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मेटाबॉलिक सिंड्रोम (कई मिलीजुली बीमारियां)
ये सिंड्रोम कई बीमारियों से मिलकर बना होता है। इनमें मोटापा, कॉलेस्ट्रॉल और बीपी जैसे लक्षण प्रमुख रूप से देखे जाते हैं। इस सिंड्रोम से पीड़ित लोगों को डायबिटीज होने के चांस बाकी लोगों से 5 गुना ज्यादा और हार्ट डिजीज होने के चांस तकरीबन 2 गुना ज्यादा रहता है। रिसर्च से पता चला कि इस सिंड्रोम की जड़ में स्ट्रेस का बहुत बड़ा हाथ है। इसके लिए 86 लोगों पर तकरीबन 10-10 दिनों तक कई तरह के योगासन करवाने से पता चला कि स्ट्रेस पैदा करने वाले हॉर्मोंस का लेवल घटा और स्ट्रेस कम करने वाले हॉर्मोंस का लेवल तेजी से बढ़ा।
बांझपान
रिसर्च में पाया कि महिलाओं में बच्चे पैदा करने की क्षमता को भी योग के जरिए बढ़ाया जा सकता है। उन्होंने रिसर्च के दौरान पाया कि कुछ ऐसे आसन और पॉश्चर हैं, जिन्हें करने से महिलाओं के पेड़ू के एरिया में ब्लड सर्कुलेशन बढ़ जाता है और वहां की एनर्जी बढ़ जाती है। डॉ. कोचर ने बताया कि योग सिर्फ शरीर से जुड़ा मामला नहीं है, बल्कि इसमें दिमाग भी बड़ा रोल अदा करता है। ऐसे में इसके कई हैरान करने वाले रिजल्ट भी सामने आते हैं। हालांकि, जरूरी नहीं है कि सभी पर योग क्रियाओं का असर बराबर मात्रा में हो।
डायबीटीज
योग से डायबिटीज टाइप-2 में भी काफी राहत मिलती है। कई केसेज में तो मरीज को दवाइयों से भी मुक्ति मिल गई। डायबिटीज में हालांकि, टाइप-1 मरीजों पर योग का कोई खास प्रभाव देखने को नहीं मिला, लेकिन जिन्हें अलग से इंसुलिन की जरूरत नहीं पड़ती उनके लिए योग के जरिए अपनी बीमारी को मैनेज करने में काफी राहत मिली।
मोटापा
रिसर्च में इस बात की पुष्टि हुई कि अनुलोम-विलोम और कपालभाति जैसी क्रियाओं से मोटापे में कमी आती है। इन्हें भी कई लोगों पर परख कर देखा गया।
न्यूरो मस्क्यूलर डिसऑर्डर
इस तरह की परेशानी में शामिल हैं मिर्गी आना या लकवा मार जाने जैसी परेशानियां। रिसर्च में यह पाया गया कि अगर मिर्गी के पेशंट्स को कुछ खास तरह के प्राणायम करवाए जाएं तो उन्हें इससे काफी फायदा मिलता है। इसके अलावा उनकी दवाओं में भी काफी कमी देखने को मिली। 6 महीने तक मेडिटेशन करने के बाद जब मिर्गी के पेशंट्स को जांचा गया तो फायदा पहुंचने वाली दिमागी अल्फा वेव्स में काफी बढ़त देखी गई। स्ट्रोक की वजह से लकवा मार जाने की समस्या में एक खास प्रोटोकॉल के जरिए योग के कई आसनों को आजमाया गया। इससे यह साबित हुआ कि इस आसनों की वजह से न सिर्फ उनके बैलेंस में इजाफा हुआ बल्कि उनकी स्पीच और शरीर पर कंट्रोल भी बढ़ा।
पेट से संबंधित बीमारियां
पेट की एक खास बीमारी इमिटेबल बाउल सिंड्रोम से अमेरिका जैसा देश काफी पहले से परेशान है। अब इसके पेशंट्स देश में भी बढ़ रहे हैं। इसमें पेशंट को बेवजह किसी खास मौके पर पेट में तेज दर्द होता है और बार-बार टॉयलेट जानी पड़ती है। रिसर्च से पता चला कि इसका कारण पेट से जुड़ा न होकर दिमाग से जुड़ा है।
अनुलोम-विलोम
इस कॉमन ब्रीदिंग टेक्निक को लैब में काफी मुफीद पाया गया
क्या है फायदा
दिल की बीमारियों से लेकर सांस की बीमारी के लिए यह फायदेमंद है। राइट साइड के नथुने से सांस लेने से मेटाबॉलिज्म बढ़ता है वहीं लेफ्ट साइड के नथुने से सांस लेने से ब्रेन की एक्टिविटी बढ़ जाती है और काफी आराम भी मिलता है। ब्लड प्रेशर में भी गिरावट देखी गई।
धीमी भ्रस्त्रिका
धीमी और गहरी भ्रस्त्रिका करने को लैब में काफी लाभदायक पाया गया।
क्या है फायदा
इसे करने से स्ट्रेस में कमी देखी गई।
कपालभाति
तेजी से सांस लेने और छोड़ने को लैब में परखा गया
क्या है फायदा
ब्रेन तेजी से ऐक्टिव होता है बाकी शरीर को भी ऐक्टिव कर देता है।
शीतली
मुंह और नाक के जरिए की जाने वाली इस क्रिया को लैब में परखा गया।
क्या है फायदा
इससे सांस की बीमारियों में राहत मिलती है।
प्राणायाम की लैब रिपोर्ट
धीमी स्पीड से किए जाने वाले प्राणायाम को हाइपरटेंशन के मरीजों के लिए ज्यादा फायदेमंद पाया गया
धीमी सांस लेने से हार्ट रेट और ब्लड प्रेशर में काफी कंट्रोल देखा गया
प्राणायाम के प्रभाव शरीर और दिमाग दोनों पर देखने को मिले। इसे करने वाले शारीरिक रूप से हेल्दी औऱ मानसिक रूप से काफी संतुलित नजर आए
प्राणायाम करने वालों की मेमरी, फोकस करने की क्षमता और किसी समस्या से निपटने की ताकत ज्यादा नजर आई
प्राणायाम करने के बाद पेशंट के स्ट्रेस लेवल में तेजी से कमी आई
कहां जाएं योग के खास प्रोटोकॉल के लिए
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