healthplanet.net

Posted on



स्पॉन्डिलाइटिस के प्रकारों में शामिल हैं:

एंकिलोसिंग स्पॉन्डिलाइटिस:

इसमें रीढ़ और पेल्विस में सूजन आ जाती है जिससे पीठ में सूजन भी हो जाती है। यह आमतौर पर 45 साल की उम्र में शुरू होता है और यह ज्यादातर समय निरंतर गतिविधि से बेहतर होता है लेकिन आराम करने से नहीं।

जैसे-जैसे समय बीतता है सूजन से एंकिलोसिस हो सकता है जो रीढ़ में नई हड्डी का निर्माण होता है। इस प्रकार रीढ़ की हड्डी को स्थिर स्थिति में स्थिर करना।
एंटरोपैथिक गठिया:

यह सूजन आंत्र रोग से जुड़ा हुआ है। इसमें आंत की सूजन होती है और इसमें आंत्र शामिल होता है जो फिर से एंटरोपैथिक गठिया की एक प्रमुख विशेषता है।

इसके लक्षणों में पेट दर्द, वजन घटना, दीर्घकालिक दस्त, मल में खून आना शामिल हैं।
सोरियाटिक गठिया:

इसमें हाथ-पैर के जोड़ों में लगातार सूजन और दर्द बना रहता है। कुछ लोगों में सोरियाटिक अर्थराइटिस के कारण त्वचा पर रैशेज भी हो जाते हैं। कभी-कभी रीढ़ में अकड़न भी होती है।
प्रतिक्रियाशील गठिया:

प्रतिक्रियाशील गठिया में आंत या मूत्र पथ में संक्रमण होता है। इससे जोड़ों, आंखों, जननांगों, मूत्राशय, श्लेष्मा झिल्ली में सूजन और दर्द भी हो सकता है।
किशोर स्पोंडिलोआर्थराइटिस:

ये लक्षण बचपन में शुरू होते हैं और सामान्य स्पॉन्डिलाइटिस की तरह दिखते हैं। इसमें टेंडन या लिगामेंट के मिलने वाली जगह पर सूजन आ जाती है।

solved 5
wordpress ago 5 Answer
--------------------------- ---------------------------
+22

Author ->

Short info