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कब्ज क्या है और मुझे कैसे पता चलेगा कि मेरे बच्चे को कब्ज है?

जब मल त्यागने में कठिनाई या फिर करीब दो सप्ताह तक मल त्यागने में देरी होती है, तो इस समस्या को कब्ज कहा जाता है। वयस्कों और बच्चों को होने वाली कब्ज के लक्षण अलग-अलग हो सकते हैं। नीचे हम उन लक्षणों के बारे में बता रहे हैं, जिन्हें देखकर आप पता लगा सकती हैं कि आपका बच्चा कब्ज की समस्या से जूझ रहा है (1) :

कई दिनों तक शिशु का मल न त्यागना।

शिशु मल त्यागने के लिए जोर लगाए, जिस कारण कभी-कभी उसका चेहरा लाल हो सकता है।

जब शिशु मल त्यागते समय चिड़चिड़ा हो जाता है। यह इस बात का संकेत है कि उसे मल त्यागने में दर्द होता है।

सूखा और कठोर मल निकलना।

शिशु का पेट फूला हुआ और कड़ा महसूस होगा।

शिशुओं में सामान्य मल प्रक्रिया क्या है?

नीचे हम एक तालिका दे रहे हैं, जो शिशुओं में मल त्यागने की सामान्य संख्या के बारे में बताती है (2) :
उम्र मल प्रक्रिया प्रति सप्ताह मल प्रक्रिया दैनिक
0-3 महीने (स्तनपान करने वाला शिशु) 5 से 40 2.9
3-6 महीने (फॉर्मूला फीड) 5-28 2.0
6-12 महीने 5-28 1.8
1-3 साल 4-2 1.0
बच्चों में कब्ज का कारण | Kabz Problem In Baby

अगर आपके बच्चे को कब्ज की समस्या है, तो इसके कारणों का पता लगाना जरूरी है। नीचे हम बताने जा रहे हैं कि आखिर किन कारणों से बच्चों को कब्ज की समस्या हो सकती है (3)।

फॉर्मूला मिल्क : शिशुओं को कब्ज होने का एक मुख्य कारण फॉर्मूला दूध हो सकता है, क्योंकि यह दूध पचाना उसके लिए आसान नहीं होता, जिससे उसे कब्ज हो जाती है। इसके अलावा, जब आप बच्चे के लिए फॉर्मूला दूध का ब्रांड बदलती हैं, तब भी उसे कब्ज की शिकायत हो सकती है। ऐसे में आप चिकित्सक से बात कर बच्चे के फॉर्मूला दूध के ब्रांड को बदल सकती हैं।

ठोस आहार की शुरुआत : जब शिशु को स्तनपान के अलावा ठोस आहार की शुरुआत कराई जाती है, तो शिशुओं को अक्सर कब्ज हो जाती है। ऐसे में जब आप शिशु को ठोस आहार खिलाना शुरू करती हैं, तो उसके साथ-साथ तरल पदार्थों का सेवन भी अच्छी तरह कराना चाहिए। वहीं, ठोस आहार में फाइबर युक्त भोजन बच्चे को दें। फाइबर की कमी से भी बच्चे को कब्ज हो सकती है। यदि किसी विशेष चीज का सेवन करने से बच्चे को कब्ज की समस्या हो रही है तो कम से कम एक महीने के लिए उसका सेवन बंद कर दें।

पानी की कमी : जब बच्चे के शरीर में पानी की कमी होती है, तो भी उसे कब्ज की समस्या हो सकती है। अगर बच्चे के दांत निकल रहे हैं, गले में परेशानी है, सर्दी-जुकाम या कान में संक्रमण है, तो हो सकता है कि शिशु ठीक से दूध न पिए। ऐसे में तरल की मात्रा कम होने से शिशु को कब्ज की समस्या हो सकती है।

किसी तरह की बीमारी या कोई स्थिति : किसी तरह के भोजन से एलर्जी, भोजन विषाक्तता या मेटाबॉलिज्म डिसऑर्डर के कारण भी बच्चे को कब्ज की समस्या हो सकती है। इसके अलावा, अगर बड़ी आंत ठीक से काम न करे, तो भी कब्ज हो सकती है। वहीं, स्पाइना बिफिडा और सिस्टिक फाइब्रोसिस (एक प्रकार का विकार, जो फेफड़ों व पाचन तंत्र को प्रभावित करता है) जैसी बीमारी भी कब्ज का कारण बन सकती हैं।

