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15 सप्ताह की गर्भावस्था में भ्रूण विकास
(4 इंच) लंबा हो गया है और उसका वजन लगभग 70 ग्राम है। वह अब तकरीबन एक सेब जितना बड़ा हो गया है। उसकी श्वसन प्रणाली अब और विकसित होती जा रही है। वह अब अपनी निगलने और चूसने की क्षमता का इस्तेमाल सांस के जरिये एमनियोटिक द्रव भीतर लेने के लिए कर रहा है।
गर्भावस्था के 15वें सप्ताह में शारीरिक परिवर्तन
आपका गर्भाशय, ग्रीवा (सर्विक्स) और योनि में अब गर्भावस्था के दौरान रक्त का प्रवाह बढ़ जाता है। हालांकि, यह आपके गर्भस्थ शिशु के लिए अच्छा है, इसका यह मतलब भी है कि आपका योनि स्त्राव अब ज्यादा होगा। आप शायद पहले से ही यह लक्षण महसूस कर रही होंगी। हो सकता है आप पैंटी लाइनर का इस्तेमाल कर भी रही हों। जब तक योनि स्त्राव गर्भावस्था से पहले के स्त्राव जैसा दिखाई दे और उसकी गंध भी वैसी ही हो, तो कोई चिंता की बात नहीं होती।
हालांकि, स्त्राव के रंग, गाढ़ेपन या गंध में बदलाव होना योनि संक्रमण के संकेत हो सकते हैं। दुर्भाग्यवश ये भी गर्भावस्था के काफी आम दुष्प्रभाव हैं।
पतला और भूरा-स्लेटी स्त्राव, जिसमें से बदबू भी आ रही हो, वह बैक्टीरियल वैजाइनोसिस का संकेत हो सकता है। या फिर थोड़ा पनीर जैसा दिखने वाला स्त्राव थ्रश होने का लक्षण हो सकता है। यदि आपको अपने स्त्राव के सामान्य होने या न होने को लेकर किसी भी तरह की शंका हो तो अपनी डॉक्टर से बात करें।
15 सप्ताह गर्भवती होने पर क्या जानना जरुरी है
अलग-अलग खाद्य पदार्थों में विटामिन और खनिज होते हैं, जो शिशु की विशिष्ट ढंग से मदद करते हैं। कैल्शियम और विटामिन डी शिशु की मजबूत हड्डियों और दांतों के लिए जरुरी हैं। वहीं शिशु के शरीर में लाल रक्त कोशिकाएं बनाने के लिए आयरन की आवश्यकता होती है। जिंक उसके अंगों के बनने में मदद करता है।
आप पौष्टिक व संतुलित आहार के सेवन से शिशु के विकास में मदद कर सकती हैं। रोजाना चार मुख्य भोजन समूहों में से खाद्य पदार्थ अपने आहार में शामिल करने का प्रयास करें: फल व सब्जियां, स्टार्चयुक्त भोजन जैसे ब्रेड व सीरियल्स, डेयरी उत्पाद, और प्रोटीन जैसे कि दालें, अंडे, व मांस-मछली। वसायुक्त, तैलीय और अधिक मीठे भोजनों का सेवन कम ही रखें।
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