13 सप्ताह में मुझे अभी भी मिचली क्यों आ रही है?HealthPlanet

Posted on Wed 8th Feb 2023 : 08:44

एक गर्भवती महिला को आपने अक्सर ऐसा कहते सुना होगा। खासतौर पर गर्भावस्था की पहली तिमाही में। गर्भावस्था में होने वाली मतली और उल्टी आने की समस्या को ‘मॉर्निंग सिकनेस’ कहा जाता है। यह परेशानी गर्भवती को दिन में किसी भी समय हो सकती है, लेकिन सुबह के समय इस समस्या से ज्यादा जूझना पड़ता है। मॉर्निंग सिकनेस से तकरीबन 85 प्रतिशत गर्भवती महिलाएं परेशान रहती हैं (1)। मॉमजंक्शन के इस लेख में हम गर्भावस्था में उल्टी और जी-मिचलाने की समस्या के बारे में विस्तार से चर्चा करेंगे।
क्या गर्भावस्था में उल्टी और मतली आना अच्छा संकेत है?

हां, गर्भावस्था के दौरान मॉर्निंग सिकनेस होना एक सकारात्मक संकेत माना गया है। कहा जाता है कि गर्भावस्था के दौरान मॉर्निंग सिकनेस होने से गर्भपात, समय पूर्व प्रसव, जन्म के समय बच्चे का वजन कम रह जाना, प्रसव से पहले शिशु की मृत्यु हो जाने का खतरा कम हो जाता है (2)। इसका यह अर्थ है कि भ्रूण और गर्भ के हार्मोंस ठीक तरीके से बढ़ रहे हैं।

गर्भावस्था के दौरान उल्टी और जी-मिचलाने की समस्या चौथे से छठे सप्ताह यानी पहली तिमाही में शुरू होती है। यही वो समय होता है, जब मासिक धर्म बंद होने के बाद गर्भाशय में भ्रूण प्रत्यारोपण होता है। गर्भावस्था के दूसरे महीने में मतली होना और उल्टी होने की समस्या ज्यादा हो सकती है और 12वें सप्ताह से 18वें सप्ताह के बीच यह समस्या कुछ हद तक कम हो सकती है। पहली तिमाही खत्म होते-होते यह समस्या कम हो सकती है, लेकिन कुछ मामलों में यह समस्या लंबे समय तक रह सकती है (3)। कभी-कभी यह समस्या बहुत बढ़ जाती है, जो गर्भवती के लिए हानिकारक साबित हो सकती है। इस बढ़ी हुई समस्या को हाइपरमेसिस ग्रेविडेरम कहा जाता है (4)। वहीं, कुछ महिलाओं को गर्भावस्था में बिल्कुल उल्टी महसूस नहीं होती है, यह भी सामान्य है।

गर्भावस्था के दौरान बहुत बार उल्टियां होने को (दिन में तीन बार से ज्यादा) हाइपरमेसिस ग्रेविडेरम कहा जाता है। 100 में से एक गर्भवती महिला को यह समस्या हो सकती है। यह ज्यादातर गर्भावस्था के पांचवें और दसवें सप्ताह के बीच में शुरू होती है और 20वें सप्ताह तक कम हो सकती है (5)। इस समस्या में आपको कुछ ऐसा महसूस हो सकता है :

मुंह सूखना।
दिल की धड़कनें बढ़ना।
पेशाब कम आना।
बहुत ज्यादा प्यास लगना।
रक्तचाप कम होना।
वज़न कम होना।

हालांकि, आपको हाइपरमेसिस ग्रेविडेरम और मॉर्निंग सिकनेस कुछ हद तक समान लगे, लेकिन इसमें कुछ अंतर होता है, जो हम नीचे बताने जा रहे हैं। जानिए, हाइपरमेसिस ग्रेविडेरम और मॉर्निंग सिकनेस के बीच का अंतर :
हाइपरमेसिस ग्रेविडेरम मॉर्निंग सिकनेस
बहुत ज्यादा उल्टियां होना। कम उल्टियां होना।
10 से 20 प्रतिशत गर्भवती महिलाओं को यह समस्या होती है। 80 प्रतिशत गर्भवती महिलाओं को ये समस्या होती है।
इस दौरान तेजी से वजन गिर सकता है। इस दौरान वज़न कम नहीं होता।

