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7 महीने के बच्चे के लिए खेल और गतिविधियां
उम्र के इस पड़ाव पर बच्चा काफी कुछ सीख चुका होता है। उसे चीजों को पकड़ना, बोलने का प्रयास करना, दूसरों की भावनाओं को समझना आ चुका होता है। ऐसे में उसकी खेल और गतिविधियां भी पहले से काफी बदल जाती हैं
ब्लॉक के साथ खेलना : सात माह के बच्चे चीजों को समझने लगते है। उनमें वस्तुओं को समझने और परखने की कला विकसित होने लगती है। इसलिए, वो ब्लॉक के साथ खेलना पसंद करते हैं। यह नन्हे-मुन्ने बच्चों के लिए एक प्रकार की पज्जल गेम होती है ।
पिक्चर गेम : उम्र के इस पड़ाव पर बच्चे में कई तरह के परिवर्तन देखने को मिलते हैं। उनकी उभरती प्रतिभा और बदलावों को देखते हुए उन्हें पिक्चर गेम खेलने के लिए प्रेरित किया जा सकता है। कारण यह है कि इस दौरान बच्चा चटकीले रंगों और चित्रों के प्रति आकर्षित होता है। बच्चा इस खेल के माध्यम से देखने के कौशल को थोड़ा और विकसित करने की कोशिश करता है )।
कॉलिंग गेम : इस दौरान बच्चों में चीजों को याद रखने की क्षमता बढ़ जाती है। वे चीजों के साथ कुछ खास शब्दों को पहचानने लगते हैं। इन शब्दों में उनका और उनके माता-पिता का नाम भी शामिल होता है। इस कारण वे इन शब्दों को पुकारे जाने पर प्रतिक्रया देते हैं ।
इसे इस तरह से समझा जा सकता है कि अगर आप अपने बच्चे का नाम पुकार कर कहीं छिप जाते हैं, तो वह आपको ढूंढने की कोशिश करता है। वहीं, वापस सामने आ जाने पर वह खिलखिलाकर अपनी खुशी प्रकट करता है। बाद में वह इसी गतिविधि को बार-बार करने के लिए आपको प्रेरित करता है।
मिरर गेम : इस दौरान बच्चों को मिरर में बार-बार देखना काफी पसंद आता है। वे मिरर में झांक कर यह अनुमान लगाने की कोशिश करते हैं कि उसमें दिखने वाला बच्चा वाकई में है या नहीं। धीरे-धीरे वो यह समझने लगते हैं कि मिरर में जो उन्हें दिखाई देता है, वह उनकी वास्तविक दुनिया का ही प्रतिबिम्ब है।
खाना चखने का खेल : खाना चखना भी उनके लिए इस दौरान एक खेल की तरह होता है। वह इस गतिविधि को बार-बार दोहराते हैं। उनके द्वारा किया जाने वाला यह कार्य उन्हें भोजन के अलग-अलग स्वादों की जानकारी हासिल कराता है
आह-बू : यह खेल 7 माह के बच्चों को काफी लुभाता है, क्योंकि आप इसमें अपने चेहरे को जल्दी नीचे ले आते हैं।
पीक-ए-बू : यह एक ऐसा खेल है, जिसमें आप अपने चेहरे को किसी कपड़े या किताब से छिपाते हैं। बाद में जब आप कपड़े या किताब को हटाकर बच्चे का नाम पुकारते हैं, तो वह बहुत खुश होता है। यह खेल भी बच्चे को काफी लुभाता है। इस खेल में बच्चे को अपना नाम याद रखने के साथ-साथ किसी भी अधूरे चित्र के पूरे भाग की कल्पना करने की क्षमता विकसित होती है मानसिक विकास
मानसिक विकास की बात करें, तो 7 माह के दौरान बच्चे में कई परिवर्तन देखे जाते हैं। ये परिवर्तन इस बात की ओर इशारा करते हैं कि बच्चा विकास की ओर धीरे-धीरे कदम बढ़ा रहा है। आइए, इन परिवर्तनों को हम विस्तार से जानते हैं।
बोलने का प्रयास : उम्र के इस पड़ाव में बच्चे लोगों से बात करने की कोशिश करते हैं। दूसरों को अपनी ओर आकर्षित करने के लिए तरह-तरह की आवाजें निकालते हैं। खासकर दो अक्षरों से बनने वाले शब्दों को बोलने लगते हैं। वहीं, जिन शब्दों को वो बोल पाने में समर्थ नहीं होते, उन्हें बुदबुदा कर अपनी प्रतिक्रिया देते हैं।
जिज्ञासु : 7वें महीने में बच्चे के अंदर चीजों को जानने की रुचि पैदा होती है। इस दौरान बच्चा हर नई या पुरानी चीज को छूकर या चाटकर उसकी बनावट, आकार व स्वाद आदि को जानने का प्रयास करता है।
निर्देशों को समझना : इस दौरान बच्चे इशारों या फिर निर्देशों को समझने और मानने लगते हैं। अगर माता-पिता नाराजगी में ‘न’ या ‘नहीं’ बोलते हैं, तो बच्चा रुक कर उनके चेहरे के हाव-भाव को समझने की कोशिश करता है (4)।
चीजों के ट्रैक करना : 7 माह के बच्चे वस्तुओं को ट्रैक करने में सक्षम हो जाते हैं। सामने किसी आकर्षक वस्तु के आने पर उसे गौर से देखते हैं। दिशा बदलने की स्थिति में भी वस्तु को एक टक निहारते रहते हैं।
वस्तुओं के महत्व को समझना : इस दौरान बच्चे में कुछ खास चीजों (खिलौने आदि) के प्रति लगाव बढ़ जाता है। वो रो कर या चीख कर उन चीजों को हासिल करने का प्रयास करते हैं। 7वें माह में बच्चों में देखी जाने वाली यह आदत प्रदर्शित करती है कि उनमें वस्तुओं के महत्व को समझने की योग्यता का विकास हो जाता है।
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