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होम्योपैथी में हैं करीब तीन हजार दवाएं, एक अवधि के बाद बेअसर हो जाती हैं मदर टिंचर मेडिसिन होम्योपैथी की दवाओं को दो श्रेणियों अल्कोहल डाइल्यूशन व मदर टिंचर में बांटा जा सकता है। इनमें 90 फीसद तक अल्कोहल होता है। मदर टिंचर दवाएं एक अवधि के बाद जरूर बेअसर हो जाती हैं।
लक्षणों के साथ सोच व व्यवहार देते ध्यान
होम्योपैथी पद्धति में चिकित्सक रोगी की ओर से बताई गई लाइफ-मेडिकल हिस्ट्री एवं रोग के लक्षणों को सुनकर दवाइयां देते हैं। रोग लक्षण एवं औषधि के चुनाव में जितनी अधिक समानता होगी रोगी के स्वस्थ होने की संभावना उतनी अधिक होगी। लक्षणों के साथ मरीज की सोच व व्यवहार पर भी ध्यान दिया जाता है। बीमारी के अनुसार इलाज दिया जाता है। कई बार इलाज लम्बा चलता है।
ऐसे बनती है दवाएं
होम्योपैथी में दवाएं कई तरह से बनती हैं। जैसे पेड़-पौधों के औषधीय तत्वों से(वेजिटेबल सोर्स से), गेंदे, चमेली के फूल से तत्व लेकर दवा बनाना। खनिज पदार्थ (मिनरल सोर्स) मिनरल सोर्स कैल्शियम, पोटैशियम की मदद से दवा बनाते हंै। सारकोड (ऊत्तकों से) के जरिए हॉर्मोन संबंधी दवाएं बनती हैं जैसे थायराइड हॉर्मोन, पिट्यूटरी ग्लैंड आदि है। राई, पुदीने, हल्दी के अंश से भी दवा बनाई जाती है।
दबता नहीं रोग
डॉ. हैनिमेन ने इसलिए होम्योपैथी की शुरुआत की क्योंकि होम्योपैथी जड़ से रोग को मिटाती है। जब उन्होंने देखा कि अन्य चिकित्सा पद्धति रोग को दबा देती है। या रोग किसी और रूप में शरीर से बाहर आता है। होम्योपैथी में बीमारी का इलाज बिना दर्द के व जड़ से रोग ठीक हो जाता है। बच्चे भी आसानी से ले लेते हंै।
अन्य दवाओं के साथ लेना
इसके कोई दुष्प्रभाव नहीं होते हैं। बीमारी का इलाज अलग-अलग चलता है। होम्योपैथी को किसी भी पैथी के साथ लिया जा सकता है। इसकी दवा को दूसरी पैथी के साथ एक घंटे के अंतरराल के बाद लेनी होती है। त्वचा, महिलाओं से सम्बन्धित रोग, हृदय, वायरल बीमारियां, डायबिटीज, बीपी, स्वाइन फ्लू, जोड़ों और हड्डियों मेंं दर्द आदि बीमारियों में कारगर इलाज है। बीमारी का शुरुआत में ही पता चल जाता है तो मरीज जल्द ठीक होने लगता है। बीमारी की स्थिति के अनुसार कई बार कोर्स लम्बा चलता है।
कैसे करती है काम
होम्योपैथी की गोलियों में तरल मिलाते है। ये गोलियां घुलकर बीमारी ठीक करती हैं। विशेषज्ञ बीमारी देखकर मदर टिंचर देते हैं जो पानी में डालकर ली जाती है। होम्योपैथी दवाओं की टेबलेट भी आती है।
ये रखें परहेज
कुछ भी खाने-पीने के तुरंत बाद दवा को नहीं लेना चाहिए। मुंह को हमेशा साफ रखना चाहिए। विशेषज्ञ बीमारी की स्थिति के अनुसार मरीज को परहेज के लिए बताते हैं। चाय-कॉफी को कम पीएं।
नहीं होती सर्जरी
इस चिकित्सा पद्धति में सर्जरी नहीं की जाती है। हालांकि सर्जरी वाली समस्याओं की भी दवाएं होती हैं लेकिन होम्योपैथी चिकित्सक मरीज को सबंधित विशेषज्ञ से परामर्श की सलाह देते हैं। गुर्दे में पथरी और गर्भाशय में गांठ की समस्याओं में इन्हें गलाने वाली दवाएं दी जाती हैं।
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