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मुझे तीसरी तिमाही में अल्ट्रासाउंड की जरुरत क्यों होती है?
गर्भावस्था की तीसरी तिमाही में अल्ट्रासाउंड स्कैन करवाने का सबसे आम वजह यह पता करना होता है कि शिशु सामान्य ढंग से बढ़ रहा है या नहीं।

आपको गर्भावस्था के 28 से 32 सप्ताह के बीच ग्रोथ और फीटल वेलबींग स्कैन कराने के लिए कहा जाएगा। इससे डॉक्टर को पता चलेगा कि आपका शिशु किस तरह बढ़ रहा है।

आपको प्रसव की नियत तिथि के आसपास, 36 से 40 सप्ताह के बीच एक अन्य ग्रोथ स्कैन और रंगीन डॉप्लर अध्ययन करवाना होगा, जिसमें निम्न बातों का पता लगाया जाएगा:

गर्भनाल की स्थिति का पता लगाना
एमनियोटिक द्रव की मात्रा को मापना
अपरा की अवस्था और काल प्रभावन (मैच्योरिटी) को जांचना
शिशु की अवस्था और वजन को जानना
शिशु की सेहत और रक्तसंचार को जांचना
शिशु के संपूर्ण शरीर और महत्वपूर्ण अंगों जैसे कि मस्तिष्क और हृदय में रक्तसंचार को जांचना
यह आंकलन करना कि पिछले सीजेरियन के चीरे का निशान अब कैसा है

आपको अपनी तीसरी तिमाही में निम्न कारणों से अतिरिक्त स्कैन करवाने पड़ सकते हैं, जैसे कि:

आपका शिशु उतने अच्छे ढंग से या उतनी ज्यादा बार हिल-डुल नहीं रहा, जितना उसे करना चाहिए।
आपका शिशु ब्रीच (सिर ऊपर और नितंब नीचे की ओर होना), ओब्लीक (आड़ा यानि कि डायगनल होना) या ट्रांसवर्स (क्षैतिज) स्थिति में हो।
आपके गर्भ में जुड़वां या इससे अधिक शिशु पल रहे हैं।
पिछले स्कैन में गर्भनाल शिशु की गर्दन से लिपटी दिखाई दी थी।
एमनियोटिक द्रव की मात्रा सामान्य से कम या ज्यादा है।
आपका शिशु अपनी गर्भावधि उम्र के अनुसार छोटा या बड़ा लग रहा है।
आपको मधुमेह (डायबिटीज) या उच्च रक्तचाप (हाई ब्लड प्रेशर) या फिर यकृत से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याएं हैं।

यहां जानें कि कुछ महिलाओं को दूसरों की तुलना में ज्यादा स्कैन करवाने की जरुरत क्यों होती है।
तीसरी तिमाही के स्कैन में क्या पता चल सकता है?

इस तस्वीर में तीसरी तिमाही में गर्भस्थ शिशु का चेहरा दिखाई दे रहा है। इससे यह भी अंदाजा लगाया जा सकता है कि स्कैन के दौरान आप और क्या-क्या देख सकेंगी।

इस चरण पर होने वाले स्कैन से आपको निम्नलिखित चीजों का पता चल सकता है

शिशु की सेहत
यह शिशु के बायोफिजिकल प्रोफाइल स्कोर (बीपीएस या बीपीपी) से मापी जाती है। शिशु को स्कोर देने के लिए निम्नांकित चीजों का आंकलन किया जाता है:

सांस लेने की हरकतें
शरीर की हलचल
बॉडी टोन, यानि कि हाथों को खोलना व बंद करना, बाजुओं और टांगों को फैलाना और खिंचाव करना
एमनियोटिक द्रव की मात्रा
नॉन स्ट्रेस टेस्ट एनएसटी ताकि हलचल होने पर शिशु की हृदय गति में हाने वाले बदलावों को देखना

