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कà¥à¤¯à¤¾ होता है निमोनिया? जानिà¤à¤‚ इसके लकà¥à¤·à¤£ और बचाव के उपाय!
सरà¥à¤¦à¥€ का मौसम शà¥à¤°à¥‚ होते ही जà¥à¤•ाम और खांसी से जà¥à¤¡à¤¼à¥€ बीमारियों के बढ़ने की संà¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾à¤à¤‚ à¤à¥€ बढ़ जाती हैं। आमतौर पर हम जà¥à¤•ाम और खांसी से तो ठीक हो जाते हैं लेकिन कà¥à¤› बीमा​रियां à¤à¤¸à¥€ होती हैं जो सरà¥à¤¦à¥€ में अपना पà¥à¤°à¤•ोप जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ दिखाती हैं। उनà¥à¤¹à¥€à¤‚ में से à¤à¤• नाम है निमोनिया संकà¥à¤°à¤®à¤£à¥¤
निमोनिया à¤à¤• à¤à¤¸à¥€ बीमारी है जो अधिकतर बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ं में होती है और इससे दà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾à¤à¤° में हर साल हज़ारों बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ की मृतà¥à¤¯à¥ à¤à¥€ हो जाती है। हालांकि वà¥à¤¯à¤¸à¥à¤• और वृदà¥à¤§à¤œà¤¨à¥‹à¤‚ को à¤à¥€ निमोनिया हो सकता है। निमोनिया होने का अधिक खतरा 65 वरà¥à¤· से अधिक उमà¥à¤° के वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ और 2 वरà¥à¤· से कम उमà¥à¤° के बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ में जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ रहता है। यह à¤à¤• à¤à¤¸à¥€ बीमारी है जिसकी समय पर पहचान और उपचार नहीं हो तो यह जानलेवा à¤à¥€ हो सकती है। à¤à¤¸à¥‡ में हमारे लिठइस बीमारी के बारे में जानना आवशà¥à¤¯à¤• है ताकि हम इसके लकà¥à¤·à¤£à¥‹à¤‚ की पहचान कर सके और समय पर उपचार à¤à¥€ ले सकें।
निमोनिया कà¥à¤¯à¤¾ होता है?
फेफड़ों में संकà¥à¤°à¤®à¤£ का हो जाना निमोनिया कहलाता है। इससे फेफड़े में सूजन की सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ बन जाती है। निमोनिया मà¥à¤–à¥à¤¯ रूप से विषाणॠऔर जीवाणॠके संकà¥à¤°à¤®à¤£ से होता है। यह वायरस, बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ और पेरासाइटà¥à¤¸ के कारण à¤à¥€ हो सकता है। इसके अलावा इसके कम तौर पर अनà¥à¤¯ सूकà¥à¤·à¥à¤®à¤œà¥€à¤µ, कà¥à¤› दवाओं और दूसरे रोगों के संकà¥à¤°à¤®à¤£ से à¤à¥€ होने की संà¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ रहती है।
साथ ही अगर निमोनिया को बढ़ावा देने वाली परिसà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ और कारकों पर बात करें तो धूमà¥à¤°à¤ªà¤¾à¤¨, रोगी पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤°à¥‹à¤§à¤• कà¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾ में कमी, अतà¥à¤¯à¤§à¤¿à¤• शराब पीना, फेफड़ों से जà¥à¤¡à¤¼à¤¾ गंà¤à¥€à¤° रोग, गंà¤à¥€à¤° गà¥à¤°à¥à¤¦à¤¾ रोग और यकृत रोग शामिल हैं। इसके अलावा कà¥à¤› दवाओं जैसे पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥‰à¤¨-पंप इनà¥à¤¹à¤¿à¤¬à¤Ÿà¤°à¥à¤¸ या H2 बà¥à¤²à¥‰à¤•रà¥à¤¸ के उपयोग से à¤à¥€ निमोनिया का खतरा बढ़ने की संà¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ रहती है। वृदà¥à¤§à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ में à¤à¥€ निमोनिया का खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा असà¥à¤¥à¤®à¤¾ (दमा), हृदय रोग, बà¥à¤°à¥‹à¤¨à¥à¤•िइकà¥à¤Ÿà¥‡à¤¸à¤¿à¤¸ आदि से पीड़ित मरीजों में à¤à¥€ निमोनिया का जोखिम जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ रहता है।
निमोनिया कितने पà¥à¤°à¤•ार का होता है?
