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प्रेगनेंसी के दौरान पहली तिमाही में थोड़ी बहुत ब्लीडिंग की समस्या खतरनाक नहीं होती, लेकिन दूसरी और तीसरी तिमाही में ये मिसकैरेज या किसी अन्य समस्या का संकेत हो सकती है.
प्रेगनेंसी के दौरान ब्लीडिंग या स्पॉटिंग सामान्य है या नहीं, यहां जानें इसके बारे में...!
गर्भावस्था की समस्याएं


प्रेगनेंसी के दौरान कुछ महिलाओं को ब्लीडिंग की समस्या हो जाती है. कई बार महिलाएं इसको लेकर टेंशन में आ जाती हैं. लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि अगर थोड़ी बहुत ब्लीडिंग प्रेगनेंसी के शुरुआती समय में होती है तो बहुत घबराने की जरूरत नहीं है. ये सामान्य स्थिति है.

लेकिन अगर ब्लीडिंग दूसरी या तीसरी तिमाही में हो रही है तो ये किसी जटिलता का संकेत हो सकती है. हालांकि ब्लीडिंग की समस्या किसी भी तिमाही में हो, इसके बारे में विशेषज्ञ को जरूर बताना चाहिए, ताकि स्थिति को समय रहते संभाला जा सके. जानिए प्रेगनेंसी के दौरान ब्लीडिंग से जुड़ी तमाम अहम बातें.
ये हो सकती हैं वजहें

1. जब भ्रूण महिला के गर्भ में इंप्लान्ट होता है तो कई बार हल्की ब्लीडिंग होती है. हालांकि इसे महिला पीरियड समझकर ज्यादा ध्यान नहीं देतीं. ये ब्लीडिंग दो से तीन दिनों तक हो सकती है.

2. शरीर के आंतरिक हिस्से बेहद संवेदनशील होते हैं. ऐसे में कई बार वैजाइनल इन्फेक्शन की वजह से भी हल्का स्पॉट आ जाता है.

3. कई बार प्रेगनेंसी के दौरान सेक्स करना असुरक्षित हो जाता है, ऐसे में भी महिला को ब्लीडिंग हो सकती है.

4. कई बार बच्चा सही जगह पर न पहुंचकर फेलोपियन ट्रयूब में पहुंच जाता है. ये स्थिति महिला के लिए काफी कष्टकारी हो सकती है. इसमें महिला को ब्लीडिंग के साथ पेट के निचले हिस्से में दर्द भी हो सकता है.
ध्यान रहे

प्रेगनेंसी के दौरान स्पॉटिंग होना खतरनाक नहीं है, लेकिन इस दौरान ब्लीडिंग खतरे का संकेत हो सकती है. मिसकैरेज की स्थिति में भी ब्लीडिंग होती है. इसलिए आप किसी भी तरह की स्थिति में ब्लीडिंग या स्पॉट होने पर विशेषज्ञ से परामर्श जरूर करें. ताकि समय रहते खतरे से निपटा जा सके. ज्यादातर मिसकैरेज की स्थिति में ब्लीडिंग या स्पॉटिंग के साथ क्रैम्प भी होते हैं. आमतौर पर मिसकैरेज के ज्यादातर मामले 14वें सप्ताह में आते हैं.

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