12 सप्ताह के अल्ट्रासाउंड में आप क्या देख सकते हैं?HealthPlanet

Posted on Sat 4th Mar 2023 : 16:19

गर्भावस्था की पहली तिमाही में अल्ट्रासाउंड स्कैन

गर्भावस्था के शुरुआती कुछ हफ्तों में अल्ट्रासाउंड स्कैन करवाना काफी रोमांचक हो सकता है। एक छोटे से बिंदू को धड़कते हुए देखना एक अविस्मरणीय अनुभव है और यही बिंदू आगे चलकर आपका शिशु बनेगा। पहली तिमाही के अल्ट्रासाउंड स्कैन के बारे में यहां जानें।
पहली तिमाही में मुझे कितने स्कैन करवाने होंगे?
आमतौर पर पहली तिमाही के दौरान दो स्कैन किए जाते हैं:

डेटिंग एंड वायबिलिटी स्कैन, जो कि छह से नौ हफ्ते की गर्भावस्था के बीच कराया जाता है।
अर्ली मोर्फोलॉजी या न्यूकल ट्रांसलुसेंसी (एनटी) स्कैन, जो कि 11 से 13 हफ्ते की गर्भावस्था के बीच कराया जाता है।

गर्भावस्था का पता चलने पर यदि आप तुरंत डॉक्टर से नहीं मिलती हैं, या आपको गर्भवती होने का पता ही देर से चले, तो संभव है कि आप पहला स्कैन कराने से चूक जाएं।

अधिकांश मामलों में यह कोई परेशानी की बात नहीं है। हालांकि, स्वस्थ गर्भावस्था के लिए बेहतर है कि जितनी जल्दी हो सके डॉक्टर से मिलें और अपने प्रसवपूर्व अप्वाइंटमेंट तय करें।

चूंकि हर गर्भावस्था अलग होती है, इसलिए डॉक्टर आपको जल्द से जल्द स्कैन करवाने के लिए कह सकती हैं। यदि आपके साथ कोई स्वास्थ्य समस्या है या गर्भावस्था जटिलता है तो आपको सामान्य से ज्यादा स्कैन करवाने की जरुरत हो सकती है।
डेटिंग व वायबिलिटी स्कैन की जरुरत क्यों होती है?
हालांकि, आपको गर्भावस्था की पुष्टि के लिए स्कैन की जरुरत नहीं होती है, मगर शुरुआती हफ्तों में स्कैन कराने से निम्न बातों का पता चलता है:

पता लगाना की भ्रूणीय थैली गर्भाशय के भीतर प्रत्यारोपित हो गई है या नहीं।
अस्थानिक (एक्टोपिक) या मोलर गर्भावस्था की आशंका दूर करना।
अगर, आपको कोई रक्तस्त्राव या खून के धब्बे हो रहे हैं, तो इनका कारण पता लगाना।


इस चरण पर स्कैन का इस्तेमाल निम्नांकित बातों के लिए भी किया जाता है:

डिलीवरी की सही नियत तिथि का पता लगाना
डेटिंग स्कैन आपकी डिलीवरी की नियत तिथि (ड्यू डेट) पता करने का सबसे अच्छा तरीका है। इस स्कैन में पता लगाया जाता है कि आप कितने हफ्ते की गर्भवती हैं। यदि आपका माहवारी चक्र अनियमित है या आप हाल ही में गर्भनिरोधक गोलियों का सेवन कर रही थीं, तो आपकी अंतिम बार की माहवारी के आधार पर शायद सही ड्यू डेट का पता न लग सके।

यदि स्कैन में बताई गई तिथि आपकी माहवारी के आधार वाली तिथि से अलग है, तो स्कैन वाली तिथि को इस्तेमाल किया जाएगा, क्योंकि यह ज्यादा सटीक होती है। स्कैन में आमतौर पर पता चलता है कि आपकी गर्भावस्था इतनी आगे नहीं बढ़ी है जितना की अंतिम बार की माहवारी के आधार पर लग रहा है।

