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1 महीने के बचà¥à¤šà¥‡ को सरà¥à¤¦à¥€ से कैसे बचाà¤à¤‚?
मां का दूध शिशà¥à¤“ं के लिठअमृत के समान है। सरà¥à¤¦à¥€ से नवजात शिशॠठंड की चपेट में आकर निमोनिया से गà¥à¤°à¤¸à¥à¤¤ हो सकते हैं। फिलहाल, असà¥à¤ªà¤¤à¤¾à¤² में 20 के करीब शिशà¥à¤“ं का इलाज चल रहा है। इनमें कà¥à¤›à¥‡à¤• बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को निमोनिया होने के बाद नà¥à¤¯à¥‚ सिकबोरà¥à¤¨ यूनिट में रखा गया है। विशेषजà¥à¤ž चिकितà¥à¤¸à¤• ों की मानें तो ठंड से शिशॠनिमोनिया की चपेट में आ सकते हैं। à¤à¤¸à¥‡ में बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को गरà¥à¤® कपड़े पहनाकर रखें। साथ ही बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को गरà¥à¤® कमरे में ही रखें। इससे बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को निमोनिया होने की संà¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ कम हो जाती है। अगर, बचà¥à¤šà¥‡ की सांस तेज हो जाठतो à¤à¥€ बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को निमोनिया हो सकता है। à¤à¤¸à¥€ सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ में बचà¥à¤šà¥‡ को तà¥à¤°à¤‚त विशेषजà¥à¤ž चिकितà¥à¤¸à¤• से चेकअप करवाà¤à¤‚। वहीं, नवजात शिशà¥à¤“ं को बीड़ी और सिगà¥à¤°à¥‡à¤Ÿ का धà¥à¤†à¤‚ à¤à¥€ बीमार कर सकता है। सरà¥à¤¦à¥€ के मौसम में अकसर लापरवाही के चलते नवजात बीमार पड़ जाते हैं। कई बार बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को ठंड लग जाती है। इस कारण बचà¥à¤šà¥‡ निमोनिया की चपेट में आ जाते हैं। समय पर इलाज न होने पर निमोनिया घातक सिदà¥à¤§ हो सकता है।
सरà¥à¤¦à¥€ के मौसम में नवजात शिशà¥à¤“ं को गरà¥à¤® कपड़ों में रखें। इसके अलावा बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को ठंड लगने पर तà¥à¤°à¤‚त चिकितà¥à¤¸à¤• से चेकअप करवाà¤à¤‚। ठंड होने पर बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को मां का दूध पिलाना जरूरी है। इससे बचà¥à¤šà¤¾à¥‡à¤‚ में बीमारी से लड़ने की शकà¥à¤¤à¤¿ मिलती है। सांस तेज होने पर à¤à¥€ दूध पिलाना जरूरी है। सरà¥à¤¦à¥€ के मौसम में नवजात के डायपर को बदलते रहना चाहिà¤à¥¤ जलà¥à¤¦ डायपर न बदलने से नवजात को सरà¥à¤¦à¥€ जà¥à¤•ाम के साथ अनà¥à¤¯ पà¥à¤°à¤•ार के कई संकà¥à¤°à¤®à¤£ हो सकते हैं। हलà¥à¤•े गà¥à¤¨à¤—à¥à¤¨à¥‡ पानी में कपड़ा à¤à¤¿à¤—ोकर बचà¥à¤šà¥‡ के शरीर को पोंछ दें। बचà¥à¤šà¥‡ को गरà¥à¤® कपड़े ही पहनाà¤à¤‚।
बचà¥à¤šà¥‡ का कैसे धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ रखें
ठंड में छह महीने से कम उमà¥à¤° के नवजात के हर समय हाथ-पैर, पेट और तलबे को छूकर देखते रहना चाहिà¤à¥¤ जरा सी à¤à¥€ ठंड महसूस हो तो तà¥à¤°à¤‚त मालिश करें ताकि नवजात के शरीर में गरà¥à¤®à¥€ आ जाà¤à¥¤
दूध नहीं पीता है तो कà¥à¤¯à¤¾ करें