अल्ट्रासाउंड डॉक्टर स्कैन के जरिये शिशु को ये सब गतिविधियां करते हुए देखेंगे और शिशु को कुल 10 के स्कोर (मैनिंग्स स्कोर) में से नंबर देंगे। ज्यादा स्कोर आने का मतलब है कि आपका शिशु सही ढंग से विकसित हो रहा है।

कम स्कोर आने का मतलब यह हो सकता है कि आपके शिशु को अपरा से पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन नहीं मिल रही है। इससे शिशु का जन्म समय से पहले होने की संभावना बढ़ सकती है। मगर, ऐसा केवल इस वजह से भी हो सकता है कि स्कैन के समय आपका शिशु गहरी नींद में सो रहा हो। ऐसी स्थिति में डॉक्टर आपको शायद दोबारा स्कैन करवाने के लिए कहेंगे, ताकि यदि कोई समस्या हो तो उसका पता चल सके।

डॉक्टर डॉप्लर स्कैन भी करेंगी, जिसमें अपरा से शिशु तक पहुंच रहे रक्त की मात्रा और प्रवाह की जांच की जाएगी। डॉप्लर स्कैन में यह भी देखा जाएगा कि आपके शिशु का दिल सामान्य ढंग से धड़क रहा है या नहीं और अपरा (प्लेसेंटा) सही से काम कर रही है या नहीं।

आपके शिशु का पेट का घेरा
यदि ​शिशु के पेट का घेरा (एब्डोमिनल सर्कमफेरेंस-एसी) बड़ा हो, तो उसका पेट बढ़ा हुआ होगा! यह इस बात का संकेत हो सकता है कि उसे उसे पर्याप्त पोषण मिल रहा है, मगर कई बार यह माँ को मधुमेह होने का इशारा भी हो सकता है, खासकर जब एमनियोटिक द्रव सामान्य से ज्यादा हो (पॉलिहाइड्रेमनियोस)।

आपके रक्त शर्करा (ब्लड शुगर) के स्तर की जांच की जाएगी, क्योंकि गर्भावधि मधुमेह (जैस्टेशनल डायबिटीज) कई बार तीसरी तिमाही में विकसित हो जाती है। अगर आपको गर्भावधि मधुमेह है, तो भी चिंतित न हों, यह शिशु के जन्म के बाद आमतौर पर स्वत: ही दूर हो जाती है।

आपके खून में शर्करा का उच्च स्तर होने का मतलब है कि शिशु को भी अधिक शुगर मिल रही होगी। इसलिए आपको आहार संबंधी सलाह दी जाएगी, जिससे आपका शर्करा का स्तर कम हो सके।

सिर के औसत माप और छोटे पेट वाला शिशु भी एक छोटा स्वस्थ शिशु हो सकता है। हालांकि, कई बार यह पैटर्न इस बात का संकेत हो सकता है कि शिशु उचित ढंग से विकसित नहीं हो रहा है, खासकर कि यदि एमनियोटिक तरल सामान्य से कम हो (ओलिगोहाइड्रेमनियोस)। इस स्थिति को इंट्रा-यूटेरिन ग्रोथ रेस्ट्रिक्शन (आईयूजीआर) कहा जाता है। अगर इस स्थिति का अंदेशा हो, तो डॉप्लर स्कैन किया जा सकता है।

अपरा की स्थिति
अगर आपके एनॉमली स्कैन (टिफ्फा या अल्ट्रासाउंड लेवल II स्कैन) के समय आपकी अपरा नीचे की तरफ थी, तो इस बात की पूरी संभावना होती है कि अब तक वह ऊपर की ओर हो गई होगी और ग्रीवा के रास्ते से हट गई होगी। हालांकि, कुछ दुर्लभ मामलों में अपरा अभी भी ग्रीवा के पास या उसके ऊपर होती है।

अगर अपरा ग्रीवा के काफी नजदीक हो, तो इसे प्लेसेंटा प्रिविया कहा जाता है। अगर आपको प्लेसेंटा प्रिविया हो, तो आपको सीजेरियन ऑपरेशन ही कराना पड़ेगा।

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