स्कैन से आपको डिलीवरी की नई संशोधित अनुमानित तिथि (एक्सपेक्टेड डिलीवरी डेट - ईडीडी) पता चलेगी, जो कि अब आगे हर बार आपकी गर्भावस्था के सही चरण का पता लगाने के लिए इस्तेमाल की जाएगी। डॉक्टर भी इस तिथि के आधार पर आपके आगे ​के अल्ट्रासाउंड स्कैन और जांच तय करेंगी।

गर्भस्थ शिशु के दिल की धड़कन सुनना
स्कैन में पता चल सकता है कि आपके शिशु का दिल अब अच्छी तरह धड़क रहा है। आमतौर पर छह सप्ताह की गर्भावस्था के करीब शिशु का दिल धड़कना शुरु कर देता है।

पहली बार अपने शिशु की धड़कन सुनना काफी मार्मिक अवसर हो सकता है। अधिकांश महिलाएं कहती हैं कि शिशु के दिल का धड़कना ऐसा सुनाई देता है जैसे कि दौड़ते हुए घोड़ों की तेज आवाज।

एक स्वस्थ गर्भस्थ शिशु की हृदय गति 120 से 180 धड़कन प्रति मिनट होती है।

आपके गर्भ में कितने शिशु पल रहे हैं
​डेटिंग स्कैन से पता चलेगा कि आपके गर्भ में​ ए​क शिशु है या जुड़वा या फिर इससे ज्यादा। यदि गर्भ में एक से ज्यादा शिशु हों, तो आपकी अल्ट्रासाउंड डॉक्टर पता लगा सकती हैं कि वे एक ही गर्भाशयी थैली में हैं या दो थैली में।

गर्भावस्था की शुरुआत में ही जुड़वा शिशु होने का पता चलने से आपको प्रसव के लिए तैयार होने का और डॉक्टर को आपकी देखभाल की योजना बनाने का ज्यादा समय मिल जाता है।

कई बार एक थैली में दिल की धड़कन दिखाई देती है, दूसरी में नहीं। एक या दो हफ्ते बाद दोबारा स्कैन करवाने पर दूसरी थैली में भी धड़कन दिखाई दे सकती है या फिर हो सकता है यह पता चले कि एक थैली विकसित हो रही है और दूसरी अभी भी खाली है।

यह काफी आम है कि जुड़वा शिशुओं का गर्भधारण करने के बाद भी केवल एक ही शिशु बढ़े और विकसित हो। इस स्थिति को वैनिशिंग ट्विन सिंड्रोम कहा जाता है।

हालांकि, ध्यान रखें कि डेटिंग स्कैन में अधिक सूक्ष्म असामान्यताओं का पता नहीं लगाया जा सकता। ऐसा आपके अगले अर्ली मोर्फोलॉजी स्कैन और एनॉमली स्कैन (टिफ्फा या अल्ट्रासाउंड लेवल II स्कैन) में होगा। उस समय तक, आपका शिशु भी थोड़ा बड़ा हो गया होगा और अल्ट्रासाउंड डॉक्टर आपके शिशु की विस्तृत जांच कर सकेंगे।
पहली तिमाही में अल्ट्रसाउंड स्कैन किस तरह किया जाता है?
पहली तिमाही में स्कैन करने के दो तरीके होते हैं:

योनि स्कैन (ट्रांसवेजाइनल स्कैन)
अगर आपकी डॉक्टर गर्भावस्था के आठ सप्ताह से पहले ही आपका स्कैन करवाना चाहती हैं, तो आपका योनि स्कैन किया जाएगा। गर्भावस्था के शुरुआती हफ्तों में आपका शिशु काफी छोटा और पेट में नीचे की तरफ होता है। इसलिए पेट पर किए जाने वाले स्कैन में यह पकड़ में आना मुश्किल हो सकता है।

यदि आपका गर्भाशय श्रोणि क्षेत्र में काफी नीचे की तरफ है या फिर आपका वजन सामान्य से ज्यादा है, तो इन स्थितियों में भी योनि स्कैन करने की संभावना रहती है।

योनि स्कैन में प्रोब आपकी योनि के अंदर डाली जाती है। इससे आपके शिशु की बेहतर तस्वीर मिल सकती है।

