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किस सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ में मरीज के लिठखतरनाक हो जाता है डेंगू, उस वकà¥à¤¤ ये होते हैं लकà¥à¤·à¤£!
डेंगू का पà¥à¤°à¤•ोप लगातार बढ़ता जा रहा है. डेंगू के मरीजों के साथ बीमारी की वजह से होने वाली मौत के आंकड़ें à¤à¥€ लगातार बढ़ते जा रहे हैं. इसलिठइस वकà¥à¤¤ डेंगू से बचाव करना बहà¥à¤¤ जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ जरूरी है. आपने देखा होगा कि डेंगू में कई लोग तो आसानी से ठीक हो जा रहे हैं, लेकिन मरीजों की हालत खराब हो जाती है. इसलिठये जानना जरूरी है कि डेंगू किस वकà¥à¤¤ आपकी हेलà¥à¤¥ के लिठजानलेवा हो सकता है और सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ में कà¥à¤¯à¤¾ कà¥à¤¯à¤¾ लकà¥à¤·à¤£ होते हैं…
आप à¤à¥€ इन लकà¥à¤·à¤£à¥‹à¤‚ के बारे में जानकर समठसकते हैं कि किस वकà¥à¤¤ डेंगू खतरनाक हो जाता है और à¤à¤µà¤¿à¤·à¥à¤¯ में कà¤à¥€ à¤à¥€ इस परिसà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ का सामना होने पर इलाज करवाया जा सकता है. तो आइठजानते हैं कि आखिर डेंगू कब मरीज के लिठखतरनाक हो जाता है और उस सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ में मरीज के शरीर में कà¥à¤¯à¤¾ कà¥à¤¯à¤¾ लकà¥à¤·à¤£ दिखाई देते हैं…
ये तो आप जानते हैं डेंगू किस तरह से फैलता है और इसके लकà¥à¤·à¤£ कà¥à¤¯à¤¾ होते हैं. लेकिन, सवाल ये है कि आखिर कैसे पता लगाया जाठकि डेंगू अब सीरियस हालत तक पहà¥à¤‚च गया है यानी अब जलà¥à¤¦ से जलà¥à¤¦ à¤à¤•à¥à¤¸à¤Ÿà¥à¤°à¤¾ टà¥à¤°à¥€à¤Ÿà¤®à¥‡à¤‚ट की आवशà¥à¤¯à¤•ता है. à¤à¤¸à¥‡ में आज हम आपको डेंगू की सà¥à¤Ÿà¥‡à¤œ के बारे में बता रहे हैं, जिससे आप समठजाà¤à¤‚गे कि डेंगू अब खतरनाक सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ में है.
कितने दिन का होता है डेंगू?
जिस दिन डेंगू वायरस से संकà¥à¤°à¤®à¤¿à¤¤ कोई मचà¥à¤›à¤° किसी वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ को काटता है तो उसके करीब 3-5 दिनों बाद à¤à¤¸à¥‡ वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ में डेंगू बà¥à¤–ार के लकà¥à¤·à¤£ पà¥à¤°à¤•ट हो सकते हैं. यह संकà¥à¤°à¤¾à¤®à¤• काल 3-10 दिनों तक à¤à¥€ हो सकता है.
डेंगू की सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿?
à¤à¤• तरह से डेंगू तीन पà¥à¤°à¤•ार के होते हैं, जिसमें à¤à¤• तो सामानà¥à¤¯ डेंगू हैं और दूसरे डेंगू खतरनाक होते हैं. तीन तरह के डेंगू में कà¥à¤²à¤¾à¤¸à¤¿à¤•ल डेंगू, डेंगू हमरेडिक बà¥à¤–ार (DHF) और डेंगू शॉक सिंनà¥à¤¡à¥à¤°à¥‹à¤® (DSS) शामिल हैं.
– कà¥à¤²à¤¾à¤¸à¤¿à¤•ल (साधारण) डेंगू बà¥à¤–ार में ठंड लगने के साथ अचानकल बà¥à¤–ार चढ़ना, सिर-जोड़ों में दरà¥à¤¦, आंखों के पिछले à¤à¤¾à¤— में दरà¥à¤¦ होना, अतà¥à¤¯à¤§à¤¿à¤• कमजोरी लगना, à¤à¥‚ख में बेहद कमी और मà¥à¤‚ह के सà¥à¤µà¤¾à¤¦ का खराब होना जैसे लकà¥à¤·à¤£ होते हं. लेकिन, इनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ सामानà¥à¤¯ माना जाता है और 5-7 दिन यह दिकà¥à¤•त होने के बाद रोगी टीक हो जाता है.
– फिर डीà¤à¤šà¤à¤« की सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ आती है, जब नाक, मसूड़ों से खून आना, शौच व उलà¥à¤Ÿà¥€ में खून आना, सà¥à¤•िन पर नीले-काले रंग के चिकतà¥à¤¤à¥‡ पड़ जाना आदि लकà¥à¤·à¤£ आने लग जाते हैं. इसके लिठटोरà¥à¤¨à¤¿à¤•े टेसà¥à¤Ÿ करवाया जाता है, जिससे इसके बारे में पता चल जाता है. इसके अलाव बà¥à¤²à¤¡ पà¥à¤²à¥‡à¤Ÿà¤²à¥‡à¤Ÿà¥à¤¸ कम होना à¤à¥€ शà¥à¤°à¥‚ हो जाता है.
– फिर बारी आती है डीà¤à¤¸à¤à¤¸ की. डीà¤à¤¸à¤à¤¸ में सामानà¥à¤¯ डेंगू के साथ कई दूसरे लकà¥à¤·à¤£ à¤à¥€ आ जाते हैं तो दिकà¥à¤•त हो जाती है. इस सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ में बैचेनी काफी जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ हो जाती है और तेज बà¥à¤–ार के बावजूद à¤à¥€ उसकी तà¥à¤µà¤šà¤¾ ठंडी महसूस होती है. इसके अलावा रोगी धीरे-धीरे होश खोने लगता है. अगर रोगी की नाड़ी देखी जाठतो वह तोज और कमजोर महसूस होती है. रोगी का बà¥à¤²à¤¡ पà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤° कम होने लगता है.
à¤à¤¸à¥‡ में अगर रोगी के ये लकà¥à¤·à¤£ आने लग जाठतो तà¥à¤°à¤‚त डॉकà¥à¤Ÿà¤° से संपरà¥à¤• करना चाहिà¤. साथी ही सामानà¥à¤¯ बà¥à¤–ार में à¤à¥€ डॉकà¥à¤Ÿà¤° की निगरानी में रहना चाहिठऔर शरीर में कोई à¤à¥€ लकà¥à¤·à¤£ आठतो तà¥à¤°à¤‚त डॉकà¥à¤Ÿà¤° से संपरà¥à¤• करना चाहिà¤. à¤à¤¸à¤¾ करके आप डेंगू का इलाज करवा सकते हैं और इसका इलाज संà¤à¤µ है.
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