ठंड में अगर बचà¥à¤šà¤¾ ऊपर का दूध नहीं पीता तो दूध को हलà¥à¤•ा गरà¥à¤® करके दें। इसके बाद दूध न पीठतो डॉकà¥à¤Ÿà¤° को दिखाà¤à¤‚। हो सकता है कि ठंड लगने से कोई à¤à¥€à¤¤à¤°à¥€ समसà¥à¤¯à¤¾ हो गई हो।
कंगारू मदर कà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ कà¥à¤¯à¤¾ है
कंगारू मदर केयर वह पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ है जो नवजात को मां के शरीर से गरà¥à¤®à¥€ पà¥à¤°à¤¦à¤¾à¤¨ करती है। इसके सहारे शिशॠको मां अपने सीने से चिपकाकर रखती है। मां के शरीर से मिलने वाली ऊरà¥à¤œà¤¾ नवजात के à¤à¥€à¤¤à¤° रोग पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤°à¥‹à¤§à¤• कà¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾ को बढ़ाती है।
बचà¥à¤šà¤¾ कमजोर है तो कà¥à¤¯à¤¾ करें
नवजात या à¤à¤• साल की उमà¥à¤° तक का बचà¥à¤šà¤¾ कमजोर है और उसका औसत वजन à¤à¥€ कम है तो उसके खून की जांच जरूरी है। नवजात को मां का दूध पिलाना चाहिà¤à¥¤ अगर मां को दिकà¥à¤•त है तो महिला रोग विशेषजà¥à¤ž से परेशानी बतानी चाहिà¤à¥¤
नवजात को पकड़ते वकà¥à¤¤ कैसे रखें धà¥à¤¯à¤¾à¤¨
बचà¥à¤šà¥‡ या नवजात को गोद में लेते वकà¥à¤¤ विशेष सावधानी बरतनी चाहिà¤à¥¤ गोद में लेते वकà¥à¤¤ बचà¥à¤šà¥‡ के सिर और गरà¥à¤¦à¤¨ का विशेष धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ रखना चाहिà¤à¥¤ कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि जनà¥à¤® के बाद नवजात का सिर और गरà¥à¤¦à¤¨ बहà¥à¤¤ नाजà¥à¤• होती है। à¤à¤Ÿà¤•े में उठाने की वजह से उसके सिर और गरà¥à¤¦à¤¨ की मांसपेशियों को नà¥à¤•सान हो सकता है।
बाकà¥à¤¸
असà¥à¤ªà¤¤à¤¾à¤² की सिकबोरà¥à¤¨ यूनिट तैयार
à¤à¤• माह के शिशà¥à¤“ं को निमोनिया होने पर नà¥à¤¯à¥‚ सिकबोरà¥à¤¨ केयर यूनिट में à¤à¥€ उपचार किया जाà¤à¤—ा। इसके अलावा सीरियस हालत में असà¥à¤ªà¤¤à¤¾à¤² पहà¥à¤‚चने वाले बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को à¤à¥€ रखा जाà¤à¤—ा। यूनिट में 24 घंटे शिशà¥à¤†à¥‡à¤‚ का इलाज किया जाà¤à¤—ा।
बाकà¥à¤¸
मां à¤à¥€ रखे सà¥à¤µà¤šà¥à¤›à¤¤à¤¾ का धà¥à¤¯à¤¾à¤¨
ठंड से गà¥à¤°à¤¸à¥à¤¤ मां को à¤à¥€ नवजात को ठंड से बचाने के लिठसावधानियां बरतने की जरूरत है। मां को सरà¥à¤¦à¥€ जà¥à¤•ाम होने पर उसे सà¥à¤µà¤šà¥à¤›à¤¤à¤¾ का धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ रखना जरूरी है। इससे नवजात को ठंड होने की संà¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ कम रहेगी।
बाकà¥à¤¸
सांस बढ़ने पर तà¥à¤°à¤‚त करवाà¤à¤‚ चेकअप
ठंड होने के बाद बचà¥à¤šà¥‡ की सांस तेज हो सकती है। à¤à¥‡à¤¸à¥‡ में तà¥à¤°à¤‚त विशेषजà¥à¤ž चिकितà¥à¤¸à¤• से बचà¥à¤šà¥‡ का चेकअप करवाà¤à¤‚। समय पर बचà¥à¤šà¥‡ का चेकअप न होने पर बीमारी बढ़ सकती है। निमोनिया से बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ में चेसà¥à¤Ÿ इंफेकà¥à¤¶à¤¨ बढ़ सकता है।
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