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शिशु को ठोस आहार खिलाना शुरु करने के बारे में हमारा यह स्लाइडशो देखें और जानें कि शिशु को शुरुआती भोजन कैसे और कब खिलाएं और कौन से भोजन न खिलाएं। साथ ही जानें कि आप शिशु को अपने भोजन का आनंद लेने में कैसे मदद कर सकती हैं।
क्या आपका शिशु तैयार है?
शिशु को जन्म के बाद पहले छह महीनों तक अनन्य स्तनपान कराना ही उसके स्वास्थ्य के लिए सबसे हितकर है। इस तरह उसे स्तनदूध के सभी फायदे मिल पाएंगे। इससे उसके पाचन तंत्र और प्रतिरक्षण प्रणाली को भी परिपक्व होने का पर्याप्त समय मिल जाता है।
छह माह के बाद, केवल स्तनदूध शिशु को पर्याप्त पोषक तत्व प्रदान नहीं कर पाता, विशेषकर कि आयरन। इसलिए, आपको धीरे-धीरे उसे ठोस आहार देना शुरु करना होगा। इसकी शुरुआत से पहले यह देखें कि आपका शिशु ठोस आहार के लिए तैयार है या नहीं।
कौन से भोजन कब दिए जाएं?
ठोस आहार शुरु करने का मूलमंत्र है कि शिशु को एक बार में एक ही नई चीज दी जाए। कोई भी नया भोजन उसे हर पांचवे दिन ही देना चाहिए। इस प्रकार भोजन से होने वाली किसी भी तरह की एलर्जी का आसानी से पता लगाया जा सकता है। केवल एक सामग्री (इन्ग्रीडीएंट) से बनी फल और सब्जियों की प्यूरी और चावल जैसे कुछ सीरियल से शुरुआत कर सकती हैं।
इसके बाद आप कुछ और सामग्रियों, स्वाद और बनावट वाले भोजन शामिल करें। यदि आप चाहें तो शिशु के लिए स्वादिष्ट शुरुआती भोजनों की रेसिपी यहां देख सकती हैं।
जब शिशु सात माह का हो जाए, तो आप स्तनपान के साथ-साथ उसे ग्लूटेन देना शुरु कर सकती हैं। ग्लूटेन मुख्यत: गेहूं में पाया जाता है।
छह माह की उम्र के बाद से शिशु के लिए खाना बनाने में आप थोड़ी मात्रा में गाय का दूध इस्तेमाल कर सकती हैंं। मगर शिशु के एक साल का होने से पहले गाय का दूध मुख्य पेय के तौर पर उसे न दें।
यहां और अधिक पढ़ें कि शिशु को कौन से भोजन कब दिए जाएं। अगर, आपके परिवार में एलर्जी का इतिहास रहा है, तो बेहतर है कि आप इस बारे में डॉक्टर की सलाह लें।
बनावट
शिशु जब छह महीने का हो जाए, तो उसे नरम गाढ़ा गूदा (प्यूरी) देना शुरु करें। सात से नौ माह के बीच उसे मसला हुआ या कीमे की तरह पिसा हुआ भोजन (न कि गाढ़ा गूदा) देने की कोशिश करें। शिशु का भोजन मसलने के लिए ब्लेंडर की बजाय कांटे का इस्तेमाल करें, ताकि यह ढेलेदार रहे।
शिशु जब सात महीने का हो जाए, तो आप उसे हाथ में पकड़ कर खाने वाले खाद्य पदार्थ (फिंगर फूड) देना भी शुरु कर सकती हैं।
शिशु के 10 महीने का होने के बाद से उसका आहार बड़ों के जैसा ही होना चाहिए। उसका भोजन भी बारीक कटा हुआ हो। खाने की बनावट भी ऐसी हो कि वह शिशु को चबाने के लिए प्रोत्साहित करे।