एंटीबायोटिक: कई बार एंटीबायोटिक लेने के बाद भी कब्ज की शिकायत हो सकती है।

टॉयलेट ट्रेनिंग: बच्चों को टॉयलेट सीट पर बैठने की ट्रेनिंग दे रहे हैं, तो शुरुआत में जब बच्चा स्टूल पास करने की कोशिश करता है तो कई बच्चों में कब्ज की शिकायत हो सकती है।

शिशुओं में कब्ज का निदान कैसे किया जाता है?

अगर बच्चे को ज्यादा समस्या होती है, तो डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। लक्षण जानने के बाद डॉक्टर बच्चे में कब्ज की जांच नीचे बताए गए तरीकों से कर सकते हैं (4)।

पहले डॉक्टर बच्चे के स्वास्थ्य और कब्ज के लक्षणों के बारे में ये सवाल पूछ सकते हैं :

डॉक्टर बच्चे की उम्र पूछेंगे और साथ ही पूछेंगे कि दिन में कितनी बार शिशु मल त्यागता है।

क्या बच्चे को मल त्यागते समय दर्द होता है?

बच्चे को क्या खाने के लिए दिया जाता है?

क्या बच्चा चिड़चिड़ा रहता है?

इसके अलावा, डॉक्टर नीचे बताए गए टेस्ट भी कर सकते हैं।

डिजिटल रेक्टम एग्जामिनेशन : इसमें डॉक्टर हाथों में ल्यूब्रिकेंट लगे ग्लव्ज पहनकर उनके मलद्वार में उंगली के माध्यम से जांच करते हैं।

पेट का एक्स-रे : इस टेस्ट से यह देखा जाता है कि बड़ी आंत में कितना मल है।

बेरियम एनीमा : इसमें मलाशय, बड़ी आंत और छोटी आंत का एक्स-रे किया जाता है। इस दौरान बच्चे को बेरियम नामक द्रव दिया जाएगा। बेरियम ऑर्गन को कोट करता है, ताकि उन्हें एक्स-रे पर देखा जा सके।

एनोरेक्टल मेनोमेट्री : इसमें गुदा में मांसपेशियों और नर्व रिफलेक्स की मजबूती की जांच की जाती है। इसमें यह भी जांचा जाता है कि बच्चा इस बात को समझता है या नहीं कि उसे अब मल त्यागने की जरूरत है। इसके अलावा, यह जांचा जाता है कि मल त्यागने के दौरान मांसपेशियां कितनी अच्छी तरह काम करती हैं।

रेक्टल बायोप्सी : इस परीक्षण में मलाशय की कोशिकाओं का नमूना लिया जाता है। उन्हें किसी माइक्रोस्कोप से जांचा जाता है।

कोलोरेक्टल ट्रांजिट स्टडी : इस टेस्ट में यह पता लगाया जाता है कि बच्चे के पेट में भोजन किस तरह से आगे बढ़ता है।

आइए, अब जानते हैं कि बच्चे को पॉटी न आए तो क्या करें।
मैं अपने बच्चे की कब्ज का इलाज कैसे कर सकती हूं?

बच्चों को होने वाली कब्ज का इलाज जीवनशैली में बदलाव और बेहतर डाइट के जरिए किया जा सकता है। जब तक जरूरत ज्यादा न हो, इसके लिए दवाएं नहीं दी जाती। नीचे जानिए किस तरह बच्चों में कब्ज का इलाज किया जा सकता है :

आहार में बदलाव: अगर बच्चा छह महीने से ज्यादा उम्र का है, तो डॉक्टर शिशु के आहार में पर्याप्त पानी के साथ फाइबर युक्त भोजन देने की सलाह देंगे। इसके लिए आप डॉक्टर से बच्चे के लिए आहार चार्ट बनवा सकते हैं।

