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Fungal Infection in Hindi – फंगल इनà¥à¤«à¥‡à¤•à¥à¤¶à¤¨ कà¥à¤¯à¤¾ होता है?
फंगल इनà¥à¤«à¥‡à¤•à¥à¤¶à¤¨ काफी आम होता है। मनà¥à¤·à¥à¤¯à¥‹à¤‚ में, फंगल इनà¥à¤«à¥‡à¤•à¥à¤¶à¤¨ तब होता है जब फंगस आपके शरीर पर सीधे आकà¥à¤°à¤®à¤£ करती है अगर आपका इमà¥à¤¯à¥‚न सिसà¥à¤Ÿà¤® उतना मजबूत नहीं होता कि आपको उस इनà¥à¤«à¥‡à¤•à¥à¤¶à¤¨ से बचा सके। यह à¤à¤• à¤à¤¸à¤¾ इनà¥à¤«à¥‡à¤•à¥à¤¶à¤¨ होता है जो शरीर पर कई पà¥à¤°à¤•ार के फंफूद या कवक के कारण हो जाता है, जिनमे डरà¥à¤®à¥‡à¤Ÿà¥‹à¤«à¤¾à¤‡à¤Ÿà¥à¤¸ और यीसà¥à¤Ÿ पà¥à¤°à¤®à¥à¤– होते हैं फंफूद मृत केराटिन में पनपता है और धीरे धीरे हमारे शरीर के à¤à¤¸à¥‡ सà¥à¤¥à¤¾à¤¨à¥‹à¤‚ में फ़ैल जाता है जहाठथोड़ी नमी होती है जैसे कि – पैर की उà¤à¤—लियों के बीच का हिसà¥à¤¸à¤¾, à¤à¥œà¥€, नाखून, जननांग, सà¥à¤¤à¤¨ इतà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¿à¥¤
फंगस को मारना मà¥à¤¶à¥à¤•िल हो सकता है।कई माइकà¥à¤°à¥‹à¤¬à¥à¤¸ की तरह, कà¥à¤› फंगस हमारे शरीर के लिठसहायक होते हैं और कà¥à¤› हानिकारक होते हैं। जब हानिकारक फंगस हमारे शरीर पर आकà¥à¤°à¤®à¤£ करते हैं, तो उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ मारना मà¥à¤¶à¥à¤•िल हो सकता है, कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि वे परà¥à¤¯à¤¾à¤µà¤°à¤£ में जीवित रह सकते हैं और उस वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ को फिर से इनà¥à¤«à¥‡à¤•à¥à¤Ÿà¥‡à¤¡ कर सकते हैं। तà¥à¤µà¤šà¤¾ और नाखून में इनà¥à¤«à¥‡à¤•à¥à¤¶à¤¨ के लिà¤, आप सीधे इनà¥à¤«à¥‡à¤•à¥à¤Ÿà¥‡à¤¡ जगह पर दवा लगा सकते हैं। गंà¤à¥€à¤° इनà¥à¤«à¥‡à¤•à¥à¤¶à¤¨ के लिठओरल à¤à¤‚टिफंगल दवाà¤à¤‚ à¤à¥€ उपलबà¥à¤§ हैं। “आइये जानते हैं फंगल इनà¥à¤«à¥‡à¤•à¥à¤¶à¤¨ के लकà¥à¤·à¤£ और कारण कà¥à¤¯à¤¾ कà¥à¤¯à¤¾ हो सकते हैं –
फंगल इनà¥à¤«à¥‡à¤•à¥à¤¶à¤¨ के कारण
शारीरिक केमिसà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥€ और जीवन शैली फंगल इनà¥à¤«à¥‡à¤•à¥à¤¶à¤¨ के जोखिम को बढ़ा सकती है। उदाहरण के लिà¤, यदि आप à¤à¤• धावक (à¤à¤¥à¤²à¥€à¤Ÿ) हैं या यदि आपको बहà¥à¤¤ पसीना आता है तो आप à¤à¤¥à¤²à¥€à¤Ÿ फà¥à¤Ÿ नामक फंगल इनà¥à¤«à¥‡à¤•à¥à¤¶à¤¨ के कई लकà¥à¤·à¤£à¥‹à¤‚ का अनà¥à¤à¤µ कर सकते हैं।
फंगस अकà¥à¤¸à¤° गरà¥à¤®, और नम वातावरण में बढ़ती है।
