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2 महीने के बच्चा का वजन अपने जन्म के वजन से करीब 1 से 2 किलोग्राम अधिक हो जाता है और लंबाई भी जन्म के वक्त की लंबाई से करीब आधा इंच अधिक हो जाती है। साथ ही सिर की परिधि भी करीब 4 सेंटीमीटर तक बढ़ जाती है।

2 महीने का शिशु शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक रूप से काफी विकसित हो जाता है। इन तीनों के बारे में हम यहां विस्तार से बता रहे हैं।

मानसिक विकास-

1. चेहरों पर ध्यान देना: 2 महीने के शिशु अपने आसपास रहने वाले लोगों के चेहरों को पहचानने की कोशिश करने लगते हैं।

2. आवाजों को सुनना: जब 2 महीने के शिशु को कोई आवाज सुनाई देती है, तो उसका ध्यान उस ओर ही जाता है। जहां से आवाज आ रही होती है, वह उस ओर देखने का प्रयास करता है।

3. अलग-अलग स्वर में रोना: भूख लगने या कुछ परेशानी होने पर 2 महीने का शिशु सिर्फ रोकर अपनी बात कह सकता है। वह अपनी भावनाओं को व्यक्त करने के लिए अलग-अलग स्वर में रो सकता है।

शारीरिक विकास-

1. मांसपेशियां मजबूत: दो महीने के शिशु के गर्दन की मांसपेशियां कुछ हद तक मजबूत हो जाती हैं, लेकिन इतनी नहीं कि वह बैठते समय अपना सिर सीधा रख सके।

2. सिर उठाना: जब 2 महीने के शिशु को पेट के बल लेटाया जाता है, तो वह अपने सिर को ऊपर उठाने का प्रयास करता है। वह करीब 45 डिग्री तक अपना सिर ऊपर उठा सकता है।

3. शरीर को ऊपर उठना: 2 महीने में शिशु के कंधे की मांसपेशियां थोड़ी मजबूत हो जाती हैं। जब उसे पेट के बल लेटाया जाता है, तो वह हाथों की मदद से अपने शरीर को ऊपर उठाने का प्रयास करता है।

4. गतिशील चीजों व लोगों को देखना: अगर शिशु के आसपास से कोई गुजरे या कोई वस्तु हिलती हुई नजर आए, तो वह उसे देख सकता है। उदाहरण के लिए अगर कोई व्यक्ति शिशु के सामने एक जगह से दूसरी जगह जाता है, तो वह गर्दन घुमाकर जहां तक नजर जाती है, वहां तक देख सकता है।

5. अंगों पर नियंत्रण: 2 महीने के शिशु का अपने हाथों व पैरों पर नियंत्रण होने लगता है। इसका पता इसी से चलता है कि वो हवा में तेजी से हाथ-पांव चलाता है।

6. बेहतर दृष्टि: 2 महीने के शिशु की दृष्टि बेहतर होने लगती है। वह अपनी आंखों को वस्तुओं पर बेहतर रूप से केंद्रित कर पता है। वास्तव में दो महीने का बच्चा एक चलती हुई वस्तु को ट्रैक कर सकता है।

सामाजिक और भावनात्मक विकास-

1. मुस्कान: अपने नन्हे की मुस्कान को हर माता-पिता देखना चाहते हैं और ऐसा दूसरे महीने में संभव हो सकता है। 2 महीने की शिशु को आप कई बार मुस्कुराते हुए देख सकते हैं (3)।

2. आवाज पर प्रतिक्रिया: जब आप दो महीने के बच्चे से बात करते हैं, तो वह कुछ अस्पष्ट आवाज के साथ जवाब देने का प्रयास करेगा।

3. कुछ समय के लिए शांत: दूसरे महीने में बेबी रोते समय अपने मुंह में हाथ डालकर कुछ देर के लिए शांत हो सकता है। यह बच्चाें के लिए एक सुखदायक स्थिती होती है।

4. असहज होने पर रोना: 2 महीने का शिशु किसी गतिविधि या खिलौने के प्रति रुचि ले सकता है। वह खिलौना न मिलने पर रोना शुरू कर सकता है। दो महीने की उम्र में बच्चे का यह व्यवहार बहुत महत्वपूर्ण होता है।

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