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सात माह की उम्र में शिशु क्या कर सकता है?
आपके शिशु को अब काफी अच्छी तरह अपने हाथों का इस्तेमाल करना आ गया है। यह कौशल खाने के समय उपयोगी साबित होगा, क्योंकि अब वह दो हैंडल वाले कप को खुद पकड़कर पीना सीखेगा।
वह जल्द ही ताली बजाना भी सीख जाएगा और हो सकता है आपके गाना सुनाने पर वह ताली बजाकर आपकी प्रशंसा करे!
इस महीने आपका शिशु ज्यादा लार टपकाएगा। इस उम्र में बहुत से शिशुओं का पहला दांत निकलना शुरु हो जाता है। ठंडा टीथर या ठंडी साबुत कच्ची गाजर शिशु को मसूढ़ों के दर्द से राहत दे सकती है।
शिशु अपने पैरों पर अपना वजन कब संभाल लेगा?
अगर शिशु ने आपको या कुर्सी को पकड़ रखा हो, तो वह अपना कुछ वजन पैरों पर डाल सकता है। शिशु को उछलना भी बहुत अच्छा लगेगा। शिशु को अपने घुटनों पर खड़ा करें और बगल से सहारा देकर पकड़ते हुए उसे ऊपर व नीचे की तरफ हल्के से उछालें।
ऐसा करने से शिशु की टांगे मजबूत होंगी और उसे चलने के लिए तैयार होने में सहायता मिलेगी।
हो सकता है आपका शिशु अब बिना सहारे के बैठना शुरु कर दे। इस तरह उसके हाथ नई चीजों को खोजने और खिलौनों तक पहुंचने के लिए आजाद होंगे। वह पेट के बल लेटे हुए खुद ही अपनी बाजुओं के सहारे उठकर बैठ भी सकता है।
शिशु को गतिविधियों में तालमेल बनाने के लिए कैसे प्रोत्साहित कर सकती हूं?
आपका शिशु हाथों और उंगलियों से चीजों को पकड़ने, हिलाने और तोड़ने-मरोड़ने में अब बेहतर होता जा रहा है। इन सभी को बच्चों की फाइन मोटर स्क्ल्सि कहा जाता है। फाइन मोटर स्किल्स का मतलब छोटी-छोटी क्रियाओं जैसे कि अंगूठे और उंगली से चीजों को उठाने या किसी चीज को चखने या महसूस करने के लिए होठों और जीभ के इस्तेमाल से है।
आपका शिशु दोनों तरफ हैंडल वाले सिप्पी कप को पकड़कर उसमें से पीना शुरु कर सकता है। हालांकि, कहीं वह इसे गिरा न दें, इसलिए उसको अभी भी आपकी सहायता की जरुरत होगी। अब शिशु को सिप्पर से पीना सिखाना शुरु कर सकती हैं।
आपका शिशु एक हाथ से खिलौना निकाल कर आसानी से दूसरे हाथ में दे सकता है। वह शायद अब अपने दोनों हाथों को एक साथ जोड़ सकता है और ताली भी बजा सकता है।
जल्द ही आप पाएंगी कि आपके शिशु ने धीरे-धीरे शोरगुल मचाना बढ़ा दिया है। अब ये आवाजें सिर्फ शिशु के बुदबुदाने की ही नहीं होगी, बल्कि आपस में चीजें टकरानें की भी होंगी, जिसमें शिशु को खूब मजा आने लगेगा।
शिशु अपने इन नए कौशलों में निपुण हो सके, इसके लिए आप कोई खिलौना शिशु की पहुंच से दूर रख दें और देखें कि वह उसे पाने के लिए क्या प्रयास करता है। अगर शिशु खिलौने को न पकड़ पाए और रोने लगे, तो उसे खिलौने को पकड़ने के लिए प्यार से प्रेरित करती रहें।
अगर शिशु के लिए सबकुछ इतनी आसानी से नहीं मिलेगा, तो वह जल्द शारीरिक तौर पर आत्मविश्वासी बन सकेगा।
खिलौने तक पहुंचने के कुछ प्रयासों के बाद आपका शिशु शायद आगे झुककर उसे पकड़ ले और फिर से सीधा बैठ जाए। निस्संदेह, इससे शिशु को नई युक्तियां मिलेंगी और वह पहुंच से दूर रखी अन्य वस्तुओं को भी पकड़ने के तरीके ढूंढ़ना चाहेगा। शिशु किसी चीज को पाने के लिए और अधिक प्रयास करेगा।
शिशु जब पलटकर अपने पेट के बल आना सीख लेता है, तो वह पैराशूट से गिरने वाले मुद्रा में आ सकता है। यानि कि वह अपने सिर और टांगों को जमीन से ऊपर उठा लेता है। इसके बाद वह अपने पेट के बल कमांडों की तरह सरकना (कमांडो क्रॉल) शुरु कर सकता है। यहां से फिर वह अपने हाथों और घुटनों के बल उठकर आगे और पीछे की तरफ हिलने लग सकता है।
इस मुद्रा से शायद आपका शिशु अब घुटनों के बल चलना सीख लेगा। मगर, घुटनों के बल चलते समय शायद वह पहले पीछे ही ओर चलने लगे, जिस वजह से वह कुछ निराश हो सकता है। लेकिन जल्द ही वह आगे बढ़ना सीख लेगा।
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