शिशु जब ढेलेदार भोजन या हाथ में पकड़ कर कुछ खा रहा हो, तो उसे कभी भी अकेला न छोड़ें। यहां जाने कि अगर भोजन शिशु के गले में अटक जाए, तो क्या करें।
शिशु के लिए खाद्य सुरक्षा
आपके शिशु की प्रतिरक्षण प्रणाली अभी अपेक्षाकृत थोड़ी नाजुक होती है। इस वजह से शिशु में पेट का संक्रमण होने का खतरा रहता है। सुनिश्चित कीजिए कि आप शिशु का भोजन पकाने या धोने के लिए भी पीने का सुरक्षित पानी इस्तेमाल करें। बचे हुए भोजन को सही ढंग से संग्रहित करके रखें।
ऐसे कुछ भोजन व सामग्रियां हैं, जो शिशु को एक साल से पहले नहीं दी जानी चाहिए। इनमें शामिल हैं- नमक, चीनी, शहद, कृत्रिम मीठा, कुछ विशिष्ट मछलियां (जिनमें पारे का स्तर काफी ज्यादा हो), कम वसा वाले भोजन और कैफीन।
पांच साल से छोटे बच्चों को साबुत मेवे नहीं देने चाहिए, क्योंकि इनके गले में अटकने का खतरा रहता है। यदि आप अपने शिशु को मेवे खिलाना चाहती हैं, तो उन्हें पीस कर या पेस्ट बनाकर खिलाएं।
शिशु का सेहतमंद खाना
अगर भोजन ताजा और मौसमी सामग्रियों से बनाया जाए, तो सबसे पौष्टिक होता है। जब शिशु अलग-अलग फलों और सब्जियों के स्वाद पहचानने लगे, तो आप किन्हीं दो चीजों को मिलाकर भी उसे भोजन दे सकती हैं।
शिशु का विकास अच्छी तरह हो सके इसलिए जरुरी है कि उसे विविध आहार खिलाए जाएं। इसका एक तरीका यह है कि शिशु को इंद्रधनुष के सभी रंगों वाले भोजन खिलाए जाएं। इसके बारे में आप हमारे स्लाइडशो में लाल, नारंगी, पीले, हरे, जामुनी और सफेद रंगों के भोजनों के बारे में जान सकती हैं।
भारतीय बाल चिकित्सा अकादमी (आईएपी) अनन्य स्तनपान करने वाले और प्रतिदिन एक लीटर से कम फॉर्मूला दूध पीने वाले शिशुओं को रोजाना 400 यूनिट विटामिन डी जन्म से एक साल का होने तक देने की सलाह देते हैं। शिशु को आयरन की कमी (एनीमिया) से बचाने के लिए आयरन अनुपूरक भी दिए जा सकते हैं।
बच्चे के आहार या कोई जरुरी अनुपूरकों के बारे में यदि आपके कोई सवाल हों तो डॉक्टर से अवश्य पूछें।
स्वादिष्ट भोजन बनाना
शिशु के भोजन में चीनी या नमक न मिलाना ही बेहतर है। मगर, इनके बिना भी शिशु के लिए स्वादिष्ट भोजन बनाया जा सकता है। उसके भोजन में स्वाद के लिए आप लहसुन, अदरक, पिसे हुए मसाले जैसे हल्दी, जीरा और धनिया या साबुत मसाले जैसे जीरा, सौंफ, दालचीनी या इलायची डाल सकती हैं।
आपके शिशु को मीठे स्वाद वाले भोजन पसंद आना स्वाभाविक है, क्योंकि स्तन दूध में भी मीठा होता है। मगर, शिशु को नमकीन स्वाद की आदत होना भी अच्छा रहता है। अगर, आपको किसी भोजन में मीठा डालना ही हो, तो चीनी की बजाय किसी फल या स्तनदूध का इस्तेमाल करें।
शुरुआती सूप