आइए, अब जानते हैं प्रेगनेंसी में उल्टी और मतली किन कारणों से आती है।


प्रेगनेंसी में उल्टी और मतली के कारण

गर्भावस्था में मॉर्निंग सिकनेस और हाइपरमेसिस ग्रेविडेरम के सटीक कारणों का पता नहीं चल सकता है, लेकिन कुछ सामान्य कारण हैं, जिनसे प्रेगनेंसी में जी-मिचलाने और उल्टी आने की समस्या बन सकती है, जैसे :

डॉक्टरों का मानना है कि गर्भावस्था में उल्टी और मिचली आने का कारण एस्ट्रोजन हार्मोन में वृद्धि होना हो सकता है। गर्भावस्था के दौरान एस्ट्रोजन हार्मोन ज्यादा बढ़ जाते हैं।
अगर आप गर्भावस्था के दौरान तनाव में रहती हैं, तो भी मॉर्निंग सिकनेस हो सकती है (6)।
इसके पीछे अनुवांशिक कारण भी हो सकता है। अगर गर्भवती की मां को भी हाइपरमेसिस ग्रेविडेरम की समस्या रही है, तो हो सकता है उसे भी इससे जूझना पड़े। आपको बता दें कि 28 प्रतिशत महिलाओं को जिन्हें गर्भावस्था के दौरान मॉर्निंग सिकनेस की समस्या होती है, वो समस्या उनकी मां को भी रह चुकी होती है। वहीं, 19 प्रतिशत मामलों में गर्भवती की बहन को भी यह समस्या हो चुकी होती है (3)।
इसके अलावा, गर्भावस्था के दौरान पाचन क्षमता कम हो जाती है, जिससे उच्च फैट वाला खाना पच नहीं पाता। इस कारण भी उल्टी और मतली की समस्या हो सकती है।
हेलिकोबैक्टर पाइलोरी के कारण भी यह समस्या हो सकती है। यह एक प्रकार का विषैला जीवाणु है, जो पेट में पाया जाता है (7)।
अगर गर्भ में एक से ज्यादा भ्रूण हैं, तो एस्ट्रोजन और प्रोजेस्ट्रोन हार्मोन ज्यादा बनते हैं, जिस कारण मॉर्निंग सिकनेस की परेशानी अधिक हो सकती है।
अगर आपका वजन सामान्य से ज्यादा है। इस बारे में डॉक्टर आपको जांच के बाद बेहतर बताएंगे।
अगर आप 30 साल की उम्र के बाद गर्भधारण करती हैं।
माइग्रेन, गैस व उच्च रक्तचाप जैसी समस्याएं होने पर भी गर्भवती को मॉर्निंग सिकनेस हो सकती है।


यूं तो गर्भावस्था के दौरान उल्टी आने के संकेत और लक्षण हर महिला के अलग-अलग हो सकते हैं, लेकिन कुछ आम संकेतों के बारे में हम नीचे बताने जा रहे है

भूख कम लगना।
डिप्रेशन जैसा महसूस होना।
कुछ भी खाने का मन न करना।
डिहाइड्रेशन और कमजोरी होना।
अगर ज्यादा उल्टियां हों, तो वज़न कम हो सकता है।
केटोसिस की समस्या होना। इस दौरान, रक्त और पेशाब में केटोसिस (एक तरह का केमिकल) की मात्रा बढ़ जाती है। ऐसा बहुत ज्यादा उल्टियां होने पर होता है।

