नवजात पीलिया कब चरम पर होता है?HealthPlanet

Posted on Thu 15th Dec 2022 : 14:02

नवजात शिशु को पीलिया होने पर दिखते हैं कुछ लक्षण, इग्‍नोर करने पर जा सकती है जान

जन्‍म के बाद भी नवजात शिशु के कई अंगों का विकास पूरी तरह से नहीं हुआ होता है जैसे कि लिवर। लिवर पूरी तरह से मैच्‍योर नहीं हुआ होता है। इसकी वजह से कुछ बच्‍चों को पीलिया हो जाता है। यहां हम नवजात शिशु में पीलिया के लक्षणों, कारण और इलाज के बारे में बात करेंगे।


नवजात शिशु को पीलिया होने पर दिखते हैं कुछ लक्षण, इग्‍नोर करने पर जा सकती है जान
पीलिया, इस बीमारी का नाम आपने भी कभी न कभी सुना ही होगा। अक्‍सर नवजात शिशुओं को भी पीलिया हो जाता है जिसे न्‍यूबॉर्न जॉन्डिस भी कहते हैं। नवजात शिशुओं में जन्‍म के 2 से 3 दिनों के अंदर पीलिया हो सकता है। इसमें आंखों का रंग सफेद या स्किन का रंग पीला हो सकता है। ऐसा शिशु के खून में बिलरूबिन का लेवल बढ़ने की वजह से होता है। पीलिया पहले शिशु के चेहरे पर दिखता है और फिर उसकी छाती, पेट, बांहों और टांगों पर इसके लक्षण दिखने लगते हैं।

नैचुरल रोशनी यानि की धूप में पीलिया को आसानी से पहचाना जा सकता है और गहरे रंग की स्किन वाले शिशुओं में इसका पता लगाना मुश्किल हो सकता है। आगे इस आर्टिकल में हम आपको नवजात शिशु को पीलिया होने के लक्षणों, कारणों और इलाज के विकल्‍पों के बारे में बताएंगे।

न्‍यूबॉर्न जॉन्डिस क्‍या है

न्‍यूबॉर्न जॉन्डिस में शिशु की आंखों और स्किन का रंग पीला हो जाता है। बड़े बच्‍चों और वयस्‍कों में लिवर बिलरूबिन बनाता है जो कि पाचन मार्ग के जरिए शरीर से बाहर निकल जाता है लेकिन नवजात शिशुओं का लिवर अभी भी पूरी तरह से मैच्‍योर नहीं होता है कि वो बिलरूबिन को हटा सके।

​कब ठीक होता है पीलिया

ज्‍यादातर मामलो में शिशु के लिवर के विकसित होने पर पीलिया अपने आप ठीक हो जाता है। अधिकतर मामलों में पीलिया दो से तीन हफ्तों के अंदर ठीक हो जाता है लेकिन अगर यह 3 हफ्ते से ज्‍यादा समय से हो रहा है, तो यह किसी अन्‍य स्‍वास्‍थ्‍य समस्‍या का लक्षण हो सकता है।

वहीं बिलरूबिन के हाई लेवल की वजह से शिशु को बहरापन, सेरेब्रल पाल्‍सी या अन्‍य किसी तरह का ब्रेन डैमेज हो सकता है।

एक स्‍टडी के मुताबिक 50 पर्सेंट फुल और 80 पर्सेंट प्रीटर्म बेबी को पीलिया होता है जिनमें जन्‍म के बाद 2 से 5 दिनों के अंदर यह दिखने लगता है और एक से दो हफ्ते के बीच ठीक हो जाता है।
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​क्‍या है सलाह

अमेरिकन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्‍स का कहना है कि अस्‍पताल से छुट्टी देने से पहले सभी नवजात शिशुओं की पीलिया की जांच होनी चाहिए और शिशु के 3 से 5 दिन के होने पर भी इसकी जांच होनी चाहिए।

​नवजात शिशु को पीलिया क्‍यों होता है

प्रीमैच्‍योर बेबी, जिन शिशुओं को पर्याप्‍त ब्रेस्‍ट मिल्‍क या फॉर्मूला नहीं मिल पाता, जिन बच्‍चों का ब्‍लड टाइप अपनी मां के ब्‍लड टाइप के अनुकूल नहीं होता है, उनमें न्‍यूबॉर्न जॉन्डिस का खतरा ज्‍यादा रहता है।

इसके अलावा लिवर में दिक्‍कत, इंफेक्‍शन, एंजाइम की कमी और शिशु की लाल रक्‍त को‍शिकाओं में असामान्‍यता आने की वजह से भी न्‍यूबॉर्न जॉन्डिस होता है।


​न्‍यूबॉर्न जॉन्डिस के लक्षण

पीलिया का सबसे पहला लक्षण स्किन और आंखों का पीला होना है। जन्‍म के दो से चार दिनों के अंदर स्किन और आंखों का रंग पीला होना शुरू हो सकता है। इसके बाद शरीर के अन्‍य अंग पीले होते हैं।

आमतौर पर जन्‍म के बाद 3 से 7 दिनों के अंदर बिलरूबिन का लेवल सबसे ज्‍यादा होता है। शिशु की स्किन को हल्‍के से दबाने पर अगर स्किन का रंग पीला हो रहा है, तो यह पीलिया का संकेत हो सकता है।


​डॉक्‍टर को कब दिखाएं

कुछ मामलों में किसी अन्‍य स्‍वास्‍थ्‍य समस्‍या की वजह से पीलिया हो सकता है, जिसका पता लगाना जरूरी है। गंभीर पीलिया होने से बिलरूबिन के दिमाग तक पहुंचने का खतरा भी बढ़ जाता है जिससे परमानेंट ब्रेन डैमेज हो सकता है।

अगर पीलिया फैल रहा है, शिशु को 100 डिग्री फारेनहाइट से ज्‍यादा बुखार है, उसके शरीर का पीला रंग बढ़ता जा रहा है, शिशु दूध नहीं पी रहा है, उसे थकान लग रही है और वो तेज से रो रहा है तो आपको तुरंत डॉक्‍टर को दिखाना चाहिए।

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