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1.कपालभाति
1.सुखासन में बैठ जाएं और आंखें बंद कर लें। 2.दोनों नॉस्ट्रिल से गहरी सांस भीतर लें। सीना फूलेगा। 3.अब सांस को बलपूर्वक पूरी तरह से बाहर निकाल दें। 4.सांस को बलपूर्वक बाहर निकालना है और पूरे आराम के साथ भीतर लेना है। इस तरह से 20 सांसें बिना रुके लेनी और निकालनी है। यह कपालभाति का एक राउंड हुआ। हर राउंड के बाद कुछ लंबे गहरे सांस लें और छोड़ें और उसके बाद दूसरे राउंड पर जाएं। ऐसे तीन राउंड कर सकते हैं।
फायदे 1. कफ संबंधी विकारों को दूर करने में बहुत सहायक है। 2.सर्दी, जुकाम, अस्थमा, ब्रोंकाइटिस को ठीक करता है।
कौन न करें -जिन लोगों को ह्रदय रोग हैं, चक्कर आते हैं, वर्टिगो है, हाई बीपी रहता है, मिर्गी, माइग्रेन, हर्निया और गैस्ट्रिक अल्सर है, वे इसे न करें।
2. अनुलोम विलोम (नाड़ी शोधन प्राणायाम)
1. सबसे पहले सुखासन में बैठ जाएं। आंखें बंद कर लें और सिर व रीढ़ की हड्डी को सीधा रखें। 2. बाएं हाथ की हथेली को ज्ञान मुद्रा (देखें चित्र) में बाएं घुटने पर रख लें। 3. दाएं हाथ की अनामिका और सबसे छोटी उंगली को मिलाकर बाएं नॉस्ट्रिल पर रखें और अंगूठे को दाएं वाले नॉस्ट्रिल पर लगा लें। तर्जनी और मध्यमा को मिलाकर मोड़ लें। 4. अब बाएं नॉस्ट्रिल से सांस भरें और उसे अनामिका और सबसे छोटी उंगली को मिलाकर बंद कर लें। फौरन ही दाएं नॉस्ट्रिल से अंगूठे को हटाकर सांस बाहर निकाल दें। अब दाएं नॉस्ट्रिल से सांस भरें और अंगूठे से उसे बंद कर दें। इस सांस को बाएं नॉस्ट्रिल से बाहर निकाल दें। यह एक राउंड हुआ। ऐसे 5 राउंड करें।
फायदे 5. तनाव और एंजायटी को कम करता है और प्राण शक्ति को बढ़ाता है। 6. कफ से संबंधित गड़बड़ियों को दूर करता है। 7. चित्त को शांत करता है और एकाग्रता को बढ़ाता है। 8. दिल को स्वस्थ रखता है, ब्लड सर्कुलेशन को बेहतर करता है, फेफड़ों को ठीक रखता है और पाचन क्रिया को दुरुस्त करता है।
कौन न करें - इसे सभी लोग कर सकते हैं।
2. उज्जयी प्राणायाम
1. किसी भी आरामदायक आसान में बैठ जाएं। सुखासन में बैठना ठीक है। 2. आंखें बंद कर लें और दोनों नॉस्ट्रिल्स से हल्के हल्के लंबी सांस भरें और निकालें। ध्यान यह रखना है कि सांस को भरते और निकालते वक्त गले की मांसपेशियां सिकुड़ी हुई अवस्था में हों, जिससे एयर पैसेज छोटा हो जाए। ऐसी स्थिति में सांस लंबी और गहरी होगी। गले द्वारा पैदा किए जा रहे अवरोध की वजह से सांस लेने और बाहर निकलने की आवाज होगी। फायदे 3. इस प्रक्रिया में पैदा होने वाली ध्वनि मन को शांत करती है। ब्लड प्रेशर कंट्रोल करने में मदद मिलती है और हार्ट रेट कम होता है। नींद न आने और माइग्रेन में भी यह फायदेमंद है। 4. अस्थमा और टीबी को ठीक करने में मददगार है।
कौन न करें 1. जिन लोगों को दिल की बीमारी हैं।
3. भ्रामरी प्राणायाम
1. सुखासन में बैठ जाएं और आंखें बंद कर लें। 2. दोनों हाथों को चेहरे पर लाएं। दोनों अंगूठे दोनों कानों में जाएंगे, तर्जनी उंगली आंखों के ऊपर रखें, मध्यमा उंगली नाक के पास, अनामिका होंठ के ऊपर और सबसे छोटी उंगली होंठ के नीचे रहेगी। इसे शनमुखी मुद्रा कहते हैं। 3. नाक से गहरा और लंबा सांस लें। 4. अब भरे गए सांस को भंवरे के गूंजने की आवाज करते हुए बाहर निकालें। यह 1 राउंड हुआ। इस तरीके से 5 राउंड कर लें। बाद में बढ़ा भी सकते हैं।
फायदे
1. गुस्सा और बेचैनी को कम करता है और तनाव से छुटकारा दिलाता है। मन शांत हो जाता है।
कौन न करें
1. जिन लोगों को नाक या कान का इंफेक्शन है।
4. भस्त्रिका प्राणायाम
1. किसी भी आरामदायक आसन में बैठ जाएं। 2. दोनों नॉस्ट्रिल्स से पूरी तेजी के साथ सांस अंदर लें। ऐसा महसूस हो जैसे फेफड़ों में सांस पूरा भर गया है। इसके फौरन बाद पूरी ताकत के साथ सांस को बाहर निकाल दें। भस्त्रिका प्राणायाम में सांस लेते हुए और निकालते हुए पूरी ताकत लगाना जरूरी है। बलपूर्वक सांस होना चाहिए। 3. एक बार सांस भरना और निकालना, इस तरह के 20 राउंड लगातार लगाएं और उसके बाद कुछ देर आराम करें और फिर 20 राउंड का ही दूसरा सेट लगाएं। ऐसे तीन सेट लगा सकते हैं।
फायदे-
1. शरीर के टॉक्सिंस को बाहर निकालने में मददगार है और सांस संबंधी बीमारियों को ठीक करता है। 2. शरीर में ऑक्सिजन की सप्लाई को बेहतर बनाता है और रक्त को शुद्ध करता है। कौन न करें 3. जिन लोगों को ह्रदय रोग हैं, हर्निया है और हाईबीपी है। 4. गर्मियों में इसे न करें।
5. शीतली प्राणायाम
1. किसी भी आरामदायक आसन में बैठ जाएं। जीभ के टिप को नीचे वाले होंठ पर रख लें और उसे रोल करें। 2. मुंह से सांस लें और सांस को रोककर रखें। 3. अब मुंह को बंद कर लें और नाक से सांस बाहर निकाल दें। 4. यह एक राउंड हुआ। शुरुआत में दो से तीन राउंड कर सकते हैं। बाद में इसे 15 तक बढ़ाया जा सकता है।
फायदे-
1. शरीर को ठंडा रखने में मददगार है। 2. एसिडिटी और हाइपरटेंशन को ठीक करता है।
कौन न करें
1. सर्दी से पीड़ित लोगों को नहीं करना चाहिए। इस प्राणायाम को सर्दियों के मौसम में नहीं करना चाहिए।
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