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प्रसव की असहनीय वेदना की कल्पना मात्र से पहली बार मातृत्व सुख पाने जा रही युवती डिप्रेशन में आ जाती है। नतीजा लेबर रूम जाते समय व उसके अंदर उसकी चीत्कार सुन कर तो घरवालों के साथ-साथ दूसरे भी डिप्रेशन में आ जाते हैं। इसको आसान बनाने के लिए पेनलेस डिलीवरी का फंडा मेट्रो सिटीज में खासा लोकप्रिय है। पटना में पेनलेस डिलीवरी कांसेप्ट, सोमवार को आनंदिता हास्पिटल के उद्घाटन के साथ शुरू हो गया। अस्पताल के निदेशक रवि आनंद की इस पहल का उद्घाटनकर्ता श्रम एवं संसाधन मंत्री जनार्दन सिग्रीवाल, धार्मिक न्यास परिषद के अध्यक्ष आचार्य किशोर कुणाल, पूर्व सांसद विजय कृष्ण, विधायक अरुण कुमार सिन्हा, पूर्व विधायक डा. विनोद यादव, विधायक अजय प्रताप सिंह तथा पूर्व विधायक राणा रंधीर ने भूरि-भूरि प्रशंसा की।

आसान और सेफ है पेनलेस डिलीवरी : आनंदिता अस्पताल के निदेशक डा. रवि आनंद ने बताया कि नार्मल डिलीवरी की असहनीय वेदना से निजात दिलाने के लिए कमर के निचले भाग में स्थित रीढ़ की हड्डियों के बीच निश्चेतना की सूई दी जाती है। इससे लेबर-पेन बिल्कुल नहीं होता परंतु प्रसव की प्रक्रिया अपनी सामान्य गति से चलती रहती है। इस प्रकार बिना किसी तरह के दर्द समय पूरा होने पर प्रसव हो जाता है। इसे एपिड्यूरल लेबर एनाल्जेसिया भी कहा जाता है। निश्चेतना सूई का असर डेढ़ से साढ़े तीन घटे तक रहता है। इस दौरान मरीज सहारा लेकर चल-फिर भी सकता है। यही कारण है कि इसे वाकिंग डिलीवरी भी कहा जाता है।

पेनलेस डिलीवरी के लाभ :

- मोटी महिलाओं का प्रसव काफी आसानी से हो जाता है।

- यह विधि प्रसव के किसी भी स्टेज में अपनाई जा सकती है

- डिलीवरी के समय आपरेशन करने की जरूरत होने पर अलग से बेहोश नहीं करना पड़ता

- यह विधि अत्यंत सुरक्षित तथा भरोसेमंद है।

ध्यान देने योग्य बातें :

- इस विधि का लाभ लेने के लिए मरीज को चिकित्सक से अनुरोध करना पड़ता है।

- कुछ पैमाने निर्धारित हैं, जिनके आधार पर गर्भवती महिलाओं का चुनाव किया जाता है।

- मरीज की सहमति के बिना डाक्टर इसका प्रयोग नहीं कर सकते।

- ब्लीडिंग हो रही हो, सेप्टिसीमिया या फिर कोई मानसिक रोग होने पर भी इस विधि द्वारा प्रसव नहीं कराया जा सकता है ।


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