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हल्दी गर्भवती महिलाओं के लिए सही नहीं मानी जाती। हल्दी में मौजूद करक्यूमिन, प्रेग्नेंट महिलाओं में कई तरह की समस्याएं उत्पन्न कर सकता है। एक्सपर्ट्स की मानें तो बेहद कम मात्रा में अगर खाने के दौरान हल्दी का सेवन किया जाए तो यह पूरी तरह से सुरक्षित है।

कब नहीं करनी चाहिए गर्भावस्था में हल्दी का सेवन
प्रेग्नेंसी में हल्दी का सेवन करने से पहले अपने डॉक्टर की परामर्श जरूर लें। साथ ही इन बातों का भी ध्यान रखेंः


हल्दी में मौजूद करक्यूमिन, प्रेग्नेंट महिलाओं में कई तरह की समस्याएं उत्पन्न कर सकता है। करक्यूमिन शरीर में एस्ट्रोजेन हॉर्मोन की नकल करता है जिससे मेन्स्ट्रूअल क्रैम्प्स और यूटेराइन कॉन्ट्रैक्शन्स बढ़ जाता है जो समय से पहले के जन्म यानी प्रीमैच्योर बर्थ और मिसकैरिज का कारण भी बन सकता है।
अगर प्रेग्नेंसी के दौरान या पहले से ही गर्भवती महिला को पित्त की थैली में पथरी है, तो उसे हल्दी का सेवन नहीं करना चाहिए।
हल्दी के सेवन से हमारी बॉडी में टेस्टोस्टेरॉन का लेवल भी कम हो जाता है। इसलिए गर्भावस्था में हल्दी का सेवन बहुत ही कम मात्रा में करनी चाहिए।
प्रेग्नेंसी में उल्टी होना आम समस्या है। कुछ महिलाओं को गर्भावस्था में बहुत कम तो कुछ महिलाओं को बच्चे के जन्म के समय के उल्टी होने की समस्या होती है। ऐसी महिलाओं को गर्भावस्था में हल्दी का सेवन कम ही करना चाहिए।
अगर परिवार में डायबिटिज जनेटिक समस्या है, तो भी गर्भवती महिला को हल्दी के सेवन से परहेज करना चाहिए।
हल्दी का ज्यादा इस्तेमाल करने से खून को पतला करने और ऐसिड ब्लॉक करने वाली दवाइयों को काम करने का तरीका प्रभावित हो सकता है जो शरीर में खून के थक्के बनने का कारण भी हो सकता है। इसलिए हल्दी का इस्तेमाल सब्जी या दाल में ही करें।
अगर गर्भावस्था में हल्दी का सेवन करने के बाद गर्भवती महिला को सिरदर्द या शरीर पर किसी तरह का रैशेज नजर आए, तो यह गर्भावस्था में हल्दी के सेवन के साइड इफेक्ट्स हो सकते हैं। ऐसे में हल्दी का इस्तेमाल करना तुरंत बंद करें।

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