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महिलाओं में होने वाले पाà¤à¤š बड़े कैंसर
बà¥à¤°à¥‡à¤¸à¥à¤Ÿ या सà¥à¤¤à¤¨ कैंसर
कैंसर विशेषजà¥à¤žà¥‹à¤‚ का कहना है कि à¤à¤¾à¤°à¤¤ में अब यà¥à¤µà¤¾ महिलाओं में à¤à¥€ सà¥à¤¤à¤¨ कैंसर के मामले सामने आ रहे हैं.
रोग और कैंसर विशेषजà¥à¤ž डॉ सà¥à¤µà¤¸à¥à¤¤à¤¿ बताती हैं कि सà¥à¤¤à¤¨ कैंसर जेनेटिक होता है यानी अगर परिवार में किसी महिला को सà¥à¤¤à¤¨ कैंसर हà¥à¤† होता है, तो à¤à¤¸à¥‡ में वो जीन अगली पीढ़ी में आ सकते हैं. यà¥à¤µà¤¾ महिलाओं में ये सà¥à¤¤à¤¨ कैंसर का कारण बनते हैं.
à¤à¤¾à¤°à¤¤ में सà¥à¤¤à¤¨ कैंसर को लेकर कई वरà¥à¤·à¥‹à¤‚ से जागरà¥à¤•ता अà¤à¤¿à¤¯à¤¾à¤¨ चलाठजा रहे हैं, जिनमें ये à¤à¥€ बताया जाता है कि कैसे महिलाà¤à¤‚ घर पर रहकर à¤à¥€ इसकी जाà¤à¤š कर सकती है.
18 साल की उमà¥à¤° के बाद हर लड़की ख़à¥à¤¦ ये जाà¤à¤š कर सकती है.
माहवारी ख़तà¥à¤® होने के बाद अपनी चार उंगलियों से सà¥à¤¤à¤¨ में गाà¤à¤ की जाà¤à¤š करें. कांख को दबाकर गाà¤à¤ की जाà¤à¤š करें.
निपल को दबाकर देखें कि कà¥à¤› डिसà¥à¤šà¤¾à¤°à¥à¤œ (सà¥à¤°à¤¾à¤µ) तो नहीं निकल रहा.
अगर किसी लड़की या महिला के परिवार में बà¥à¤°à¥‡à¤¸à¥à¤Ÿ कैंसर का मामला पहले आ चà¥à¤•ा है, जिसमें माठको 35 की उमà¥à¤° में ही बà¥à¤°à¥‡à¤¸à¥à¤Ÿ कैंसर हà¥à¤† हो, तो à¤à¤¸à¥‡ में बेटी की जाà¤à¤š छह-सात साल पहले ही शà¥à¤°à¥‚ कर दी जाती है.
हर महिला को 40 साल की उमà¥à¤° के बाद मेमोगà¥à¤°à¤¾à¤«à¥€ करानी चाहिà¤.
अगर à¤à¤¸à¤¾ कà¥à¤› दिखे, तो तà¥à¤°à¤‚त जाà¤à¤š करानी चाहिà¤.
सरà¥à¤µà¤¾à¤‡à¤•ल कैंसर या गरà¥à¤à¤¾à¤¶à¤¯ गà¥à¤°à¥€à¤µà¤¾ कैंसर
महिलाओं में होने वाला दूसरा बड़ा कैंसर है. इसे बचà¥à¤šà¥‡à¤¦à¤¾à¤¨à¥€ के मà¥à¤à¤¹ का कैंसर à¤à¥€ कहा जाता है.
इस कैंसर का कारण हà¥à¤¯à¥‚मन पेपीलोमा वायरस (à¤à¤šà¤ªà¥€à¤µà¥€) होता है और विशेषजà¥à¤ž बताते हैं कि इस कैंसर की शत पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¶à¤¤ रोकथाम की जा सकती है.
टीकाकरण पर राषà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥€à¤¯ तकनीकी सलाहकार समूह ने सरà¥à¤µà¤¾à¤‡à¤•ल कैंसर से रोकथाम के लिठà¤à¤šà¤ªà¥€à¤µà¥€ वायरस के टीके को यूनिवरà¥à¤¸à¤² इमà¥à¤¯à¥‚नाइज़ेशन कारà¥à¤¯à¤•à¥à¤°à¤® में शामिल करने की सिफ़ारिश à¤à¥€ है.
