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गर्भावस्था के 36 वें हफ्ते अर्थात 9वें महीने में आ जाती हैं। डॉक्टर द्वारा निर्धारित तिथि भी इसी सप्ताह के आधार पर होती है। अब आपका बच्चा 36-40 सप्ताह के बीच कभी भी जन्म ले सकता है। हालांकि यह बहुत रोमांचक समय होता है लेकिन साथ ही साथ यह चिंता का समय भी हो सकता है।

36 सप्ताह की गर्भावस्था में भ्रूण विकास
आपके शिशु का वजन अब करीब 2.6 किलोग्राम हो चुका है। उसकी लंबाई अब 47.4 सें.मी. (18.7 इंच) से थोड़ी ज्यादा है, जो कि एक बड़े रोमेन लैटस (सलाद के पत्ते) जितनी है। इस सप्ताह के बाद से आपकी गर्भावस्था को पूर्ण अवधि (फुल टर्म) की गर्भावस्था कहा जाएगा, इसका मतलब है कि आपका शिशु अब किसी भी दिन जन्म लेने के लिए तैयार है। ध्यान रखें कि केवल पांच प्रतिशत शिशु ही अपने जन्म की नियत तिथि पर पैदा होते हैं।

शिशु के शरीर से बचे हुए रोएंदार लेनुगो बाल और वर्निक्स कैसिओसा झड़ना जारी रहते हैं। वर्निक्स कैसिओसा एक सुरक्षात्मक तत्व होता है, तो शिशु की त्वचा को ढके रखता है। शिशु इन बालों और त्वचा को निगल लेगा और अपनी आंतों में मिकोनियम के तौर पर संग्रहित कर लेगा। मिकोनियम काले या हरे रंग का चिपचिपा तत्व होता है। मिकोनियम ही शिशु का पहला मल होता है।

आपकी डॉक्टर अगले चेक-अप के दौरान आपके शिशु की अवस्था को जांचेंगी। इस बात की संभावना होती है कि आपका शिशु सफैलिक अवस्था में होगा, जिसका मतलब है कि उसका सिर नीचे की तरफ होगा। हो सकता है उसका सिर थोड़ा और नीचे की तरफ आपके श्रोणी क्षेत्र में आ गया हो, यानि कि वह जन्म के लिए तैयार है। इस अवस्था को शिशु का सिर एंगेज्ड होना बोलते हैं।

यदि ऐसा हो, तो आपको शायद अपना पेट थोड़ा नीचे की तरफ खिसका हुए लगेगा और आपको सांस लेने के लिए अब अधिक जगह मिल रही होगी। इसे 'लाइटनिंग' कहा जाता है। हालांकि, इसका मतलब है कि आपका शिशु जन्म के लिए तैयार है, मगर यह जरुरी नहीं है कि वह अभी जन्म लेगा।

यदि आपके शिशु का सिर नीचे श्रोणी क्षेत्र में अभी तक न आया हो, तो भी निराश न हों। कई शिशु प्रसव शुरु होने से पहले तक श्रोणी क्षेत्र में नहीं आते हैं।

36 सप्ताह गर्भवती होने पर क्या जानना जरुरी है
तीसरी तिमाही में पहला ग्रोथ स्कैन 28 से 32 सप्ताह की गर्भावस्था के बीच करवाया जाता है। प्रसव की नियत तिथि के आसपास, 36 से 40 सप्ताह के बीच एक अन्य ग्रोथ स्कैन और रंगीन डॉप्लर अध्ययन करवाया जा सकता है, जिसमें गर्भनाल की स्थिति पता लगाना, एमनियोटिक द्रव की मात्रा मापना, शिशु की सेहत और रक्तसंचार, अपरा की अवस्था, शिशु की अवस्था और वजन को जानना आदि को शामिल है।

अब आपके शिशु के जन्म का समय नजदीक आ रहा है और आपको अपना अस्पताल ले जाने वाला बैग तैयार करके रखना होगा। यहां जानें कि इस बैग में क्या-क्या सामान रखना चाहिए।

हर महिला का प्रसव का अनुभव अलग होता है। शिशु के जन्म के बाद आपको कैसा महसूस हो सकता है, इस बारे में आप हमारा यह लेख पढ़ सकती हैं।

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