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रोग के लक्षणों की जांच करके रोग को देखा जा सकता है। रोगों के सामान्य लक्षणों में सिरदर्द, बुखार, उल्टी आदि शामिल हैं। पीलिया की तरह पीली त्वचा की जांच की जा सकती है। लूज मोशन से डायरिया की जांच की जा सकती है।
रोग अर्थात अस्वस्थ होना। यह चिकित्साविज्ञान का मूलभूत संकल्पना है। प्रायः शरीर के पूर्णरूपेण कार्य करने में में किसी प्रकार की कमी होना 'रोग' कहलाता है। जिस व्यक्ति को रोग होता है उसे 'रोगी' कहते हैं। हिन्दी में 'रोग' को 'बीमारी' , 'रुग्णता', 'व्याधि' और 'विकार' भी कहते हैं।
रोग का उपचार करने या उसके लक्षणों को कम करने के लिए औषध और औषधशास्त्र (फार्मेकोलॉजी) के विज्ञान का उपयोग किया जाता है। मानसिक और शारीरिक विकृतियों के कारण होने वाली गंभीर आजीवन विकलांगता को वर्णित करने के लिए 'विकासात्मक विकलांगता' शब्द का उपयोग किया जाता है।
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