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बच्चे को सिर्फ इतनी मात्रा में देना चाहिए विटामिन ए
बच्चों के लिए विकास के लिए विटामिन ए बहुत जरूरी होता है। आप डायट में विटामिन ए से प्रचुर खाद्य पदार्थों को शामिल कर बच्चे को स्वस्थ और तंदुरुस्त कर सकते हैं।
vitamin a
विटामिन ए फैट घुलनशील विटामिनों में से एक है जो आहार में दो रूपों में मिलता है रेडिनॉएड और कैरोटीनोइड। पशु से मिलने वाले उत्पादों में रेटिनॉइड होता है जबकि पौधों से मिलने वाली चीजों में कैरोटीनोइड होता है।
ये दोनों ही शरीर की विभिन्न क्रियाओं में मदद करता है। शिशु की विटामिन ए की जरूरत को कई तरह के खाद्य पदार्थों से पूरा किया जा सकता है।
बच्चों के लिए क्यों जरूरी है विटामिन ए
विटामिन ए एक ऐसा जरूरी विटामिन है जो शरीर खुद नहीं बना सकता है इसलिए आहार में विटामिन ए युक्त चीजों को शामिल करना जरूरी है। ये माइक्रोन्यूट्रिएंट शिशु के विकास में मदद करता है। इससे दांत, हड्डियां और नरम ऊतकों को स्वस्थ रखने में मदद मिलती है। आंखों को ठीक तरह से कार्य करने में मदद करता है। इसमें एंटीऑक्सीडेंट गुण भी हैं जो इम्यून सिस्टम को स्वस्थ बनाए रखते हैं। दिल, फेफड़ों, किडनी और अन्य अंगों के कार्य में विटामिन ए मददगार है।
छह महीने से लेकर दो साल के बच्चे को इस तरह बनाकर खिलाएं दलिया, पोषण और स्वाद से भरपूर
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सामग्री : एक चम्मच नमक, आधा कटोरी मटर, आधा कटोरी टमाटर, आधा कटोरी गाजर और एक कटोरी दलिया। दो चम्मच घी, कढ़ाई और तीन से पांच कप पानी।
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गैस पर कढ़ाई रखें और उसमें दो चम्मच घी डालें।घी गर्म होने पर आपको इसमें दलिया डालना है। दलिये में पानी डालकर 20 मिनट के लिए भिगो दें। इसके बाद इसका उपयोग करें।दलिये को घी में डालकर अच्छी तरह से भून लें। इसमें दो से तीन मिनट का समय लगेगा।अब इसमें मटर, कटा हुआ टमाटर और गाजर डालें। आप अपनी पसंद के अनुसार कोई भी सब्जी इसमें डाल सकते हैं।
धीमी आंच पर पांच मिनट के लिए इसे पकने दें। इसके बाद इसमें एक चम्मच नमक डालें और मिक्स करें।अब तीन कप पानी डालकर पकने के लिए ढक कर रख दें।कुछ देर बाद अगर दलिया कच्चा लग रहा है तो इसमें और पानी मिला सकते हैं।मटर के दानों को मैश कर लें ताकि बच्चे के गले में ये अटके नहीं।
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दलिया होल व्हीट से बनता है और इसमें प्रचुर मात्रा में फाइबर होता है और पाचन तंत्र को दुरुस्त रखता है। दलिये में अघुलनशील फाइबर होता है जो शिशु के पाचन को ठीक रखता है और कब्ज से बचाता है।
इसमें प्रोटीन भी होता है और कार्बोहाइड्रेट से खूब एनर्जी भी मिलती है। इसके अलावा शरीर दलिये को धीरे धीरे सोखता है जिससे बच्चे का पेट लंबे समय तक भरा रहता है। आप छह महीने के बाद शिशु को दलिया खिला सकती हैं।
बच्चों के लिए विटामिन ए
हर बच्चे को अलग मात्रा में विटामिन ए की जरूरत होती है। हालांकि, उम्र के आधार पर यह निर्णय लिया जा सकता है कि बच्चे को कितनी मात्रा में विटामिन ए चाहिए। 3 साल से कम उम्र के बच्चों को 300 माइक्रोग्राम विटामिन ए रोजाना चाहिए होता है।
चार साल की उम्र तक और आठ साल तक के बच्चों को रोजाना विटामिन ए चाहिए होता है। नौ साल से अधिक लेकिन 14 साल से कम उम्र के बच्चों को रोजाना 600 माइक्रोग्राम विटामिन की चाहिए होता है।
किसमें होता है विटामिन ए
कई तरह खाद्य पदार्थों में विटामिन ए होता है। हरी पत्तेदार सब्ज्यिों या गहरे लाल या संतरी रंग की सब्जियों में प्रचुर मात्रा में विटामिन ए होता है। इसलिए ही बच्चों को पालक खिलाने की सलाह दी जाती है। गाजर में भी विटामिन ए पाया जाता है। इसमें बीटा कैरोटीन होता है। आप रोज सलाद में गाजर खा सकते हैं।
रोज दूध पीने से अधिक मात्रा में विटामिन ए मिलता है। इसके अलावा चीज, अंडे में भी विटामिन ए होता है। मांसाहार में मीट से बनी चीजें, मछली और कॉड लिवर ऑयल में विटामिन ए होता है।
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बच्चों में विटामिन ए की कमी
संतुलित आहार की कमी या लिवर से जुड़े विकारों के कारण विटामिन ए की कमी या हाइपोविटामिनोसिस ए हो सकता है। शरीर में विटामिन कम होने पर हल्की थकान, रूखी त्वचा, रैशेज, एक्ने, रूखे बाल, बाल झड़ने, बार-बार इंफेक्शन होना, एनीमिया का अधिक खतरा, धीमा विकास होना, गले और छाती में इंफेक्शन, घाव न भरने जैसे संकेत मिलते हैं।
यदि गंभीर रूप से विटामिन ए की कमी हो तो आंखों में धुंधलापन, तेज रोशनी से आंखें चुंधियाना, आंखों के सफेद हिस्सों पर पैचेज, रात में दिखाई न देना, आंखों में गंभीर रूप से ड्राईनेस जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। बच्चे में विटामिन ए की कमी के संकेत दिखने पर बाल रोग चिकित्सक को दिखाएं।
बच्चे को आप डॉक्टर की सलाह पर सप्लीमेंट भी दे सकते हैं। यदि डायट से बच्च्चे के आहार में विटामिन एक की पूर्ति न हो पाए तो सप्लीमेंटस से इसे पूरा किया जा सकता है।
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