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20 सप्ताह की गर्भावस्था
20 सप्ताह की गर्भावस्था में भ्रूण विकास
अब तक आपके शिशु का माप सिर से नितंब तक लिया जाता था, मगर इस चरण से उसे सिर से एड़ी तक मापा जाएगा। इस सप्ताह आपके शिशु का माप करीब 25.6 सेंमी (10 इंच) हो गया है, लगभग एक केले के जितना लंबा। उसका वजन करीब 300 ग्राम है।
आप अपनी प्रसव की नियत तिथि का आधा रास्ता तय कर चुकी हैं। दिन प्रतिदिन आपका शिशु और अधिक क्रियाशील व फुर्तीला होता जा रहा है। चाहे आप अभी भी उसके पैर की पहली मार का अहसास करने का इंतजार कर रही हैं, मगर आपका शिशु अंदर हिलने-डुलने में व्यस्त है। वह शायद अपने अंगूठों या उंगलियों को चूसने भी लगा है!
आपके एनॉमली स्कैन के दौरान, जो कि 18 से 20 सप्ताह के बीच होगा, अल्ट्रासाउंड डॉक्टर शिशु के सिर के घेरे का माप लेंगे। ऐसा इसलिए क्योंकि शिशु के मुड़ जाने या खुद को सिकोड़ लेने पर शिशु का सटीक माप ले पाना मुश्किल होगा।
वर्निक्स कैसिओसा नामक चिकने और वसायुक्त तत्व की सफेद परत आपके शिशु को ढकने लगी होगी। यह मॉइस्चराइजर और चिकनाई के तौर पर काम करता है, जो कि एमनियोटिक द्रव में शिशु की नाजुक त्वचा को रुखा होने से बचाने में मदद करता है। शिशु के जन्म के समय भी वर्निक्स प्रसव नलिका से शिशु को आसानी से नीचे आने में मदद करता है।
गर्भावस्था के 20वें सप्ताह में शारीरिक परिवर्तन
क्या थोड़ी सी सीढ़ियां चढ़ने पर आपको सांस की कमी महसूस होने लगती है? गर्भावस्था में श्वासहीनता होना सामान्य है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि आपका पंजर ऊपर और थोड़ा बाहर की तरफ हो जाता है, ताकि आपके फेफड़ों की क्षमता और अधिक बढ़ सके और आपका शरीर आॅक्सीजन अंदर लेने और कार्बन डाइअॅक्साइड बाहर निकालने का कार्य बेहतर ढंग से कर सके। इसका मतलब है कि गर्भावस्था से पहले की तुलना में अब हर सांस आपको अधिक गहरी लेनी पड़ती है। इस वजह से ही आप सांस की कमी महसूस करती हैं।
जैसे-जैसे आपका गर्भाशय बढ़ना जारी रखेगा, यह आपके फेफड़ों पर दबाव डालना शुरु करेगा, जिससे आपके लक्षण और अधिक बदतर हो सकते हैं। आपको श्वासहीनता के लिए उपचार की जरुरत नहीं होती, क्योंकि यह गर्भावस्था के कारण शरीर में हो रहे बदलावों का ही हिस्सा है। बहरहाल, यदि आप बेहोशी सी महसूस करने लगें या दिल तेजी से धड़कने लगे, तो इस बारे में अपनी डॉक्टर से बात करें।
20 सप्ताह गर्भवती होने पर क्या जानना जरुरी है
18 से 20 सप्ताह के बीच आपका एनॉमली स्कैन होना चाहिए। इस स्कैन का मकसद यह पता करना होता है कि आपका शिशु उम्मीद के मुताबिक बढ़ और विकसित हो रहा है या नहीं। अल्ट्रासाउंड डॉक्टर शिशु का माप लेंगे और देखेंगे कि शिशु के अंग सही ढंग से काम कर रहे हैं या नहीं। वे जन्मजात स्वास्थ्य स्थितियों जैसे कि खंड होंठ (क्लेफ्ट लिप) या दिल से जुड़ी समस्या के संकेतों को भी स्कैन में देखते हैं।
अल्ट्रासाउंड डॉक्टर स्क्रीन पर शिशु के चेहरे, अंग और दिल को दिखाएंगे। आपको शायद शिशु की स्कैन तस्वीरों का प्रिंट आउट भी दिया जाएगा। हालांकि, इसके लिए आपको अतिरिक्त शुल्क देना पड़ सकता है।
इस समय तक यह स्पष्ट हो चुका होगा कि गर्भ में पल रहा शिशु लड़का है या लड़की। अपने शिशु के लिंग के बारे में जानने के लिए उत्सुक होना स्वाभाविक है, मगर भारत में प्रसवपूर्व लिंग परीक्षण करवाना निषेध है। गर्भ में लड़की होने का पता चलने पर गर्भपात करवाने की बढ़ती दर को देखते हुए ऐसा किया गया है। गर्भपात की वजह से भारत के कई राज्यों में लिंग अनुपात बिगड़ा हुआ है।
अधिकांश अस्पताल व नैदानिक केंद्र अल्ट्रासाउंड करने से पहले एक कागजात पर दस्तखत करवाते हैं। इसमें लिखा होता है कि आप डॉक्टर से गर्भ में पल रहे शिशु के लिंग के बारे में नहीं पूछेंगी।
गर्भावस्था के 20वें हफ्ते में क्या करें
बहुत से ऐसे खाद्य पदार्थ हैं, जिनका सेवन गर्भावस्था में सुरक्षित नहीं है। इनके बारे में यहां विस्तार से जानें।
आमतौर पर 18 से 20 सप्ताह के बीच गर्भ में शिशु की हलचल महसूस होनी शुरु हो जाती है। आपको शिशु की हलचल कितनी बार महसूस होनी चाहिए, यहां जानिए।
गर्भावस्था में शरीर में होने वाले बदलाव आपको मूत्रमार्ग संक्रमण (यूटीआई) के प्रति अधिक संवेदनशील बनाते हैं। यूटीआई के लक्षण और उपचारों के बारे में यह लेख पढ़ें।
क्या गर्भावस्था के दौरान आयरन की गोलियों के सेवन से शिशु का रंग काला पड़ सकता है, इस बात की सच्चाई यहां जानें।
चाहे आप अब भी नौकरी पर जाती हों, फिर भी जितना अधिक हो सके आराम करें। दोपहर के खाने के समय अपनी डेस्क पर बैठी न रहें। अपना खाना-पीना साथ लेकर बाहर कहीं ताजा हवा में चली जाएं। यदि आप घर पर हैं और आपके साथ छोटे बच्चे भी हैं, तो जब वे सो रहे हों तो आप भी आराम करें।
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