आपको ट्रांसवेजाइनल स्कैन करवाने में संकोच और असहजता महसूस हो सकती है, मगर आप जितना ज्यादा आरामपूर्वक रहेंगी, अल्ट्रासाउंड डॉक्टर के लिए प्रोब अंदर डालने में उतनी ही आसानी होगी।

यदि आपकी मांसपेशियां तनी हुई रहेंगी, तो आपको असहजता और यहां तक की दर्द भी हो सकता है। ट्रांसवेजाइनल स्कैन (टी.वी.एस.) के बारे में यहां विस्तार से जानें।

पेट के ऊपर से स्कैन (एब्डोमिनल स्कैन)
आठ या नौ सप्ताह की गर्भावस्था के बाद करीब-करीब सारे स्कैन पेट पर से किए जाते हैं। पहली तिमाही में एब्डोमिनल स्कैन करवाने के लिए आपका मूत्राशय भरा हुआ होना चाहिए, इ​सलिए अधिकांश अस्पताल और डायग्नोस्टिक केंद्र स्कैन से पहले आपको खूब सारा पानी पीने के लिए कह सकते हैं।

क्योंकि अभी आपकी गर्भावस्था की शुरुआत ही है, इसलिए आपका शिशु बहुत छोटा है और आपका गर्भाशय भी पेट में अभी काफी नीचे की तरफ है। गर्भाशय को पेट में ऊपर की तरफ लाने के लिए आपका मूत्राशय भरा हुआ होना चाहिए। इस तरह से स्कैन में शिशु की बेहतर तस्वीर आ सकेगी।

पेट के स्कैन के दौरान डॉक्टर आपके पेट पर थोड़ा (आमतौर पर ठंडा) जैल लगाएंगी। फिर वे हाथ से चलने वाले प्रोब या ट्रांसड्यूसर को आपकी त्वचा के ऊपर घुमाएंगी, ताकि शिशु की छवि मिल सके। इस स्कैन से आपको कोई तकलीफ नहीं होगी, हालांकि आपको पेटर पर थोड़ा दबाव महसूस हो सकता है। पेट पर किए जाने वाले इस स्कैन के लिए आपको अपना पेट अनावरित करना होगा।
स्कैन के लिए मुझे क्या तैयारी करनी होगी?
ध्यान रखें कि अल्ट्रासाउंड स्कैन पुरुष और महिला दोनों डॉक्टरों द्वारा किए जाते हैं। कुछ महिलाओं को पुरुष डॉक्टर से ट्रांसवेजाइनल अल्ट्रासाउंड करवाने में संकोच महसूस होता है। अगर आप यह स्कैन महिला डॉक्टर से करवाना चाहें, तो इस बारे में पहले ही पता कर लें और उसी अनुसार अपना अप्वाइंटमेंट लें।

जब आप स्कैन के लिए जाएं, तो बेहतर है कि आप ढीले-ढाले कपड़े ही पहनें। सलवार-कमीज या टॉप व पैंट जैसे कपड़े ज्यादा आरामदायक रहेंगे। इससे आपको स्कैन के दौरान पूरे कपड़े उतारने की जरुरत नहीं होगी।

यदि आपका योनि स्कैन हो रहा है तो इसके लिए आपका मूत्राशय खाली होना चाहिए। भरे मूत्राशय से शिशु की स्पष्ट तस्वीर पाना मुश्किल हो सकता है।

अगर, आपका पेट के ऊपर से स्कैन किया जा रहा है, तो आपका मूत्राशय पूरा भरा हुआ होना चाहिए। इसलिए बेहतर है कि स्कैन करवाने जाने से पहले आप खूब सारा पानी पी लें।

कुछ महिलाएं अकेले ही स्कैन करवाना पसंद करती हैं, मगर यदि आप किसी को अपने साथ ले जाना चाहें, तो इस बारे में डॉक्टर से पूछ लें। आपकी माँ या पति ऐसे में आपको सहयोग और मदद दे सकते हैं।

