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अब आपकी गर्भावस्था पूर्ण अवधि पर पहुंच गई है, प्रसव की नियत तिथि से अब यह केवल कुछ ही हफ्तों दूर है। आपके शिशु का वजन अब करीब 2.9 किलोग्राम और सिर से एड़ी तक की लंबाई करीब 48.6 सें.मी. (19.1 इंच) है। यह रसपालक (स्विस चार्ड) के एक डंठल की लंबाई जितना है।

आपका शिशु होंठ भींचकर चुंबल जैसी मुद्रा बनाकर (पाउट), त्योरी चढ़ाकर और मुंह बनाकर अपने चेहरे की मांसपेशियों पर काम करना जारी रखता है। उसके पैर की उंगलियों के नाखून अब उंगलियों के सिरे तक पहुंच गए होंगे, और ये इससे आगे भी बढ़ना जारी रख सकते हैं।

आपके शिशु का पाचन तंत्र अभी विकसित हो रहा है, और जन्म के कई सालों तक यह परिपक्व होना जारी रखेगा। उसकी छोटी आंत जन्म के बाद पहले साल में ही 100 सें.मी. तक बढ़े जाएगी!

आपके शिशु की हलचल अब भी नियमित पैटर्न पर होती रहेगी और उसके जन्म तक ऐसा ही जारी रहेगा। यदि आप शिशु के हलचल के पैटर्न में बदलाव देखें, तो तुरंत अपनी डॉक्टर से बात करें, ताकि वे बता सके कि सब ठीक-ठाक है या नहीं।

नोट:विशेषज्ञों का कहना है कि हर शिशु अलग ढंग से विकसित होता है- गर्भाशय में भी। ये भ्रूण विकास की जानकारी आपको इस बात का सामान्य अंदाजा देती है कि गर्भ में शिशु किस तरह बढ़ रहा है।
गर्भावस्था के 37वें सप्ताह में शारीरिक परिवर्तन
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क्या बढ़ते पेट और पीठ दर्द की वजह से आपको मुश्किल हो रही है? क्या हर घंटे बाद पेशाब आने की वजह से आप परेशान हो गई हैं? चिंता न करें, ये सभी गर्भावस्था के दुष्प्रभाव अब कुछ ही समय के लिए हैं, आपके प्रसव की तिथि नजदीक आ रही है और शिशु के जन्म के बाद आपको इन दुष्प्रभावों से भी राहत मिल जाएगी।

गर्भावस्था के दौरान कूल्हों में दर्द होना भी आम है। अगर यह समस्या गर्भावस्था की शुरुआत से ही आपको है, तो गर्भावस्था बढ़ने पर आपके माप और वजन में वृद्धि होने पर यह और बदतर हो सकती है। यह परेशानी अक्सर रात में होती है और आपके लिए आराम की नींद ले पाना मुश्किल बना सकती है। कूल्हों के दर्द को अक्सर श्रोणि क्षेत्र के दर्द के साथ मिलाकर देखा जाता है।

बहरहाल, यदि आपको चलने में दिक्कत हो रही हो, प्रभावित हिस्से की तरफ से आप वजन न उठा पा रही हों या फिर दर्द बहुत ज्यादा हो या फिर अचानक से शुरु होता हो तो आपको अपनी डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
37 सप्ताह गर्भवती होने पर क्या जानना जरुरी है
क्या आपने अपने अस्पताल ले जाने वाले बैग में सभी जरुरी सामान रख लिया है? हमारा यह लेख पढ़कर जानें कि आपको अपने बैग में क्या-क्या सामान रखना चाहिए। बेहतर है कि आप जन्म के बाद,और घर लाते समय शिशु को जो कपड़े पहनाना चाहती हैं, उन्हें अभी से निकाल कर रख लें। साथ ही, अस्पताल से घर आते समय आप भी जो कपड़े पहनकर आएंगी, उन्हें भी अवश्य रख लें। आपको प्रसव के बाद भी ढीले-ढाले कपड़े पहनने की जरुरत होगी।

सभी शिशु अलग होते हैं, मगर रोने के मामले में वे सभी एक जैसे होते हैं। रोना, नवजात शिशु का यह बताने का तरीका है कि उसे कुछ चाहिए। आपको यह जानकर हैरानी होगी कि शिशु के रोने का आप पर कितना असर हो सकता है। नवजात शिशु क्यों रोते हैं और उन्हें शांत करने के सुझावों के बारे में हमारा यह लेख पढ़ें।

भारत के अधिकांश हिस्सों में शिशु के जन्म के बाद शुरुआती 40 दिनों तक पारंपरिक एकांतवास का पालन किया जाता है। एकांतवास की इस अवधि का मतलब नई माँ को प्रसव के परिश्रम से उबरने, फिर से ताकत पाने और शिशु के साथ जुड़ाव बनाने का समय देना है। हमारा लेख पढ़कर जानें कि एकांतवास की अवधि का आप भरपूर फायदा कैसे उठा सकती हैं।

"यदि आप इस बात को लेकर डर रही हैं कि एनिमा से आपको दर्द होगा, तो गहरी सांसे लें और जितना संभव हो सके आराम करें। एनिमा की प्रक्रिया में केवल एक मिनट का समय लगता है।"

सन8मम
गर्भावस्था के 37वें हफ्ते में क्या करें

शिशु के जन्म का इंतजार करने का समय काफी मुश्किल से गुजरता है। फिर भी शिशु के आने से पहले के इस समय का पूरा आनंद लें। सेहतमंद आहार लें और पर्याप्त आराम करें।
यदि आप अपनी इतनी लंबी अवधि से गर्भावस्था से ऊब सी चुकी हैं तो अपना ध्यान कहीं और लगाएं। क्यों न जानें कि आपका नवजात शिशु कैसे दिखेगा।
सीजेरियन आॅपरेशन करवाने के जोखिम और फायदों के बारे में हमारा यह लेख पढ़ें।
बहुत सी गर्भवती माँएं प्रसव पीड़ा के डर से या फिर ज्योतिषीय कारणों से ऐच्छिक सीजेरियन आॅपरेशन करवाने का विकल्प चुनती हैं? ऐसा करना कितना सही है, यहां जानें।
बहुत सी माँएं प्रसव के बाद मालिश करवाना पसंद करती हैं। प्रसवोत्तर मालिश के फायदों पर हमारा यह लेख पढ़ें।

आपकी गर्भावस्था के लिए बेबीसेंटर का सुझाव
ध्यान (मेडिटेशन) का और आराम देने वाली तकनीकों का अभ्यास करें और सोचें कि आप प्रसव की प्रकिया का सामना किस तरह करेंगी।

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