इसमें कहा गया है कि 9-14 साल की किशोरियों को ये टीके दिठजाने चाहिà¤.
शà¥à¤°à¥à¤†à¤¤ में इस कैंसर के कोई लकà¥à¤·à¤£ नहीं होते, लेकिन अगर लकà¥à¤·à¤£ दिखें तो इसे नज़रअंदाज नहीं करना चाहिà¤.
इस वायरस को कैंसर बनने में लंबा वक़à¥à¤¤ लगता है और पेपसà¥à¤®à¤¿à¤¯à¤° टेसà¥à¤Ÿ के ज़रिठइसका पता चल सकता है.
ओवरियन या अंडाशय का कैंसर
ये कैंसर आख़िरी सà¥à¤¤à¤° यानी सà¥à¤Ÿà¥‡à¤œ तीन या चार में पता चल पाता है, इसलिठइसे 'साइलेंट कैंसर' à¤à¥€ कहा जाता है.
, "इस कैंसर का कोई लकà¥à¤·à¤£ नहीं होता. महिलाओं को आमतौर पर पेट फूलना, à¤à¥‚ख न लगना, उलà¥à¤Ÿà¤¿à¤¯à¤¾à¤ होना, गैस पास न कर पाना या शौच न जा पाने जैसी परेशानियाठपेश आती हैं. à¤à¤¸à¥€ समसà¥à¤¯à¤¾ उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ केवल à¤à¤• महीने के लिठहोती है. लेकिन जाà¤à¤š करवाने पर ये अंडाशय का कैंसर à¤à¥€ हो सकता है."
, "जब डॉकà¥à¤Ÿà¤° à¤à¤¸à¥€ महिलाओं की मेडिकल हिसà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥€ में जाते हैं, तो पता चलता है कि वो दो रोटी की जगह à¤à¤• रोटी खाती थीं, ज़à¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ हजम नहीं कर पाती थी और घरेलू इलाज ही करवाती थीं."
à¤à¤¸à¥‡ में वे सलाह देती हैं कि महिलाओं को हर साल अलà¥à¤Ÿà¥à¤°à¤¾à¤¸à¤¾à¤‰à¤‚ड करवा लेना चाहिठताकि अगर अंडाशय में सिसà¥à¤Ÿ हो तो पता चल जाठऔर इलाज समय से शà¥à¤°à¥‚ किया जा सके.
इसके अलावा महिलाओं में लिप, ओरल कैविटी और कोलोरेकà¥à¤Ÿà¤® यानी बड़ी आंत का कैंसर à¤à¥€ आम हैं, जो पà¥à¤°à¥à¤·à¥‹à¤‚ में à¤à¥€ पाया जाता है. इनके बारे में नीचे जानकारी दी जा रही है.
कैंसर की जाà¤à¤š
लिप, ओरल कैविटी कैंसर या मà¥à¤‚ह का कैंसर
हेड à¤à¤‚ड नेक सरà¥à¤œà¤¨ à¤à¤‚ड ऑनकोलॉजिसà¥à¤Ÿ बताते हैं कि लिप और ओरल कैविटी कैंसर 90 पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¶à¤¤ उन लोगों में पाया जाता है, जो तंबाकू का सेवन करते हैं.
इस कैंसर का मà¥à¤–à¥à¤¯ कारण तंबाकू (किसी à¤à¥€ पà¥à¤°à¤•ार से सेवन) और शराब पीना है.
ये कैंसर मà¥à¤‚ह के अंदर अलग-अलग जगहों जैसे गाल, जीà¤, जीठके नीचे का हिसà¥à¤¸à¤¾, तालू में हो सकता है. यहाठअलà¥à¤¸à¤° या छाला बन जाता है और जो दवाà¤à¤ खाने के बावजूद ठीक नहीं होता है.
"जैसे आपकी जीठकट जाठया दाà¤à¤¤ से मà¥à¤à¤¹ का हिसà¥à¤¸à¤¾ कट जाठऔर वो दवाà¤à¤ खाने के बाद à¤à¥€ तीन हफ़à¥à¤¤à¥‡ तक ठीक न हो तो ये चिंता का सबब बन जाता है. वहीं कई बार दांत ढीला हो कर टूट कर गिर जाना कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि वहाठघाव होता है."