हालांकि, ध्यान रखें कि कुछ जगहों पर परिवारजनों या साथ आए सदस्य को अल्ट्रासाउंड रूम में जाने की अनुमति शायद न हो।
शुरुआती चरण के स्कैन में क्या देखा जा सकता है?
पांच सप्ताह की गर्भावस्था
अल्ट्रासाउंड डॉक्टर गर्भ में एक छोटी भ्रूणीय थैली (जैस्टेशन सैक) देख सकती हैं। तरल पदार्थ भरा होने के कारण यह एक काले छिद्र के समान दिखती है। स्कैन में डॉक्टर यह पता लगा पाएंगी कि यह थैली गर्भाशय में कहा प्रत्यारोपित हुई है, ताकि अस्थानिक गर्भावस्था की आशंका को दूर किया जा सके।

हो सकता है कि इस चरण पर स्कैन में आपका शिशु न दिखाई दे, मगर अल्ट्रासाउंड डॉक्टर पीतक कोष (योक सैक) की मौजूदगी की पुष्टि कर सकती हैं। इसलिए, शायद डॉक्टर आपको एक या दो हफ्ते में दोबारा स्कैन करवाने के लिए बुलाएंगी, ताकि शिशु और उसके ​दिल की धड़कन देखी जा सके।

छह सप्ताह की गर्भावस्था
भ्रूणीय थैली में पीतक कोष एक छोटे सफेद गोले के रूप में दिख सकता है। पीतक कोष भ्रूण से जुड़ा होता है और इसमें विकास के दौरान भ्रूण को पोषित करने के लिए पोषक तत्व होते हैं।

प्रेगनेंसी के इस चरण पर आप स्कैन में अपने शिशु के दिल की धड़कन भी सुन सकती हैं।

आठ सप्ताह की गर्भावस्था
विकसित होता भ्रूण करीब एक सें.मी.से दो सें.मी. का हो गया है। अब स्कैन के दौरान इसे आसानी से देखा जा सकता है। भ्रूण का विकसित होता सिर और धड़ (जिसमें अंगों के छोटे अंकुर निकल रहे हैं) अब दिखना शुरु हो रहे हैं। यह तेजी से बढ़ेगा और हर बार कुछ हफ्तों के बाद दोगुना बड़ा हो जाएगा।

10 सप्ताह की गर्भावस्था
आपका शिशु तीन सें.मी. का हो गया है और अब सिर, पेट और अंगों के अंकुर स्पष्ट दिखने लगे हैं और इसलिए वह काफी सजीव सा दिखने लगा है।

11 से 13 सप्ताह के बीच, शायद 12 सप्ताह पर, आपका न्यूकल ट्रांसलुसेंसी (एनटी) स्कैन होगा। इस स्कैन में डाउंस सिंड्रोम के खतरे और अन्य गुणसूत्रीय या संरचनात्मक असामान्यताओं का आंकलन किया जाएगा।

12 सप्ताह की गर्भावस्था
आपके शिशु की सिर से नितंब तक लंबाई पांच से छह सेंमी. हो गई है। इस चरण पर न्यूकल ट्रांसलुसेंसी (एनटी) स्कैन निम्नांकित बातों की जांच के लिए किया जाता है:

न्यूकल ट्रांसलुसेंसी की मोटाई
नाक की हड्डी (नेज़ल बोन-एनबी) का पता लगाना और इसकी लंबाई देखना
पेट और मूत्राशय की मौजूदकी देखना
भ्रूण की रीढ और अंगों से जुड़ी समस्याएं
भ्रूण की पेट की दीवार से जुड़े विकार
भ्रूण में हृदय या रक्त संचरण संबंधी कोई गंभीर विकार
गर्भनाल की ध​मनियों की असामान्यताएं
अपरा (प्लेसेंटा) की स्थिति
माँ के गर्भ तक रक्त संचरण


अल्ट्रासाउंड डॉक्टर इस समय आपकी ग्रीवा की जांच भी कर सकती हैं। जरुरी हुआ तो यह ट्रांसवेजाइनल स्कैन के जरिये किया जा सकता है।
अगर स्कैन में कुछ गड़बड़ी का पता चले तो क्या होगा?
स्कैन भी कई बार अनिर्णायक हो सकते हैं और सभी गर्भावस्थाएं एक जैसी नहीं होती हैं, इसलिए गर्भावस्था की शुरुआत में होने वाले स्कैन के लिए कड़े दिशा-निर्देश तय हैं। अगर, स्कैन के बाद भी किसी तरह की शंका हो, तो एक या दो हफ्तों बाद स्कैन दोबारा कराया जाता है।

