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गैस क्या है?
गैस आपके शिशु के पेट में जमा हवा है। शिशु दूध पीते समय दूध के साथ-साथ बहुत सारी हवा भी अंदर निगल लेता है।
वह रोते समय और यहां तक कि सांस लेते समय भी हवा अंदर गटक सकता है। गैस अंदर जाने से शिशु को पर्याप्त दूध पीए बिना ही पेट भरा-भरा सा महसूस होता है। पेट के अंदर गैस होने से शिशु को बहुत असहजता भी हो सकती है।
कई बार दूध या भोजन अच्छी तरह न पच पाने की वजह से भी अत्याधिक हवा बन सकती है। आंतों में सामान्यत: मौदज बैक्टीरिया दूध या भोजन को फर्मेंट कर सकते हैं, जिससे ज्यादा गैस बनती है। जिन शिशुओं में यह समस्या होती है, वे बीमार से लग सकते हैं और उनका वजन भी सही ढंग से नहीं बढ़ता।
साथ ही, कुछ शिशुओं के पेट में बहुत ज्यादा गैस होती है और उन्हें हर बार दूध पिलाने के बाद डकार दिलवाने की जरुरत होती है। वहीं, कुछ शिशुओं को शायद ही कभी गैस होती है।
कैसे पता चलेगा कि शिशु को गैस है?
दूध पीते समय आपका शिशु बोतल को चूसना छोड़ सकता है या रोना शुरु कर सकता है या फिर हो सकता है वह दूसरे स्तन से दूध पीने को तैयार न हो। वह कसमसाने और मुंह बनाने लग सकता है, खासकर कि यदि आप उसे दूध पिलाने के बाद लिटाने का प्रयास करें तो।
जिन शिशुओं में गैस बनती है वे अपनी टांगे उपर उठाकर फैलाते हैं और अपनी पीठ को चापाकार में मोड़ते हैं। ये लक्षण कॉलिक या रिफ्लक्स के भी हो सकते हैं।
पहले तीन महीनों में शिशुओं में गैस होना आम है, क्योंकि तब उनकी आंतें पूरी तरह विकसित हो रही होती हैं। छह से 12 महीने के शिशुओं में भी ये आम है, क्योंकि वे बहुत से अलग-अलग भोजना पहली बार आजमा रहे होते हैं।
क्या स्तनपान करने वाले शिशुओं को गैस होती है?
स्तनपान करने वाले शिशुओं में बोतल से दूध पीने वाले शिशुओं की तुलना में कम गैस बनती है। स्तनपान करने वाले शिशु स्तन से दूध के प्रवाह को नियंत्रित कर सकते हैं। इसलिए वे धीमे-धीमे दूध चूसते हैं, जिससे दूध के साथ कम हवा अंदर जाती है।
स्तनपान करने वाले शिशुओं की कम अवधि के लिए और बार-बार दूध पीने की संभावना होती है। उन्हें सीधे बिठाकर भी दूध पिलाया जा सकता है। इन सबसे शिशु के पेट में कम गैस जाती है।
हालांकि, स्तनपान करने वाले शिशुओं को फिर भी हर बार दूध पिलाने के बाद डकार दिलवाने की जरुरत होती है। खासकर उन परिस्थितियों में, जब आपका शिशु बहुत जल्दी-जल्दी स्तनपान करता हो या फिर आपके दूध का प्रवाह विशेषत: तेज हो।
स्तनपान करने वाले शिशुओं में गैस होने की वजह आपके आहार में मौजूद प्रोटीन के प्रति असहिष्णुता हो सकती है। इस आहार को पहचानकर इसका सेवन बंद करने से मदद मिल सकती है। स्तनपान करवाने वाली माँ के आहार में शामिल डेयरी उत्पाद भी इसका कारण हो सकते हैं।
कुछ सब्जियाों जैसे गोभी, पत्तागोभी, हरी गोभी, राजमा, छोलों को गैस और कॉलिक का कारण माना जाता है। हालांकि, इस बारे में प्रमाण इतने प्रबल नहीं है।
अपने आहार को इतना भी सीमित न करें कि शिशु को भोजन के प्रति संवेदनशीलता होने लगे। मगर यदि आपको लगे कि को विशेष भोजन शिशु को दिक्कत पहुंचा रहा है तो आप उसे अपने आहार से हटाकर देख सकती हैं। स्तनपान करवाने वाली माँ के आहार के बारे में यहा पढ़ें।
बोतल से दूध पीने वाले अपने शिशु को गैस होने से कैसे बचा सकती हूं?
बोतल से दूध के प्रवाह की वजह से शिशु बहुत सारी गैस अंदर निगल सकते हैं। शिशु के पेट में कम गैस जाए, इसके लिए आप शिशु को जितना सीधा हो सके उतना सीधा रखकर बोतल से दूध पिलाएं। साथ ही, यह सुनिश्चित करें कि बोतल को थोड़ा उठाकर रखें, ताकि दूध निप्पल के छेद को पूरी तरह ढक ले।
बोतल में छेद बहुत बड़ा या बहुत छोटा नहीं होना चाहिए। छोटे छेद से शिशु परेशान हो सकता है और वह ज्यादा दूध निगलने का प्रयास करता है। बहुत बड़ा छेद होने से दूध का प्रवाह बहुत तेज जोता है।
कुछ बोतले हवा अंदर निगलने से रोकने के लिए तैयार की जाती हैं और ऐसा उनके पैकेट पर लिखा होता है। कुछ मुड़ी हुई होती हैं, वहीं कुछ में आंतरिक छेद या लाइनर होता है, जिससे दूध में हवा के बुलबुले नहीं बनते और निप्पल को गिरने से भी बचाते हैं।
कई बार शिशु को फॉर्मूला में मौजूद प्रोटीन के प्रति असहिष्णुता हो सकती है। यदि ऐसा हो तो डॉक्टर से उचित विकल्प के बारे में पूछ सकती हैं।
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