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थकान के कारण

थकान कर्मचारी की एक शारीरिक एवं मानसिक अवस्था होती है। इसमें कार्य-शक्तियों का ह्रास होता है। इस अवस्था को उत्पन्न करने वाले कुछ तत्त्व, दशाएं एवं परिस्थितियां होती हैं, जिन्हें 'थकान का कारण' माना जाता है। ये कारण निम्न हैं-

१. कार्य के घंटों का प्रभाव
२. विश्राम काल का प्रभाव
३. तापमान एवं वातायन (temrature and ventilation)
४. मशीन की रचना (Machine design)
५. वातावरण का प्रभाव
६. उचित आसन का प्रभाव (Effect of proper posture)
७. व्यक्तिगत कारण
८. सामाजिक कारण

1. कार्य के घंटों का प्रभाव : मनोवैज्ञानिक परीक्षणों द्वारा यह तथ्य सामने आया है कि अधिक घंटे कार्य करने से प्रति घंटा उत्पादन में कमी आ जाती है। इसके विपरीत कार्य के कम घंटे होने पर उत्पादन में वृद्धि होती है। इस प्रकार यदि कार्य के घंटे अधिक लंबे होंगे तो कर्मचारी थकान का अनुभव करेगा।

2. विश्रामकाल का प्रभाव : उद्योग में कार्य के घंटों को कम करने के साथ कार्य घंटों के बीच विश्राम भी बहुत आवश्यक होता है। यदि कार्य के बीच आराम करने के बाद कर्मचारी पुनः कार्य करता है तो वह अधिक उत्पादन कर सकता है।

3. तापमान एवं वातायन : अधिक ठंडा और अधिक गर्म स्थान पर कार्य करने वाले कर्मचारी शीघ्र ही थकान का अनुभव करते हो। साथ ही कई बीमारियों से भी पीड़ित रहते हैं। इससे कर्मचारी के साथ उत्पादन भी प्रभावित होता है।

4. मशीन की बनावट : कुछ मशीनों की बनावट इस प्रकार होती है कि या तो कर्मचारी खड़ा रहकर कार्य कर सकता है या बैठकर कार्य कर सकता है। इसलिए एक ही अवस्था में अधिक समय तक रहने से कर्मचारी जल्दी ही थक जाता है। कभी-कभी मशीन की बनावट इस प्रकार होती है कि शरीर के किसी अंग विशेष से ही अधिक कार्य लेना पड़ता है। इस प्रकार मशीन की बनावट भी थकान का महत्त्वपूर्ण कारण है।

5. वातावरण का प्रभाव : कोलाहल और थकान का गहरा संबंध होता है। उद्योग में जहां शोर अधिक होता है वहां कर्मचारी को जल्दी ही थकान का अनुभव होने लगता है। परीक्षणों द्वारा यह सिद्ध हुआ है कि कोलाहलपूर्ण वातावरण में कर्मचारी को काम करने के लिए शारीरिक बल अधिक लगाना पड़ता है। इससे कर्मचारी का ध्यान कार्य में केन्द्रित नहीं रह पाता है। इससे कार्य में त्रुटियों की संभावना भी अधिक रहती है। वेस्टन नामक विद्वान ने कपड़ा सीने वाले कुछ कर्मचारियों पर इसका प्रयोग किया तब यह निष्कर्ष निकाला कि शान्त वातावरण में 7.5 प्रतिशत उत्पादन में वृद्धि हुई।

6. उचित आसन का प्रभाव : कार्य करते समय कर्मचारी का उचित आसन न होने से थकान के साथ-साथ दुर्घटनाओं की भी संभावना बनी रहती है। शारीरिक आसनों को सही रखने के लिए उचित व्यवस्था न होने से कार्य पर इसका प्रभाव पड़ता है।

7. व्यक्तिगत कारण : थकान के लिए अनेक व्यक्तिगत कारण उत्तरदायी होते हैं। उनमें दो कारण मुख्य हैं- नींद की कमी और प्रेरणा का अभाव।

8. नींद की कमी : मनुष्य की उम्र के अनुसार नींद के निश्चित घंटे होते हो। बड़ी मशीनों से संबंधित कार्य करने वाले कर्मचारी की नींद में यदि कोई कमी होती है तो थकान शीघ्र ही होती है, साथ में उत्पादन का ह्रास भी होने लगता है। दुर्घटनाओं की भी संभावनाएं अधिक रहती हो। कम नींद के अलावा अधिक नींद भी थकान का कारण होती है।

9. प्रेरणा का अभाव (Lack of motivation)- प्रेरणा के अभाव में कर्मचारी को थकान की अनुभूति शीघ्र होने लगती है। यदि कार्य में संलग्न कर्मचारी को अर्थ या पदोन्नति संबंधी कोई जानकारी दी जाए तो वह एक प्रेरणा का कार्य करती है। इससे थकान का अनुभव देर से होगा और उत्पादन में भी वृद्धि होगी। इनके अतिरिक्त अस्वस्थता, कुसमायोजन (Maladjustment), पर्याप्त शक्ति का अभाव (Lack of power required), कार्य-अभ्यास का अभाव, तथा कर्मचारी का पारिवारिक जीवन आदि ऐसे कारण हो जो कर्मचारी की थकान में सहायक होते हैं।

10. सामाजिक कारण : समाज कर्मचारी की उद्योगशाला है। इस उद्योगशाला के पारिवारिकजनों से यदि किसी प्रकार का असंतोष होगा तो उसे थकान की अनुभूति बनी रहती है। यदि कर्मचारी इस उद्योगशाला में अपने को असुरक्षित महसूस करता है या मान-सम्मान जैसी अन्य कोई बात हो तो भी वह स्वयं को थका हुआ पाएगा। इससे भी उत्पादन प्रभावित होता है, दुर्घटनाओं की संभावना बनी रहती है।

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