पेट का कैंसर कैसे पता चलता है?HealthPlanet

Posted on Fri 9th Dec 2022 : 12:59

पेट के कैंसर के लक्षण

पेट का कैंसर अन्य कैंसरों की तुलना में अपेक्षाकृत कम होता है, परन्तु इस रोग के सबसे बड़े खतरों में से एक है इसका पता न लगना। पेट के बाकी कैंसर की तरह गैस्ट्रिक कैंसर के भी शुरुआती चरणों में सामान्यतः कोई लक्षण नहीं होते हैं। यह अक्सर शरीर के अन्य हिस्सों में फैलने के बाद पकड़ में आता है । इससे इसका इलाज करना मुश्किल हो जाता है।
पेट के कैंसर के लक्षणों में शामिल है:

अपच, पेट में जलन और पेट फूलना
लगातार कमजोरी या थकान महसूस करना
भूख न लगना
वजन कम होना
हीमोग्लोबिन में कमी (एनीमिया)
पेट में दर्द या बेचैनी
मल में लाल खून का धब्बा या काले रंग का मल
थोड़ी मात्रा में भोजन करने के बाद पेट भरा हुआ महसूस होना
मतली और उल्टी (रक्त के साथ या इसके बिना)
पेट के ऊपरी हिस्से में परेशानी


पेट में कैंसर के लक्षण
त्वचा पर दिखने वाले लक्षणों के अलावा पेट के कैंसर के शुरुआती लक्षणों में भूख न लगना, अचानक वजन कम होना, पेट में दर्द और पेट में बेचैनी या सूजन शामिल हैं। रोग के अन्य लक्षणों में बेचैनी, अपच, मतली और उल्टी शामिल है, जो खून के साथ या बिना हो सकती है।


पेट के कैंसर की जांच एवं परीक्षण (डायग्नोसिस)
स्वास्थ्य परीक्षण

एक चिकित्सक द्वारा लक्षणों को समझना और संकेतों की जांच करना बीमारी तक पहुंचने के लिए जरूरी है।
एंडोस्कोपी

एंडोस्कोपी से पेट के कैंसर की पुष्टि होती है।

एण्डोस्कोप एक लचीली पतली ट्यूब होती है, जिसमें एक कैमरा होता है। यह आपके पेट के अंदर की छवि को एक मॉनिटर पर प्रसारित करता है। यदि कोई असामान्यता मिलती है, तो उसमें से एक छोटा सा नमूना भी लिया जाता है, जिसे बायोप्सी कहा जाता है।
बायोप्सी

बायोप्सी का अर्थ है कि ट्यूमर के एक छोटे से हिस्से का नमूना लेना और माइक्रोस्कोप के द्वारा इसकी जांच करना। यह एक पैथोलॉजिस्ट द्वारा किया जाता है। यदि आवश्यक हो तो बायोप्सी नमूनों पर जीन परीक्षण भी किया जा सकता है।
कैंसर का प्रसार (चरण) निर्धारित करना (स्टेजिंग)

पेट के कैंसर की गंभीरता या चरण का अनुमान यह देख कर लगाया जाता है कि ट्यूमर पेट में कहां है, यह कितनी हद तक पेट के ऊतकों में फ़ैल चूका है, और अगर यह पेट के बाहर शरीर के अन्य आंतरिक अंगो में भी फैल गया हो।

कैंसर की गांठ से कैंसर कोशिकाएं निकलती है और शरीर में तीन प्रकार से फैलती हैं;

रक्त के माध्यम से
लिंफेटिक के माध्यम से
सीधे आसपास के उत्तकों में

कैंसर का फैलाव स्थानीय हो सकता है, पेट, उसके आसपास के उत्तकों में और लिंफ नोड्स में। या दूरवर्ती हो सकता है, लिवर, फेफड़े और पेट के अंदर की परत (पेरीटोनियम) में। कैंसर जब दूर के अंगों में फैल जाता है तो उसे मेटास्टैसिस (metastasis) कहते हैं।
स्टेजिंग से बीमारी के प्रसार का पता चल रहा है। पेट के कैंसर का पता चलने के बाद, हम यह पता लगाने के लिए परीक्षण करते हैं कि ट्यूमर कितना फैल गया है। इसके लिए निम्नलिखित जांचों में से हम कुछ टेस्ट करते हैं।

रक्त परीक्षण: रक्त में विभिन्न प्रकार के तत्वों की जांच की जाती है। कुछ रोगियों में एनीमिया (कम हीमोग्लोबिन) होता है। इसके अलावा, लिवर और किडनी के टेस्ट भी किए जाते हैं।

कंप्यूटेड टोमोग्राफी (CT) स्कैन: इस टेस्ट में मरीज को एक सीटी स्कैनर में रखा जाता है। फिर एक्स-रे की किरणें चारों तरफ से अंदरूनी अंगों की छवि लेती है। कंप्यूटर इन छवियों को विकसित कर हमें अंदरूनी स्थिति के बारे में सटीक जानकारी देते हैं। कंट्रास्ट का इंजेक्शन देने से हमें बेहतर छवि मिलती है।

पोजीट्रान एमिशन टोमोग्राफी (PET) स्कैन: कैंसर कोशिकाएं ग्लूकोज ज्यादा मात्रा में लेती हैं। इस टेस्ट में रेडियोएक्टिव ग्लूकोज (18एफ-फ्लोरोडीऑक्सी; FDG) का इंजेक्शन देते हैं। यह रेडियोएक्टिव ग्लूकोज ट्यूमर में चला जाता है जिसे हम स्कैनर से देख सकते हैं।

एंडोस्कोपिक अल्ट्रासाउंड (EUS): यह अंदर से पेट का अल्ट्रासाउंड है। यह छोटे ट्यूमर में उपयोगी होता है। यह देखता है कि कैंसर पेट की परतों और आस-पास के लिम्फ नोड्स में कितना फैल गया है।

लेप्रोस्कोपी: सीटी और PET स्कैन छोटे ट्यूमर को नहीं खोज सकते । लैप्रोस्कोपी में, आपके पेट में एक छोटे छेद के माध्यम से एक पतला कैमरा डाला जाता है और यकृत और पेरिटोनियल सतह (पेट के अंदर की झिल्ली) पर छोटे ट्यूमर का पता लगाया जा सकता है।
ये टेस्ट्स हमें कैंसर को एक चरण प्रदान करने में मदद करते हैं। मोटे तौर पर हम कैंसर को तीन श्रेणियों में वर्गीकृत करते हैं:

स्थानीयकृत - कैंसर उस अंग तक सीमित है जिसमें यह शुरू हुआ था।

स्थानीय प्रसार - कैंसर आसपास के लिम्फ नोड्स में फैल गया है या उस अंग की दीवार से बाहर आ गया है जिसमें यह शुरू हुआ था।

दूर तक फैला हुआ - कैंसर दूर के अंगों तक फैल गया है, जो ट्यूमर की उत्पत्ति के अंग से दूर है। इसे मेटास्टेसिस कहा जाता है।

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