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मालिश से शिशु न केवल स्वस्थ रहता है बल्कि इससे उसे दुलार का भी एहसास होता है। जानिए बच्चे की मालिश कैसे करते हैं।
शिशु की मालिश करने के कई लाभ होते हैं। इससे बच्चे को आपका दुलार महसूस होता है और आप दोनों के बीच एक मजबूत रिश्ता बन जाता है। मालिश से शिशु को आराम भी मिलता है जिससे उसे अच्छी नींद आती है।कुछ अध्ययनों की मानें तो बेबी मसाज से शिशु का सही विकास होने में भी मदद मिल सकती है। हालांकि, अभी इस दिशा में और रिसर्च किए जाने की जरूरत है।हम सभी जानते हैं कि नवजात शिशु के लिए मालिश कितनी जरूरी है लेकिन बहुत कम लोग ही इस बात से वाकिफ होते हैं कि शिशु के मालिश कब शुरू करनी चाहिए और मालिश करने की विधि क्या है।
नवजात शिशु की मालिश कब करें
शिशु के जन्म के कुछ हफ्तों बाद आप मालिश करना शुरू कर सकते हैं लेकिन इसके लिए आपको बच्चे के मूड का भी खास ख्याल रखना है। मसाज के समय पर शिशु शांत और सचेत होना चाहिए। मालिश करने का तरीका ऐसा न अपनाएं जो बच्चे को सहज महसूस करवाए।
मायो क्लीनिक के अनुसार अगर बच्चा मालिश करने के दौरान बांह को सख्त कर लेता है या सिर को पीछे खींचता है तो इसका मतलब है कि वो मालिश करवाने के लिए तैयार नहीं है। शिशु को मसाज देने का सही समय स्तनपान करवाने के कम से कम 45 मिनट बाद होता है। स्तनपान करवाने के तुरंत बाद मालिश करने से शिशु को उल्टी हो सकती है।
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