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आयुर्वेद के अनुसार भोजन स्वस्थ जीवन जीने की महत्वपूर्ण जरूरत है. एक प्रेग्नेंट महिला का खान-पान ही गर्भ में मौजूद बच्चे के विकास और स्वास्थ्य के लिए जिम्मेदार है, इसलिए प्रेग्नेंसी के दौरान आयुर्वेद की सिफारिशों को
मां बनने का सपना देखने से लेकर मां बनने तक की यात्रा एक महिला के लिए काफी रोमांचक, भावुक कर देने वाली होने के साथ ही जिम्मेदारी भरी भी होती है. इस दौरान शरीर में होने वाले बदलावों से लेकर आने वाली नई जिंदगी के लिए बेहतर जीवन की कल्पना भी साथ चलती है. मां के स्वास्थ्य और बच्चे के विकास के लिए गर्भधारण (Pregnancy) से लेकर नौवें महीने तक गर्भवती महिला के खान-पान का बेहद ध्यान रखा जाता है क्योंकि यही उसके होने वाले बच्चे को पोषण (Nutrition) प्रदान करता है. हालांकि कई बार अलग-अलग जगहों पर खान-पान की अलग-अलग मान्यताओं, बड़े बुजुर्गों के अनुभवों, चिकित्सकों की सलाहों और खुद प्रेग्नेंट महिला (Pregnant Woman) की पसंद-नापसंद के चलते सही और पोषणयुक्त भोजन का चुनाव करना काफी कठिन हो जाता है. ऐसे में आयुर्वेद की ओर से प्रेग्नेंट महिलाओं के लिए तय की गई ये पोषणयुक्त डाइट काफी फायदेमंद हो सकती है.गर्भवती महिलाओं के लिए डाइट पहला महीना– पहले महीने में महिलाएं ठंडा दूध और पोषणयुक्त खाना खाएं. जिसमें फल, सब्जी, दाल आदि ले सकते हैं.
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