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Pregnancy 18th Week बच्चे की किक कर पाएंगीं महसूस
Pregnancy 18 week symptoms में इस समय आपको हाथ और पैरों में सूजन महसूस हो सकती है। इसके अलावा और भी कई लक्षण इस सप्ताह आपको परेशान कर सकते हैं।
pregnancy 18th week
यह सप्ताह ज्यादा मुश्किल नहीं होगा और शिशु की मूवमेंट महसूस करने की वजह से आपको खुशी मिलेगी। इस सप्ताह में मॉर्निंग सिकनेस भी जा चुकी होगी। आप अपनी प्रेगनेंसी की दूसरी तिमाही के लगभग बीच में हैं। प्रेगनेंसी के 18वें सप्ताह में आप फिलहाल जी मिचलाने वाली समस्या से दूर हैं लेकिन बढ़ते वजन की वजह से आपकी तकलीफें भी बढ़ने लगी होंगी। आइए चर्चा करते हैं इस हफ्ते के लक्षणों के बारे में।
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प्रेगनेंट महिला के शरीर में बदलाव
अब से आपका बेबी बंप तेजी से बढ़ने लगा है। गर्भावस्था की दूसरी तिमाही में आपका दो किलो वजन बढ़ सकता है जो कि नॉर्मल बात है। अगर आप कंसीव करने के समय पर अंडरवेट या ओवरवेट हैं तो इससे ज्यादा या कम बढ सकता है।
आपका शरीर बहुत एक्टिव महसूस करेगा। पेट में तितली जैसा महसूस होगा जो कि शिशु की पहली मूवमेंट हो सकती है।
आपके बच्चे का विकास
आपका बेबी अब लगभग 14 सेंटीमीटर लंबा और 190 ग्राम के आस पास वजन वाला हो गया होगा। इस समय तक वह उन सब चीजों का स्वाद लेना शुरू कर चुका होगा जो आप खाती हैं। उसकी टेस्ट बड्स डिवेलप हो रही हैं। आपके गर्भाशय में उसकी भागदौड़ बढ़ती जा रही है। हो सकता है इस हफ्ते आपको पहली बार उसकी किक भी महसूस हो।
47 की उम्र में ऐश्वर्या से हो रही है प्रेगनेंसी की उम्मीद, जानिए इस उम्र में प्रेगनेंसी के चांस और जोखिम
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जी हां, 45 साल की उम्र के बाद भी महिलाएं प्रेगनेंट हो सकती हैं। हालांकि, इस एज में नैचुरली कंसीव करना थोड़ा मुश्किल होता है। 20 साल की उम्र के बाद महिलाओं की फर्टिलिटी सबसे ज्यादा अच्छी होती है और 30 के मध्य की उम्र में आने के बाद फर्टिलिटी पॉवर घटना शुरू हो जाती है।
40 के बाद इसमें तेजी से गिरावट आती है क्योंकि महिला की ओवरी में एक तय संख्या में एग होते हैं और उम्र बढ़ने पर एग की संख्या घटने लगती है।
इन बचे हुए एग में क्रोमोसोमल असामान्यता हो सकती है या मिसकैरेज का खतरा हो सकता है। उम्र जितनी ज्यादा होगी प्रेगनेंसी में उतनी ही ज्यादा समस्याएं आने की आशंका रहेगी।
इसका मतलब यह है कि 45 की उम्र में कई महिलाओं के लिए नैचुरली कंसीव करना मुश्किल होगा लेकिन नामुमकिन नहीं है।
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हेल्दी कपल्स में महिला के 20 और 30 की शुरुआती उम्र में प्रेगनेंट होने के चांस 25 से 30 प्रतिशत होते हैं। 35 की उम्र के बाद नैचुरली प्रेगनेंट होने की संभावना 15 प्रतिशत होती है और 40 के बाद यह घटकर 5 फीसदी रह जाती है। 45 की उम्र के बाद नैचुरली कंसीव करना मुश्किल होता है और किसी फर्टिलिटी ट्रीटमेंट की मदद लेनी पड़ती है।
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अगर आप 45 साल की उम्र के बाद प्रेगनेंट होना चाहती हैं तो आपको आईवीएफ की मदद लेनी पड़ सकती है। इसके अलावा कई एक्ट्रेसेस एग फ्रीजिंग करवाती हैं और अधिक उम्र में प्रेगनेंट होती हैं। एग फ्रीजिंग में कम उम्र की महिलाओं के अच्छी क्वालिटी वाले एग्स फ्रीज कर दिए जाते हैं और जब वो मां बनना चाहती हैं तो इन्हीं एग्स को इंप्लांट किया जाता है।