व्यायाम कराएं : अगर आपके बच्चे ने घुटनों के बल चलना शुरू कर दिया है, तो इससे पेट अच्छा रहने में मदद मिलती है। वहीं, अगर वह घुटनों के बल चलना नहीं सीखा है, तो आप उसे पीठ के बल लेटाकर अपने हाथों से उसके पैरों को पकड़ कर साइकिल चलाने जैसा धीरे-धीरे घुमा सकती हैं।

मालिश : शिशु के पेट पर हल्की-हल्की मालिश करने से भी फायदा मिलता है।

ग्लिसरीन सपोसिटरी का उपयोग : ग्लिसरीन सपोसिटरी (Glycerin Suppositories) एक प्रकार का कैप्सूल होता है, जिसे गुदा मार्ग से मलाशय में डाला जाता है। यह कैप्सूल मल मार्ग को प्रेरित करने के लिए घुल जाता है। जब बच्चे की कब्ज ठीक करने का कोई रास्ता नहीं रहता, तब इस प्रक्रिया को अपनाया जाता है। ध्यान रहे कि यह प्रक्रिया आप डॉक्टर से ही करवाएं (2)।

नोट : बाल रोग विशेषज्ञ बच्चे को कब्ज से राहत दिलाने के लिए कोई भी ओवर-द-काउंटर दवा या टॉनिक देने से मना करते हैं। इसके लिए घरेलू उपचार अपनाकर ही बच्चे को कब्ज से राहत मिल सकती है।
शिशुओं में कब्ज को कैसे रोकें?

आप कुछ खास बातें समझते हुए बच्चे को होने वाली कब्ज से बचा सकते हैं। नीचे हम इसी बारे में बता रहे हैं :

अगर आपका बच्चा फल और सब्जियां खाना शुरू कर चुका है, तो उसे भरपूर मात्रा में फल और सब्जियां दें। साथ ही तरल पदार्थ भी भरपूर मात्रा में दें।

बच्चों में कब्ज से राहत दिलाने का सबसे बेहतर उपाय फाइबर युक्त भोजन है। इसमें फल मुख्य रूप से बेहतर उपाय माने जाते हैं। अगर बच्चा फल नहीं खा सकता, तो आप उसे फलों की स्मूदी बनाकर खिला सकती हैं।

अगर आपको लगता है कि बच्चा सामान्य के मुकाबले स्तनपान कम करता है, तो स्तनपान की आवृत्ति बढ़ाएं। कम स्तनपान करने से भी शिशु को कब्ज की समस्या हो सकती है।

जैसे-जैसे आपका बच्चा बड़ा होता है, उसे हल्की-हल्की एक्सरसाइज कराएं।

बच्चे को प्रतिदिन टॉयलेट सिटिंग टाइम के लिए प्रोत्साहित करें।

बच्चों में कब्ज कब चिंता का कारण बनती है?

यूं तो कुछ सतर्कता और घरेलू तरीकों से बच्चों में कब्ज की समस्या दूर की जा सकती है, लेकिन अगर आपको बच्चे में कुछ ऐसे लक्षण नजर आएं, तो यह चिंता का विषय हो सकता है। ऐसे लक्षण नजर आने पर आपको डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

जब बच्चा मल त्यागते समय चिड़चिड़ा हो जाए और रोने लगे।

अगर आप देखें कि बच्चा जोर तो बहुत लगा रहा है, लेकिन मल नहीं त्याग पा रहा है। यह चिंता का विषय हो सकता है।

अगर आप पाएं कि बच्चे के मल में रक्त आ रहा है, तो यह स्थिति गंभीर हो सकती है। ऐसे में आपको तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

शिशुओं में कब्ज के लिए घरेलू उपचार | Bacho Ki Kabj Ke Gharelu Upay

ऐसे कई घरेलू उपचार हैं, जिनकी मदद से आप बच्चे में कब्ज की समस्या को दूर कर सकते हैं। नीचे हम कब्ज के घरेलू उपचार के बारे में बता रहे हैं :

ऑर्गेनिक कोकोनट ऑयल : अगर बच्चा कब्ज से परेशान है, तो नारियल का तेल फायदा कर सकता है। अगर बच्चा छह महीने से ज्यादा का है, तो आप उसके खाने में दो से तीन ml नारियल का तेल मिला सकते हैं।