निमोनिया पॉंच पà¥à¤°à¤•ार का होता है, जो इस पà¥à¤°à¤•ार है।
बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤² निमोनिया
वायरल निमोनिया
माइकोपà¥à¤²à¤¾à¤œà¥à¤®à¤¾ निमोनिया
à¤à¤¸à¥à¤ªà¤¿à¤°à¥‡à¤¶à¤¨ निमोनिया
फंगल निमोनिया
निमोनिया संकà¥à¤°à¤®à¤£ के लकà¥à¤·à¤£ कà¥à¤¯à¤¾ है?
किसी à¤à¥€ बीमारी की पहचान के लिठउसके लकà¥à¤·à¤£à¥‹à¤‚ की जानकारी होना बहà¥à¤¤ जरूरी है। à¤à¤¸à¥‡ में निमोनिया जैसी गंà¤à¥€à¤° बीमारी के लकà¥à¤·à¤£ à¤à¥€ समय पर पहचान लिठजाठतो उपचार में आसानी रहती है। जानिà¤à¤‚ निमोनिया के लकà¥à¤·à¤£à¥¤
निमोनिया संकà¥à¤°à¤®à¤£ के पà¥à¤°à¤®à¥à¤– लकà¥à¤·à¤£à¥‹à¤‚ में खांसी, सीने में दरà¥à¤¦, बà¥à¤–ार और सांस लेने में कठिनाई होती है। साथ ही अगर आपका तापमान 105 डिगà¥à¤°à¥€ फारेनहाइट तक पहà¥à¤‚च गया है तो यह निमोनिया का संकेत हो सकता है।
सामानà¥à¤¯ तौर पर फà¥à¤²à¥‚ जैसे लकà¥à¤·à¤£ दिखते हैं जो बाद में धीरे धीरे या फिर à¤à¤• दम से बढ़ने लगते हैं।
रोगी में कमजोरी आ जाती है और थकान महसूस होती है।
रोगी को बलगम वाली खांसी आती है।
रोगी को बà¥à¤–ार के साथ पसीना आता है कंपकंपी महसूस होती है।
सांस लेने में कठिनाई होने से रोगी तेज या जोर जोर से सांस लेने लगता है।
रोगी को बेचैनी होती है।
रोगी को à¤à¥‚ख लगनी कम या बंद हो जाती है।
बीपी का कम हो जाना
खॉंसी में खून आना
धड़कन का तेज हो जाना
मतली और उलà¥à¤Ÿà¥€ आना
बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ में à¤à¥€ निमोनिया के लकà¥à¤·à¤£ इसी पà¥à¤°à¤•ार समान रहते हैं।
निमोनिया की जांचें और उपचार
सामानà¥à¤¯ तौर पर निमोनिया के लकà¥à¤·à¤£ दिखने पर तà¥à¤°à¤‚त चिकितà¥à¤¸à¤•ीय परामरà¥à¤¶ लेना चाहिà¤à¥¤ अगर हम निमोनिया की जांच और उपचार पर बात करें तो डॉकà¥à¤Ÿà¤° के दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ रोगी को छाती का à¤à¤•à¥à¤¸à¤°à¥‡ करवाने का कहा जाता है। साथ ही सà¥à¤Ÿà¥‡à¤¥à¥‹à¤¸à¥à¤•ोप से फेफड़ों की गति सà¥à¤¨à¤¨à¥‡ पर डॉकà¥à¤Ÿà¤° को फेफड़ोंं से कà¥à¤› आवाज आती हà¥à¤ˆ à¤à¥€ सà¥à¤¨à¤¾à¤ˆ देती है। इसके अलावा डॉकà¥à¤Ÿà¤°à¥à¤¸ के दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ खून की जांच, सीटी सà¥à¤•ैन, बलगम की जांच, बà¥à¤°à¥‹à¤‚कोसà¥à¤•ोपी आदि à¤à¥€ करवाने की सलाह दी जाती है।