अब हमारे लिए यह जानना भी ज़रूरी है कि इस समस्या का उपचार क्या है।

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गर्भावस्था में उल्टी और मतली के लिए क्या उपचार हैं? |
गर्भावस्था में उल्टी और मतली की समस्या ज्यादा बढ़ने पर समय रहते उपचार करने की ज़रूरत होती है। नीचे हम मॉर्निंग सिकनेस से छुटकारा पाने के कुछ कारगर उपाय बताने जा रहे हैं

थोड़ा-थोड़ा खाएं : गर्भावस्था के दौरान जी-मिचलाने और उल्टी आने की समस्या से बचने के लिए आप थोड़ी-थोड़ी देर के अंतराल पर थोड़ा-थोड़ा खाती रहें। ऐसा करने से मॉर्निंग सिकनेस से राहत मिलेगी।
ड्रिप चढ़वाना : जिन गर्भवती महिलाओं को उल्टी की समस्या ज्यादा बढ़ जाती है, उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया जा सकता है। वहां, उन्हें ड्रिप चढ़वाने की ज़रूरत पड़ सकती है। इससे द्रव पदार्थ को सीधा नस के जरिए शरीर में प्रविष्ट करवाया जाता है।
एक्यूप्रेशर : हाथ पर एक्यूप्रेशर करने से भी मॉर्निंग सिकनेस को कम किया जा सकता है (10)।
टोटल पैरेंटरल न्यूट्रिशन : जब यह समस्या ज्यादा बढ़ जाती है, तो शरीर को संतुलित मात्रा में पोषक तत्व इन्जेक्शन के जरिए गर्भवती को दिए जाते हैं।

गर्भावस्था के दौरान जी-मिचलाने और उल्टी आने की समस्या दिन में किसी भी समय हो सकती है। हो सकता है कि कि आपको किसी गंध पर उल्टी जैसा महसूस हो जाए। इसके अलावा, किसी विशेष खाने पर या फिर रक्त शर्करा कम होने पर आपको उल्टी आने की समस्या हो सकती है। नीचे हम कुछ टिप्स बता रहे हैं, जो इस समस्या को नियंत्रित करने में मदद करेंगे :

ऐसा खानपान खाएं, जिसमें उच्च मात्रा में कार्बोहाइड्रेट हो, जैसे – ब्राउन ब्रेड व दालें आदि। इसके अलावा, प्रोटीन युक्त चीजें जैसे बीन्स, मटर व पनीर आदि खाने से फायदा मिल सकता है।

फलों का सेवन करें जैसे केला, कीवी, तरबूज व सेब आदि। इसके अलावा, फाइबर की मात्रा बढ़ाने के लिए सूखे मेवों का इस्तेमाल करें। आप डिहाइड्रेशन और कब्ज़ की समस्या से बचने के लिए नींबू व हरी सब्जियों का सेवन कर सकती हैं, क्योंकि डिहाइड्रेशन और कब्ज होने से भी मतली की समस्या हो सकती है

सुबह उठकर कुछ बिस्कुट खाएं। इनमें प्रचुर मात्रा में कार्बोहाइड्रेट होते हैं, जो गर्भावस्था के दौरान मिचली और उल्टी की समस्या से राहत दिलाते हैं।

हमेशा खुद को हाइड्रेट रखें। दिन में आठ से दस गिलास पानी जरूर पिएं। ध्यान रहे कि आप खाना खाने के बीच में और खाना खाने के तुरंत बाद पानी न पिएं। हमेशा खाना खाने के एक घंटे बाद पानी पिएं। यह आपको गैस और ब्लोटिंग की समस्या से दूर रखेगा, जो जी-मिचलाने का एक कारण बन सकता है।

घर की खिड़कियां खुली रखें और ताजी हवा लें।

प्रेगनेंसी के दौरान उल्टी आने की समस्या से राहत पाने के लिए आप अदरक का सेवन कर सकती हैं (12)। अदरक इस समस्या से राहत दिलाने में काफी कारगर साबित हो सकता है। आप चाहें तो अदरक की चाय भी बनाकर पी सकती हैं।

