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शिशु का वजन चेक करना क्यों जरूरी है?
जिन बच्चों का वजन कम होता है उन्हें कई समस्याओं से गुजरना पड़ता है, अगर ये लक्षण नजर आएं तो डॉक्टर की सलाह पर बच्चे का वजन चेक करवाएं-
सांस लेने में परेशानी हो तो वजन चेक करवाएं। अगर बच्चे का वजन बहुत कम है तो उसे सांस लेने में परेशानी हो सकती है।
बच्चे के शरीर के तापमान में बदलाव दिखे तो उसका वजन डॉक्टर की सलाह पर चेक करवाएं। बच्चे के शरीर का बॉडी टैम्प्रेचर बनाए रखना मुश्किल हो जाता है।
बच्चे का वजन नहीं बढ़ता और शिशु को कुछ भी खिलाने में मुश्किल होती है तो भी आपको शिशु का वजन चेक करवाना चाहिए।
अगर बच्चे को इंफेक्शन हो तो ये किसी गंभीर बीमारी का संकेत हो सकता है ऐसे में आपको पहले बच्चे का वजन चेक करवा लेना चाहिए।
किस समय शिशु के वजन को चेक करवाएं?
जन्म के समय बच्चे का वजन 2.6 से 3.8 किलोग्राम तक हो सकता है, अगर जन्म के समय वजन 2.5 से कम है तो उसे डॉक्टर की निगरानी में रखा जाता है। तीन से छह माह की उम्र में बच्चे का जवन हर दो हफ्तों में करीब 220 ग्राम बढ़ना चाहिए। इससे आपको पता चलेगा कि बच्चे को सही आहार मिल रहा है या नहीं या उसकी तबीयत ठीक है या नहीं। आपको शिशु का वजन इन प्वॉइंट्स के मुताबिक चेक करवाना चाहिए-
जन्म के समय अस्पताल में सबसे पहले बच्चे का वजन चेक होता है।
जब तक बच्चा छह माह का न हो जाए तब तक हर महीने उसका वजन चेक होना चाहिए।
छह से बारह महीने का वजन हर दूसरे महीने में चेक होना चाहिए।
एक साल से ऊपर की उम्र में बच्चे का वजन हर तीन महीने में एक बार चेक होना चाहिए।
शिशु का वजन सामान्य से ज्यादा होने के कारण
जिन शिशुओं का वजन सामान्य से ज्यादा होता है उसके पीछे ये कारण हो सकते हैं-
अगर आप बच्चे को जन्म के छह माह के भीतर ही ठोस आहार देने लगेंगे तो बच्चे का वजन तेजी से बढ़ने लगेगा।
बच्चे को मां के दूध के अलावा डॉक्टर की सलाह के बिना फॉर्मूला मिल्क देने से भी उसका वजन जरूरत से ज्यादा बढ़ सकता है।
अगर शिशु के शरीर में शुगर लेवल तेजी से बढ़ रहा है तो उसका वजन भी बढ़ सकता है, ऐसी स्थिति में आपको डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।
अगर आपके बच्चे का वजन नहीं बढ़ रहा है तो इसके पीछे ये कारण हो सकते हैं-
बच्चे के शरीर में सही तरह से कैलोरीज नहीं जा पाने के कारण बच्चे का वजन सामान्य से कम होता है।
अगर आप बच्चे को स्तनपान कराने का सही तरीका नहीं जानती हैं तो भी बच्चे का वजन बढ़ना रुक सकता है।
शिशु का चेकअप करवाएं, जॉन्डिस होने के कारण भी बच्चे का वजन नहीं बढ़ता है।
बच्चे के कान में इंफेक्शन होने से भी उसका वजन बढ़ने की प्रक्रिया रुक सकती है।
जिन बच्चों के शरीर में खून की कमी होती है उनका वजन बढ़ने में भी परेशानी हो सकती है।
जिन शिशुओं में यूटीआई के लक्षण नजर आते हैं उन्हें भी वजन न बढ़ पाने की समस्या हो सकती है।
शिशु का वजन बढ़ाने के लिए क्या करें?
जन्म के समय शिशु का वजन जांचा जाता है। इसके बाद कुछ हफ्तो बार दोबारा शिशु का वजन चेक किया जाता है। शिशु का वजन चेक करवाने के लिए प्रशिक्षित डॉक्टर या क्लीनिक में ही जाएं क्योंकि अलग-अलग मशीनों के परिणाम अलग हो सकते हैं इसलिए सटीक नंबर के लिए डॉक्टर की मदद लें। अगर शिशु का वजन कम है तो आप इन आसान टिप्स की मदद से शिशु का वजन बढ़ा सकते हैं-
शिशु के लिए मां के दूध से बेहतर आहार कुछ भी नहीं है, स्तनपान हर बच्चे की सेहत के लिए जरूरी है इसलिए शिशु का वजन कम है तो स्तनपान के सही तरीके को सीखें और बच्चे को ज्यादा से ज्यादा मां का दूध पिलाएं।
जब तक बच्चा छह महीने का न हो जाए तब तक उसे सॉलिड फूड न दें, इससे बच्चे का वजन संतुलित नहीं रहेगा।
बच्चे का वजन बढ़ाने के लिए आप बच्चे को कंगारू मदर केयर थैरेपी भी दे सकते हैं, इसे मां के अलावा घर का कोई भी सदस्य दे सकता है। शिशु का वजन इस प्रक्रिया से तेजी से बढ़ता है।
आपको तेल से बच्चे के शरीर पर मालिश करनी चाहिए, इससे भी बच्चे का वजन बढ़ता है और डाइजेशन बेहतर होता है।
बच्चे को जबरदस्ती खिलाने की गलती न करें, इससे खाना उसके फूड पाइप में फंस सकता है या पेट से संबंधी समस्याएं या उल्टी हो सकती है।
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