पसीने से तर या गीले कपड़े पहनना à¤à¥€ आपकी तà¥à¤µà¤šà¤¾ के इनà¥à¤«à¥‡à¤•à¥à¤¶à¤¨ के लिठà¤à¤• जोखिम कारक है।
तà¥à¤µà¤šà¤¾ के कटने या फटने से à¤à¥€ बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ तà¥à¤µà¤šà¤¾ की गहरी परतों में अंदर तक जा सकता है और विà¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ पà¥à¤°à¤•ार के इनà¥à¤«à¥‡à¤•à¥à¤¶à¤¨ हो सकते हैं।
वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿à¤—त सà¥à¤µà¤šà¥à¤›à¤¤à¤¾ के साथ गैर-अनà¥à¤ªà¤¾à¤²à¤¨
अतà¥à¤¯à¤§à¤¿à¤• पसीना आना
तंग कपड़े, जूते पहनने से
à¤à¤‚टीबायोटिकà¥à¤¸ लेना
कमजोर इमà¥à¤¯à¥‚न सिसà¥à¤Ÿà¤®
फंगल इनà¥à¤«à¥‡à¤•à¥à¤¶à¤¨ के लकà¥à¤·à¤£
वैसे तो फंगल इनà¥à¤«à¥‡à¤•à¥à¤¶à¤¨ के लकà¥à¤·à¤£ इसके पà¥à¤°à¤•ार पर निरà¥à¤à¤° करते हैं, लेकिन कà¥à¤› सामानà¥à¤¯ लकà¥à¤·à¤£ इस पà¥à¤°à¤•ार हैं:
तà¥à¤µà¤šà¤¾ में परिवरà¥à¤¤à¤¨, जिसमें लाल और संà¤à¤µà¤¤à¤ƒ तà¥à¤µà¤šà¤¾ का काटना या छिलना शामिल है
खà¥à¤œà¤²à¥€ होना
कà¥à¤› सामानà¥à¤¯ पà¥à¤°à¤•ार के फंगल इनà¥à¤«à¥‡à¤•à¥à¤¶à¤¨, उनके लकà¥à¤·à¤£ और उपचार के विकलà¥à¤ªà¥‹à¤‚ के बारे में अधिक जानने के लिठनीचे पà¥à¥‡à¤‚।
फंगल इनà¥à¤«à¥‡à¤•à¥à¤¶à¤¨ के पà¥à¤°à¤•ार
यहां कà¥à¤› अधिक सामानà¥à¤¯ फंगल और यीसà¥à¤Ÿ इनà¥à¤«à¥‡à¤•à¥à¤¶à¤¨ दिठगठहैं जो लोग अनà¥à¤à¤µ करते हैं –
टीनिया वरà¥à¤¸à¥€à¤•ोलर
टीनिया वरà¥à¤¸à¥€à¤•ोलर को पिà¤à¤Ÿà¥à¤°à¤¿à¤¾à¤¸à¤¿à¤¸ वरà¥à¤¸à¤¿à¤•ोलर के रूप में à¤à¥€ जाना जाता है। यह तà¥à¤µà¤šà¤¾ की सबसे ऊपर की परत, à¤à¤ªà¤¿à¤¡à¤°à¥à¤®à¤¿à¤¸ में होने वाला à¤à¤• फंगल इनà¥à¤«à¥‡à¤•à¥à¤¶à¤¨ है। यीटीनिया वरà¥à¤¸à¥€à¤•ोलरसà¥à¤Ÿ जो इस तरह के इनà¥à¤«à¥‡à¤•à¥à¤¶à¤¨ के लिठजिमà¥à¤®à¥‡à¤¦à¤¾à¤° होता है वह अकà¥à¤¸à¤° तेलीय तà¥à¤µà¤šà¤¾ में बहà¥à¤¤ अधिक होता है जिस कारण इस पà¥à¤°à¤•ार का इनà¥à¤«à¥‡à¤•à¥à¤¶à¤¨ वृदà¥à¤§à¥‹à¤‚ की तà¥à¤²à¤¨à¤¾ में वà¥à¤¯à¤¸à¥à¤•ो को जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ होता है। टीनिया वरà¥à¤¸à¥€à¤•ोलर के लिठउपचार उपलबà¥à¤§ है, लेकिन यह इनà¥à¤«à¥‡à¤•à¥à¤¶à¤¨ अकà¥à¤¸à¤° वापस आ जाता है। परनà¥à¤¤à¥, यह इनà¥à¤«à¥‡à¤•à¥à¤¶à¤¨ किसी à¤à¥€ पà¥à¤°à¤•ार के दरà¥à¤¦ या खà¥à¤œà¤²à¥€ का कारण नहीं बनता है।
