà¥à¤Ÿà¤°à¥€ सलाह लेना बेहतर विकलà¥à¤ª हो सकता है।
मरासà¥à¤®à¤¸ के लिठडॉकà¥à¤Ÿà¤° की सलाह कब लेनी चाहिà¤?
बचà¥à¤šà¤¾ बहà¥à¤¤ कमजोर है या उसके शरीर की तà¥à¤µà¤šà¤¾ पतली, à¤à¥à¤°à¥à¤°à¥€à¤¦à¤¾à¤° और बेजान नजर आती है या उमà¥à¤° के हिसाब से बचà¥à¤šà¥‡ का बहà¥à¤¤ कम वजन है, तो ये मरासà¥à¤®à¤¸ के लकà¥à¤·à¤£ हो सकते हैं (2)। इसलिठà¤à¤¸à¥‡ कोई à¤à¥€ लकà¥à¤·à¤£ बचà¥à¤šà¥‡ में दिखाई देते हैं, तो डॉकà¥à¤Ÿà¤° से सलाह लेनी चाहिà¤à¥¤ इसके अलावा, अगर आहार में उचित पोषक ततà¥à¤µ शामिल हैं, इसके बाद à¤à¥€ मरासà¥à¤®à¤¸ के लकà¥à¤·à¤£ नजर आते हैं, तो तà¥à¤°à¤‚त डॉकà¥à¤Ÿà¤°à¥€ सलाह लें।
मरासà¥à¤®à¤¸ से बचाव – Prevention Tips for Marasmus in Hindi
मरासà¥à¤®à¤¸ रोग पोषण की कमी से होता है। इसलिठजरूरी है कि मरासà¥à¤®à¤¸ की रोकथाम करने के लिठआहार में उचित पोषक ततà¥à¤µ शामिल किठजाà¤à¥¤ साथ ही कà¥à¤› अनà¥à¤¯ जरूरी बातों का धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ रखकर à¤à¥€ मरासà¥à¤®à¤¸ की रोकथाम की जा सकती है, जैसे:
उपचार के बाद रोकथाम के चरणों का पालन करें।
हमेशा सà¥à¤µà¤šà¥à¤› पानी और आहार खाà¤à¤‚।
डिहाइडà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤¨ से बचाव के लिठउचित मातà¥à¤°à¤¾ में तरल पदारà¥à¤¥à¥‹à¤‚ का सेवन करें।
पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¦à¤¿à¤¨ के आहार में शरीर के लिठजरूरी पोषण संबंधी डाइट शामिल करें।
माता-पिता बचà¥à¤šà¥‡ के लिठडॉकà¥à¤Ÿà¤° से डाइट चारà¥à¤Ÿ से जà¥à¤¡à¤¼à¥€ जानकारी लेकर उसमें बताठगठखादà¥à¤¯ पदारà¥à¤¥à¥‹à¤‚ को बचà¥à¤šà¥‡ के डाइट में शामिल कर सकते हैं।
जनà¥à¤® के बाद बचà¥à¤šà¥‡ को नियमित सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ कराà¤à¤‚।
6 माह के होने के बाद शिशॠके आहार में मां के सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ के साथ ही अनà¥à¤¯ पोषक ततà¥à¤µ यà¥à¤•à¥à¤¤ ठोस आहार शामिल करें (14)।
उचित समय पर बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को आवशà¥à¤¯à¤• टीकाकरण कराà¤à¤‚।
साफ-सफाई का धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ रखें।
à¤à¥‹à¤œà¤¨ को अचà¥à¤›à¥‡ से धोकर, उबालकर और पकाकर खाà¤à¤‚।
आहार में कैलोरी, पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨, विटामिन, शà¥à¤—र और नमक की उचित मातà¥à¤°à¤¾ शामिल करें।
सबà¥à¤œà¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ के साथ-साथ फलों को à¤à¥€ डाइट का हिसà¥à¤¸à¤¾ बनाà¤à¤‚।
अगर आहार के जरिठउचित कैलोरी, पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨ या अनà¥à¤¯ पोषक ततà¥à¤µà¥‹à¤‚ की पूरà¥à¤¤à¤¿ नहीं होती है, तो डॉकà¥à¤Ÿà¤°à¥€ सलाह पर इनके सपà¥à¤²à¥€à¤®à¥‡à¤‚टà¥à¤¸ का à¤à¥€ सेवन कर सकते हैं।
| --------------------------- | --------------------------- |