40 के बाद आईवीएफ से प्रेगनेंट होने पर भ्रूण की क्रोमोसोमल स्क्रीनिंग की सलाह दी जाती है।
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किसी भी उम्र में प्रेगनेंट होने के लक्षण एक जैसे ही होते हैं। आपको प्रेगनेंट होने पर मॉर्निंग सिकनेस (मतली और उल्टी), थकान, क्रेविंग, प्रेगनेंसी में कब्ज और पेट फूलना, सीने में जलन, ब्रेस्ट में दर्द, दर्द और कमर दर्द, सूजन और बार बार पेशाब आना शामिल है।
उम्र जितनी ज्यादा होगी दर्द और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं भी उतनी ही ज्यादा आएंगीं।
प्रेग्नेंसी के 18वें के हफ्ते केे लक्षण
प्रेगनेंसी के 18वें हफ्ते में आपको बढ़ते वजन की वजह से कुछ दिक्कतें होने लगी होंगी।
हाथों और पैरों में सूजन : वॉटर रिटेंशन की वजह से आपको अपने हाथों और पैरों में सूजन नजर आ रही होगी। यह सामान्य है। इससे बचने के लिए आप अपने हाथ-पैर लटका कर या देर तक मोड़ कर न बैठें। सोते समय पैरों के नीचे तकिया लगा लें। हल्की-फुल्की वॉक पर जाती रहें।
सीने में जलन और अपच : आपका गर्भाशय आपके पाचन तंत्र की जगह घेरने लगा है। इसलिए भूख होने के बावजूद आप जैसे ही ज्यादा खाना खाएंगी फौरन सीने में जलन और अपच की शिकायत होने लगेगी। इसलिए कई बार थोड़ा-थोड़ा करके खाना खाएं। हल्का खाएं, पोषक भोजन लें।
कब्ज और बवासीर : बढ़ते वजन, आयरन की गोलियों के असर की वजह से अगर आपकी कब्ज बढ़ जाए तो यह बवासीर में बदल सकती है। अभी भी ध्यान न दिया जाए तो इनसे खून बहने लगता है। इससे शरीर में खून की कमी हो सकती है। इसलिए शुरू से ही फाइबर वाले फल-सब्जियां खानी चाहिए और पर्याप्त मात्रा में पानी पीना चाहिए। जरूरी हो तो डॉक्टर से संपर्क करें।
नाक से खून : शरीर में खून की अधिकता से आपका बीपी थोड़ा बढ़ जाता है। इस वजह से आपकी नाक की बारीक धमनियां कभी-कभी फट जाती हैं और थोड़ी मात्रा में खून की बूंदें निकलने लगती हैं। ऐसा हो तो सिर ऊपर करके बैठ जाएं, घबराएं नहीं। ध्यान रहे कि सिर ज्यादा पीछे न करें वरना खून गले में जाने लगेगा। नाक पर बर्फ लगा सकते हैं।
जुकाम : प्रेगनेंसी में शरीर की प्रतिरोधक क्षमता कुछ कमजोर हो जाती है। इसलिए जुकाम वगैरह हो सकता है। इससे बचने के लिए अपनी मर्जी से दवा न लें बल्कि अपने डॉक्टर से संपर्क करें। विटामिन सी या इसकी भरपूर मात्रा वाले फलों का सेवन करें इससे जुकाम जल्द सही होता है। इसके अलावा कुछ भी असामान्य लगे तो डॉक्टर से संपर्क करने में हिचकिचाएं नहीं।
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प्रेगनेंट महिलाएं इस समय क्या करें
इस सप्ताह आपको डेंटल चेकअप करवा लेना चाहिए क्योंकि प्रेगनेंसी में मसूड़ों से खून आ सकता है। गर्भावस्था में दांतों से संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है जिसका संबंध प्रीटर्म लेबर हो सकता है।
अगर आप दूसरी तिमाही में डेंटल चेकअप करवाने जाएं तो एक्स रे करवाने से बचें। वजन को संतुलित रखने के लिए पौष्टिक आहार लें जिसमें कैल्शियम और आयरन युक्त पदार्थ शामिल हों। डायट में मौजूद चीजों में फोलिक एसिड अधिक होना चाहिए। हरी सब्जियां खट्टे फल खाएं।
मीठा खाने का मन कर रहा है तो ताजे फल खाएं। तला हुआ और अधिक कैलोरी वाला भोजन न करें।
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