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बार-बार बीमार पड़ने का कारण
शरीर में जब किसी तरह का असंतुलन होता है तो शरीर खुद को अस्वस्थ (Unhealthy) महसूस करने लगता है. शरीर में यह असंतुलन किसी भी रूप में हो सकता है चाहे वो हार्मोनल इम्बेलेंस (Hormonal Imbalance) हो या पोषक तत्वों की कमी हो या मांसपेशियों से संबंधित हो. हमारे शरीर के सभी अंग प्राकृतिक रूप से रोगों से लड़ने में सक्षम होते हैं, जिसका मुख्य कारण होता है शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (Body Immunity) का‌, लेकिन उम्र के हिसाब से रोग प्रतिरोधक क्षमता सभी में कम-ज्यादा हो सकती है जो आपके बार-बार बीमार होने का एक सबसे मुख्य कारण है. इसके अलावा भी कई ऐसे कारण हैं जो आपको लगातार बीमार करते रहते हैं-

शरीर में किसी पोषक तत्व की कमी
अगर शरीर में किसी भी विटामिन्स, प्रोटीन और पोषक तत्व की कमी होती है तो वह भी संबंधित अंग को प्रभावित कर सकता है. जैसे प्रोटीन की कमी से मांसपेशियां कमजोर होती हैं. वसा के ज्यादा होने से दिल कमजोर होने लगता है. आयरन की कमी होने से हिमोग्लोबिन की कमी होती है आदि ऐसे कई कारण हैं, जो शरीर को कमजोर करते हैं, जिससे व्यक्ति बीमार होता है या खुद को थका हुआ और बीमार महसूस करता है. हार्मोन का संतुलन बेहद जरूरी
शरीर के सभी अंगों के ठीक तरह से कार्य करने के लिए शरीर में हार्मोन का संतुलन होना भी आवश्यक है. अगर इन हार्मोन में किसी भी तरह का असंतुलन होता है तो व्यक्ति बीमार हो जाता है. हार्मोन्स बिगड़ने के कई कारण हो सकते हैं जैसे महिलाओं में 40 से अधिक उम्र होने पर हार्मोन्स में परिवर्तन होते रहते हैं. इसके अलावा अधिक तनावग्रस्त होने के कारण भी हार्मोन्स असंतुलित होते हैं. पैन्क्रियाज ग्रंथि के प्रभावित होने पर भी शरीर में प्राकृतिक रूप से इंसुलिन बनना बंद हो जाता है, जिससे डायबिटीज जैसी बीमारी पैदा हो जाती है. आमतौर पर हार्मोन असंतुलन की समस्या 40 वर्ष के बाद ही आती है, इसलिए इस उम्र में आते ही व्यवस्थित खानपान और जीवनशैली का ध्यान रखना चाहिए.

अनियमित दिनचर्या का प्रभाव
कई लोगों की जीवन शैली इन दिनों व्यस्तता के चलते खराब हो गई है. नियमित व्यायाम नहीं करना, खानपान में गड़बड़ी, अधिक वसायुक्त आहार का सेवन करना, रातभर जागने के कारण कम नींद होना आदि सभी बीमारियों के मुख्य कारण होते हैं. इस कारण भी लोग बार-बार बीमार होते हैं.

हानिकारक रसायनयुक्त खानपान का प्रभाव
आजकल ज्यादातर रसायुक्त चीजों का उपयोग किया जा रहा है, जैसे सब्जियों और फलों को जल्द पकाने के लिए इंजेक्शन का उपयोग होता है. खानपान की चीजें भी अमानक स्तर की पॉलिथीन में पैक कर दी जाती हैं, जिसका हमारे स्वास्थ्य पर काफी दुष्प्रभाव पड़ता है. कैंसर जैसी घातक बीमारी भी इसी का परिणाम है. स्वस्थ रहने के लिए ज्यादातर प्रयास यह करना चाहिए कि पॉलिथीन का कम उपयोग करें.

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