आप घबराएं नहीं। दूसरे स्कैन के लिए इंतजार करना काफी मुश्किल समय हो सकता है, मगर, ध्यान रखें कि अधिकांश गर्भावस्थाएं सफल रहती हैं और शायद आपका दूसरा स्कैन करवाने पर सब कुछ ठीक-ठाक ही निकले। मगर यदि दुर्भाग्यवश आपके शिशु में किसी स्वास्थ्य समस्या का पता चले, तो अल्ट्रासाउंड से मिली जानकारी के आधार पर डॉक्टर को यह निर्णय लेने में मदद मिलती है कि शिशु के लिए सबसे बेहतर क्या किया जा सकता है।

हालांकि, स्थिति की जानकारी होने से आपको विभिन्न विकल्पों पर विचार करने का ​अवसर मिल जाता है। आपको गर्भावस्था समाप्त करने, चिकित्सकीय उपचार करवाने या विशेष जरुरतों वाले शिशु को जन्म देने का कठिन निर्णय भी लेना पड़ सकता है।

अगर, दूसरे स्कैन में क्षतिग्रस्त अंडाणु (ब्लाइटेड ओवम) या चूके हुए गर्भपात (मिस्ड मिस्कैरिज) का पता लगता है, तो डॉक्टर आपको सलाह देंगी कि आगे क्या किया जा सकता है।

गर्भपात को पूरा करने के लिए वे आपको दवाएं और वेजाइनल पेसरी दे सकती हैं।

दूसरे विकल्प में अस्पताल में जाकर हल्के जनरल एनेस्थीसिया के प्रभाव में अपने गर्भाशय को खाली करवाना है। इस प्रक्रिया को अंग्रेजी में इवेकुएशन ऑफ रिटेन्ड प्रोडक्ट्स ऑफ कंसेप्शन (ईआरपीसी) या डिलटेशन और क्यूरेटेज (डीएंडसी) कहा जाता है। आमतौर पर आपको उसी दिन अस्पताल से छुट्टी दे दी जाएगी।

आपको तुरंत ही कोई निर्णय नहीं लेना होता। आपको इस बारे में सोचने का समय चाहिए होगा और डॉक्टर भी आपको सलाह देंगी कि आगे क्या किया जा सकता है।

यदि आपके एनटी स्कैन में कुछ गुणसूत्रीय असामान्यताओं के लिए सॉफ्ट मार्कर्स की मौजूदगी की पता चले या फिर डुअल मार्कर ब्लड टेस्ट में गुणसूत्रीय असामान्यताएं होने का ज्यादा खतरा दिखाई दे, तो डॉक्टर आपको कुछ एडवांस्ड टेस्ट करवाने के लिए कहेंगी।

नॉन-इनवेसिव प्रीनेटल टेस्टिंग (एनआईपीटी) एक अतिरिक्त स्क्रीनिंग टेस्ट है, जिससे शिशु में डाउंस सिंड्रोम, एडवडर्स सिंड्रोम और पटाउ सिंड्रोम होने के खतरे का पता चलता है।

कम्बाइंड टेस्ट जैसे अन्य स्क्रीनिंग टेस्ट की तुलना में एनआईपीटी ज्यादा सटीक होता है और इसे गर्भावस्था में काफी पहले कराया जा सकता है। इसमें गर्भपात होने का भी खतरा नहीं होता। हालांकि, एनआईपीटी एक महंगा टेस्ट है और चुनिंदा शहरों और केंद्रो पर ही उपलब्ध है।

यदि जांच परिणाम से पता चले कि गुणसूत्रीय असामान्यताओं वाले शिशु के जन्म का खतरा ज्यादा है, तो आपको कोरियोनिक विलस सेम्पलिंग (सीवीएस) या एमनियोसेंटेसिस जैसे डायग्नोस्टिक टेस्ट करवाने के लिए कहा जाएगा।

दुर्भाग्यवश, इन डायग्नोस्टिक जांचों में गर्भपात होने का खतरा रहता है। इसलिए इन्हें करवाने का निर्णय लेना आसान नहीं होगा।

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