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नवजात शिशु को छूते समय यह सुनिश्चित करें कि हाथ हमेशा साफ हों क्योंकि छोटे बच्चे का इम्यून सिस्टम काफी कमजोर होता है। गंदे हाथों से शिशु को पकड़ने से उसे संक्रमण (Infection) होने का डर रहता है।
शिशु को जब भी उठाएं या लेटाएं, ध्यान से उसकी गर्दन को संभालें क्योंकि जन्म के कुछ महीने बाद ही नवजात शिशु की गर्दन का विकास अच्छे से होता है। गर्दन को सहारा न देने से उसकी गर्दन में चोट आ सकती है।
शिशु को जोर से न हिलाएं इससे मस्तिष्क में रक्तस्राव हो सकता है। यदि शिशु को जगाने की जरुरत है, तो उसे हिलाकर मत उठाएं।

नवजात शिशु की देखरेख के समय याद रखें कि शिशु को मां के पास ही रहने दें क्योंकि मां के शरीर से बच्चे को गर्मी मिलती है।
जन्म के आधे घंटे के अंदर शिशु को मां का दूध पिलाना चाहिए। मां का पहला पीला दूध जिसे कोलोस्ट्रम कहते हैं, शिशु को कई बीमारियों से लड़ने की शक्ति देता है। जन्म के बाद के छह महीने तक बच्चे के लिए मां का दूध (Mother’s milk) ही संपूर्ण आहार है। शुरूआती छह महीनों तक स्तनपान करने वाले शिशु अच्छी तरह से विकसित होते हैं। संक्रमण से उनका बचाव होता है।
न्यू बोर्न बेबी केयर टिप्स के दौरान इस बात का ख्याल रखें कि शिशु को पहले 6 महीने में पानी नहीं पिलाना चाहिए। यह लोगों के बीच गलत धारणा है कि स्तपान के बाद भी बच्चों को प्यास लगती है।
छह महीने से ऊपर के बच्चे को मां के दूध के अलावा ऊपरी आहार भी देना चाहिए।
जन्म के तुरंत बाद शिशु को पोलियो की दवा, बीसीजी और हेपेटाइटिस का टीका लगवाना चाहिए।
सभी नवजात शिशुओं की बेबी मसाज ऑयल से मालिश करना चाहिए। इससे शिशु की मांसपेशियां और हड्डियां मजबूत होती हैं। मालिश करते समय ध्यान रखें कि हल्के-हल्के हाथों से ही मालिश करें।

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