यदि आपके लकà¥à¤·à¤£ गंà¤à¥€à¤° नहीं हैं, तो आप घर पर à¤à¥€ इस फंगल इनà¥à¤«à¥‡à¤•à¥à¤¶à¤¨ का इलाज कर सकते हैं। इस इनà¥à¤«à¥‡à¤•à¥à¤¶à¤¨ के इलाज के लिठओटीसी à¤à¤‚टिफंगल कà¥à¤°à¥€à¤® या शैंपू का पà¥à¤°à¤¯à¥‹à¤— करना पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¥€ हो सकता हैं। यदि आप टीनिया वरà¥à¤¸à¥€à¤•ोलर के लिठमेडिकल इलाज करना चाहते हैं, तो आपका डॉकà¥à¤Ÿà¤° विà¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ दवाओं को लिख सकता है, जैसे कि टोपिकल कà¥à¤°à¥€à¤® जिसे सीधे तà¥à¤µà¤šà¤¾ पर लगाया जा सकता है।
जोक इच (दाद का à¤à¤• पà¥à¤°à¤•ार)
जोक इच, जिसे टिनिया कà¥à¤°à¥‚सिस के नाम में à¤à¥€ जाना जाता है, यह मà¥à¤–à¥à¤¯à¤¤à¤ƒ गà¥à¤°à¥‹à¤‡à¤¨(पेट और जांध के बीच का à¤à¤¾à¤—) की तà¥à¤µà¤šà¤¾ में होने वाला à¤à¤• फंगल इनà¥à¤«à¥‡à¤•à¥à¤¶à¤¨ है। जैसा कि हमने बताया कि फंगस गरà¥à¤®, नम वातावरण में पनपता है – और गà¥à¤°à¥‹à¤‡à¤¨ के आस-पास नमी रहती है। जोक इच आमतौर पर महिलाओं को अधिक होती है, जबकि पà¥à¤°à¥à¤·à¥‹à¤‚ में यह इनà¥à¤«à¥‡à¤•à¥à¤¶à¤¨ न के बराबर होता है। जैसा कि इस इनà¥à¤«à¥‡à¤•à¥à¤¶à¤¨ के नाम से पता चलता है, इसमें बहà¥à¤¤ अधिक खà¥à¤œà¤²à¥€ होना इसका मà¥à¤–à¥à¤¯ लकà¥à¤·à¤£ होता है।
यह आमतौर पर ओवर-द-काउंटर फंगल इनà¥à¤«à¥‡à¤•à¥à¤¶à¤¨ कà¥à¤°à¥€à¤® से जलà¥à¤¦à¥€ सही हो जाता है। जोक इच को रोकने के लिठगà¥à¤°à¥‹à¤‡à¤¨ को जहां तक हो सके सूखा रखना चाहिठऔर कà¤à¥€-कà¤à¥€ हर दिन à¤à¤‚टिफंगल पाउडर का उपयोग करते रहना चाहिà¤à¥¤ यदि à¤à¤‚टीफंगल कà¥à¤°à¥€à¤® से à¤à¤•-दो सपà¥à¤¤à¤¾à¤¹ में इनà¥à¤«à¥‡à¤•à¥à¤¶à¤¨ सही नहीं होता है तो तà¥à¤°à¤‚त डॉकà¥à¤Ÿà¤° को दिखाना चाहिà¤à¥¤
à¤à¤¥à¤²à¥€à¤Ÿ फà¥à¤Ÿ
à¤à¤¥à¤²à¥€à¤Ÿ फà¥à¤Ÿ, या टीनिया पेडिस, पैरों में होने वाला à¤à¤• सामानà¥à¤¯ फंगल इनà¥à¤«à¥‡à¤•à¥à¤¶à¤¨ है। चूंकि यह इनà¥à¤«à¥‡à¤•à¥à¤¶à¤¨ à¤à¤¥à¤²à¥€à¤Ÿ/ धावकों में बहà¥à¤¤ ही आम होता है इस कारण इसे à¤à¤¥à¤²à¥€à¤Ÿ फà¥à¤Ÿ कहा जाता है। à¤à¤¥à¤²à¥€à¤Ÿ फà¥à¤Ÿ में पैर की उंगलियों के बीच में इनà¥à¤«à¥‡à¤•à¥à¤¶à¤¨ हो जाता है। यह इनà¥à¤«à¥‡à¤•à¥à¤¶à¤¨ तीवà¥à¤° खà¥à¤œà¤²à¥€ का कारण बनता है और तà¥à¤µà¤šà¤¾ को तोड़ देता है, इसलिठयह अकà¥à¤¸à¤° पैर की उंगलियों के बीच सफेद फंफूद की तरह दिखता है।
