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क्‍या प्रेगनेंसी में पेरासिटामोल खाना सुरक्षित है?

सामान्य तौर पर जब गर्भावस्था में घरेलू उपचार के माध्यम से बुखार की स्थिति नियंत्रित नहीं होती है, तो उस स्थिति में पेरासिटामोल के उपयोग को किसी भी अन्य दवा के मुकाबले सुरक्षित माना गया है (2)। वहीं, एक अध्ययन के अनुसार, गर्भावस्था में पेरासिटामोल का उपयोग होने वाले बच्चे में कुछ शारीरिक समस्या (जैसे अस्थमा) का कारण बन सकता है (3)। इसलिए, सावधानी के तौर पर गर्भावस्था में पेरासिटामोल का उपयोग डॉक्टरी परामर्श पर ही करें।

लेख के अगले भाग में अब हम प्रेगनेंसी में पेरासिटामोल की सुरक्षित मात्रा के बारे में बताएंगे।
प्रेगनेंसी में पेरासिटामोल की कितनी मात्रा लेनी चाहिए?

गर्भावस्था में पेरासिटामोल का इस्तेमाल डॉक्टरी परामर्श पर कम से कम मात्रा में किया जाना चाहिए। वहीं, शोध में गर्भावस्था में ली जाने वाली कम से कम मात्रा 500 मिलीग्राम दी गई है। इस आधार पर कहा जा सकता है कि गर्भावस्था में जरूरत की स्थिति में डॉक्टर की सलाह से 500 मिलीग्राम की पेरासिटामोल टैबलेट का इस्तेमाल किया जा सकता है (3)। हालांकि, गर्भवती की शारीरिक स्थिति के अनुसार डॉक्टर इसकी मात्रा में बदलाव भी कर सकते हैं।

आगे अब हम प्रेगनेंसी में पेरासिटामोल खाने के नुकसान के बारे में बताएंगे।
प्रेगनेंसी में पेरासिटामोल खाने से होने वाले नुकसान

गर्भावस्था में पेरासिटामोल का अधिक मात्रा में सेवन कुछ दुष्परिणाम भी प्रदर्शित कर सकता है, जो कुछ इस प्रकार हैं :

जन्म दोष : गर्भावस्था में पेरासिटामोल दवा का अधिक इस्तेमाल कुछ मामलों में होने वाले बच्चे में क्रिप्टोरचिडिज्म (cryptorchidism) नामक जन्म दोष का कारण बन सकता है (2)। बता दें क्रिप्टोरचिडिज्म (cryptorchidism) एक ऐसी स्थिति है, जिसमें जन्मे लड़के प्रभावित होते हैं। इस समस्या में लड़के के टेस्टिकल्स जननांग से ऊपर स्थिति हो जाते हैं और टेस्टिकल बैग में नहीं आ पाते हैं।

व्यवहार संबंधी समस्या : गर्भावस्था में पेरासिटामोल का अधिक प्रयोग होने वाले बच्चे में मानसिक संबंधी विकास को प्रभावित कर सकता है। इस कारण जन्म के बाद बच्चे को सीखने में देरी जैसी व्यवहार संबंधी समस्याएं देखी जा सकती हैं ।

श्वसन संबंधी समस्या : गर्भावस्था में अधिक पेरासिटामोल का सेवन करने वाली कुछ महिलाओं के बच्चों में लंबे समय के अंतराल पर अस्थमा जैसी श्वसन संबंधी समस्या देखी जा सकती है (3)।

अब हम पेरासिटामोल की जगह इस्तेमाल में लाए जाने वाले कुछ घरेलू उपचारों के विषय में जानेंगे।

पेरासिटामोल की जगह ये घरेलू उपचार आजमाएं

जैसा कि हम लेख में आपको पहले ही बता चुके हैं कि पेरासिटामोल का इस्तेमाल सामान्य रूप से बुखार और दर्द से राहत पाने के लिए किया जाता है। ऐसे में यहां हम बुखार और दर्द के लिए अलग-अलग घरेलू उपचार बताने का प्रयास करेंगे। हालांकि, इस बात को ध्यान में रखना आवश्यक है कि प्रेगनेंसी में किसी भी बुखार को सामान्य न लेते हुए अपने गायनेकोलॉजिस्ट से अवश्य ही परामर्श लेना चाहिए, जिससे बुखार के कारण का भी निदान हो सके।
1. गर्भावस्था के दौरान बुखार के लिए घरेलू उपचार :

गर्भावस्था में बुखार से राहत पाने के लिए निम्न घरेलू तरीकों को इस्तेमाल में लाया आ सकता है, जो कुछ इस प्रकार हैं :

ठंडे पानी में भीगे कपड़े को माथे पर रखने से बुखार में आराम मिल सकता है (5)।

बाजुओं और शरीर को ठंडे पानी में भीगे कपड़े से पोंछने से बुखार में आराम मिल सकती है (5)।

गुनगुने पानी से नहाने से भी बुखार को कम करने में मदद मिल सकती है (5)।

अदरक की चाय का सेवन बुखार को कम करने में मदद कर सकता है, क्योंकि इससे जुड़े एक शोध में अदरक के एंटीपायरेटिक यानी बुखार को कम करने वाले गुण का पता चलता है (6)। वहीं, प्रेगनेंसी में अदरक का सेवन सुरक्षित माना गया है (7)।तनाव से दूर रखकर भी बुखार को कम करने में मदद मिल सकती है (8)।

जितना संभव हो हल्के और ढीले कपड़े पहनें। इससे भी बुखार को कम करने में मदद मिल सकती है (9)।

2. गर्भावस्था के दौरान दर्द से निपटने के घरेलू उपाय :

गर्भावस्था के दौरान होने वाली दर्द से आराम पाने के लिए निम्न घरेलू उपायों को इस्तेमाल में लाया जा सकता है :

शरीर की मसाज के साथ-साथ प्रभावित हिस्से की मसाज से दर्द में राहत पाई जा सकती है (10)। ध्यान रहे, प्रेगनेंसी में मसाज डॉक्टरी परामर्श पर और किसी एक्सपर्ट से ही कराएं।

तनाव और थकान के कारण होने वाले दर्द से राहत पाने के लिए योग अभ्यास करना फायदेमंद हो सकता है (11)। इसके लिए भी डॉक्टरी सलाह जरूरी है। साथ ही एक्सपर्ट की देखरेख में ही हल्के योग अभ्यास करें, जिनमें ज्यादा शारीरिक क्रियाओं की आवश्यकता न हो।

एक्यूपंचर को भी दर्द से राहत दिलाने में प्रभावी माना जाता है (12)किसी विशेषज्ञ द्वारा ही कराया जाए (13)।

अगर गर्भावस्था में कोई महिला साइनस के दर्द से पीड़ित है, तो ऐसे में वह नाक और माथे की गर्म सिंकाई करके राहत पा सकती है (14)। सावधानी के लिए डॉक्टर से परामर्श जरूर करें।

वहीं, कमर और गर्दन के दर्द से राहत पाने के लिए घरेलू तौर पर ठंडी या गर्म सिंकाई का सहारा लिया जा सकता है

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