अगर हम निमोनिया संकà¥à¤°à¤®à¤£ के उपचार की बात करें तो य​ह बीमारी की सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿, रोगी की उमà¥à¤° पर à¤à¥€ निरà¥à¤à¤° करता है। हालांकि डॉकà¥à¤Ÿà¤°à¥à¤¸ के दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ à¤à¤‚टीबायोटिकà¥à¤¸, खांसी कम करने की दवाà¤à¤‚, बà¥à¤–ार à¤à¤µà¤‚ दरà¥à¤¦ कम करने की दवाà¤à¤‚ दी जाती हैं ताकि रोगी को आराम मिल सके। इसके अलावा कà¥à¤› घरेलू उपायों के दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ à¤à¥€ रोगी को राहत देने का कारà¥à¤¯ किया जाता है।
निमोनिया संकà¥à¤°à¤®à¤£ होने पर असà¥à¤ªà¤¤à¤¾à¤² में à¤à¤°à¥à¤¤à¥€ कब होना चाहिà¤?
चिकितà¥à¤¸à¤•ीय परामरà¥à¤¶ के बाद अगर ​डॉकà¥à¤Ÿà¤° को लगता है कि आपको असà¥à¤ªà¤¤à¤¾à¤² में à¤à¤°à¥à¤¤à¥€ किया जाना चाहिठतब वे à¤à¤°à¥à¤¤à¥€ होने की सलाह देते हैं। हालांकि इन विà¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ परिसà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ में रोगी के असà¥à¤ªà¤¤à¤¾à¤² में à¤à¤°à¥à¤¤à¥€ होने की संà¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ रहती है, वह इस पà¥à¤°à¤•ार हैं।
अगर रोगी की आयॠ5 वरà¥à¤· से कम à¤à¤µà¤‚ 65 वरà¥à¤· से अधिक हो।
यदि रोगी में सà¥à¤¥à¤¾à¤¨, समय à¤à¤µà¤‚ वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ को लेकर à¤à¥à¤°à¤® की सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ हो।
अगर सांस लेने में अतà¥à¤¯à¤§à¤¿à¤• तकलीफ हो।
अगर रोगी का तापमान 105 डिगà¥à¤°à¥€ फारेनहाइट तक हो।
यदि हारà¥à¤Ÿ बीट की दर 50 से कम या 100 से अधिक हो।
निमोनिया संकà¥à¤°à¤®à¤£ से बचाव के तरीके कà¥à¤¯à¤¾ है?
Pneumonia Infection prevention
पà¥à¤°à¤¥à¤® तौर पर जनà¥à¤® के बाद टीकाकरण के माधà¥à¤¯à¤® से निमोनिया को रोका जा सकता है। इसमें शिशà¥à¤“ं के लिठPVC13 और बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ व वयसà¥à¤•ों के लिठPPSV23 नामक टीके लगाठजाते हैं। निमोनिया से बचाव के लिठदूसरे तरीकों में धूमà¥à¤°à¤ªà¤¾à¤¨ से दूरी, साफ सफाई रखने, मासà¥à¤• पहनने, पौषà¥à¤Ÿà¤¿à¤• आहार लेने, वà¥à¤¯à¤¾à¤¯à¤¾à¤®, योग के माधà¥à¤¯à¤® से निमोनिया से बचा जा सकता है।
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