à¤à¤¥à¤²à¥€à¤Ÿ फà¥à¤Ÿ में à¤à¤¥à¤²à¥€à¤Ÿ के पैर का इलाज (Fungal Infection Treatment in Hindi) आमतौर पर कà¥à¤°à¥€à¤® या लोशन लगाकर किया जाता है, लेकिन कà¤à¥€-कà¤à¥€ गंà¤à¥€à¤° मामलों में ओरल à¤à¤‚टिफंगल दवा की आवशà¥à¤¯à¤•ता होती है।इसके अलावा आप हाइडà¥à¤°à¥‹à¤œà¤¨ परॉकà¥à¤¸à¤¾à¤‡à¤¡ का à¤à¥€ उपयोग कर सकते हैं, यह पैर की तà¥à¤µà¤šà¤¾ से फंगस को जड़ से समापà¥à¤¤ कर देता है।
दाद या रिंगवॉरà¥à¤®
दाद, जिसे टिनिया कॉरà¥à¤ªà¥‹à¤°à¤¿à¤¸ à¤à¥€ कहा जाता है, तà¥à¤µà¤šà¤¾ का à¤à¤• सामानà¥à¤¯ पà¥à¤°à¤•ार का फंगल इनà¥à¤«à¥‡à¤•à¥à¤¶à¤¨ होता है। à¤à¤¸à¥€ कई फंगस होती हैं जो दाद का कारण बन सकते हैं और वे à¤à¤ªà¤¿à¤¡à¤°à¥à¤®à¤¿à¤¸ में रहते हैं। दाद टीनिया वरà¥à¤¸à¥€à¤•ोलर की तà¥à¤²à¤¨à¤¾ में अधिक लकà¥à¤·à¤£à¥‹à¤‚ का कारण बनता है, जैसे खà¥à¤œà¤²à¥€ और धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ देने योगà¥à¤¯ लाल चकतà¥à¤¤à¥‡à¥¤ चकतà¥à¤¤à¥‡ अकà¥à¤¸à¤° पपड़ीदार, लाल पैच और उà¤à¤°à¥‡ हà¥à¤ चकते होते हैं जो धीरे-धीरे बà¥à¤¤à¥‡ जाते हैं। इनका आकार ही इनके निदान का कारण बनाता है।
रिंगवॉरà¥à¤® या दाद को टोपिकल à¤à¤‚टिफंगल दवा के साथ बहà¥à¤¤ आसानी से इलाज किया जाता है। जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾à¤¤à¤° मामलों में, आपको यह सà¥à¤¨à¤¿à¤¶à¥à¤šà¤¿à¤¤ करने के लिठफंगल इनà¥à¤«à¥‡à¤•à¥à¤¶à¤¨ समापà¥à¤¤ हो गया है या नहीं, करीबन 2 से 4 सपà¥à¤¤à¤¾à¤¹ के लिठअपनी तà¥à¤µà¤šà¤¾ पर इन दवाओं का उपयोग करना चाहिà¤à¥¤ इससे दाद के वापस आने की संà¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ à¤à¥€ कम हो जाà¤à¤—ी।
सà¥à¤•ैलà¥à¤ª का दाद
सà¥à¤•ैलà¥à¤ª के दाद को टीनिया कैपिटिस के नाम से à¤à¥€ जाना जाता है और यह, दाद से à¤à¥€ अधिक तीवà¥à¤° फंगल इनà¥à¤«à¥‡à¤•à¥à¤¶à¤¨ है जो तà¥à¤µà¤šà¤¾ के अनà¥à¤¯ कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤°à¥‹à¤‚ पर à¤à¥€ दिखाई देता है। इस दाद का कारण बनने वाली फंगी न केवल खोपड़ी की तà¥à¤µà¤šà¤¾ को संकà¥à¤°à¤®à¤¿à¤¤ करती है, बलà¥à¤•ि बालों के रोम में à¤à¥€ फ़ैल जाती हैं। जिस कारण यह बालों के गिरने का कारण à¤à¥€ बन सकता है, और उस सà¥à¤¥à¤¾à¤¨ से बाल उड जाते हैं और वहाठदाद के पà¥à¤°à¤•ार के दाने के साथ à¤à¤• गंजा सà¥à¤¥à¤¾à¤¨ छोड़ देता है।