नींबू सूंघने से भी इस समस्या से राहत पाई जा सकती है। कहा जाता है कि नींबू की महक से जी-मिचलाना कम हो सकता है

अपने पेट को खाली न रहने दें, 1-2 घंटे में कुछ न कुछ खाती रहें।

थकावट से यह समस्या और भी बढ़ सकती है, इसलिए जरूरी है कि आप पूरा आराम करें।

फलों का रस भी इस समस्या से राहत दिलाने में मदद करता है, लेकिन खट्टों फलों का जूस न लें।

आइए, अब जानते हैं कि खाना खाने के बाद मतली को कैसे रोका जा सकता है।

भोजन के बाद मतली को कैसे रोकें?

कई गर्भवती महिलाएं जैसे ही खाना खाती हैं, उनका जी-मिचलाने लगता है। यहां हम बता रहे हैं कि भोजन के बाद मतली की समस्या को कैसे कम किया जा सकता है :

आप खाना खाने के तुरंत बाद न लेटें। इससे पाचन प्रक्रिया कमजोर पड़ती है और जी-मिचलाने लगता है।

आप खाना खाने के कुछ देर बाद हर बार हल्का-हल्का ब्रश करें। इसके अलावा, अगर कभी उल्टी हो, तो उसके बाद भी ब्रश करना चाहिए।

खाना खाने के बाद एक नींबू पर थोड़ा-सा नमक लगाकर चाटने से आपको जी-मिचलाने से राहत मिलेगी।

आप हल्का, कम तेल मसाले का खाना खाएं, जिसे पचाने में आसानी हो। इस दौरान ज्यादा तेल मसाले वाला खाने से भी जी-मिचला सकता है, क्योंकि इन्हें पचने में देर लगती है।

आपको बता दें कि मॉर्निंग सिकनेस और उल्टी आना गर्भावस्था का ऐसा दौर होता है, जो कुछ समय बाद खुद-ब-खुद ठीक हो जाता है। हालांकि, शुरू के तीन महीनों में आपको इससे काफी परेशानी हो सकती है, लेकिन धीरे-धीरे यह समस्या खुद ठीक हो जाएगी। अगर यह समस्या बहुत ज्यादा हो रही है, तो डॉक्टर से संपर्क करने में देरी न करें।

क्या गर्भावस्था के दौरान उल्टी और मतली मेरे बच्चे को प्रभावित कर सकती है?

गर्भावस्था में उल्टी और मतली होना बच्चे के स्वास्थ पर कुछ खास असर नहीं डालता। हालांकि, इससे बस शिशु का वजन प्रभावित हो सकता है (8)। जब गर्भवती को उल्टियां ज्यादा होती हैं, तो जरूरी पोषक तत्व शिशु तक नहीं पहुंच पाते, जिस कारण बच्चे का वजन कम रह सकता है।
अगर मुझे पहली गर्भावस्था में उल्टी हो रही है, तो क्या भावी गर्भावस्था में भी होंगी?

हां, ऐसा हो सकता है। ज्यादातर महिलाओं को जिन्हें पहली गर्भावस्था में उल्टी और मितली की समस्या होती है, उन्हें दूसरी गर्भावस्था के दौरान भी इस समस्या से जूझना पड़ सकता है।
क्या उल्टी किसी अन्य चिकित्सा स्थिति के कारण हो सकती है?

हां, अगर गर्भवती महिला को थायरॉइड, अल्सर या पित्त की थैली में किसी तरह की समस्या है, तो गर्भावस्था के दौरान उल्टी और मतली की समस्या हो सकती है।

ये थीं गर्भावस्था के दौरान होने वाली मॉर्निंग सिकनेस से जुड़ी कुछ जरूरी बातें। इसकी जानकारी हर गर्भवती महिला को होना जरूरी है। अगर भविष्य में उन्हें या उनकी किसी परिचित को इस समस्या का सामना करना पड़े, तो वो ठीक से इसका उपचार करा सकें।

solved 5
wordpress 3 years ago 5 Answer
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