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18 सप्ताह की गर्भावस्था
18 सप्ताह की गर्भावस्था में भ्रूण विकास
आपका शिशु सिर से नितंब (क्राउन टू रंप) तक लगभग 14.2 सेंमी. (5.6 इंच) लंबा हो गया है, करीब-करीब एक शिमला मिर्च जितना बड़ा। उसका वजन लगभग 190 ग्राम तक हो गया है। उसके कान अब अपनी अंतिम स्थान पर विकसित हो गए हैं और सिर से अलग दिखाई देते हैं। उसकी नन्हीं भौंहें भी अब उभरने लगी हैं और अब वह अपनी बंद आंखों के आसपास की मांसपेशियों में हरकत कर सकता है।
18-20 सप्ताह के बीच आपका लेवल II अल्ट्रासाउंड स्कैन, जिसे एनॉमली स्कैन भी कहा जाता है, करवाया जाएगा। इसलिए, जल्द ही आप स्कैन में अपने शिशु को शायद पैर मारते, हिलते-डुलते और यहां तक कि पलटी मारते हुए भी देख सकेंगी। कोशिश करें कि आप यह स्कैन उस समय करवाएं, जब आपके पति भी आपके साथ मौजूद रह सकें।
एनॉमली स्कैन के दौरान अल्ट्रासाउंड डॉक्टर आपके शिशु की बढ़त और विकास का विस्तृत जायजा लेंगी। इस स्कैन से विशिष्ट जन्म दोषों, अपरा और गर्भनाल की जांच और गर्भावधि उम्र की सटीकता के बारे में भी पता चल सकता है।
यदि आपके गर्भ में पुत्री हुई, तो उसकी योनि, गर्भाशय और डिंबवाही नलिकाएं अपने स्थान पर विकसित हो चुकी होंगी। यदि आपके गर्भ में पुत्र हो, इस समय तक उसका लिंग अलग से दिख सकता है और उसके वृषण भी उसके श्रोणी से अंडकोष की थैली में नीचे आना शुरु हो गए होंगे।
अपने शिशु के लिंग के बारे में जानने के लिए उत्सुक होना स्वाभाविक है, मगर भारत में प्रसवपूर्व लिंग परीक्षण करवाना निषेध है। यह ध्यान में रखने वाली बात है कि भारत में लिंग परीक्षण के लिए अल्ट्रासाउंड स्कैन करवाना गैर-कानूनी है और गर्भ में लड़की होने पर भ्रूण हत्या करवाना कानूनी जुर्म है।
सभी अल्ट्रासाउंड क्लिनिकों और अस्पतालों में यह नोटिस लगा होना चाहिए, जिसमें लिखा हो कि 'लिंग निर्धारण जांच करवाना कानूनी अपराध है और इसका उल्लंघन करने वाले के खिलाफ कानूनी कार्यवाही की जाएगी'। अगर, आप भी अल्ट्रासाउंड डॉक्टर से शिशु के लिंग के बारे में पूछती हैं, तो यह भी एक अपराध है।
अधिकांश अस्पताल व नैदानिक केंद्र अल्ट्रासाउंड करने से पहले एक कागजात पर दस्तखत करवाते हैं। इसमें लिखा होता है कि आप डॉक्टर से गर्भ में पल रहे शिशु के लिंग के बारे में नहीं पूछेंगी।
गर्भावस्था के 18वें सप्ताह में शारीरिक परिवर्तन
कई बार भोजन करने के बाद आपको जो असहजता सी महसूस होती है, वह शायद अपचता (इनडाइजेशन) है। यह गर्भावस्था एक बहुत ही आम दुष्प्रभाव है। गर्भावस्था के हॉर्मोन आपके पाचन तंत्र समेत शरीर की मांसपेशियों को शिथिल बना देते हैं, जिससे पाचन क्रिया मंद हो जाती है।
जैसे-जैसे आपका गर्भस्थ शिशु बड़ा होता जाता है, आपका पेट ऊपर की तरफ हो जाता है, जिससे पेट के अम्ल (एसिड) आसानी से ऊपर आपकी भोजन नलिका में आ जाते हैं। इस वजह से आपको सीने में जलन (हार्टबर्न) होती है।
दिनभर समय-समय पर थोड़ी-थोड़ी मात्रा में भोजन खाते रहने से अपचता और सीने में जलन से बचा जा सकता है। गरिष्ट या वसायुक्त व तैलीय भोजन का सेवन कम से कम करें और खाना खाने के बाद सीधे न बैठें। यदि आपके लक्षण रात में अधिक परेशान करते हैं, तो कोशिश करें कि शाम को स्नैक्स न लें। या फिर आप गुरुत्वाकर्षण बल की मदद ले सकती हैं और अपने पति से कुशन या तौलिया नीचे लगाकर बिस्तर का सिराहना ऊंचा करने के लिए कह सकती हैं। कोशिश करें कि आप ऊंचे तकियों पर न सोएं, क्योंकि इससे आपके पेट पर अनावश्यक दबाव पड़ेगा।
कुछ महिलाएं पाती हैं कि गर्भावस्था के दौरान उन्हें सामान्य से काफी ज्यादा गैस हो रही है। गर्भावस्था में गैस और पेट फूलने की वजह और उपचार के बारे में हमारा यह लेख पढ़ें।
18 सप्ताह गर्भवती होने पर क्या जानना जरुरी है
आपको गर्भ में अपने शिशु की हलचल अब किसी भी दिन महसूस होना शुरु हो सकती है। यदि यह आपकी पहली गर्भावस्था है, तो आप शुरुआत में शायद इस हलचल को समझ न पाएं। शुरुआती हलचल पेट में बुलबुलों के फूटने या कुछ फड़फड़ाने जैसी महसूस हो सकती है। यह भी हो सकता है आप शिशु की पहली हलचल को पेट की गड़गड़ाहट समझ लें! अगले कुछ हफ्तों में आप बिना किसी गलती के आसानी से अपने शिशु की हलचल को पहचान जाएंगी, क्योंकि वे अधिक प्रबल और स्पष्ट होने लगेगी।
गर्भावस्था के 18वें हफ्ते में क्या करें
गर्भवती होने पर टखनों, पैरों और हाथों में सूजन आना आम है। इसके उपचार के लिए आप क्या कर सकती हैं, यहां जानें।
शिशु की मजबूत हड्डियों और दांतों के लिए आपको पर्याप्त मात्रा में कैल्शियम के सेवन की जरुरत होती है। कैल्शियम के समृद्ध स्त्रोतों के बारे में यह स्लाइडशो देखें।
गर्भावस्था में खान-पान को लेकर विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता होती है। यहां जानें कि क्या गर्भावस्था में इंस्टेंट नूडल्स का सेवन सुरक्षित है।
गर्भावस्था में तनाव में रहना गर्भवती माँ व शिशु दोनों के लिए सही नहीं है। तनाव से निपटने के हमारे इन उपायों को आजमाएं।
अदरक और नींबू का पानी पीकर देखें। यह ताजगी प्रदान करने वाली तो होता ही है, साथ ही यह गर्भावस्था में अक्सर रहने वाली कब्ज और मिचली से भी राहत दिलाता है!
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