टिनिया कैपिटिस का इलाज टोपिकल कà¥à¤°à¥€à¤® से नहीं किया जा सकता है। इसका इलाज ओरल à¤à¤‚टिफंगल दवाओं से करना पड़ता है। मà¥à¤‚ह से ली जाने वाली à¤à¤‚टिफंगल दवाà¤à¤‚ सà¥à¤•ैलà¥à¤ª के दाद का इलाज करने के लिठउपयोग की जाती हैं। आमतौर पर इसके लिठइसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² की जानी वाली दवाओं में गà¥à¤°à¤¿à¤¸à¥‹à¤«à¥à¤²à¤µà¤¿à¤¨ (गà¥à¤°à¤¿à¤¸-पेग) और टेरबिनाफिन (लैमिसिल) शामिल हैं। आपके बचà¥à¤šà¥‡ को इन दवाओं में से à¤à¤• को छह सपà¥à¤¤à¤¾à¤¹ या उससे अधिक समय तक लेने की आवशà¥à¤¯à¤•ता हो सकती है।
नाखून में फंगल इनà¥à¤«à¥‡à¤•à¥à¤¶à¤¨
इस पà¥à¤°à¤•ार का नफ़ेकà¥à¤¶à¤¨ नाखूनों में होता है जिसे ऑनिकोमाईकोसिस à¤à¥€ कहा जाता है, पैर की अंगà¥à¤²à¥€ के नाखून के हिसà¥à¤¸à¥‡ में फंगल इनà¥à¤«à¥‡à¤•à¥à¤¶à¤¨ के कारण होता है।जैसे-जैसे नाखून बढ़ता है, यह à¤à¤‚गà¥à¤° होता जाता है, फिर मोटा होकर नाखून से अलग हो जाता है।
फंगल नेल के इलाज के लिठà¤à¥€ ओरल à¤à¤‚टिफंगल दवाओं का पà¥à¤°à¤¯à¥‹à¤— किया जाता है। इसके इलाज के लिठà¤à¥€ कà¥à¤°à¥€à¤® और लोशन मदद नहीं करते।
फंगल सà¥à¤•िन इनà¥à¤«à¥‡à¤•à¥à¤¶à¤¨ का इलाज
फंगल इनà¥à¤«à¥‡à¤•à¥à¤¶à¤¨ को मारने और जलà¥à¤¦à¥€ से ठीक होने में आपकी सहायता के लिठकई उपचार उपलबà¥à¤§ हैं। आपके दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ किया जाने वाला उपचार उस पà¥à¤°à¤•ार और फंगलसà¥à¤•िन इनà¥à¤«à¥‡à¤•à¥à¤¶à¤¨ की गंà¤à¥€à¤°à¤¤à¤¾ पर निरà¥à¤à¤° करता है जिससे आप पीड़ित हैं। उदाहरण के लिà¤, टिनिआ कैपिटिस को हर दो या तीन दिनों में लगाने के लिठमेडिकेटेड शैमà¥à¤ªà¥‚ की आवशà¥à¤¯à¤•ता हो सकती है, जबकि शरीर पर कहीं à¤à¥€ दाद होने पर पà¥à¤°à¤¤à¥à¤¯à¥‡à¤• दिन कई बार à¤à¤• सामयिक कà¥à¤°à¥€à¤® लगाने की आवशà¥à¤¯à¤•ता हो सकती है।
अधिकांश फंगल सà¥à¤•िन इनà¥à¤«à¥‡à¤•à¥à¤¶à¤¨ का इलाज ओवर-द-काउंटर या पà¥à¤°à¤¿à¤¸à¥à¤•à¥à¤°à¤¿à¤ªà¥à¤¶à¤¨ कà¥à¤°à¥€à¤® के साथ किया जा सकता है। यदि आप गंà¤à¥€à¤° इनà¥à¤«à¥‡à¤•à¥à¤¶à¤¨ (Fungal Infection in Hindi) से पीड़ित हैं तो इसके लिठअतिरिकà¥à¤¤ तरीकों की आवशà¥à¤¯à¤•ता हो सकती है।सावधानी बरतना फंगल सà¥à¤•िन इनà¥à¤«à¥‡à¤•à¥à¤¶à¤¨ से बचने का सबसे अचà¥à¤›à¤¾ उपाय है। संà¤à¤µà¤¤à¤ƒ गंà¤à¥€à¤° जटिलताओं से बचने के लिठसà¥à¤•िन इनà¥à¤«à¥‡à¤•à¥à¤¶à¤¨ के शà¥à¤°à¥‚आती लकà¥à¤·à¤£à¥‹à¤‚ के लिठडॉकà¥à¤Ÿà¤° को सूचित करना सबसे अचà¥à¤›à¤¾ विकलà¥à¤ª है। डॉकà¥à¤Ÿà¤° की सहायता से, फंगल सà¥à¤•िन इनà¥à¤«à¥‡à¤•à¥à¤¶à¤¨ के अधिकांश मामलों का आसानी से इलाज किया जा सकता है।
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