इसके अलावा आपके मà¥à¤‚ह में कोई गà¥à¤°à¥‹à¤¥ हो जाठलेकिन कोई ज़रूरी नहीं है वो कैंसर हो लेकिन इसकी जाà¤à¤š करवा लेनी चाहिà¤. साथ ही कई बार मà¥à¤‚ह खोलने में दिक़à¥à¤•़त आने लगती है तो ये à¤à¥€ इस कैंसर का लकà¥à¤·à¤£ होता है."
इसके अलावा जब सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ बिगड़ने लगती है, तब घाव से ख़ून आना, आवाज़ में बदलाव होना, दरà¥à¤¦ की वजह से खाना खाने में दिक़à¥à¤•़त और वज़न घटने लगता है.
अगर à¤à¤¸à¥‡ संकेत दिखाई देते हैं और दवा लेने के बावजूद तीन हफ़à¥à¤¤à¥‡ तक ये ठीक नहीं होता है, तो डॉकà¥à¤Ÿà¤° की सलाह तà¥à¤°à¤‚त लेनी चाहिà¤.
लंग या फेफड़ों का कैंसर
इस कैंसर को लोग टीबी से à¤à¥€ जोड़ लेते हैं कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि इसमें मरीज़ को खाà¤à¤¸à¥€ की शिकायत ज़à¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ रहती है.
लेकिन अगर ये सारे लकà¥à¤·à¤£ तीन हफ़à¥à¤¤à¥‡ तक बने रहते हैं और दवा लेने के बावजूद असर न हो, तो डॉकà¥à¤Ÿà¤° बॉयोपà¥à¤¸à¥€ की सलाह देते हैं लेकिन इससे घबराना नहीं चाहिà¤.
इसके होने का मà¥à¤–à¥à¤¯ कारण धूमà¥à¤°à¤ªà¤¾à¤¨ है वहीं अब पà¥à¤°à¤¦à¥‚षण को à¤à¥€ इसके कारण के तौर पर देखा जा रहा है. ये कैंसर बढ़ी हà¥à¤ˆ अवसà¥à¤¥à¤¾ यानी तीसरे या चौथे सà¥à¤Ÿà¥‡à¤œ में ही पता चलता है.
इसोफैगस या खाने की नली का कैंसर
डॉकà¥à¤Ÿà¤°à¥‹à¤‚ के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° ये कैंसर 50 साल की उमà¥à¤° के बाद ही पता चलता है. इस कैंसर में खाना निगलने में दिक़à¥à¤•़त होने लगती है और बाद में कà¥à¤› पीने में à¤à¥€ परेशानी आने लगती है.
ये कैंसर à¤à¤¸à¥‡ लोगों को जà¥à¤¼à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ होने की आशंका रहती है, जिनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ लंबे समय से à¤à¤¸à¤¿à¤¡à¤¿à¤Ÿà¥€ की समसà¥à¤¯à¤¾ हो या मà¥à¤à¤¹ खटà¥à¤Ÿà¤¾ रहने की शिकायत होती है.
इसके अलावा ये लकà¥à¤·à¤£ हो सकते हैं..
पाचन की समसà¥à¤¯à¤¾
छाती में जलन
कà¥à¤› फà¤à¤¸à¤¾ हà¥à¤† महसूस होना
शराब पीते हैं और धूमà¥à¤°à¤ªà¤¾à¤¨ करते हैं उनमें ये कैंसर होने की आशंका ज़à¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ होती है.
पेट का कैंसर
गैसà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‹à¤‚ à¤à¤‚ड कैंसर सेंटर रीजेंसी हॉसà¥à¤ªà¤¿à¤Ÿà¤² लिमिटेड में जीआई सरà¥à¤œà¤°à¥€ विà¤à¤¾à¤— के पà¥à¤°à¤®à¥à¤– डॉ अà¤à¤¿à¤®à¤¨à¥à¤¯à¥‚ कपूर बताते हैं कि पेट या अमाशय का कैंसर जिसे गैसà¥à¤Ÿà¥à¤°à¤¿à¤• कैंसर à¤à¥€ कहा जाता है, पेट की लाइनिंग पर पाई जाने वाली कोशिकाओं में शà¥à¤°à¥‚ होता है.
