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इस सप्‍ताह में शिशु का विकास तेजी से होता है। इस सप्‍ताह में भ्रूण का आकार लगभग खसखस के बीज जितना होता है। इस समय भ्रूण का आकार काफी छोटा है और उसके आसपास एम्निओटिक फ्लूइड बन गया है। भ्रूण इस दौरान कोशिकाओं की तीन भिन्‍न परतों से बना है जिससे शरीर के विशेष अंगों का विकास होगा।
जल्‍द ही आपको कैल्शियम की बहुत जरूरत होगी इसलिए दूध, पनीर, दही जैसी चीजें खाइए। इसके अलावा आपको कब्‍ज से बचने के लिए पर्याप्‍त मात्रा में पानी पीना चाहिए। विटामिन सी वाले फल, हरी सब्जियां, फल, साबुत अनाज और दालों को अपनी डायट में शामिल करें ताकि पर्याप्‍त पोषण मिल सके। जंक या फास्‍ट फूड से दूर रहें। कॉफी से परहेज करें। अब से जो भी खाएं उस पर ध्‍यान दें।
स्‍वस्‍थ जीवनशैली अपनाएं, नशे वगैरह से दूर रहें। डॉक्‍टर ने जो फोलिक एसिड सप्‍लीमेंट दिया है उसे नियमित रूप से लेती रहें। तनाव से दूर रहें। हल्‍की-फुल्‍की कसरत करें लेकिन ज्‍यादा उछल-कूद से बचें। अभी कहीं यात्रा न करें। कोई भी दवा लेने से पहले अपने डॉक्‍टर से सलाह जरूर ले लें। शुरुआती सप्‍ताहों में पपीता, अनानास जैसे फल न खाएं जिनसे गर्भपात का खतरा बढ़ जाता है। पहले गर्भपात हुआ हो तो इस दौरान शारीरिक संबंधों से परहेज करें।

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