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हमारे शरीर में कुछ ऐसे रसायन होते हैं जो मस्तिष्क के खास हिस्सों में विशिष्ट ग्रंथियों से निर्मित होते हैं, इन्हें न्यूरोट्रांसमीटर्स कहते हैं। ये ऐसे रसायन हैं जो सोच-विचार के जरिए हमारे व्यवहार और आचरण को प्रभावित करते हैं। इनकी सूक्ष्म मात्रा ही अधिकांश मानसिक क्रियाओं के लिए पर्याप्त होती है। इस तरह इन रसायनों की कमी घातक है और इनका अधिक स्राव भी। आइए विस्तार से जानते हैं इनके बारे में।

छह प्रमुख न्यूरोट्रांसमीटर्स

सेरोटोनिन

प्रभाव पथ : मध्य और अग्र मस्तिष्क का बड़ा हिस्सा।

सुकून भरी जिंदगी और उम्मीदों के लिए जिम्मेदार।

इसका कम स्तर : डिप्रेशन

प्रोजेक जैसी एंटीडिप्रेसेंट दवाइयां इसका स्तर बढ़ाने के लिए दी जाती हैं।

गुआटामेट

मध्य मस्तिष्क का बड़ा हिस्सा

सीखने की क्षमता के लिए जिम्मेदार होता है।

प्रभाव पथ


ये एक-दूसरे को संतुलित रखते हैं।

याददाश्त को बनाए रखने के लिए उपयोगी।

मध्य और पश्च मस्तिष्क का बड़ा हिस्सा।

मन की शांति के लिए जरूरी।

ज्यादा होने की स्थिति में आते हैं ये भाव

तनाव को कम करने में भी उपयोगी।

बेचैनी को कम करने वाली दवाइयां गाबा के स्राव को बढ़ाती हैं।

प्रभाव पथ : मध्य मस्तिष्क का छोटा हिस्सा।

डोपामाइन नाम का यह रसायन अभिव्यक्ति और प्रेरकता को बढ़ाता है।

इसे कुछ अच्छा, बड़ा करने या सम्मान पाने के साथ जोडक़र देखा जाता है।

इसकी मात्रा कम हो जाए तो लोग बुरी आदतों का शिकार हो जाते हैं।

डोपामाइन

प्रभाव पथ : मध्य मस्तिष्क और उससे नीचे का हिस्सा।

यह न्यूरोट्रंासमीटर एक हार्मोन की तरह कार्य करता है।

यह तब पैदा होता है जब हम तनाव या पीड़ा में होते हैं।

यह सुकून और खुशी प्रदान करने के लिए जिम्मेदार होता है।

चॉकलेट खाने से इसका स्तर बढ़ता है।

एंडोर्फिन्स

प्रभाव पथ
मस्तिष्क का लगभग पूरा हिस्सा जिम्मेदार होता है।

शारीरिक क्रियाएं जैसे कि हृदयगति और ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करता है।

संघर्ष और जुझारूपन बढ़ाने में।

नोरेड्रिनेलिन

कम हो जाए तो थकान और किसी काम में मन नहीं लगता।

बहुत ज्यादा हो जाए तो बेचैनी और हाई ब्लड प्रेशर हो सकता है।

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