आप शुरुआत में केवल एक सामग्री से बना सूप दे सकती हैं और इसके बाद धीरे-धीरे मिक्स वेजिटेबल, चिकन या मीट सूप दे सकती हैं। क्लीयर सूप का इस्तेमाल आप शिशु के सीरियल्स में मिलाने के लिए कर सकती हैं। चावल के व्यंजन बनाने या फिर शिशु चपाती या परांठे खाने लगे तो आटा गूंथने में क्लीयर सूप का इस्तेमाल कर सकती हैं।
हमारी 30 मिनट में दाल सूप बनाने की रेसिपी शिशु के लिए बेहतरीन आहार है। हमारे विडियो में जानें कि आप इसे किस तरह बना सकती हैं, कि शिशु को यह पसंद आए।
यदि आप ऐसे स्वादिष्ट सूप बनाने के सुझाव चाह रही हैं, तो हमारी शुरुआती सूप की रेसिपी के बारे में जानें।
शुरुआती अनाज
शिशु को अनाज देने की शुरुआत चावल से करना अच्छा रहता है। चावल न केवल पौष्टिक होते हैं, बल्कि ये आसानी से पच भी जाते हैं। जैसे-जैसे शिशु दाल, सूप और प्यूरी में मिले चावल खाने का आदि हो जाए, तो फिर उसे सूजी, रागी, बाजरा, ज्वार और साबूदाना जैसे अन्य अनाज दे सकती हैं।
पचाने में थोड़े मुश्किल अनाज जैसे कि गेहूं या जई शिशु को सात महीने का हो जाने के बाद दें। शिशु के शुरुआती आहार के लिए अनाज की व्यंजन विधियां यहां देखें।
शुरुआती रस
आप शिशु को भोजन के साथ पीने के लिए फलों और सब्जियों का रस दे सकती हैं। बेहतर है कि आप ताजा रस घर पर ही तैयार करें, ताकि सुनिश्चित हो सके कि रस में चीनी, नमक, कृत्रिम रंग व स्वाद नहीं हैं। शिशु को जूस में पानी मिलाकर ही दें, एक हिस्से जूस में 10 हिस्से पानी।
शिशु को जूस देना तभी शुरु करें जब वह सादा पानी अच्छे से पीने लगा हो, वरना वह हमेशा जूस या फ्लेवर्ड पानी ही पीना चाहेगा! साथ ही, शिशु को पानी के बदले जूस या कोई मीठा पेय कभी न दें। अगर, शिशु को केवल मीठे या अन्य स्वाद वाले पेय पदार्थों की आदत पड़ जाती है, तो उसे पर्याप्त तरल पदार्थ की बजाय केवल काफी सारी कैलोरी ही मिलेगी। मीठे भोजन और पेय शिशु को उभरते दांतों के लिए नुकसानदेह हैं।
शुरुआती मीठा
बेहतर है कि शिशु को मीठे व्यंजन देना तभी शुरु किया जाए जब वह नमकीन ठोस आहार अच्छे से खाने लग गया हो। वरना, हो सकता है वह सिर्फ मीठे व्यंजन ही पसंद करने लगे।
शिशु के लिए मीठे की शुरुआत करने का सबसे सेहतमंद विकल्प हैं उबाले या भाप में पकाए हुए या फिर ताजा फल। शिशु के लिए बनाए डेजर्ट या पुडिंग को मीठा बनाने के लिए शहद या चीनी न डालें। इसकी बजाय फलों की प्यूरी या चुटकी भर दालचीनी डालें। शिशु के लिए शुरुआती मीठे की व्यंजन विधियां यहां देखें।
शाकाहारी या वीगन आहार
अगर आप शिशु को वीगन या शाकाहारी आहार देती हैं, तो आपको यह ध्यान रखना होगा कि शिशु को वे सभी पोषक तत्व मिल सकें, जिनकी कमी शाकाहारी या वीगन आहार में होती है। जैसे कि विटामिन बी6, बी12, विटामिन डी, आयरन, प्रोटीन और कैल्शियम।
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