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कैल्शियम व आयरन के साथ फाइबर, प्रोटीन और विटामिन भी बच्चों के विकास के लिए जरूरी हैं। इसके अलावा, एनर्जी, कार्बोहाइड्रेट और फैट भी वजन बढ़ाने में सहायक हो सकते हैं (4) (6)। पोषक तत्वों से भरपूर रागी आसानी से पच जाती है, इसलिए चिकित्सक भी इसे बच्चों के आहार में शामिल करने की सलाह देते हैं।

जन्म के पहले छह महीनों तक स्तनदूध के अलावा उसे और कुछ न दें। शिशु का वजन बढ़ाने में मदद के लिए डॉक्टर आपको शिशु की मर्जी की बजाय नियत समय पर उसे स्तनपान करवाने की सलाह दे सकते हैं। इसलिए आप ध्यान रखें कि आपने शिशु को स्तनपान कब करवाया था और इसके अनुसार तय अंतराल पर उसे स्तनपान करवाती रहें।

2 महीने के बच्चे को आप सोते समय चुसनी या पैसिफायर्स भी दे सकती हैं क्योंकि शोधों की मानें तो पैसिफायर्स की मदद से SIDS के खतरे को कम करने में मदद मिलती है। हालांकि अगर बच्चा चुसनी नहीं लेना चाहता तो बच्चे को जबरन चुसनी देने की जरूरत नहीं। साथ ही 1 महीने से छोटे बच्चे को चुसनी बिलकुल नहीं देनी चाहिए।
आपके बच्चे के पहले 3 महीनों के दौरान, माँ का दूध या फार्मूला सभी आवश्यक पोषण प्रदान करेगा। डॉक्टर ठोस आहार शुरू करने के लिए आपका शिशु लगभग 6 महीने का होने तक प्रतीक्षा करने की सलाह देते हैं। कुछ बच्चे 6 महीने से पहले ठोस आहार के लिए तैयार हो सकते हैं, लेकिन तब तक प्रतीक्षा करें जब तक आपका बच्चा कम से कम 4 महीने का न हो जाए।

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