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MTP ACT (1971) में हुए संशोधन

MTP ACT (1971) के अनुसार, भारत में अबॉर्शन कानूनी (legal) है. हालांकि इसे बाद में संशोधित किया गया है. महिला को MTP ACT का पालन करते हुए गर्भपात का अधिकार मिला है. भारत में पहले कुछ मामलों में 20 हफ्ते तक अबॉर्शन कराने की अनुमति थी, लेकिन 2021 में इस कानून में संशोधन के बाद ये समय सीमा बढ़ाकर 24 हफ्ते तक की गई. इसके अलावा, कुछ खास केस में 24 हफ्ते के बाद भी अबॉर्शन कराने की अनुमति ली जा सकती है. भारत में अबॉर्शन को तीन श्रेणी में बांटा गया है.

1. प्रेग्नेंसी के 0 से 20 हफ्ते तक

अगर महिला मां बनने के लिए मानसिक तौर पर तैयार नहीं है या फिर कांट्रासेप्टिव मैथड या डिवाइस फेल हो चुका हो और महिला न चाहते हुए भी प्रेग्नेंट हो गई हो तो वो अबॉर्शन करवा सकती है. इसके लिए बस एक रजिस्टर्ड डॉक्टर की लिखित परमिशन जरूरी है.

2. प्रेग्नेंसी के 20 से 24 हफ्ते तक

अगर मां या बच्चे के मानसिक/शारीरिक हेल्थ को किसी तरह का खतरा है, तो महिला अबॉर्शन करा सकती है. हालांकि, ऐसे मामलों में दो डॉक्टरों की लिखित परमिशन जरूरी है.

3. प्रेग्नेंसी के 24 हफ्ते बाद

अगर महिला यौन उत्पीड़न या रेप का शिकार हुई है तो ऐसे केस में 24 हफ्ते बाद भी अबॉर्शन करवा सकती है. अगर गर्भवती माइनर हो, विकलांग हो, मानसिक रूप से बीमार हो तो भी अबॉर्शन करवा सकती है. अगर प्रेग्नेंसी के दौरान महिला का मेरिटल स्टेटस चेंज हो जाए (उसका तलाक हो जाए या विधवा हो जाए), तो भी अबॉर्शन करवा सकती है.

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