इसके लकà¥à¤·à¤£ à¤à¥€ खाने की नली के कैंसर से मिलते-जà¥à¤²à¤¤à¥‡ होते हैं.
जिन मरीज़ों में कैंसर की वजह से बà¥à¤²à¥€à¤¡à¤¿à¤‚ग होती है, उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ ख़ून की उलà¥à¤Ÿà¥€ हो सकती है या उनके मल का रंग काला हो सकता है.इस कैंसर के पà¥à¤°à¤®à¥à¤– कारण शराब पीना, तंबाकू का सेवन और धूमà¥à¤°à¤ªà¤¾à¤¨ है. वहीं जंक फूड और कसरत न करना à¤à¥€ इस कैंसर का कारण बन सकता है.
जापान में पेट का कैंसर आमतौर पर देखा गया और इसका मà¥à¤–à¥à¤¯ कारण इस बीमारी की सà¥à¤•à¥à¤°à¥€à¤¨à¤¿à¤‚ग की सà¥à¤µà¤¿à¤§à¤¾ होना है, लेकिन à¤à¤¾à¤°à¤¤ में इस तरह के सà¥à¤•à¥à¤°à¥€à¤¨à¤¿à¤‚ग कारà¥à¤¯à¤•à¥à¤°à¤® नहीं है, इसलिठमरीज़ में जब लकà¥à¤·à¤£ दिखते हैं, तà¤à¥€ जाकर इस बीमारी का पता चल पाता है.
अगर ये कैंसर पेट तक ही सीमित रहते हैं यानी अरà¥à¤²à¥€ सà¥à¤Ÿà¥‡à¤œ में पता चल जाता है तो मरीज़ पूरी तरह से ठीक हो जाता है.
"ये बीमारी आज से 20 साल पहले हमें नाउमà¥à¤®à¥€à¤¦ कर देती थी लेकिन अब इतने सरà¥à¤œà¤¿à¤•ल इलाज संà¤à¤µ हो गठहैं कि लंबे समय तक मरीज़ जी सकता है."
धूमà¥à¤°à¤ªà¤¾à¤¨, शराब का सेवन, मोटापा, ज़à¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ नमक का खाना यानी पà¥à¤°à¥€à¤œà¤¼à¤°à¥à¤µà¥‡à¤Ÿà¤¿à¤µ वाला खाना लेना और सबà¥à¤œà¤¼à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ और फलों का कम सेवन इसके कारणों में गिने जाते हैं.
कोलोरेकà¥à¤Ÿà¤² या बड़ी आंत का कैंसर
इस कैंसर में आपके शरीर में ख़ून की कमी हो जाती हैं.
आमतौर पर महिलाओं में जहाठहीमोगà¥à¤²à¥‹à¤¬à¤¿à¤¨ 12-15 गà¥à¤°à¤¾à¤® डेसीलीटर होना चाहिà¤, वहीं पà¥à¤°à¥à¤·à¥‹à¤‚ में ये 13.5-17.5 गà¥à¤°à¤¾à¤® डेसीलीटर होना चाहिà¤.
इस कैंसर से पीड़ित वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ में à¤à¤¨à¥€à¤®à¤¿à¤¯à¤¾ की दिकà¥à¤•़त पेश आती है और इसमें ख़ून की अचानक आती है.
अगर टà¥à¤¯à¥‚मर बन जाता है तो शौच के वकà¥à¤¤ ख़ून आना, काला मल, कबà¥à¤œà¤¼ का होना या दसà¥à¤¤ लगना इसके लकà¥à¤·à¤£à¥‹à¤‚ में गिने जाते हैं.गैस बनना
पेट का फूलना
पेट में पानी बनना
पेट दरà¥à¤¦ अगर गंà¤à¥€à¤° सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ हो तो पेट में गाà¤à¤ à¤à¥€ बन जाती है.
कि ये बढ़ती उमà¥à¤° का कैंसर है, जो 50 वरà¥à¤· की उमà¥à¤° में होता है और बताते हैं और इसके कारणों के बारे में पता नहीं चल पाया है.
लेकिन à¤à¤• परिवार में अगर फ़रà¥à¤¸à¥à¤Ÿ डिगà¥à¤°à¥€ रिलेटिव यानी माà¤, पिता, सगे à¤à¤¾à¤ˆ या बहन हैं, तो उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ ये कैंसर होने का ख़तरा रहता है.
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