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शिशु की स्किन बहुत नाजुक और मुलायम होती है। गर्भ से बाहर आने के बाद बाहर के वातावरण में एडजस्‍ट होने में शिशु को समय लगता है। उसकी बहुत ज्‍यादा पतली स्किन अभी विकसित ही हो रही होती है। इस समय में बच्‍चे की स्किन टोन में बदलाव दिखना सामान्‍य बात है।
वैसे तो बच्‍चे की रंगत, उसके मां-बाप पर निर्भर करती है लेकिन कुछ बाहरी कारकों जैसे कि केमिकल युक्‍त स्किन केयर प्रोडक्‍ट्स के इस्‍तेमाल, स्किन एलर्जी और बाहरी वातावरण के संपर्क में आना भी अहम भूमिका निभाते हैं। इसलिए आपको अपने शिशु की नाजुक त्‍वचा की खासतौर पर शुरुआती कुछ सालों में खास देखभाल करनी चाहिए।

यहां हम आपको कुछ ऐसे घरेलू उपाय बता रहे हैं जिनकी मदद से नैचुरली शिशु की स्किन टोन को बेहतर किया जा सकता है।
कच्‍चे दूध में हल्‍दी या बेसन मिलाकर शिशु के शरीर पर लगाएं और 5 से 10 मिनट के बाद इसे साफ और सूती कपड़े से हटा दें। दूध में विटामिन ए, डी, बी12, लैक्टिक एसिड और बायोटिन के साथ कई अन्‍य पोषक तत्‍व भी मौजूद होते हैं।

य‍ह नैचुरल क्‍लींजर की तरह काम करता है जिससे स्किन हाइड्रेट रहती है। हल्‍दी में एंटी-बैक्‍टीरियल और एंटी-इंफ्लामेट्री गुण होते हैं जो रंगत को निखारने का काम करते हैं। बेसन से भी स्किन पर तुरंत ग्‍लो आता है।
दही में टमाटर के गूदे को मिलाकर शिशु की स्किन की मालिश करें। जिन हिस्‍सों पर आपको पिगमेंटेशन दिख रही है, उन हिस्‍सों पर जरूर मसाज करें। दही स्किन को हाइड्रेट करती है और टमाटर नैचुरल ब्‍लीचिंग एजेंट का काम करता है। इससे कोशिकाएं पुनर्जीवित होती है और स्किन से धूल और मिट्टी निकलती है।
यदि शिशु की स्किन पर रैशेज, खुजली, जलन या एलर्जी हो गई है तो आप उस पर एलोवेरा जेल लगा सकती हैं। इसके औषधीय गुण स्किन ही हर तरह की परेशानी को दूर करते हैं।

आप एलोवेरा जेल में दही, बेसन, शहद या नारियल तेल मिलाकर शिशु की त्‍वचा पर लगा सकती हैं। आप चाहें तो एलोवेरा जेल को शिशु की स्किन पर सीधा भी लगाया जा सकता है। हालांकि, इससे पहले डॉक्‍टर से एक बार बात करना बेहतर होगा।

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