टमाटर : छह महीने से ज्यादा उम्र के बच्चों में कब्ज की समस्या से राहत दिलाने में टमाटर काफी मदद करता है। इसके लिए आप एक कप पानी में एक छोटा टमाटर उबालें। मिश्रण को ठंडा करके छान लें। कब्ज से बचने के लिए रोजाना इस रस के तीन से चार चम्मच बच्चे को दें।

सौंफ : पाचन संबंधी समस्याओं के इलाज के लिए सौंफ बहुत प्रभावी है। बच्चे को कब्ज से राहत दिलाने के लिए आप एक कप पानी में एक चम्मच सौंफ उबालें। फिर इस पानी को ठंडा करके छान लें। इसे अपने बच्चे को दिन में तीन से चार बार दें।

पपीता : पपीता फाइबर का एक बेहतरीन स्रोत है। छह महीने से अधिक उम्र के शिशुओं के लिए पपीता कब्ज से लड़ने का एक बेहतरीन उपाय है। आप अपने बच्चे को पपीता पीसकर थोड़ा-थोड़ा खिला सकती हैं।

गर्म पानी से नहलाएं : गर्म पानी का स्नान मांसपेशियों को लचीला करने में मदद करता है। कब्ज होने पर भी गर्म पानी से नहाना फायदा पहुंचा सकता है। इसके लिए अपने बच्चे के बाथटब को गर्म पानी से भरें और कुछ चम्मच बेकिंग सोडा डालें। इस पानी से बच्चे को नहलाएं। यह मलाशय की मांसपेशियों को खोलने में मदद करेगा। यदि बेकिंग सोडे का इस्तेमाल करने से बच्चे में किसी तरह की एलर्जी हो, तो इसका इस्तेमाल तुरंत बंद कर दें।

कब्ज के दौरान बच्चे को क्या खिलाना चाहिए?

अगर बच्चा छह महीने से कम उम्र का है, तो उसे कब्ज से बचाने के लिए मां का दूध सबसे बेहतर है। वहीं, अगर बच्चा छह माह से ज्यादा का है, तो उसे फाइबर युक्त भोजन देना जरूरी है। नीचे हम एक तालिका दे रहे हैं, जिसमें बताया गया है कि कब्ज के दौरान बच्चे को क्या खिलाना चाहिए (5) :
भोजन खाने की चीजें

सब्जियां
रूट सब्जियां जैसे – गाजर व चुकंदर
ब्रेसिका सब्जियां – फूलगोभी, गोभी, ब्रोकली
फलियां – बीन्स व दालें
हरी पत्तेदार सब्जियां – पालक
आलू और बटरनट स्क्वैश

फल
बेरीज – स्ट्रॉबेरी, ब्लैकबेरी
सेब, आम, पपीता
संतरा, नाशपाती और एवोकाडो

सूखे फल
खजूर, किशमिश, अंजीर

अनाज
ओट्स, स्टील कट ओट्स आदि

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

एक सप्ताह के बच्चे को कब्ज के लिए क्या देना चाहिए?

एक महीने से छोटे बच्चे को कब्ज होना इस बात का संकेत देता है कि उसे पर्याप्त मात्रा में ब्रेस्ट मिल्क नहीं मिल रहा है। ऐसे में आपको उसे और अधिक स्तनपान कराने की जरूरत होगी।

क्या बच्चे को कब्ज दूर करने के लिए घुट्टी (ग्राइप वॉटर) दे सकती हूं?

नहीं, बच्चों में ग्राइप वॉटर नहीं देना चाहिए। यह अन्य कई परेशानियों का कारण बन सकता है।

क्या मैं अपने बच्चे की कब्ज को कम करने के लिए नारियल और अरंडी का तेल का उपयोग कर सकती हूं?

नहीं, बच्चों को कब्ज होने पर अरंडी का तेल फायदा पहुंचाता है, इस बारे में कोई तथ्य मौजूद नहीं है। यह तेल लैक्सेटिव (पेट साफ करने की दवा) के रूप में काम करता है, जो आंत और शौच के तेजी से संकुचन का कारण बनता हैं। इसलिए, यह बच्चे के लिए अच्छा नहीं है (6)।

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